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अजमेर जिले के गोविंदगढ़ में टेलरिंग का काम करने वाले बुजुर्ग को आयकर विभाग से 975 करोड़ का नोटिस मिला है। गोविंदगढ़ निवासी रेखराज ठाड़ा (62) महीने के 15 हजार रुपए कमाते हैं। ऐसे में 13 अगस्त 2026 को सूरत (गुजरात) से आया आयकर विभाग का नोटिस उनके लिए चौंकाने वाला था। नोटिस के मुताबिक, रेखराज सूरत की रूप रजत डायमंड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर हैं। उन पर 974 करोड़ 97 लाख 25 हजार 457 रुपए की टैक्स रिकवरी निकाली गई है। रेखराज का कहना है कि उन्होंने न कोई कंपनी चलाई और न ही कभी गुजरात गए। मामले की जानकारी मिलने पर परिजन ने एक परिचित सीए की मदद से रिकॉर्ड की पड़ताल कराई। रेखराज के अनुसार, इसमें सूरत की एक दूसरी कंपनी जय बाबेरी डायम प्राइवेट लिमिटेड में भी उनका नाम डायरेक्टर के तौर पर सामने आया। रेखराज ने पीसांगन थाने में शिकायत दी है। पुलिस ने FIR दर्ज करने के बजाय परिवाद लिया। इसके बाद वह अजमेर एसपी कार्यालय पहुंचे। एडिशनल एसपी ग्रामीण लालचंद कायल को मामले की जानकारी दी। उन्होंने जांच का आश्वासन देते हुए परिवाद दर्ज कराया। रेखराज ने बताया कि 13 अगस्त को मिले आयकर विभाग के नोटिस में उन्हें 20 अगस्त तक सूरत पहुंचकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया था। उन्होंने नोटिस का जवाब ईमेल के जरिए भेज दिया है। रेखराज का दावा है कि उनके पैन कार्ड का किसी ने दुरुपयोग कर रूप रजत डायमंड प्राइवेट लिमिटेड का डायरेक्टर बना दिया। उनके अनुसार, यह कंपनी 2011 से संचालित बताई गई है, लेकिन उन्हें इसकी बिल्कुल जानकारी नहीं है। उन्हें इसकी जानकारी आयकर विभाग के नोटिस से ही हुई। रेखराज ने बताया कि वह टेलर हैं और कभी गुजरात नहीं गए। नोटिस मिलने के बाद परिवार तनाव में है। रेखराज, उनके दो बेटे और एक भाई मामले की जांच के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
मामला हाथीपोल थाना क्षेत्र का है, जहां चेतक सर्कल स्थित राजस्थान महिला परिषद स्कूल हॉस्टल में रह रही बच्ची मंगलवार शाम अचानक लापता हो गई। जानकारी के मुताबिक घटना शाम करीब साढ़े पांच बजे की है। बच्ची के बिना बताए कहीं चले जाने के बाद हॉस्टल स्तर पर उसकी तलाश की गई, लेकिन जानकारी नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई।इसके बाद प्रार्थीया की ओर से हाथीपोल थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अब बच्ची के लापता होने की परिस्थितियों की जांच कर रही है। मामले की जांच हाथीपोल थाने के एएसआई जगदीश कुमार को सौंपी गई है। पुलिस हॉस्टल से बच्ची के निकलने के घटनाक्रम सहित आसपास के क्षेत्र में उसकी संभावित गतिविधियों की जानकारी जुटाने में लगी है। साथ ही बच्ची के बारे में संबंधित लोगों से पूछताछ कर सुराग तलाशे जा रहे हैं। फिलहाल बच्ची के लापता होने के कारणों और उसके साथ क्या हुआ, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
बुधवार शाम करीब 4 बजकर 30 मिनट पर कंट्रोल रूम को अर्बन स्क्वायर मॉल में आग लगने की सूचना मिली। सूचना में बताया गया कि मॉल की दूसरी मंजिल पर करीब 80 से 100 लोग फंसे हुए हैं। सूचना मिलते ही अतिरिक्त जिला कलेक्टर दीपेंद्र सिंह राठौर के आदेश और नागरिक सुरक्षा विभाग के सहायक प्रशासनिक अधिकारी धनेंद्र कश्यप के दिशा-निर्देशन में टीम को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम जब अर्बन स्क्वायर मॉल पहुंची तो सामने आया कि आग लगने की सूचना एक मॉक ड्रिल का हिस्सा थी। इसके बाद मौके पर मौजूद विभिन्न एजेंसियों ने आपात स्थिति से निपटने की अपनी तैयारियों का अभ्यास किया। इस मॉक अभ्यास में नगर निगम, पुलिस, सिविल डिफेंस, एसडीआरएफ और चिकित्सा विभाग सहित कई एजेंसियां शामिल रहीं। अभ्यास के दौरान आग जैसी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य को किस तरह अंजाम दिया जाए, इसे लेकर तैयारियों को परखा गया। मॉक ड्रिल में वाहन चालक प्रकाश राठौड़, फायरमैन हीरालाल प्रजापत और सचिन कंडारा के साथ रेस्क्यूअर भवानी शंकर वाल्मीकि, विष्णु राठौर, नरेश चौधरी और कैलाश गमेती सहित अन्य कार्मिक मौजूद रहे। मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता को परखना रहा। ऐसे अभ्यास से वास्तविक आपदा के समय राहत और बचाव कार्य को अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करने में मदद मिलती है।
मामला पानरवा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, पीड़िता की शिकायत के मुताबिक घटना 20 अप्रैल की बताई गई है। पीड़िता ने घटना को लेकर पुलिस को डाक के जरिए लिखित रिपोर्ट भेजी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर 18 अगस्त को मामला दर्ज कर जांच शुरू की। रिपोर्ट में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि रमेश उसे जबरन अपने घर ले गया। वहां उसके साथ डस्की किया गया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि घटना के संबंध में वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई। यह धमकी आरोपी के जीजा की ओर से दिए जाने की बात शिकायत में कही गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पानरवा थाना पुलिस ने पीड़िता की रिपोर्ट के आधार पर रमेश के अलावा छह अन्य लोगों को भी मामले में अभियुक्त बनाया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।मामले की जांच पानरवा थाना अधिकारी सबीर खान कर रहे हैं। पुलिस की ओर से प्रकरण से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और नामजद लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। शिकायत में बताए गए घटनाक्रम के आधार पर पुलिस सभी पहलुओं को खंगाल रही है।
उदयपुर के हिरण मगरी थाना क्षेत्र में बुधवार को शिव मंदिर में माताजी की मूर्ति में तोड़फोड़ का मामला सामने आया है। सुबह जब कुछ लोग मंदिर में पूजा करने पहुंचे तो उन्हें पार्वती माता मूर्ति के दोनों हाथ टूटे मिले। मामले की आसपास के ग्रामीणों को चला तो वे मंदिर पहुंच गए। घटना मनवाखेड़ा गांव स्थित शिव मंदिर में बीती रात की बताई जा रही है। ग्रामीणों ने इसे असामाजिक तत्वों की करतूत बताते हुए घटना के खिलाफ विरोध जताया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटना स्थल का जायजा लिया। जानकारी अनुसार मंदिर आबादी क्षेत्र से दूर है और वहां सीसीटीवी नहीं लगे हैं। ग्रामीणों ने पुलिस से मामले की जांच कर घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले ग्रामीणों का कहना था कि मूर्ति को क्यों और किस कारण से तोड़ा गया। पुलिस जल्द इसका पता लगाए। इधर, फिलहाल पुलिस को कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस की टीम आसपास सीसीटीवी खंगालते हुए आरोपियों का पता लगाने में जुट गई है।
उदयपुर के बालिका गृह में शेल्टर ली हुई मासूम बच्ची ने काउंसलिंग के दौरान बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष यशोदा पनिया के सामने अपनी दर्दभरी दास्तान बयां की। इस काउंसलिंग में खुलासा हुआ कि दस साल की इस बच्ची के साथ एक नहीं बल्कि दो बदमाशों ने घिनौनी करतूत की थी। कुछ साल पहले मां का साया सिर से उठने के बाद बच्ची का पिता, जो मजदूरी करता है और शराब का आदी है, अपनी इकलौती संतान को काम पर जाते समय पास के ही एक दुकानदार के भरोसे छोड़ देता था। वही दुकानदार बच्ची के साथ लगातार छेड़छाड़ और गलत हरकतें करता रहा, हालांकि पुलिस ने उस आरोपी दुकानदार को अब तक गिरफ्तार नहीं किया है। इसके बाद पिता छह महीने पहले बच्ची को एक स्थानीय आश्रम के सुपुर्द करके चला गया और फिर कभी दोबारा उसकी सुध लेने नहीं आया। लेकिन आश्रम में भी बच्ची सुरक्षित नहीं रह सकी। आश्रम संचालिका का पचास साल का भाई अकेली बच्ची को देखकर उसके साथ गंदी हरकतें और रेप करने लगा। बच्ची ने कई बार उसका विरोध किया और इस पूरी दरिंदगी की जानकारी आश्रम संचालिका को भी दी। लेकिन संचालिका ने अपने भाई पर एक्शन लेने के बजाय मासूम बच्ची को डरा-धमकाकर पूरी तरह चुप करा दिया। इस खौफनाक मामले का खुलासा तब हुआ जब पांच अगस्त को बच्ची को पढ़ाने वाले एक स्कूल टीचर उससे मिलने आश्रम पहुंचे। बच्ची ने हिम्मत जुटाकर टीचर को अपने साथ हुई पूरी आपबीती सुनाई, जिसके बाद टीचर ने बिना देरी किए चाइल्ड हेल्पलाइन को शिकायत दर्ज कराई। चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए छह अगस्त को बच्ची को आश्रम से रेस्क्यू किया और बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। समिति ने बच्ची को सुरक्षित बालिका गृह में भिजवाया और १३ अगस्त को स्थानीय थाने में मामला दर्ज कराया, जिसके बाद आश्रम के आरोपी भाई को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मामला उजागर होने के बाद आश्रम में अन्य बच्चियों के होने की संभावना को देखते हुए मंगलवार को बाल अधिकारिता विभाग के अधिकारी गौरव सारस्वत अपनी टीम के साथ जांच करने पहुंचे। लेकिन वहां आश्रम पर ताला लटका मिला और करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बावजूद संचालिका सामने नहीं आई। पड़ताल में पता चला कि घटना से पहले यहां एक बच्ची अपने दादा के साथ रह रही थी, जो मामला सामने आते ही वहां से चले गए। इस पूरी घटना के बाद अब आक्रोशित स्थानीय लोगों ने इस विवादित आश्रम को हमेशा के लिए बंद करने की पुरजोर मांग उठाई है।
यह शिकायत केसरपुरा निवासी भुरकी देवी ने की है। शिकायत के मुताबिक उनके पति स्वर्गीय खातरा पिता वक्ता के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था। योजना में लाभार्थी का Beneficiary Name RJ12047950 दर्ज है। आरोप है कि आवास स्वीकृत होने के बाद जियो-टैगिंग की प्रक्रिया भी कराई गई, लेकिन लाभार्थी के मकान के बजाय अमृत पिता सुरमाल के मकान की जियो-टैगिंग कर दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद पूरे मामले में खेल किया गया। लाभार्थी के नाम स्वीकृत आवास को पूर्ण बताते हुए ग्राम पंचायत स्तर पर कंप्लीशन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और इसी आधार पर 1 लाख 20 हजार रुपए की राशि उठा ली गई। शिकायत में ग्राम पंचायत गरनाला कोटडा के सरपंच धर्मेन्द्र और अमृत पिता सुरमाल पर मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायत सही है तो जिस व्यक्ति के नाम आवास स्वीकृत हुआ, उसके मकान की जगह दूसरे व्यक्ति के मकान की जियो-टैगिंग आखिर कैसे हो गई? आवास पूर्ण होने की रिपोर्ट किस आधार पर तैयार हुई? और लाभार्थी के नाम स्वीकृत राशि किस प्रक्रिया से जारी हुई? इन सवालों का जवाब संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आएगा। शिकायतकर्ता ने संभागीय आयुक्त से मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। जियो-टैगिंग रिकॉर्ड, आवास स्वीकृति, निर्माण की फोटो, कंप्लीशन रिपोर्ट, भुगतान आदेश और राशि किस खाते में गई—इन सभी बिंदुओं की जांच की मांग की गई है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा लाभार्थी को उसकी स्वीकृत राशि दिलाने की मांग की गई है।
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