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उदयपुर में युवाओं के बीच फैलते नशे के कारोबार पर पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। सुखेर थाना पुलिस की टीम गश्त के दौरान 200 फीट खेलगांव रोड स्थित मार्बल स्लरी पार्क के पास पहुंची, जहां एक संदिग्ध कार खड़ी दिखाई दी। कार में दो युवक और दो महिलाएं बैठे हुए थे। पुलिस को देखकर चारों घबराने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोककर पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान चारों कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। शक गहराने पर पुलिस ने नियमानुसार कार की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार के डैशबोर्ड में रखी माचिस की डिब्बी से एक पारदर्शी प्लास्टिक थैली बरामद हुई। थैली में सफेद रंग का पाउडरनुमा पदार्थ मिला, जिसकी जांच करने पर वह एमडीएमए ड्रग्स निकला। पुलिस ने मौके से करीब 5 ग्राम अवैध एमडीएमए ड्रग्स जब्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने संजय माली, करणसिंह राव, मंजू वेद और लक्ष्मी मेघवाल को गिरफ्तार किया। वहीं ड्रग्स परिवहन में इस्तेमाल की जा रही कार को भी जब्त कर लिया गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आ रहा है कि कार को नशे के सेवन और सप्लाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। फिलहाल सुखेर थाना पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि ड्रग्स कहां से लाई गई थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
उदयपुर के महासतिया क्षेत्र स्थित गंगु कुंड में गुरुवार सुबह का मंजर बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला था। यहां अपने दो मासूम बेटों को स्विमिंग सिखाने पहुंचे एक पिता की देखते ही देखते पानी में डूबने से मौत हो गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि युवक काफी देर तक पानी में जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा, लेकिन आसपास मौजूद लोग उसे बचाने के लिए आगे नहीं आए। मृतक की पहचान ठोकर चौराहा निवासी 41 वर्षीय दुर्गा शंकर सालवी के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक दुर्गा शंकर गुरुवार सुबह करीब 7 बजे अपने 10 और 14 साल के दो बेटों को स्विमिंग कराने के लिए गंगु कुंड लेकर पहुंचे थे। बच्चे पानी में स्विमिंग कर रहे थे, जबकि दुर्गा शंकर कुंड की सीढ़ियों पर बैठे हुए थे। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एक व्यक्ति ने उन्हें पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन हाथ छूट गया और दुर्गा शंकर पानी में डूबने लगे। बताया जा रहा है कि वे करीब 10 मिनट तक पानी में छटपटाते रहे, लेकिन वहां मौजूद 20 से 30 लोग तमाशबीन बने रहे। किसी ने भी उन्हें बचाने के लिए पानी में उतरने की हिम्मत नहीं दिखाई। घटना की सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस टीम मौके पर पहुंची। उप नियंत्रण नागरिक सुरक्षा विभाग उदयपुर के निर्देश पर गठित टीम ने तत्काल रेस्क्यू शुरू किया। टीम में कैलाश मेनारिया, गोताखोर विपुल चौधरी, रवि शर्मा और भवानी शंकर वाल्मीकि सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। रेस्क्यू टीम ने युवक को बाहर निकालकर सीपीआर भी दिया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सिविल डिफेंस के सदस्य कैलाश मेनारिया ने बताया कि मृतक को तैरना नहीं आता था। वहीं गंगु कुंड में स्विमिंग की अनुमति भी नहीं है, बावजूद इसके यहां रोजाना 30 से 40 लोग तैरने पहुंचते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लोगों की आवाजाही के बावजूद यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम क्यों नहीं हैं।
ईद-उल-अजहा के मौके पर उदयपुर शहर गुरूवार को पूरी तरह उत्साह, आस्था और भाईचारे के रंग में रंगा नजर आया। सुबह से ही मुस्लिम समाज के लोग नए परिधानों में सजकर मस्जिदों की ओर जाते दिखाई दिए। चेटक स्थित पलटन मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाजियों ने पहुंचकर विशेष नमाज अदा की। इसके अलावा शहर की अन्य प्रमुख मस्जिदों में भी ईद की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज के दौरान लोगों ने देश और प्रदेश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज पूरी होने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद दी। मस्जिद परिसरों में सुबह से ही रौनक का माहौल देखने को मिला। बकरीद के पर्व को लेकर मुस्लिम समाज में खासा उत्साह नजर आया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में त्योहार को लेकर खुशी दिखाई दी। कई स्थानों पर सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी दिया गया। त्योहार को देखते हुए शहर में सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए थे। प्रमुख मस्जिदों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा ताकि नमाज शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके। उदयपुर में बकरीद का यह पर्व आपसी प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश देता नजर आया, जहां लोगों ने मिल-जुलकर त्योहार की खुशियां साझा कीं।
लोक कला मंडल क्षेत्र में हुए सनसनीखेज अपहरण और फिरौती मामले में उदयपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद अब गिरफ्तार किए गए सभी छह आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस लगातार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पूरा मामला 25 मई का है, जब अंबामाता थाना क्षेत्र निवासी मोहम्मद सालिस अपने दोस्त अरबाज खान के साथ लोक कला मंडल के पास चाय की थड़ी पर मौजूद था। इसी दौरान उसके मोबाइल पर दुबई नंबर से कॉल आया और उसे धमकाते हुए लोकेशन पूछी गई। कुछ ही मिनटों बाद पंजाब नंबर की काली स्कॉर्पियो में सवार होकर छह युवक मौके पर पहुंचे और मोहम्मद सालिस को जबरन गाड़ी में डालकर अपहरण कर ले गए। आरोपियों ने रास्ते में उसके साथ थप्पड़ और मुक्कों से मारपीट की तथा नाथद्वारा और राजसमंद की तरफ ले जाते हुए 5 लाख रुपए की फिरौती मांगी। साथ ही पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई। इसी दौरान पीड़ित के फोन पर पुलिस का कॉल आने से आरोपी घबरा गए और गोमती रोड के पास युवक को पटककर मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा, डीएसपी राजेश यादव और हाथीपोल थानाधिकारी राजू देवी के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और नाकाबंदी के जरिए महज 12 घंटे में पूरे मामले का खुलासा कर दिया।जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी गौरव प्रताप राणा, मोहाली पंजाब का निवासी है और फॉरेन करेंसी एक्सचेंज कंपनी से जुड़ा हुआ है। आरोपी का दावा था कि बीएनएस वॉलेट के जरिए खरीदे गए 5 हजार यूएस डॉलर के बदले मोहम्मद सालिस पर करीब 5 लाख रुपए बकाया थे। इसी रकम की वसूली के लिए अपहरण की साजिश रची गई। पुलिस ने गौरव प्रताप राणा, कपिल राणा, अमनदीप सिंह, रोहित कुमार, सोनु और अनिल कुमार को गिरफ्तार कर स्कॉर्पियो वाहन भी जब्त कर लिया है।
उदयपुर की गुजराती धर्मशाला में आयोजित अखिल भारतीय किसान सभा के जिला स्तरीय सम्मेलन में किसानों के मुद्दों को लेकर मंथन हुआ। जिले की विभिन्न तहसीलों से पहुंचे किसान प्रतिनिधियों और संगठन पदाधिकारियों ने सम्मेलन में हिस्सा लेकर खेती, बिजली, कर्ज और फसल बीमा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व विधायक पेमाराम ने केंद्र की मोदी सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। पेमाराम ने कहा कि अखिल भारतीय किसान सभा हमेशा किसानों की एकता और उनके हकों की लड़ाई लड़ती रही है। उन्होंने पूर्व के किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों के दबाव के चलते सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन की ताकत के आगे सरकार को झुकना पड़ा और माफी तक मांगनी पड़ी। प्रदेशाध्यक्ष ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता लागू हुआ तो देश की खेती, पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। इससे किसानों और ग्रामीण युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा। पेमाराम ने राजस्थान के बिजली आंदोलन, कर्ज माफी संघर्ष और महाराष्ट्र के लॉन्ग मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों को अधिकार केवल संघर्ष और आंदोलन से ही मिल सकते हैं। उन्होंने घोषणा की कि अगस्त में चूरू में प्रांतीय सम्मेलन और उसके बाद हैदराबाद में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जहां देशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने 1 जून से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। डीलर्स प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, आपूर्ति संकट और प्रशासनिक कार्रवाई से नाराज हैं। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को मंगलवार को लेटर लिखकर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की है।एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर 1 जून 2026 से पहले सरकार ने डीलर्स के साथ बैठक कर समाधान नहीं निकाला तो प्रदेशभर के पेट्रोल पंप डीलर धरना-प्रदर्शन और हड़ताल पर जाएंगे।एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि लगातार लेटर और ईमेल भेजने के बावजूद प्रमुख शासन सचिव स्तर पर कोई बैठक आयोजित नहीं की जा रही है। न तो डीलर्स के फोन कॉल का जवाब दिया जा रहा है। डीलर्स की सबसे बड़ी समस्या पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति है। प्रदेश के कई पेट्रोल पंप रोजाना ड्राई हो रहे हैं। इंडियन ऑयल ने मौखिक आदेश, वॉट्सएप और मोबाइल संदेशों के जरिए एक ग्राहक को 50 हजार रुपए तक डीजल और 5 हजार रुपए तक पेट्रोल देने की सीमा तय की है, जबकि भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की ओर से भी पेट्रोल और डीजल की मात्रा सीमित कर दी गई है।डीलर्स ने कहा कि अगर कोई संचालक तय सीमा से अधिक ईंधन देता है। तो उस पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए बिक्री बंद कर दी जाती है और नोटिस जारी किए जाते हैं। इससे जनता में भ्रम की स्थिति बनी हुई है और पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ रही है। तेल कंपनियों के ये निर्देश कंट्रोल एक्ट-2000 और MSHSD कंट्रोल एक्ट-2005 का उल्लंघन हैं।डीलर्स ने सरकार से पेट्रोल पंपों और तेल डिपो पर फ्लोमीटर लगाने की मांग भी दोहराई है। उनका कहना है कि जब तक पूरी सप्लाई चेन में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक केवल डीलर्स को दोषी ठहराना गलत है।एसोसिएशन ने ब्रांडेड फ्यूल को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में ग्राहक महंगा ब्रांडेड पेट्रोल-डीजल खरीदने को तैयार नहीं हैं, लेकिन तेल कंपनियां इसकी बिक्री का दबाव बना रही हैं।वहीं किसानों को ड्रम में डीजल आपूर्ति रोकने का मुद्दा भी लेटर में उठाया गया है। डीलर्स ने कहा कि बारिश और बुवाई के सीजन में किसानों को डीजल की जरूरत बढ़ेगी, लेकिन तेल कंपनियों की पाबंदियों के कारण ड्रम में डीजल नहीं दिया जा रहा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर स्थिति बन सकती है।एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री के दौरे और सरकारी रैलियों के दौरान उधार में दिए गए ईंधन भुगतान का मुद्दा भी उठाया है। डीलर्स का कहना है कि लाखों रुपए अब भी बकाया हैं और भुगतान नहीं होने से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। बायोडीजल और बेस ऑयल के अवैध कारोबार पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए डीलर्स ने कहा कि उनकी शिकायतों के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।सबसे अहम मांग वैट कम करने को लेकर की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पर वैट ज्यादा होने के कारण प्रदेश में ईंधन सबसे महंगा बिक रहा है। उन्होंने पंजाब के बराबर वैट दरें लागू करने और कम से कम 5 प्रतिशत वैट घटाने की मांग की है।एसोसिएशन ने कहा कि राजस्थान में सीएनजी की कीमतें हरियाणा और पंजाब की तुलना में ज्यादा हैं। साथ ही अलग-अलग जिलों में भारी मूल्य अंतर होने से उपभोक्ता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। एसोसिएशन ने कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो 1 जून 2026 से प्रदेशभर के पेट्रोल पंप संचालक हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
त्योहारों के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और आमजन में सुरक्षा का भरोसा कायम करने के उद्देश्य से उदयपुर पुलिस द्वारा शहर के संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला गया। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के नेतृत्व में निकाले गए इस फ्लैग मार्च में पुलिस अधिकारियों और जवानों ने शहर के प्रमुख मार्गों पर पैदल मार्च करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया। फ्लैग मार्च में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर उमेश ओझा, शहर के सभी सीओ, थानाधिकारी, कालिका पेट्रोलिंग यूनिट और पुलिस बल के जवान शामिल रहे। पुलिस का यह मार्च घंटाघर, धानमंडी, हाथीपोल, सूरजपोल और अंबामाता थाना क्षेत्र के संवेदनशील मार्गों से होकर गुजरा। मार्च के दौरान पुलिस ने विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और असामाजिक तत्वों पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए। पुलिस अधिकारियों ने आमजन से भी शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उदयपुर पुलिस का कहना है कि त्योहारों के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और पुलिस की गश्त लगातार बढ़ाई गई है। फ्लैग मार्च समाप्त होने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक लेकर कानून व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही त्योहारों के दौरान सतर्कता बरतने और आमजन से बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी जारी किए गए।
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