आवाज़ हम सबकी
यह दर्दनाक वाकया गुरुवार तड़के करीब 4 बजे का है, जब जलदा निवासी प्रेम गमेती अपनी रोजमर्रा की मजदूरी के लिए कृषि मंडी जा रहा था। रास्ते में रेलवे पटरी के पास अज्ञात युवकों ने उसे घेर लिया और चाकू से 6-7 वार कर उसे मरणासन्न हालत में छोड़ दिया। घायल प्रेम ने हिम्मत जुटाकर परिजनों को फोन किया, जो उसे तुरंत सैटेलाइट अस्पताल ले गए। वहां से गंभीर हालत देखते हुए उसे एमबी अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन असली त्रासदी यहीं से शुरू हुई। मृतक की पत्नी और परिजनों का आरोप है कि एमबी अस्पताल के स्टाफ ने घायल प्रेम को भर्ती करने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि यह मेडिको लीगल केस है, इसलिए पहले सविना थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज करवाओ, तभी इलाज शुरू होगा। परिजन मिन्नतें करते रहे, लेकिन सिस्टम का दिल नहीं पसीजा। बेबस परिजन जब तक उसे लेकर थाने पहुँचे और कागजी कार्रवाई पूरी की, तब तक शरीर से काफी खून बह चुका था और प्रेम ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस घटना की जानकारी मिलते ही भील समाज के लोग बड़ी संख्या में एमबी अस्पताल पहुँच गए। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि इमरजेंसी में पहले इलाज मिलना चाहिए, पुलिस रिपोर्ट बाद में भी हो सकती है। समाज के लोगों ने दोषी डॉक्टरों और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सहायता राशि की भी मांग उठाई जा रही है। अस्पताल की इस संवेदनहीनता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक गरीब की जान की कीमत कागजी कार्रवाई से कम है? परिजनों का साफ़ कहना है कि अगर समय रहते टांके लग जाते और खून रुक जाता, तो आज प्रेम गमेती जिंदा होता। फिलहाल, अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल है और समाज के लोग एकजुट होकर न्याय की मांग कर रहे हैं ताकि कल किसी और के साथ ऐसी बेरहमी न हो।
उदयपुर में बलीचा स्थित पंडित दीनदयाल नगर R-4 में दिनदहाड़े राधा-कृष्ण मंदिर में चोरी हो गई। चोर यहां रखा दानपात्र उठाकर ले गया। इसमें करीब 500 रुपए थे। दूसरे दानपात्र में करीब 4500 रुपए थे, लेकिन वजन में भारी होने की वजह से चोर इसे ले जाने में कामयाब नहीं नहीं हो पाया। घटना मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। सीसीटीवी फुटेज में चोर चोरी करने से पहले भगवान के सामने हाथ जोड़ता दिखाई दे रहा है। फिर खिड़की से इधर-उधर देखकर थैली में दानपात्र को छिपाकर ले जाता है। सोसायटी सचिव आनंद यादव ने चोरी की घटना को लेकर गोवर्धन विलास थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने चोर को जल्द पकड़ने की मांग की है।क्षेत्रवासी विजय रणवां और देवेन्द्र रैगर ने बताया कि हमने अपने स्तर पर आसपास की बस्तियों में चोर को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन कहीं पता नहीं चला। पूछताछ में सामने आया कि दो सप्ताह पहले पास ही बलीचा मंडी स्थित हनुमानजी मंदिर में भी दानपात्र चोरी हुआ था। बाद में लोगों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस गश्त बढ़ाने और चोरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
उदयपुर के भुवाणा स्थित खसरा नंबर 1961 की आधा बीघा जमीन अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। मंगलवार को कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक पर गंभीर आरोप लगाए। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने कहा कि जिले में आदिवासियों की जमीनों को हड़पना अब आम बात हो गई है। उन्होंने दावा किया कि भुवाणा के मूल खातेदार ने पहले यह जमीन दो करोड़ रुपये में चित्तौड़गढ़ के एक व्यक्ति को बेची थी, लेकिन सत्ता के दबाव में खेल पलट दिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों और भाजपा नेताओं ने मिलकर खातेदार को सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में बंधक बनाया। आरोप के मुताबिक, रिवॉल्वर और लाठियों के दम पर महज 12 लाख रुपये में जमीन की फिर से रजिस्ट्री करवाई गई। इतना ही नहीं, पीड़ित खातेदार को ही ठगी के फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेज दिया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार को पर्ची सरकार करार देते हुए कहा कि उदयपुर में जमीनों के जितने भी विवाद सामने आ रहे हैं, उनमें सत्ताधारी दल के नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत साफ नजर आ रही है। पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा और फतह सिंह राठौड़ ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि पीड़ित आदिवासी परिवार को उसकी जमीन वापस दिलाई जाए। उन्होंने इस मामले में लिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई करने और विधायक के इस्तीफे की भी मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे गरीबों और आदिवासियों का शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे और यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
उदयपुर एक बार फिर देश के अग्नि योद्धाओं की शारीरिक दक्षता और खेल कौशल का गवाह बन रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ऑल इंडिया फायर सर्विस स्पोर्ट्स एंड फायर सर्विस मीट-2026 का आयोजन उदयपुर में कर रहा है। इसका उद्घाटन राजस्थान के जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने मशाल जलाकर किया। 27 से 31 जनवरी तक चलने वाली इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ईआरटीओ, एयरपोर्ट अथॉरिटी सहित विभिन्न केंद्रीय संगठनों की फायर सेफ्टी टीमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 1500 फायर ऑफिसर, फायर फाइटर्स और फायरमैन हिस्सा ले रहे हैं। प्रतिष्ठित आयोजन ऑल इंडिया फायर सर्विस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड द्वारा कराया जा रहा है। आयोजन ऑल इंडिया फायर सर्विस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड द्वारा करवाया जा रहा है। प्रतियोगिता में खेलों के साथ-साथ फायर फाइटर्स के पारंपरिक और तकनीकी खेल भी आयोजित होंगे।इस मौके पर मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा- हम सभी धरती पुत्र हैं। हमें सेवा करने का अवसर मिला है। भले ही यह नौकरी हो, लेकिन इसे पहले सेवा भाव से निभाना चाहिए। फायर ऑफिसर एवं कर्मचारी देश के किसी भी कोने में आगजनी या आपदा जैसी स्थिति में अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने के लिए तत्पर रहते हैं, यही सच्ची देश सेवा है।टूर्नामेंट के समन्वयक और निगम में मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी ने बताया कि इसमें एथलेटिक्स, आर्म रेसलिंग, बैडमिंटन, क्रिकेट, लॉन टेनिस, टेबल टेनिस, कुश्ती, सीढ़ी दौड़, मस्टर, ‘सबसे ताकतवर अग्निशामक’ और ‘अल्टीमेट फायर फाइटर’ जैसी विशेष प्रतियोगिताएं होंगी। आयोजन का मुख्य उद्देश्य अग्निशमन सेवा से जुड़े कर्मियों की फिटनेस को परखना और उनके बीच टीम वर्क व खेल भावना को प्रोत्साहित करना है। इस दौरान उनके फायर स्किल्स की भी परीक्षा होगी, जिसमें भारी होज पाइप के साथ दौड़ (होज रन), सीढ़ियों पर चढ़कर बचाव कार्य (लैडर ड्रिल) और हाइड्रेंट तकनीक का सटीक प्रदर्शन (फायर ड्रिल) करना होगा। नियमित खेल में फुटबॉल, बैडमिंटन, टेनिस, तैराकी, साइक्लिंग, जैवलिन थ्रो, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स (100-200 मीटर व रिले रेस) की प्रतियोगिताएं होंगी।खास बात यह है कि भारत साल 2029 में गुजरात में वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स की मेजबानी करने जा रहा है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े आयोजन की तैयारी और खिलाड़ियों के चयन के लिहाज से उदयपुर का यह टूनामेंट काफी महत्वपूर्ण हैं।
उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में नई लॉयन सफारी की शुरुआत से पहले वन विभाग के लिए पिछला हफ्ता चुनौतीपूर्ण रहा। एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत गुजरात के जूनागढ़ से लाए गए 7 वर्षीय शेर सम्राट और 3 वर्षीय शेरनी सुनयना को नए वातावरण के अभ्यास के लिए खुले बाड़े में छोड़ा गया था। शेर सम्राट तो समय पर लौट रहा था, लेकिन सुनयना को जंगल की आबोहवा इतनी रास आ गई कि वह पिछले चार दिनों से शेल्टर होम नहीं लौटी। 20 हेक्टेयर के विशाल सफारी क्षेत्र में ऊंची घास और घनी झाड़ियों के कारण शेरनी बार-बार नजरों से ओझल हो रही थी। वन विभाग की सबसे बड़ी चिंता फेसिंग के बाहर इंसानी आवाजाही को लेकर थी। शेरनी की तलाश के लिए वनकर्मियों की टीम ने सफारी के सबसे ऊंचे पॉइंट क्लाउड-9 पहाड़ी पर बने कमरों की छतों को अपना वॉच टावर बनाया। दिन-रात दूरबीन से की गई निगरानी के दौरान जब शुक्रवार को शेरनी की लोकेशन ट्रेस हुई, तो विभाग ने तुरंत रणनीति बदली। एक विशेष वाहन के जरिए शेरनी की घेराबंदी की गई और उसे धीरे-धीरे शेल्टर होम की दिशा में धकेला गया। करीब एक घंटे के प्रयास के बाद शाम साढ़े छह बजे सुनयना ने सही रास्ता पकड़ा और सुरक्षित अपने एनक्लोजर में दाखिल हो गई। गौरतलब है कि इस लॉयन सफारी का शिलान्यास जून 2024 में हुआ था, जो शहर से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित है। अब जबकि शेरनी अपने खाने-पीने की नियत जगह से परिचित हो गई है, वन अधिकारियों को उम्मीद है कि वह जल्द ही इस नए ठिकाने में पूरी तरह ढल जाएगी। अगले माह प्रस्तावित लॉयन सफारी के भव्य उद्घाटन की तैयारियों में जुटे प्रशासन के लिए सुनयना की यह घर वापसी किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। अब जल्द ही पर्यटक यहाँ सम्राट और सुनयना की दहाड़ सुन सकेंगे।
उदयपुर के सुखेर थाना इलाके में स्थित एक गेम जोन में दोपहर बाद अचानक भीषण आग लग गई। पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते आग ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। गेम जोन के भीतर मौजूद प्लास्टिक का सामान, फोम के गद्दे और बच्चों के खेलने के उपकरणों ने आग तेज हो गई। आग से गेम जोन के संचालक को करीब 25 लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। घटना सुखेर के नवरत्न कॉम्प्लेक्स में ट्रेम्पोलियन पार्क के 'स्काई विले' की है।घटना की सूचना मिलते ही मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी के निर्देश पर फायर ऑफिसर नवदीप बग्गा के नेतृत्व में अग्निशमन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। करीब 10 हजार स्क्वायर फीट के विस्तृत क्षेत्र में फैले इस गेम जोन में आग को काबू करने के लिए दमकल की 5 गाड़ियों को तैनात किया गया।प्रारंभिक जांच के अनुसार इस अग्निकांड की मुख्य वजह बिजली का शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। गेम जोन में अधिकांश सजावटी और खेलने की चीजें प्लास्टिक और सिंथेटिक सामग्री से बनी थीं, जिसके कारण आग बुझाना दमकलकर्मियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुआ। गनीमत यह रही कि आग लगने के दौरान परिसर में भगदड़ नहीं मची और कोई जनहानि नहीं हुई।
उदयपुर में अवैध निर्माण के खिलाफ यूडीए कमिश्नर राहुल जैन के निर्देशन में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को राजस्व ग्राम कालारोही के आराजी संख्या 822 पर स्थित होटल आर्याइन पर प्राधिकरण ने सीज की कार्रवाही को अंजाम दिया। जांच में सामने आया कि निर्माणकर्ता ने फार्म हाउस की जमीन पर बिना किसी मंजूरी के बहुमंजिला होटल खड़ी कर दी थी और धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। सचिव हेमेंद्र नागर ने बताया कि इस अवैध निर्माण के विरुद्ध प्राधिकरण अधिनियम-2023 की धारा 32 के तहत नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, निर्माणकर्ता ने रूपांतरण या स्वीकृति के कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किए, जिसके बाद आज उपायुक्त सुरेंद्र बी पाटीदार के नेतृत्व में यूडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर होटल को पूरी तरह सीज कर दिया। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार रणजीतसिंह विठू सहित राजस्व और पुलिस विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। गौरतलब है कि यूडीए की टीम ने इससे ठीक एक दिन पहले गुरुवार को कलड़वास क्षेत्र में भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया था। वहां शिवलाल पटेल द्वारा भवानी होटल के नाम से किए गए अवैध व्यावसायिक निर्माण को सीज किया गया था। प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुमोदित प्लान के विरुद्ध या बिना रूपांतरण के किए गए किसी भी निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा। एक के बाद एक हुई इन दो बड़ी कार्यवाहियों ने शहर के उन होटल संचालकों की नींद उड़ा दी है जो नियमों को ताक पर रखकर बिना स्वीकृति इमारतें तान रहे हैं। यूडीए प्रशासन ने भविष्य में भी इस तरह के अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान जारी रखने के संकेत दिए हैं।
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