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उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले होमगार्ड दिलीप खराड़ी ने ही एक महिला प्रोफेसर की स्कूटी चोरी कर ली। घटना 30 जून की है, लेकिन इसका खुलासा करीब छह दिन बाद सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान हुआ। जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। सीसीटीवी कैमरों से बचने के उद्देश्य से उसने अपनी होमगार्ड की वर्दी के ऊपर सादा शर्ट पहन ली और हेलमेट भी लगाया, ताकि उसकी पहचान आसानी से नहीं हो सके। इसके बावजूद कैमरों में उसकी गतिविधियां रिकॉर्ड हो गईं और जांच के दौरान वही फुटेज पूरे मामले का अहम सबूत बन गई। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी को स्कूटी ले जाते हुए देखा गया। इसके बाद जब उससे पूछताछ की गई और उसके सामने पुख्ता सबूत रखे गए तो होमगार्ड दिलीप खराड़ी ने चोरी करना स्वीकार कर लिया। घटना सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राहुल जैन ने आरोपी होमगार्ड दिलीप खराड़ी को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटा दिया है। फिलहाल मामले में आगे की वैधानिक प्रक्रिया जारी है। यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है, क्योंकि जिस व्यक्ति पर संस्थान की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, उसी पर चोरी करने का आरोप साबित हुआ।
उदयपुर में शुक्रवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे अंबामाता थाना क्षेत्र में प्रॉपर्टी विवाद को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई और इस दौरान विनोद खटीक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को तत्काल महाराणा भूपाल चिकित्सालय यानी एमबी हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही अंबामाता थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है और विवाद के कारणों का भी पता लगाया जा रहा है। घायल के परिजनों का आरोप है कि हितेश रावत, निखिल रावत, हिमांशु रावत, लक्ष्मी रावत, दो नाबालिगों और उनके अन्य साथियों ने मिलकर विनोद खटीक पर हमला किया। परिजनों का यह भी दावा है कि विवाद के दौरान फायरिंग की गई और धारदार हथियार से वार कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। घटना के बाद महाराणा भूपाल चिकित्सालय में घायल के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। आरोपियों की भूमिका और फायरिंग के आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल घायल का उपचार जारी है और पुलिस साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से परेशान नांदेशमा और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद संभाल ली। रात में युवाओं की अलग-अलग टोलियां बनाकर पूरे गांव में गश्त की जा रही थी। गश्त के तीसरे दिन देर रात करीब डेढ़ बजे ग्रामीणों को दो संदिग्ध युवक बाजार क्षेत्र में दिखाई दिए। नांदेशमा भाजपा युवा मोर्चा मंडल के उपाध्यक्ष कैलाश पालीवाल और अन्य युवाओं ने जब दोनों पर नजर रखी तो वे बाइक छोड़कर भागने लगे। ग्रामीणों ने करीब 200 से 300 मीटर तक पीछा कर दोनों को पकड़ लिया। इसी दौरान गांव के अलग-अलग हिस्सों में गश्त कर रहे युवाओं ने बाइकों पर करीब एक दर्जन संदिग्धों को अलग-अलग रास्तों से भागते हुए भी देखा। सूचना मिलते ही पास में गश्त कर रही पुलिस की 112 टीम मौके पर पहुंच गई और ग्रामीणों ने दोनों संदिग्धों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पूछताछ के दौरान उनके कब्जे से ढोल गांव से चोरी की गई एक मोटरसाइकिल बरामद होने की बात सामने आई। सायरा थाने के एएसआई शंभूसिंह ने बताया कि दोनों संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम में जितेंद्र कुमार, कॉन्स्टेबल गणपत बिश्नाई सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद रहे। गौरतलब है कि दो दिन पहले नांदेशमा गांव के जैन मंदिर, महादेव मंदिर, ठाकुर मंदिर और चामुंडा माता मंदिर में चोरी की वारदात हुई थी। इसके अलावा पानेर के थोब स्थित एक किराना दुकान को भी निशाना बनाया गया था। इन घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश था और इसी के चलते गांव में रात्रि गश्त शुरू की गई थी।
बैंक परिसर से सामने आई यह तस्वीरें दिव्यांगों के लिए बनाई गई व्यवस्थाओं की वास्तविकता को उजागर करती हैं। आरोप है कि उदयपुर के हिरण मगरी सेक्टर-4 स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा के मुख्य द्वार पर बना रैंप अत्यधिक ढाल वाला और मानकों के अनुरूप नहीं है। ऐसे में व्हीलचेयर और बैसाखी के सहारे चलने वाले लोगों के लिए बैंक तक पहुंचना बेहद कठिन हो गया है। बताया गया कि हाल ही में एक दिव्यांग महिला अपने जरूरी बैंकिंग कार्य के लिए शाखा पहुंची। रैंप की तीखी ढाल देखकर वह उस पर चढ़ने में असमर्थ रही। मजबूरी में महिला ने अपनी बैसाखियां हाथ में लीं और रेलिंग का सहारा लेते हुए घुटनों और हाथों के बल रेंगकर बैंक के भीतर प्रवेश किया। काम पूरा होने के बाद बाहर निकलते समय भी उसे इसी पीड़ादायक स्थिति का सामना करना पड़ा। घटना का एक और गंभीर पहलू यह भी बताया गया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान मुख्य द्वार पर मौजूद सुरक्षाकर्मी महिला की परेशानी देखता रहा, लेकिन उसकी सहायता के लिए आगे नहीं आया। इस घटना को लेकर दिव्यांग अधिकार संघर्ष मंच के सदस्य दिनेश जाटव ने विशेष योग्यजन आयुक्त, जयपुर को तस्वीरों के साथ शिकायत भेजी है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक बैंक की लापरवाही नहीं बल्कि दिव्यांगजनों के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। दिनेश जाटव ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का हवाला देते हुए मांग की है कि बैंक प्रबंधन के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए, दिव्यांग समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए और शाखा में बने रैंप को तत्काल सुगम, सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाया जाए।
उदयपुर जिले के खेरवाड़ा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब लेखा शाखा के कमरे की जर्जर छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। घटना के समय कार्यालय में कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन संयोगवश लेखा शाखा में कार्यरत कर्मचारी हादसे से कुछ ही सेकंड पहले किसी काम से दूसरे कमरे में चले गए थे। इसी कारण एक बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्लास्टर गिरते ही तेज आवाज हुई, जिससे अस्पताल परिसर में मौजूद कर्मचारी और मरीज घबरा गए। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और कुछ देर के लिए अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हादसे में कमरे में लगा सीलिंग फैन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि कुर्सियां और अन्य सामान भी टूट गए। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन यदि कर्मचारी अपनी सीट पर मौजूद होते तो बडा हादसा हो सकता था। घटना के बाद अस्पताल भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल भवन के जर्जर हिस्सों की समय रहते मरम्मत कराई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है और अस्पताल भवन की स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
लंबे समय से अपनी मांगों के समाधान का इंतजार कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और ग्राम साथिनों ने अब आंदोलन का रुख अपना लिया है। उदयपुर में अखिल राजस्थान महिला और बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सरकार से लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की। संघ की जिलाध्यक्ष लक्ष्मी डेगावत ने कहा कि विभाग ने पहले 10 से 15 दिन में समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि, ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य नीतिगत मांगों पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लगाकर कार्य बहिष्कार किया जाएगा। ज्ञापन में कुम्हेर परियोजना में ठेका प्रथा समाप्त करने, पिछले कार्यकाल का ऑडिट कराने और नौ महीने से बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान करने की मांग की गई। साथ ही कोटा चेचट परियोजना सहित अन्य स्थानों पर लंबित भुगतान जारी करने की भी मांग उठाई गई। संगठन ने बीएलओ, चुनाव, जनगणना और अन्य गैर-आईसीडीएस कार्यों से आंगनबाड़ी कर्मियों को मुक्त करने, सेवा मुक्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी देने, न्यूनतम 20 से 25 हजार रुपये मानदेय, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये, पेंशन, मध्य प्रदेश की तर्ज पर मानदेय वृद्धि, भवन किराए का भुगतान और महिला पर्यवेक्षकों के रिक्त पदों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पदोन्नति देने की मांग भी रखी। संगठन का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो पूरे प्रदेश में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब फतेहपुरा के रहने वाले 65 वर्षीय पीड़ित रुपलाल पालीवाल ने अम्बामाता पुलिस थाने में आपबीती सुनाई। पीड़ित की शिकायत के अनुसार, अभियुक्तों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत उनके बेटे के साथ शादी का नाटक रचाया था। विवाह होने के कुछ समय बाद ही आरोपी दुल्हन और उसके साथी पीड़ित के घर से नकदी और कीमती जेवरात लेकर मौके से फरार हो गए। इस धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम देने में कई लोग शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मामले में कुल आठ अभियुक्तों को नामजद किया गया है, जिनमें पुरुषोत्तम आचार्य, नीरज जैन, शीतल देवी, किरण देवी, रानी देवी, विक्की सिंह, नीरज सिंह और राघव शामिल हैं। इन सभी आरोपियों ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए अम्बामाता थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले की जांच एएसआई किशन सिंह को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारी अब इस गिरोह के नेटवर्क को खंगालने और लुटेरी दुल्हन सहित सभी फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश करने में जुट गए हैं।
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