आवाज़ हम सबकी
लोक कला मंडल क्षेत्र में हुए सनसनीखेज अपहरण और फिरौती मामले में उदयपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद अब गिरफ्तार किए गए सभी छह आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस लगातार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पूरा मामला 25 मई का है, जब अंबामाता थाना क्षेत्र निवासी मोहम्मद सालिस अपने दोस्त अरबाज खान के साथ लोक कला मंडल के पास चाय की थड़ी पर मौजूद था। इसी दौरान उसके मोबाइल पर दुबई नंबर से कॉल आया और उसे धमकाते हुए लोकेशन पूछी गई। कुछ ही मिनटों बाद पंजाब नंबर की काली स्कॉर्पियो में सवार होकर छह युवक मौके पर पहुंचे और मोहम्मद सालिस को जबरन गाड़ी में डालकर अपहरण कर ले गए। आरोपियों ने रास्ते में उसके साथ थप्पड़ और मुक्कों से मारपीट की तथा नाथद्वारा और राजसमंद की तरफ ले जाते हुए 5 लाख रुपए की फिरौती मांगी। साथ ही पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई। इसी दौरान पीड़ित के फोन पर पुलिस का कॉल आने से आरोपी घबरा गए और गोमती रोड के पास युवक को पटककर मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा, डीएसपी राजेश यादव और हाथीपोल थानाधिकारी राजू देवी के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और नाकाबंदी के जरिए महज 12 घंटे में पूरे मामले का खुलासा कर दिया।जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी गौरव प्रताप राणा, मोहाली पंजाब का निवासी है और फॉरेन करेंसी एक्सचेंज कंपनी से जुड़ा हुआ है। आरोपी का दावा था कि बीएनएस वॉलेट के जरिए खरीदे गए 5 हजार यूएस डॉलर के बदले मोहम्मद सालिस पर करीब 5 लाख रुपए बकाया थे। इसी रकम की वसूली के लिए अपहरण की साजिश रची गई। पुलिस ने गौरव प्रताप राणा, कपिल राणा, अमनदीप सिंह, रोहित कुमार, सोनु और अनिल कुमार को गिरफ्तार कर स्कॉर्पियो वाहन भी जब्त कर लिया है।
उदयपुर की गुजराती धर्मशाला में आयोजित अखिल भारतीय किसान सभा के जिला स्तरीय सम्मेलन में किसानों के मुद्दों को लेकर मंथन हुआ। जिले की विभिन्न तहसीलों से पहुंचे किसान प्रतिनिधियों और संगठन पदाधिकारियों ने सम्मेलन में हिस्सा लेकर खेती, बिजली, कर्ज और फसल बीमा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व विधायक पेमाराम ने केंद्र की मोदी सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। पेमाराम ने कहा कि अखिल भारतीय किसान सभा हमेशा किसानों की एकता और उनके हकों की लड़ाई लड़ती रही है। उन्होंने पूर्व के किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों के दबाव के चलते सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन की ताकत के आगे सरकार को झुकना पड़ा और माफी तक मांगनी पड़ी। प्रदेशाध्यक्ष ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता लागू हुआ तो देश की खेती, पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। इससे किसानों और ग्रामीण युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा। पेमाराम ने राजस्थान के बिजली आंदोलन, कर्ज माफी संघर्ष और महाराष्ट्र के लॉन्ग मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों को अधिकार केवल संघर्ष और आंदोलन से ही मिल सकते हैं। उन्होंने घोषणा की कि अगस्त में चूरू में प्रांतीय सम्मेलन और उसके बाद हैदराबाद में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जहां देशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने 1 जून से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। डीलर्स प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, आपूर्ति संकट और प्रशासनिक कार्रवाई से नाराज हैं। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को मंगलवार को लेटर लिखकर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की है।एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर 1 जून 2026 से पहले सरकार ने डीलर्स के साथ बैठक कर समाधान नहीं निकाला तो प्रदेशभर के पेट्रोल पंप डीलर धरना-प्रदर्शन और हड़ताल पर जाएंगे।एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि लगातार लेटर और ईमेल भेजने के बावजूद प्रमुख शासन सचिव स्तर पर कोई बैठक आयोजित नहीं की जा रही है। न तो डीलर्स के फोन कॉल का जवाब दिया जा रहा है। डीलर्स की सबसे बड़ी समस्या पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति है। प्रदेश के कई पेट्रोल पंप रोजाना ड्राई हो रहे हैं। इंडियन ऑयल ने मौखिक आदेश, वॉट्सएप और मोबाइल संदेशों के जरिए एक ग्राहक को 50 हजार रुपए तक डीजल और 5 हजार रुपए तक पेट्रोल देने की सीमा तय की है, जबकि भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की ओर से भी पेट्रोल और डीजल की मात्रा सीमित कर दी गई है।डीलर्स ने कहा कि अगर कोई संचालक तय सीमा से अधिक ईंधन देता है। तो उस पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए बिक्री बंद कर दी जाती है और नोटिस जारी किए जाते हैं। इससे जनता में भ्रम की स्थिति बनी हुई है और पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ रही है। तेल कंपनियों के ये निर्देश कंट्रोल एक्ट-2000 और MSHSD कंट्रोल एक्ट-2005 का उल्लंघन हैं।डीलर्स ने सरकार से पेट्रोल पंपों और तेल डिपो पर फ्लोमीटर लगाने की मांग भी दोहराई है। उनका कहना है कि जब तक पूरी सप्लाई चेन में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक केवल डीलर्स को दोषी ठहराना गलत है।एसोसिएशन ने ब्रांडेड फ्यूल को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में ग्राहक महंगा ब्रांडेड पेट्रोल-डीजल खरीदने को तैयार नहीं हैं, लेकिन तेल कंपनियां इसकी बिक्री का दबाव बना रही हैं।वहीं किसानों को ड्रम में डीजल आपूर्ति रोकने का मुद्दा भी लेटर में उठाया गया है। डीलर्स ने कहा कि बारिश और बुवाई के सीजन में किसानों को डीजल की जरूरत बढ़ेगी, लेकिन तेल कंपनियों की पाबंदियों के कारण ड्रम में डीजल नहीं दिया जा रहा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर स्थिति बन सकती है।एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री के दौरे और सरकारी रैलियों के दौरान उधार में दिए गए ईंधन भुगतान का मुद्दा भी उठाया है। डीलर्स का कहना है कि लाखों रुपए अब भी बकाया हैं और भुगतान नहीं होने से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। बायोडीजल और बेस ऑयल के अवैध कारोबार पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए डीलर्स ने कहा कि उनकी शिकायतों के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।सबसे अहम मांग वैट कम करने को लेकर की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पर वैट ज्यादा होने के कारण प्रदेश में ईंधन सबसे महंगा बिक रहा है। उन्होंने पंजाब के बराबर वैट दरें लागू करने और कम से कम 5 प्रतिशत वैट घटाने की मांग की है।एसोसिएशन ने कहा कि राजस्थान में सीएनजी की कीमतें हरियाणा और पंजाब की तुलना में ज्यादा हैं। साथ ही अलग-अलग जिलों में भारी मूल्य अंतर होने से उपभोक्ता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। एसोसिएशन ने कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो 1 जून 2026 से प्रदेशभर के पेट्रोल पंप संचालक हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
त्योहारों के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और आमजन में सुरक्षा का भरोसा कायम करने के उद्देश्य से उदयपुर पुलिस द्वारा शहर के संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला गया। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के नेतृत्व में निकाले गए इस फ्लैग मार्च में पुलिस अधिकारियों और जवानों ने शहर के प्रमुख मार्गों पर पैदल मार्च करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया। फ्लैग मार्च में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर उमेश ओझा, शहर के सभी सीओ, थानाधिकारी, कालिका पेट्रोलिंग यूनिट और पुलिस बल के जवान शामिल रहे। पुलिस का यह मार्च घंटाघर, धानमंडी, हाथीपोल, सूरजपोल और अंबामाता थाना क्षेत्र के संवेदनशील मार्गों से होकर गुजरा। मार्च के दौरान पुलिस ने विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और असामाजिक तत्वों पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए। पुलिस अधिकारियों ने आमजन से भी शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उदयपुर पुलिस का कहना है कि त्योहारों के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और पुलिस की गश्त लगातार बढ़ाई गई है। फ्लैग मार्च समाप्त होने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक लेकर कानून व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही त्योहारों के दौरान सतर्कता बरतने और आमजन से बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी जारी किए गए।
बिजनोल ग्राम पंचायत क्षेत्र में पिछले कई दिनों से पेयजल संकट गहराने के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 20 दिनों से नियमित रूप से पीने के पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जबकि पिछले 45 दिनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि 10 दिन में केवल एक बार और वह भी महज 15 मिनट के लिए पानी की सप्लाई दी जा रही है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। इसी समस्या को लेकर मंगलवार को ग्राम पंचायत मुख्यालय पर सैकड़ों ग्रामीण एकत्रित हुए और जलदाय विभाग के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। महिलाओं ने खाली मटके फोड़कर अपना विरोध जताया और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि घरों में पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं है और उन्हें दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जलदाय विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत करवाया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। जनप्रतिनिधियों को भी स्थिति बताई गई, फिर भी गांव में पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। धरना प्रदर्शन में समाजसेवी प्रवीण सिंह चुंडावत, शंभु सिंह, देवी सिंह, राम सिंह, भंवर सिंह, किशन सिंह, मथुरा लाल गुर्जर, लोकेश गुर्जर, उदय लाल, गोपाल गुर्जर, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कलेक्टर कार्यालय पर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
उदयपुर में बढ़ती छीना-झपटी की घटनाओं के बीच सवीना थाना क्षेत्र में हुई इस वारदात ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पीड़िता शिरीन रूही कुरैशी ने सवीना थाने में शिकायत देकर बताया कि 23 मई की रात करीब 8 बजकर 45 मिनट पर वह सवीना क्षेत्र से अपने घर की ओर जा रही थीं। इसी दौरान अचानक एक ब्ल्यू कलर की बाइक पर सवार तीन युवक उनके पास पहुंचे और उनका पर्स छीनकर फरार हो गए। पीड़िता के अनुसार पर्स में जरूरी दस्तावेजों के साथ करीब 4 हजार रुपए की नकदी भी रखी हुई थी। घटना इतनी तेजी से हुई कि महिला संभल भी नहीं पाई और बदमाश मौके से भाग निकले। वारदात के बाद क्षेत्र में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस पूरी घटना का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बाइक सवार संदिग्ध युवक नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। सवीना थाना पुलिस अब आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि बदमाशों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया गया है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और वारदात में शामिल तीनों बदमाशों की तलाश लगातार जारी है।
महाराष्ट्र में हाल ही में सामने आए टीसीएस धर्मांतरण मामले के बीच अब उदयपुर से जुड़ा यह नया मामला सामने आने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। इस पूरे मामले की शुरुआत मुंबई के बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी है, जहाँ पीड़ित युवक और उसकी पत्नी साथ काम करते थे। पीड़ित ने उदयपुर के सुखेर थाने में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि साल 2022 में बांद्रा ईस्ट निवासी मोहम्मद आदिल ने उसकी पत्नी को झांसे में लेकर उसका ब्रेनवॉश शुरू किया, जिसके बाद पत्नी ने हिजाब पहनना शुरू कर दिया था। आरोप है कि आदिल ने न केवल महिला को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया, बल्कि उनके संयुक्त खाते से 2 लाख 59 हजार रुपए भी ऐंठ लिए। इतना ही नहीं, शारीरिक शोषण के बाद महिला का गर्भपात भी करवाया गया। पीड़ित के मुताबिक, जैसे-तैसे आदिल से पीछा छुड़ाया तो उसने अपने दोस्त और एसबीआई कर्मचारी साफिन गोडल को इस साजिश में शामिल कर लिया। साफिन ने धमकाया कि पत्नी को मोहम्मद आदिल से तो बचा लिया, लेकिन उससे नहीं बचा पाएगा। उसने बताया कि पत्नी बच्ची के साथ जल्द मुस्लिम धर्म अपना लेगी। कुछ दिनों बाद साफिन की महिला मित्र नेहा शर्मा ने कॉल कर पत्नी को मुंबई भेजने के लिए कहा। नहीं मानने पर नौकरी से बर्खास्त कराने की धमकी दी। घर में उर्दू की किताबें मिलने और पत्नी द्वारा सुसाइड की धमकी देने के बाद मामला और गंभीर हो गया। समझाइश पर पत्नी गलत कदम नहीं उठाने के लिए मान गई। उसने मुंबई से उदयपुर ट्रांसफर कराने की बात कही। ऐसे में वह बेटी और पत्नी को उदयपुर छोड़कर वापस मुंबई चले गए। 18 अप्रैल को जब पीड़ित उदयपुर आने वाला था, उससे पहले ही सुबह करीब पौने छह बजे पत्नी अपनी 9 साल की बेटी, 5 लाख रुपए नकद और सोने के जेवर लेकर साफिन गोडल के साथ फरार हो गई। पीड़ित ने आशंका जताई है कि इस पूरी साजिश के पीछे कोई बड़ा धार्मिक संगठन और अपराधी जुड़े हो सकते हैं, जिनका काम दूसरे धर्म की महिलाओं का यौन शोषण और धर्मांतरण कराना है। फिलहाल, सुखेर थानाधिकारी इस मामले की तकनीकी पहलुओं से जांच कर रहे हैं। युवक ने महाराष्ट्र से डाक के जरिए जिला पुलिस अधीक्षक को शिकायत की थी, जिसके आधार पर अब आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसा जा रहा है। उदयपुर एसपी डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि पीड़ित युवक की रिपोर्ट के आधार पर धर्मांतरण के नए कानून की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। मामले का अनुसंधान जारी है। इसके बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो पाएगा। फिलहाल मामले की जांच को लेरक उदयपुर पुलिस की एक टीम मुंबई के लिए रवाना हो गयी है।
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