आवाज़ हम सबकी
उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में हुए प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने केंद्र सरकार की नई अधिसूचना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस से जुड़े राजेश सिंघवी ने कहा कि मनरेगा को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सरकार भले ही सवा सौ दिन रोजगार की बात कर रही हो, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पहले मनरेगा योजना में 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार वहन करती थी, जबकि नई व्यवस्था में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है और केंद्र का हिस्सा 60 प्रतिशत रह जाएगा। उनका आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों के लिए यह व्यवस्था लागू करना मुश्किल होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर और कम हो जाएंगे। मजदूर नेताओं ने योजना में तकनीकी निर्भरता और अनिवार्य केवाईसी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बारापाल क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि इंटरनेट सुविधा नहीं होने के कारण कई महिलाओं की उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी और उन्हें बिना काम किए वापस लौटना पड़ा। उनका कहना है कि नई व्यवस्था में जिन मजदूरों की केवाईसी पूरी नहीं होगी, उन्हें भी काम मिलने में परेशानी आ सकती है। प्रदर्शन के बाद मजदूरों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि मनरेगा जैसी ग्रामीण रोजगार योजना को कमजोर नहीं किया जाए। साथ ही हर परिवार को साल में 200 दिन का गारंटीड रोजगार और महंगाई को देखते हुए 600 रुपए प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। संगठन ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उदयपुर के चर्चित हिम्मत सिंह हत्याकांड की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी कडी में सुखेर थाना पुलिस ने आठ और आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी कार्रवाई की। बुधवार को सभी आरोपियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायालय में पेश किया गया। इस दौरान आरोपी पुलिस जाप्ते के साथ कोर्ट परिसर में लंगड़ाते हुए पहुंचे। सुनवाई के बाद न्यायालय ने सभी आठ आरोपियों को चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। अब पुलिस रिमांड के दौरान हत्या की साजिश, वारदात में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और घटना में इस्तेमाल किए गए हथियारों सहित कई सवालों पर पूछताछ करेगी। पुलिस के मुताबिक 26 जून को मावली निवासी 45 वर्षीय हिम्मत सिंह सोलंकी सुखेर थाना क्षेत्र के कैलाशपुरी में अपनी महिला मित्र का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान बिना नंबर की सफेद पिकअप वहां पहुंची और उनकी कार को टक्कर मार दी। आरोप है कि पिकअप से उतरे सात से आठ लोगों ने पहले लाठियों और पत्थरों से कार के शीशे तोड़े, फिर हिम्मत सिंह के साथ बेरहमी से मारपीट कर उनका अपहरण कर लिया। इसके बाद उन्हें करीब दस किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में ले जाकर धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। हिम्मत सिंह के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने सुखेर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस के सर्च अभियान के दौरान 27 जून को पेसिफिक अस्पताल के पीछे पहाड़ी पर उनका शव बरामद हुआ। घटना के विरोध में राजपूत करणी सेना और समाज के लोगों ने एमबी अस्पताल में प्रदर्शन भी किया था। बाद में जिला प्रशासन के साथ हुई वार्ता में मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने का निर्णय लिया गया। सुखेर थानाधिकारी भरत योगी ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच जारी है। पहले से गिरफ्तार आरोपियों के साथ एक महिला को भी आरोपी बनाया गया है और पूछताछ के आधार पर आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खेरवाड़ा कस्बे के निचला खेरवाड़ा स्थित जयप्रकाश कॉलोनी में मंगलवार रात अज्ञात चोरों ने सुनियोजित तरीके से बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया। आबादी के बीच स्थित दो सगे भाइयों के मकानों को निशाना बनाते हुए बदमाश लाखों रुपए के सोने-चांदी के जेवर और करीब दो लाख रुपए की नकदी चोरी कर फरार हो गए। जानकारी के मुताबिक हीरालाल पटेल के घर में घटना के समय उनकी पत्नी और एक बेटा मौजूद थे। बदमाश रसोईघर की खिड़की तोड़कर मकान में दाखिल हुए और अलमारी में रखे सोने-चांदी के जेवरात समेट ले गए। इसके बाद चोरों ने पास में रहने वाले उनके छोटे भाई के मकान को भी निशाना बनाया, जहां अलमारी और पलंग पेटी तोड़कर लाखों रुपए के जेवर चोरी कर लिए। वारदात को अंजाम देने से पहले बदमाशों ने आसपास के कई घरों की कुंडी बाहर से बंद कर दी, ताकि कोई बाहर निकलकर उन्हें देख न सके। घटना स्थल पर लकड़ी के लठ भी मिले हैं, जिन्हें देखकर आशंका जताई जा रही है कि यदि परिवार का कोई सदस्य जाग जाता तो बदमाश हमला करने की तैयारी में थे। घटना का खुलासा सुबह उस समय हुआ जब पीड़ित परिवार के बड़े भाई मॉर्निंग वॉक पर जाने के लिए उठे और घर का दरवाजा बाहर से बंद मिला। उन्होंने सामने रहने वाले अपने बेटे को फोन कर बुलाया, जिसके बाद दोनों मकानों में चोरी की जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि हीरालाल पटेल दस दिन पहले ही विदेश रोजगार के लिए गए थे और परिवार ने बेटियों की शादी के लिए वर्षों से जेवर और नकदी जमा कर रखी थी। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलने पर खेरवाड़ा पुलिस मौके पर पहुंची, घटनास्थल का मुआयना किया और पीड़ित परिवार की रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
भीलवाडा के भीमगंज थाना क्षेत्र में दर्ज 13 लाख रुपए की चोरी की वारदात की जांच जब आगे बढ़ी तो पुलिस को हर कदम पर कई सवालों के जवाब तलाशने पड़े। प्रॉपर्टी डीलर संदीप कुमार ने 23 जून को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 22 जून की रात वह अपनी पत्नी क्षिप्रा जैन के साथ बाजार से लौटे तो घर का मुख्य दरवाजा खुला मिला, सामान बिखरा पड़ा था और अलमारी में रखे बैग से 13 लाख रुपए गायब थे। यह रकम एक प्लॉट की बिक्री के बाद किसी अन्य व्यक्ति को भुगतान के लिए रखी गई थी। खुद पत्नी ने ही एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी थी। भीमगंज थाना प्रभारी सुनील चौधरी के नेतृत्व में पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में सामने आया कि घटना के दौरान न कोई संदिग्ध व्यक्ति घर में दाखिल हुआ और न ही बाहर निकला। वहीं संदीप की मां भी करीब एक घंटे तक घर के बाहर मौजूद थीं। इससे पुलिस का शक घर के किसी सदस्य पर गहरा गया। परिजनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने क्षिप्रा जैन से सख्ती से पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि एमबीए पास क्षिप्रा शादी से पहले से ही ऑनलाइन गेमिंग की आदी थी। जनवरी 2026 में वह ड्रैगन गेम में साढ़े चार लाख रुपए जीत चुकी थी। इसके बाद अधिक रकम जीतने के लालच में लगातार पैसे लगाती रही और अपनी जीती हुई रकम के साथ निजी बचत भी हार गई। इसके बाद उसने पति के घर में रखे 13 लाख रुपए धीरे-धीरे निकालकर गेमिंग में लगा दिए। पूरी रकम हारने के बाद शक से बचने के लिए चोरी की झूठी कहानी रच दी। पुलिस ने सोमवार को क्षिप्रा जैन को गिरफ्तार कर मंगलवार को अदालत में पेश किया, जहां से उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया। थाना प्रभारी सुनील चौधरी ने बताया कि पुलिस बैंक खातों, लेनदेन और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि रकम किस माध्यम से गेमिंग में लगाई गई और शेष राशि की बरामदगी की जा सके।
उदयपुर के अर्थ डायग्नोस्टिक सेंटर के सीईओ और दिव्यांग अधिकारों के लिए सक्रिय डॉ. अरविंदर सिंह द्वारा दायर परिवाद पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक, मंडल रेल प्रबंधक अजमेर और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सभी पक्षों को 27 अगस्त को स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होकर जवाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं होने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई भी की जा सकती है। शिकायत के अनुसार, 14 मार्च को 50 प्रतिशत पोलियोग्रस्त दिव्यांग डॉ. अरविंदर सिंह को कैलिपर की मरम्मत के लिए तत्काल जयपुर जाना था। उनका आरोप है कि उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित पार्किंग, अलग टिकट काउंटर, व्हीलचेयर सहायता, प्लेटफॉर्म तक सुगम पहुंच और ट्रेन में सुरक्षित चढ़ने की व्यवस्था प्रभावी रूप से उपलब्ध नहीं थी। पूछताछ काउंटर बंद होने और लंबी कतारों के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने 412 रुपये का टिकट ऑनलाइन बुक किया, लेकिन पर्याप्त सहायता नहीं मिलने से ट्रेन में सुरक्षित रूप से सवार नहीं हो सके।परिवाद में कहा गया है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत असुविधा का नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के संवैधानिक अधिकारों और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा है। याचिका में त्ंरपअम त्ंजनतप, श्रममरं ळीवेी और टपांेी ज्ञनउंत से जुड़े सर्वाेच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें सार्वजनिक सेवाओं में सुगमता और गरिमापूर्ण व्यवहार को अनिवार्य बताया गया है। डॉ. अरविंदर सिंह ने मानसिक पीड़ा, आर्थिक नुकसान, मुकदमे के खर्च और टिकट राशि सहित कुल 6 लाख 20 हजार 412 रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की है। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल व्यक्तिगत मुआवजे की नहीं, बल्कि सभी दिव्यांग यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों पर वास्तविक और सम्मानजनक सुविधाएं सुनिश्चित कराने की पहल है।
उदयपुर शहर में आयोजित होने वाली इस भव्य रथयात्रा के लिए रथ निर्माण का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। रथ समिति के कार्यकर्ता कमल चौहान ने बताया कि रथ को बेहद कलात्मक और भव्य रूप दिया जा रहा है। इस विशेष रथ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लगभग 90 से 95 किलो चांदी का उपयोग किया गया है। यह पूरी चांदी भगवान के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्तों द्वारा भेंट स्वरूप दी गई है। रथ के निर्माण और मरम्मत का कार्य कुशल कारीगरों द्वारा किया जा रहा है, ताकि व्यवस्था में किसी भी तरह की कोई कमी न रहे। चांदी से सुसज्जित इस भव्य रथ में कई अनूठी कलाकृतियों को शामिल किया गया है। रथ को मजबूती और सुंदरता देने के लिए चार विशेष पिलर और आठ मेहराब बनाए गए हैं। इसके साथ ही रथ के आगे दो चांदी के घोड़े और एक सारथी की प्रतिमा भी लगाई गई है, जो रथ को खींचने की मुद्रा में नजर आएंगे। रथ के साइड कवर्स को भी चांदी की नक्काशी से खूबसूरती से ढका गया है। इस रथयात्रा का एक और मुख्य आकर्षण भगवान की रेवाड़ी होगी, जिसमें गणेश का स्वरूप विराजमान रहेगा। यह रेवाड़ी मुख्य रथ के आगे-आगे चलेगी, जिससे रथयात्रा की शुरुआत पारंपरिक और मंगलकारी तरीके से हो सके। रथ का मुख्य ढांचा तैयार होने के बाद अब घोड़ों और अन्य हिस्सों पर पेंटिंग और फिनिशिंग का कार्य शुरू किया जा रहा है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए यह उपलब्धि तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। उदयपुर के डबोक स्थित महाराणा प्रताप एयरपोर्ट पर पहली बार इंडिगो के एयरबस ए-320 जेट विमान की सफल लैंडिंग स्वदेशी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली ‘गगन’ की सहायता से कराई गई। यह पहला अवसर है जब किसी बड़े यात्री जेट विमान ने इस स्वदेशी तकनीक के जरिए सुरक्षित लैंडिंग की है। जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन प्रणाली का विकास इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से किया है। यह प्रणाली सैटेलाइट आधारित नेविगेशन के माध्यम से विमान की सटीक स्थिति का आकलन करती है और रनवे तक पहुंचने के लिए पायलट को अत्यंत सटीक मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है। विशेषज्ञों के अनुसार विमान की सुरक्षित लैंडिंग के लिए सेंटीमीटर स्तर की सटीकता आवश्यक होती है। सामान्य जीपीएस सिग्नल वायुमंडल की चार्ज्ड परत से प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन गगन प्रणाली पूरे देश में स्थापित 15 ग्राउंड रेफरेंस स्टेशनों की मदद से इन त्रुटियों की पहचान कर उन्हें सुधारती है। संशोधित जानकारी जीसैट-8 और जीसैट-10 सैटेलाइट के माध्यम से पायलट तक पहुंचाई जाती है, जिससे लैंडिंग अधिक सुरक्षित और सटीक हो जाती है। अब तक बड़े एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम यानी आईएलएस जैसे महंगे ग्राउंड उपकरणों पर निर्भरता अधिक थी। गगन तकनीक के सफल उपयोग से ऐसे एयरपोर्ट, जहां आईएलएस उपलब्ध नहीं है या सीमित है, वहां भी बड़े विमानों की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सकेगी। इससे एयरपोर्ट संचालन अधिक आधुनिक और किफायती बनने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि धुंध, बारिश, कम दृश्यता और खराब मौसम जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी गगन प्रणाली पायलट को रनवे की सटीक दिशा और विमान की वास्तविक स्थिति की जानकारी देती रहेगी। इससे उड़ानों की सुरक्षा बढ़ेगी, डायवर्जन की संभावना कम होगी और यात्रियों को अधिक भरोसेमंद एवं सुरक्षित हवाई सेवा का लाभ मिलेगा।
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