आवाज़ हम सबकी
उदयपुर की झीलों के लिए मानसून का हर दौर अपने साथ एक उम्मीद लेकर आता है, लेकिन इस बार कमजोर बारिश के चलते फतहसागर में पानी की आवक उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाई। अब मदार क्षेत्र में पानी का बहाव शुरू होने से झील को कुछ राहत मिलती नजर आ रही है। हाल ही में कैचमेंट क्षेत्रों में हुई बारिश का असर मदार क्षेत्र के जलस्रोतों पर दिखाई दिया है। इसी के चलते मदार नहर के जरिए फतहसागर की तरफ पानी पहुंचना शुरू हुआ है। मदार नहर फतहसागर के लिए प्रमुख जलस्रोतों में शामिल है, इसलिए इसकी शुरुआत को झील के लिए अहम माना जा रहा है। बीते दिनों उदयपुर जिले के कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। झाड़ोल, कोटड़ा और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के बाद कुछ बांधों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हुई है। देवास प्रथम बांध का जलस्तर कुछ ही घंटों में करीब 7 फीट बढ़ा, जबकि मादड़ी बांध में भी पानी बढ़ा है। हालांकि फतहसागर और पिछोला झीलों के कैचमेंट क्षेत्रों में अभी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। ऐसे में मदार नहर से आई यह पानी की आवक फिलहाल राहत जरूर दे रही है, लेकिन झीलों में अच्छी आवक के लिए कैचमेंट में और बारिश जरूरी मानी जा रही है। उदयपुर में मानसून के कमजोर दौर के बीच अब लोगों की नजर आसमान के साथ मदार क्षेत्र के जलस्तर पर भी टिकी है। अगर आने वाले दिनों में कैचमेंट क्षेत्रों में अच्छी बारिश होती है तो फतहसागर में पानी की आवक और बढ़ सकती है।
नावड़ा गांव में शुक्रवार सुबह हुए हादसे ने एक बार फिर बदहाल पुल और ग्रामीणों की मजबूरी पर सवाल खड़े कर दिए। बताया जा रहा है कि गांव के पास नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण लंबे समय से आवागमन के लिए बंद है। ऐसे में ग्रामीणों को नदी के पानी से होकर रास्ता पार करना पड़ता है। शुक्रवार सुबह नावड़ा निवासी हिरी बाई पटेल पशुओं के बाड़े की तरफ जा रही थीं। पुल खराब होने के कारण उन्होंने नदी के पानी में उतरकर दूसरी तरफ जाने का प्रयास किया। इसी दौरान पानी का बहाव तेज होने से उनका संतुलन बिगड़ गया और वह बह गईं। हादसे में वृद्ध महिला की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से बनी समस्या का नतीजा है। उनका आरोप है कि क्षतिग्रस्त पुल के निर्माण को लेकर कई बार जिला प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक को अवगत कराया गया, लेकिन पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया। हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए साफ कर दिया कि जब तक अधिकारी और स्थानीय विधायक मौके पर पहुंचकर पुल निर्माण सहित उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक शव नहीं उठाया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो वे शव को स्थानीय विधायक के आवास पर ले जाकर रखने के लिए मजबूर होंगे।
उदयपुर में बाल संरक्षण और सुरक्षा के दावों के बीच एक संस्था में गंभीर लापरवाही और अपराध का मामला सामने आया है। भोपालपुरा थाना क्षेत्र के जय अम्बे आश्रम में रह रही एक नाबालिग बालिका को जब चाइल्ड लाइन द्वारा रेस्क्यू किया गया, तब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। रेस्क्यू के बाद चाइल्ड लाइन की टीम ने बालिका को बाल कल्याण समिति, उदयपुर के समक्ष पेश किया। बाल कल्याण समिति के निर्देशानुसार बालिका को सुरक्षा और देखरेख के लिए राजकीय बालिका गृह में शेल्टर प्रदान करवाया गया। शेल्टर होम में रहने के दौरान जब बालिका की काउंसलिंग की गई, तो उसने अपने साथ हुई आपबीती बयां की। बालिका ने काउंसलिंग में बताया कि आश्रम की संचालिका का भाई उसे अकेली पाकर उसके साथ गंदी हरकतें करता था। पीड़ित बालिका ने यह भी खुलासा किया कि उसने इस घटना की जानकारी कई बार आश्रम की संचालिका को दी थी। लेकिन संचालिका द्वारा आरोपी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया और बालिका को बात छुपाने और चुप रहने के लिए कहा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने नारू और विनोद सोनी के खिलाफ बीएनएस, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच महिला अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजित सिंह द्वारा की जा रही है।
जिस बुजुर्ग दंपति को परिजन दो दिन से तलाश रहे थे, उनकी तलाश का अंत बेहद दर्दनाक तरीके से हुआ। सायरा थाना क्षेत्र के पुनावली गांव में लहरीलाल पालीवाल और उनकी पत्नी राधा देवी के शव उसी घर के अंदर मिले, जहां से दोनों अचानक गायब हुए थे। दोनों के शव एक बड़े संदूक में प्लास्टि की थेलियों में बंद मिले हैं। लहरीलाल की उम्र 65 वर्ष और उनकी पत्नी राधा देवी की उम्र 62 वर्ष बताई गई है। दोनों घर पर अकेले रहते थे। लहरीलाल दूध बेचने का काम करते थे। बुधवार सुबह जब वे दूध देने नहीं पहुंचे तो एक पड़ोसी ने घर जाकर देखा। घर का दरवाजा खुला था, लेकिन अंदर दोनों नजर नहीं आए। इसके बाद पड़ोसी ने उनके बेटे को सूचना दी। बेटा मनोहर राजकोट में निजी नौकरी करता है। माता-पिता के लापता होने की जानकारी मिलते ही वह सायरा पहुंचा। मनोहर के मुताबिक मंगलवार रात करीब साढ़े 9 बजे उसकी मां से फोन पर बातचीत हुई थी। इसके बाद दोनों सो गए थे। बुधवार सुबह पड़ोसी ने घर का दरवाजा खुला होने और माता-पिता के नहीं मिलने की सूचना दी। परिजनों ने रिश्तेदारों के साथ आसपास तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद सायरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। परिजनों को दोनों के अपहरण की आशंका भी थी। इसी दौरान लहरीलाल के मोबाइल की लोकेशन लखावली के समीप मिली। परिजन वहां पहुंचे, लेकिन दोनों का पता नहीं चला। दो दिनों तक तलाश चलने के बाद अब घर से दोनों के शव मिलने से पूरा मामला उलझ गया है। बताया जा रहा है कि घर से बदबू आने पर पड़ोसियों को अनहोनी का अंदेशा हुआ। सूचना पर सायरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और संदूक से दोनों शव बरामद किए। दोनों की हत्या कर शव संदूक में बंद किए जाने की आशंका है। हालांकि हत्या की वजह, वारदात का समय और इसमें कौन शामिल है, इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद ही होगा। पुलिस मौके से साक्ष्य जुटाने के साथ पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जानकारी के मुताबिक प्रारंभिक जांच में पुलिस को कोई अहम सुराग भी हाथ लगे है। फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है। पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले का खुलासा होगा।
उदयपुर के भाजपा सांसद मन्नालाल रावत को जोधपुर जिला निर्वाचन अधिकारी से कार्रवाई का नोटिस मिला है। नोटिस में चुनाव ड्यूटी में लापरवाही करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। दरअसल, सांसद मन्नालाल रावत लोकसभा चुनाव लड़ने से पहले ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में एडिशनल कमिश्नर थे। वे जोधपुर में भी पोस्टेड रहे। साल 2024 में वीआरएस लेकर उन्होंने चुनाव लड़ा और लोकसभा सांसद चुने गए। इसके बाद भी उनका नाम अब तक जोधपुर जिले के सरकारी कर्मचारियों की लिस्ट में शामिल है। नोटिस मिलने के बाद रावत ने सरकारी सिस्टम पर हैरानी जताई है।जोधपुर जिला परिषद के सीईओ और निर्वाचन विंग के कार्मिक प्रकोष्ठ प्रभारी अधिकारी आशीष कुमार मिश्रा के ऑफिस ने सांसद को गुरुवार (13 अगस्त) शाम को ये नोटिस जारी किया। इसमें रावत से उनके ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई है। इस डिटेल को सरकारी पोर्टल पर शुक्रवार (14 अगस्त) दोपहर तीन बजे तक अपडेट करने के आदेश दिए गए हैं। अगर रावत ऐसा नहीं करते हैं तो इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 134 के तहत अपराध माना जाएगा। उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। आशीष कुमार मिश्रा ने बताया- चुनाव के लिए ईएमएस पोर्टल पर कार्मिकों की सूचना 1 अगस्त 2026 तक अपडेट की जानी थी। 13 अगस्त 2026 तक एनआईसी से प्राप्त सूची के अनुसार सूचना अपडेट से शेष रहे डीडीओ ऑफिस को सूचित किया गया था। इसमें संयुक्त यातायात कमिश्नर (आरआईटी) जोधपुर द्वारा डीडीओ की सूची को अपडेट नहीं किया गया था। लिस्ट में 129 नंबर पर पूर्व अधिकारी मन्नाराम रावत का नाम होने के कारण उन्हें नोटिस जारी हो गया। सांसद बोले- कर्मचारी ने फोन कर दी सूचना सांसद को दिए गए इस नोटिस के बाद पंचायत और निकाय चुनाव की तैयारियों पर भी सवाल उठ गए हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि सालों तक कर्मचारियों की लिस्ट अपडेट नहीं होना चिंताजनक है। सांसद मन्नालाल ने बताया- पहले मुझे सुबह जोधपुर की निर्वाचन शाखा के एक कर्मचारी ने फोन करके नोटिस की सूचना दी। इसके बाद गुरुवार शाम 5:34 बजे मुझे वॉट्सएप पर नोटिस की कॉपी भेज दी गई। सांसद रावत ने कहा- डिजिटल दौर में भी निर्वाचन विभाग का डाटा 3 साल पुराना चल रहा है। इससे पता चलता है कि सिस्टम में बैठे अधिकारी आम आदमी और कर्मचारियों का डेटा कैसे मेंटेन कर रहे होंगे।
मेयर पद की आरक्षण लॉटरी के बाद उदयपुर की राजनीति में अचानक हलचल बढ़ गई है। लंबे समय से चुनावी तैयारी में जुटे नेताओं ने अब अपने-अपने समीकरणों पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। अनारक्षित ओपन सीट आने के बाद सामान्य वर्ग के पुरुष नेताओं के लिए मेयर पद की दौड़ खुली नजर आ रही है। बीजेपी में कई पुराने और चर्चित चेहरे दावेदारी की रेस में बताए जा रहे हैं। प्रमोद सामर, पारस सिंघवी, डॉ. रामकृपा शर्मा, तख्तसिंह शक्तावत और अतुल चंडालिया के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। इसके अलावा केके गुप्ता, प्रेम सिंह शक्तावत और नानालाल वया जैसे नेताओं की सक्रियता भी चुनावी माहौल में चर्चा का विषय बनी हुई है। बीजेपी के भीतर सामान्य महिला चेहरों में अलका मुंदडा, कविता जोशी, पिंकी माड़ावत और किरण तांतेड़ के नाम सामने आ रहे हैं। वहीं ओबीसी पुरुष वर्ग से जगदीश सुथार, छोगालाल भोई, मनोहर चौधरी, योगेश कुमावत और विजय आहूजा जैसे नाम दावेदारी में माने जा रहे हैं। ओबीसी महिला वर्ग से हंसा माली और मंदाकिनी धाबाई भी अपनी दावेदारी रख सकती हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में भी मेयर पद को लेकर रणनीति बननी शुरू हो गई है। सामान्य पुरुष वर्ग में फतेह सिंह राठौड़, पंकज शर्मा, दिनेश श्रीमाली, अजय पोरवाल, अरूण टांक और मोहसिन खान के नाम चर्चा में हैं। महिला दावेदारों में नीलीमा सुखाड़िया, हितांशी शर्मा, राजीव सुहालका, सीमा चोर्डिया, नजमा मेवाफरोश और कामिनी गुर्जर के नाम सामने आ रहे हैं। लेकिन सियासत का अगला खेल वार्ड आरक्षण तय करेगा। जिस दावेदार का वार्ड आरक्षित हो जाएगा, उसके सामने नया वार्ड तलाशने की चुनौती होगी। ऐसे में दोनों दल अपने मजबूत चेहरों को सुरक्षित वार्ड से मैदान में उतारने की रणनीति बना सकते हैं। यानी मेयर की कुर्सी का रास्ता आरक्षण लॉटरी से खुल जरूर गया है, लेकिन टिकट किसे मिलेगा और कौन चुनावी मैदान में उतरेगा, इसका फैसला अभी बाकी है। आने वाले दिनों में वार्ड आरक्षण के बाद उदयपुर की सियासत में दावेदारों की तस्वीर और ज्यादा साफ होने की उम्मीद है।
पुनावली गांव में रहने वाले 65 वर्षीय लहरी लाल पालीवाल और उनकी 62 वर्षीय पत्नी राधा देवी बुधवार सुबह अचानक घर से लापता हो गए। दोनों घर पर अकेले रहते हैं। लहरी लाल दूध बेचने का काम करते हैं। बुधवार सुबह जब वह दूध देने नहीं पहुंचे तो पड़ोसी को चिंता हुई। पड़ोसी ने घर जाकर देखा तो दरवाजा खुला था, लेकिन अंदर दोनों मौजूद नहीं था। इसके बाद पड़ोसी ने लहरी लाल के बेटे मनोहर पालीवाल को फोन कर जानकारी दी। मनोहर राजकोट में निजी नौकरी करता है। माता-पिता के लापता होने की सूचना मिलने के बाद वह तुरंत सायरा पहुंचा। इसके बाद रिश्तेदारों और आसपास के लोगों की मदद से घर और आसपास के इलाकों में तलाश की गई, लेकिन दंपति का पता नहीं चला। बाद में सायरा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मनोहर पालीवाल ने बताया कि मंगलवार रात को उसकी मां से उसकी बात हुई थी सुबह लापता होने की सूचना मिली। जानकारी के मुताबिक मंगलवार रात करीब साढ़े 9 बजे परिवार के सदस्य कमल पालीवाल की लहरी लाल और राधा देवी से फोन पर बातचीत हुई थी। इसके बाद दोनों घर पर थे। लेकिन बुधवार सुबह दोनों अचानक गायब मिले। अब इस मामले में सबसे अहम अपडेट सामने आया है। लहरी लाल के मोबाइल की लोकेशन लखावली के पास मिली। मोबाइल लोकेशन सामने आने के बाद परिजन लखावली पहुंचे और संभावित स्थानों पर तलाश की, लेकिन वहां भी वृद्ध दंपति का कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस को भी इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद पुलिस टीम ने मोबाइल लोकेशन सहित अन्य माध्यमों से तलाश शुरू कर दी है। दंपति के लापता होने से परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। परिजनों ने उनके अपहरण की आशंका भी जताई है, हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस संभावित स्थानों पर खोजबीन कर रही है और मोबाइल लोकेशन के आधार पर भी सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। इधर, पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट परिजन और ग्रामीण गुरुवार को सायरा थाने पहुंचे थे। ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए वृद्ध दंपति को जल्द तलाशने की मांग की। बेटे मनोहर ने भी पुलिस प्रशासन से माता-पिता को जल्द खोजने की गुहार लगाई है। फिलहाल करीब 40 घंटे बीत चुके हैं और मोबाइल लोकेशन लखावली के पास मिलने के बावजूद दंपति का पता नहीं चल पाया है। अब पुलिस की जांच और मोबाइल लोकेशन से मिलने वाले सुरागों पर सभी की नजर है। फिलहाल पुलिस लापता दंपति की तलाश के प्रयास में जुटी है।
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