आवाज़ हम सबकी
उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फेस्टिवल में तुर्की के कलाकारों को बुलाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शनिवार को NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।NSUI कार्यकर्ताओं ने कहा- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का साथ दिया था। तुर्की के कलाकारों को मंच देना गलत है। म्यूजिक फेस्टिवल में तुर्की के कलाकारों के परफॉर्मेंस को रोका जाए और पूरे म्यूजिक फेस्टिवल को कैंसिल किया जाए।NSUI कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) सिटी जितेंद्र ओझा को सौंपा।NSUI के पूर्व ज़िला अध्यक्ष मोहित नायक ने कहा- तुर्की के कलाकारों को बुलाना और उन्हें महाराणा प्रताप की पवित्र धरती पर मंच देना पूरी तरह गलत है। अगर इसे समय रहते नहीं रोका गया, तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, और इसके लिए आयोजकों के साथ-साथ जिला प्रशासन भी जिम्मेदार होगा।शनिवार शाम को तुर्की की सिंगर सेलीन सुम्बुलटेपे और दूसरे कलाकारों को इस फेस्टिवल में परफॉर्म करना है, और NSUI इसका विरोध कर रही है।
सज्जनगढ़ अभयारण्य में तैयार की जा रही नई लॉयन सफारी में शेरों के जोड़े को अभ्यास के तौर पर छोड़ा गया था, ताकि सफारी शुरू होने से पहले वे नए वातावरण में अपने आप को ढाल सके । गुजरात के जूनागढ़ स्थित सक्करबाग चिड़ियाघर से एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लाए गए 7 वर्षीय शेर सम्राट और 3 वर्षीय शेरनी सुनयना को सोमवार को होल्डिंग एरिया से करीब 20 हेक्टेयर में फैले खुले बाड़े में छोड़ा गया। सम्राट तो तय समय पर नाइट शेल्टर में लौट आया, लेकिन शेरनी सुनयना पिछले चार दिनों से शेल्टर तक नहीं पहुंची है। हालांकि बुधवार को उसे सफारी की झाड़ियों में देखा गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वह सफारी क्षेत्र के अंदर ही मौजूद है। बावजूद इसके, शेल्टर में वापस न लौटने और फेंसिंग के बाहर लगातार इंसानी आवाजाही होने के कारण किसी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शेरनी की तलाश और निगरानी के लिए वनकर्मी सफारी के ऊपरी हिस्से में स्थित क्लाउड-9 के कमरों की छतों से नजर रखे हुए हैं। इसके साथ ही ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं और ढोल बजाकर उसकी मूवमेंट पर नजर रखने के साथ उसे शेल्टर की ओर लाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि सुनयना सफारी क्षेत्र के भीतर ही है और जल्द ही शेल्टर में लौट आएगी। वाइल्डलाइफ विंग उदयपुर के उप वन संरक्षक यादवेंद्र सिंह चूंडावत के अनुसार, अगले माह लॉयन सफारी के उद्घाटन की तैयारी को देखते हुए शेरों के जोड़े को रिलीज किया गया था। शेर नियमित रूप से शेल्टर में लौट रहा है, जबकि शेरनी को जंगल रास आ गया है। क्षेत्र में घास और झाड़ियां अधिक होने से वह बार-बार छिप जाती है। कुछ दिनों में वह अपनी खाने-पीने की जगह पहचान लेगी। आपको बता दे की शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित सज्जनगढ़ अभयारण्य में 24 जून 2024 को लॉयन सफारी का शिलान्यास हुआ था। चारों ओर लोहे की फेंसिंग और चारदीवारी से सुरक्षित इस सफारी को अगले माह शुरू करने की तैयारी है।
बेडवास क्षेत्र में गुरुवार को लोगों का सब्र टूट गया। सड़क हादसे में नाबालिग छात्र की मौत से आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने सड़क पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बेडवास कॉलोनी को बसे लगभग 25 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक यहां सड़क सुरक्षा के नाम पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ताजा मामला बुधवार शाम का है, जब एक तेज रफ्तार पिकअप ने स्कूल से घर लौट रहे नाबालिग छात्र को चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि छात्र की मौके पर ही मौत हो गई।हादसे के बाद पिकअप चालक मौके से फरार हो गया। घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिससे हादसे की भयावहता साफ नजर आती है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फरार ड्राइवर की तलाश शुरू कर दी गई है। हादसे में जान गंवाने वाले छात्र की पहचान गौरांश शर्मा के रूप में हुई है। मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है, वहीं पूरे क्षेत्र में गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि आरोपी चालक को जल्द गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। लोगों ने प्रशासन से स्पीड कंट्रोल, सड़क संकेतक और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग की है।
यूजीसी द्वारा जनवरी 2026 में लागू किए गए नए कानून Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulation 2026 के विरोध में उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में विप्र फाउंडेशन, सर्व ब्राह्मण समाज और सवर्ण संगठनों के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग उठाई।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस अधिसूचना के तहत सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में 90 दिनों के भीतर इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है, जिन्हें शिकायतों की जांच के व्यापक अधिकार दिए गए हैं। समाज के लोगों का आरोप है कि यह कानून सामाजिक समरसता को कमजोर करेगा। विप्र फाउंडेशन जोन वन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र पालीवाल ने कहा कि यह कानून भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 की भावना के अनुरूप नहीं है और समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून सनातन धर्म की एकता को खंडित करने वाला है और समाज में टकराव की स्थिति पैदा करेगा। पालीवाल ने यह भी कहा कि इस कानून के माध्यम से एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग के छात्रों को सवर्ण समाज के छात्रों के खिलाफ झूठी शिकायत करने का अवसर मिलेगा, जिससे विश्वविद्यालयों का सामाजिक संतुलन बिगड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया तो देशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष निर्णय की मांग की गई।
वीआईपी रोड पर बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने बना वही खतरनाक गड्ढा, जिसने दो दिन पहले दो जिंदगियां छीन ली थीं, अब मिट्टी और बजरी से भर दिया गया है। नगर निगम की ओर से देर से की गई इस कार्रवाई से सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थायी समाधान अभी भी अधूरा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गड्ढे को केवल ऊपर से भर दिया गया है। सड़क की मजबूती, लेवलिंग और ड्रेनेज सिस्टम पर कोई काम नहीं हुआ। बारिश या भारी ट्रैफिक होने पर यह भराव फिर से बैठ सकता है और बड़ा हादसा दोबारा हो सकता है। सबसे गंभीर बात यह है कि मौके पर अब भी कोई स्पीड ब्रेकर, चेतावनी बोर्ड या रिफ्लेक्टर नहीं लगाया गया है।आपको बता दे कि इसी स्थान पर तेज रफ्तार कार गड्ढे से बचने के प्रयास में बेकाबू हो गई थी और नाश्ते के ठेले को उड़ाते हुए चार लोगों को कुचल दिया था। इसमें दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दो घायलों का इलाज अब भी जारी हैं। हादसे के बाद विधायक द्वारा स्थायी मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम का आश्वासन दिया गया था, लेकिन फिलहाल सिर्फ खानापूर्ति होती नजर आ रही है। क्षेत्रवासी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि सड़क का पक्का निर्माण, स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड और बैरिकेड्स लगाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को होने से रोका जा सके।
उदयपुर के भुवाणा स्थित खसरा नंबर 1961 की आधा बीघा जमीन अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। मंगलवार को कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक पर गंभीर आरोप लगाए। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने कहा कि जिले में आदिवासियों की जमीनों को हड़पना अब आम बात हो गई है। उन्होंने दावा किया कि भुवाणा के मूल खातेदार ने पहले यह जमीन दो करोड़ रुपये में चित्तौड़गढ़ के एक व्यक्ति को बेची थी, लेकिन सत्ता के दबाव में खेल पलट दिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों और भाजपा नेताओं ने मिलकर खातेदार को सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में बंधक बनाया। आरोप के मुताबिक, रिवॉल्वर और लाठियों के दम पर महज 12 लाख रुपये में जमीन की फिर से रजिस्ट्री करवाई गई। इतना ही नहीं, पीड़ित खातेदार को ही ठगी के फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेज दिया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार को पर्ची सरकार करार देते हुए कहा कि उदयपुर में जमीनों के जितने भी विवाद सामने आ रहे हैं, उनमें सत्ताधारी दल के नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत साफ नजर आ रही है। पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा और फतह सिंह राठौड़ ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि पीड़ित आदिवासी परिवार को उसकी जमीन वापस दिलाई जाए। उन्होंने इस मामले में लिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई करने और विधायक के इस्तीफे की भी मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे गरीबों और आदिवासियों का शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे और यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
उदयपुर एक बार फिर देश के अग्नि योद्धाओं की शारीरिक दक्षता और खेल कौशल का गवाह बन रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ऑल इंडिया फायर सर्विस स्पोर्ट्स एंड फायर सर्विस मीट-2026 का आयोजन उदयपुर में कर रहा है। इसका उद्घाटन राजस्थान के जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने मशाल जलाकर किया। 27 से 31 जनवरी तक चलने वाली इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ईआरटीओ, एयरपोर्ट अथॉरिटी सहित विभिन्न केंद्रीय संगठनों की फायर सेफ्टी टीमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 1500 फायर ऑफिसर, फायर फाइटर्स और फायरमैन हिस्सा ले रहे हैं। प्रतिष्ठित आयोजन ऑल इंडिया फायर सर्विस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड द्वारा कराया जा रहा है। आयोजन ऑल इंडिया फायर सर्विस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड द्वारा करवाया जा रहा है। प्रतियोगिता में खेलों के साथ-साथ फायर फाइटर्स के पारंपरिक और तकनीकी खेल भी आयोजित होंगे।इस मौके पर मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा- हम सभी धरती पुत्र हैं। हमें सेवा करने का अवसर मिला है। भले ही यह नौकरी हो, लेकिन इसे पहले सेवा भाव से निभाना चाहिए। फायर ऑफिसर एवं कर्मचारी देश के किसी भी कोने में आगजनी या आपदा जैसी स्थिति में अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने के लिए तत्पर रहते हैं, यही सच्ची देश सेवा है।टूर्नामेंट के समन्वयक और निगम में मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी ने बताया कि इसमें एथलेटिक्स, आर्म रेसलिंग, बैडमिंटन, क्रिकेट, लॉन टेनिस, टेबल टेनिस, कुश्ती, सीढ़ी दौड़, मस्टर, ‘सबसे ताकतवर अग्निशामक’ और ‘अल्टीमेट फायर फाइटर’ जैसी विशेष प्रतियोगिताएं होंगी। आयोजन का मुख्य उद्देश्य अग्निशमन सेवा से जुड़े कर्मियों की फिटनेस को परखना और उनके बीच टीम वर्क व खेल भावना को प्रोत्साहित करना है। इस दौरान उनके फायर स्किल्स की भी परीक्षा होगी, जिसमें भारी होज पाइप के साथ दौड़ (होज रन), सीढ़ियों पर चढ़कर बचाव कार्य (लैडर ड्रिल) और हाइड्रेंट तकनीक का सटीक प्रदर्शन (फायर ड्रिल) करना होगा। नियमित खेल में फुटबॉल, बैडमिंटन, टेनिस, तैराकी, साइक्लिंग, जैवलिन थ्रो, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स (100-200 मीटर व रिले रेस) की प्रतियोगिताएं होंगी।खास बात यह है कि भारत साल 2029 में गुजरात में वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स की मेजबानी करने जा रहा है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े आयोजन की तैयारी और खिलाड़ियों के चयन के लिहाज से उदयपुर का यह टूनामेंट काफी महत्वपूर्ण हैं।
Stay updated with the latest morning news from Udaipur and surrounding areas
Live virtual tour of the magnificent City Palace complex
Traditional Rajasthani folk music and dance performances
Featuring successful local entrepreneurs and their stories