आवाज़ हम सबकी
कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोगों की नजर उस वक्त एक महिला पर टिक गई, जब वह हाथ जोड़कर अपने बच्चे को वापस दिलाने की गुहार लगाते हुए रोने लगी। सलूंबर जिले के मउड़ी निवासी लीला पटेल अपने नाबालिग बच्चे की कस्टडी को लेकर अधिकारियों के पास फरियाद लेकर पहुंची थीं। लीला पटेल के मुताबिक उसका पति से तलाक हो चुका है। महिला का कहना है कि अदालत ने नाबालिग बच्चे की कस्टडी उसके पक्ष में दी थी। इसके बावजूद उसका पति बच्चे को जबरन अपने साथ लेकर चला गया। बच्चे के दूर चले जाने के बाद से महिला लगातार उसे वापस पाने के लिए परेशान है। महिला ने आरोप लगाया कि जिस दौरान उसके बच्चे को उससे अलग किया गया, उस समय उसके पति के साथ कुछ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। लीला पटेल का आरोप है कि इस दौरान उसके साथ बदसलूकी भी की गई। अपनी इसी पीड़ा को लेकर वह सोमवार को उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट पहुंची और अधिकारियों के सामने न्याय की गुहार लगाई। कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी बात बताते-बताते महिला भावुक हो गई और फूट-फूटकर रोने लगी। महिला को इस हालत में देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक नजर आए। लोगों ने उसे संभालकर शांत कराया और पूरे मामले की शिकायत सलूंबर जिला पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखने की सलाह दी। अब महिला की मांग है कि उसे उसका बच्चा वापस दिलाया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उसे न्याय दिलाया जाए।
झाड़ोल थाना क्षेत्र में हुए इस हादसे के बाद सड़क पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि ढिमड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने दो बाइक आमने-सामने आ गईं और दोनों की जोरदार टक्कर हो गई। दुर्घटना में बाइक पर सवार एक बच्चे को गंभीर चोटें आईं। हादसा इतना भीषण था कि बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दुर्घटना में तीन अन्य लोग घायल हुए हैं। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों की मदद में जुट गए। स्थानीय लोगों ने घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। यहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया और उनकी स्थिति को देखते हुए तीनों घायलों को आगे के इलाज के लिए उदयपुर रेफर कर दिया। इधर, हादसे के बाद एक बाइक सवार मौके से अपनी बाइक छोड़कर फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही झाड़ोल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल बाइक को जब्त कर लिया है। पुलिस अब हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है। फरार बाइक सवार की पहचान और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए भी जानकारी जुटाई जा रही है। हादसे में बच्चे की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है, वहीं घायलों का उदयपुर में उपचार जारी है।
उदयपुर में बलिचा के अटल एंकलेव में श्वानों की सुरक्षा को लेकर सामने आई शिकायत ने स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय निवासी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में सड़क पर रहने वाले श्वानों को नुकसान पहुंचाने और मारने की धमकियां दी जा रही हैं। इन धमकियों का विरोध करने वाले स्थानीय निवासियों के साथ विवाद और अभद्रता की स्थिति बनने का भी आरोप है। मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब पास की एक इमारत में दो पिल्ले मृत अवस्था में मिले। शिकायत के मुताबिक दोनों पिल्लों के शव सड़ने की स्थिति में थे। घटना की परिस्थितियां संदिग्ध होने के कारण पिल्लों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका जताई गई है। घटना से संबंधित वीडियो भी एनिमल प्रोटेक्शन सोसायटी को उपलब्ध कराए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्था ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संस्था ने पुलिस, नगर निगम और संबंधित पशु कल्याण अधिकारियों से मौके का निरीक्षण करने और क्षेत्र में मौजूद अन्य श्वानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। साथ ही संस्था ने मांग की है कि यदि पशु क्रूरता या श्वानों को नुकसान पहुंचाने की धमकियों की पुष्टि होती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। इस मामले में संस्था की ओर से पशु प्रेमी मेनका गांधी से भी तत्काल हस्तक्षेप की अपील की गई है, ताकि संबंधित अधिकारियों तक मामला पहुंचाया जा सके और क्षेत्र में श्वानों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। संस्था का कहना है कि बेजुबान श्वानों के साथ किसी भी तरह की क्रूरता स्वीकार्य नहीं है। दो पिल्लों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए मामले की निष्पक्ष और तत्काल जांच जरूरी है।
उदयपुर में टाउन हॉल से शुरू हुई रैली जिला कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां किसान, मजदूर और वामदलों से जुड़े विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। भारत छोड़ो आंदोलन दिवस पर देशव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत हुए इस प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में लाल झंडे, तिरंगे, बैनर और जेल भरो आंदोलन के पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी देने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेना शुरू किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। सड़क पर बैठकर नारेबाजी कर रही महिलाओं और बुजुर्ग कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस वाहनों में बैठने के बाद भी कार्यकर्ताओं ने लाल झंडे और तिरंगे लहराते हुए नारेबाजी जारी रखी। प्रदर्शन में इंटक, सीटू, अखिल भारतीय किसान सभा और संयुक्त किसान मोर्चा सहित कई संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चार श्रम संहिताओं को रद्द कर श्रम कानून लागू करने, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने और किसानों से जुड़े समझौतों को रद्द करने की मांग उठाई। वामदल से जुड़े राजेश सिंघवी ने कहा कि यह आंदोलन लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर मजदूरों और किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। साथ ही पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से वाहनों को नुकसान होने का दावा करते हुए इस नीति पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने उदयपुर की कच्ची बस्तियों के लोगों को पट्टे देने, माछला मगरा, देवाली और भीलू राणा बस्ती के निवासियों की समस्या दूर करने, ऑनलाइन चालान की कार्रवाई पर रोक लगाने और ठेला-फुटपाथ व्यवसायियों के रोजगार की सुरक्षा की मांग भी उठाई। राजेश सिंघवी ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों और आम जनता के मुद्दों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।
उदयपुर के सवीना थाना क्षेत्र में पति-पत्नी के आपसी विवाद में बीच-बचाव करना एक मार्बल फिटिंग कारीगर को भारी पड़ गया। विवाद के दौरान धारदार हथियार से किए गए हमले में हेमाराम जाट की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। जानकारी के अनुसार सवीना थाना क्षेत्र में अन्ना सिंह और उसकी पत्नी सुनीता के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो रहा था। इसी दौरान मार्बल फिटिंग का काम करने वाले हेमाराम जाट वहां पहुंचे और पति-पत्नी के झगड़े में बीच-बचाव करने का प्रयास किया। आरोप है कि इसी दौरान अन्ना सिंह ने धारदार हथियार से हेमाराम पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल हेमाराम को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सवीना थानाधिकारी दलबीर सिंह के अनुसार मामले में आरोपी अन्ना सिंह को पुलिस ने डिटेन कर लिया है। बताया जा रहा है कि आरोपी Zepto में डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता है। पुलिस ने मृतक के भाई कालूराम की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस घटना के कारणों और पूरे विवाद की जानकारी जुटा रही है। वहीं, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने घटना पर दुख जताते हुए मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मामला चित्तोडगढ के सोनियाणा रीको औद्योगिक क्षेत्र का है, जहां ट्रांसपोर्ट कंपनी के बल्कर की जीपीएस लोकेशन एक सुनसान जगह पर मिली। कंपनी को बल्कर के वहां खड़े होने पर संदेह हुआ और पुलिस को सूचना दी गई। गंगरार थाना पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां सीमेंट से भरा बल्कर, एक ट्रैक्टर और पांच मोटरसाइकिलें खड़ी मिलीं। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार बल्कर से सीमेंट निकालकर उसे प्लांट में मिलाने की बात सामने आई। इसके बाद नाथूलाल उर्फ लालू जाट निवासी सोनियाणा, शंकरलाल शर्मा निवासी सोनियाणा और नारायणलाल बैरवा निवासी परयुरिया को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र यादव ने बताया कि बल्कर गुजरात से 44.360 मीट्रिक टन सीमेंट लेकर सुजानगढ़ के लिए निकला था। मौके पर ट्रांसपोर्ट कंपनी के प्रतिनिधि को बुलाया गया। जांच के दौरान बल्कर की कंपनी सील टूटी मिली। इसके बाद बल्कर को श्री श्याम धर्मकांटा ले जाकर वजन कराया गया। वजन में बल्कर के अंदर 39.270 मीट्रिक टन सीमेंट मिला। इस तरह लोड किए गए सीमेंट की तुलना में 5.090 मीट्रिक टन सीमेंट कम पाया गया। पुलिस के अनुसार चोरी किया गया सीमेंट करीब 6 टन बताया गया है। ट्रांसपोर्ट कंपनी के प्रतिनिधि की रिपोर्ट पर गंगरार थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि सीमेंट चोरी का काम कब से चल रहा था और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में भी जुटी है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बल्कर, एक ट्रैक्टर और पांच मोटरसाइकिलें जब्त की हैं। कार्रवाई करने वाली टीम में एएसआई शिवलाल, एएसआई देवेंद्र सिंह, कांस्टेबल श्योपत्त मंडा, श्योजीराम और मनोज कुमार शामिल रहे।
मामला डूंगरपुर के विकासनगर पटवार हल्का और पंचायत समिति झांतरी के मोजा डूंगरपुर स्थित खसरा नंबर 962 से जुड़ा है। इस भूमि में परिवादी की भी हिस्सेदारी दर्ज है। भूमि के शुद्धिकरण के लिए परिवादी ने करीब एक साल पहले संबंधित पत्रावली तत्कालीन पटवारी शीतल भट्ट को सौंपी थी। आरोप है कि पत्रावली लंबित रहने के दौरान परिवादी ने अलग-अलग समय पर पटवारी को कुल 6 लाख 50 हजार रुपए दिए। इसके बावजूद भूमि शुद्धिकरण का काम आगे नहीं बढ़ा। परेशान होकर परिवादी ने 19 फरवरी को एसीबी चौकी डूंगरपुर में लिखित शिकायत दी। शिकायत के मुताबिक इससे एक दिन पहले 18 फरवरी को परिवादी दोबारा तत्कालीन पटवारी शीतल भट्ट से मिला था। इस दौरान उसे बताया गया कि संबंधित पत्रावली एसडीएम कार्यालय भेज दी गई है और वहां से काम करवाने के लिए डेढ़ लाख रुपए और देने होंगे। शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्राथमिक जांच शुरू की और रिश्वत मांग की पुष्टि के लिए सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत मांगने की पुष्टि हो गई। इसके बाद एसीबी चौकी डूंगरपुर में तत्कालीन पटवारी शीतल भट्ट के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। रिश्वत की रकम लेते हुए कार्रवाई के लिए एसीबी ने ट्रैप की तैयारी भी शुरू कर दी थी, लेकिन इसी दौरान परिवादी के बड़े भाई का निधन हो गया। पारिवारिक परिस्थितियों के चलते परिवादी करीब डेढ़ से दो माह तक व्यस्त रहा। इसी वजह से उस समय रिश्वत की रकम लेते हुए ट्रैप कार्रवाई नहीं हो सकी। अब एसीबी मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। 6 लाख 50 हजार रुपए पहले दिए जाने के आरोप और डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत मांग की पुष्टि के आधार पर प्रकरण में अग्रिम अनुसंधान जारी है।
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