आवाज़ हम सबकी
लंबे समय से अपनी मांगों के समाधान का इंतजार कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और ग्राम साथिनों ने अब आंदोलन का रुख अपना लिया है। उदयपुर में अखिल राजस्थान महिला और बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सरकार से लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की। संघ की जिलाध्यक्ष लक्ष्मी डेगावत ने कहा कि विभाग ने पहले 10 से 15 दिन में समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि, ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य नीतिगत मांगों पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लगाकर कार्य बहिष्कार किया जाएगा। ज्ञापन में कुम्हेर परियोजना में ठेका प्रथा समाप्त करने, पिछले कार्यकाल का ऑडिट कराने और नौ महीने से बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान करने की मांग की गई। साथ ही कोटा चेचट परियोजना सहित अन्य स्थानों पर लंबित भुगतान जारी करने की भी मांग उठाई गई। संगठन ने बीएलओ, चुनाव, जनगणना और अन्य गैर-आईसीडीएस कार्यों से आंगनबाड़ी कर्मियों को मुक्त करने, सेवा मुक्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी देने, न्यूनतम 20 से 25 हजार रुपये मानदेय, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये, पेंशन, मध्य प्रदेश की तर्ज पर मानदेय वृद्धि, भवन किराए का भुगतान और महिला पर्यवेक्षकों के रिक्त पदों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पदोन्नति देने की मांग भी रखी। संगठन का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो पूरे प्रदेश में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब फतेहपुरा के रहने वाले 65 वर्षीय पीड़ित रुपलाल पालीवाल ने अम्बामाता पुलिस थाने में आपबीती सुनाई। पीड़ित की शिकायत के अनुसार, अभियुक्तों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत उनके बेटे के साथ शादी का नाटक रचाया था। विवाह होने के कुछ समय बाद ही आरोपी दुल्हन और उसके साथी पीड़ित के घर से नकदी और कीमती जेवरात लेकर मौके से फरार हो गए। इस धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम देने में कई लोग शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मामले में कुल आठ अभियुक्तों को नामजद किया गया है, जिनमें पुरुषोत्तम आचार्य, नीरज जैन, शीतल देवी, किरण देवी, रानी देवी, विक्की सिंह, नीरज सिंह और राघव शामिल हैं। इन सभी आरोपियों ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए अम्बामाता थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले की जांच एएसआई किशन सिंह को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारी अब इस गिरोह के नेटवर्क को खंगालने और लुटेरी दुल्हन सहित सभी फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश करने में जुट गए हैं।
भारतीय डाक विभाग में फर्जी अंकतालिकाओं के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में हाथीपोल थाना पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की जांच तेज कर दी है। पुलिस के मुताबिक भारतीय डाक विभाग के निरीक्षक ताजसिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उदयपुर मंडल में शाखा डाकपाल के रिक्त पदों पर चयनित अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत अंकतालिकाओं का सत्यापन संबंधित शिक्षा बोर्ड से कराया गया। जांच के दौरान शिक्षा बोर्ड ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत अंकतालिकाएं उनके कार्यालय द्वारा जारी नहीं की गई हैं और पूरी तरह फर्जी हैं। रिपोर्ट के आधार पर हाथीपोल थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। अनुसंधान के दौरान पुलिस ने लालसोट निवासी विजेश कुमार मीणा और करौली निवासी अमरजीत मीणा को गिरफ्तार किया है। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है कि फर्जी अंकतालिकाएं किसके माध्यम से तैयार कराई गईं, सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए यह नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और इसमें अन्य किन लोगों की भूमिका रही। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस तरीके से अन्य सरकारी भर्तियों में भी फर्जी दस्तावेजों का उपयोग तो नहीं किया गया। फिलहाल हाथीपोल थाना पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले में आगे भी गिरफ्तारियां और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एक पुश्तैनी रास्ते को लेकर चल रहा विवाद उस समय गर्मा गया, जब गोगुंदा उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मोडी के वेलावतों की भागल में रहने वाले वृद्ध अंबाव सिंह राजपूत के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा श्मशान घाट तक नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि विवादित मार्ग पर एक पक्ष ने कांटेदार झाड़ियां डालकर रास्ता बंद कर दिया, जिससे शवयात्रा बीच रास्ते में ही रुक गई। इसके विरोध में परिजनों और ग्रामीणों ने मुख्य सड़क पर अर्थी रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया और प्रशासन से तत्काल श्मशान घाट का मार्ग खुलवाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यह वर्षों पुराना पुश्तैनी रास्ता है, जिसका उपयोग अंतिम संस्कार और गांव के नियमित आवागमन के लिए किया जाता रहा है। उनका आरोप है कि करीब दस दिन पहले भी गोगुंदा उपखंड अधिकारी, तहसील प्रशासन और गोगुंदा पुलिस को ज्ञापन देकर रास्ता खुलवाने की मांग की गई थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। सूचना मिलने पर थानाधिकारी श्यामसिंह चारण और तहसीलदार श्री सैनी मौके पर पहुंचे। करीब ढाई घंटे तक दोनों पक्षों से बातचीत की गई। इस दौरान जमीन के मालिक ने अपने स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए। इसके बाद तहसीलदार और थानाधिकारी ने ग्रामीणों और परिजनों को समझाइश देकर वैकल्पिक रास्ते से शवयात्रा निकालने के लिए मनाया किया। प्रशासन की समझाइश के बाद खेतों के रास्ते शव को श्मशान घाट पहुंचाया गया और अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। हालांकि ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक पुश्तैनी रास्ते के विवाद का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक इस तरह की स्थिति दोबारा भी उत्पन्न हो सकती है। अब ग्रामीण प्रशासन से स्थायी रूप से रास्ता खुलवाने की मांग कर रहे हैं।
इस पूरे मामले की शुरुआत प्रतापनगर थाना क्षेत्र के मठ माड़ड़ी इलाके में रहने वाली पीड़िता की शिकायत से हुई। पीड़िता का आरोप है कि 1 मार्च से 25 मार्च के बीच सलोनी कांता, मठ माड़ड़ी क्षेत्र में उसके साथ सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचकर दुष्कर्म किया गया। पीड़िता का कहना है कि यह घटना पूर्व नियोजित साजिश के तहत अंजाम दी गई। मामले में कोर्ट के आदेश के बाद सोमवार को प्रतापनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में मुख्य आरोपी के रूप में राजकुंवर पत्नी गोपाल सिंह को नामजद किया गया है, जो मूल रूप से धरियावद, जिला प्रतापगढ़ की निवासी हैं और वर्तमान में मठ माड़ड़ी क्षेत्र में रह रही हैं। पुलिस के अनुसार इस मामले में उनके अलावा 9 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। सभी आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी प्रतापनगर थाने में पदस्थ महिला उप-निरीक्षक रेणु खोईवाल को सौंपी गई है। पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है और साक्ष्य जुटाने के साथ सभी आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बेहद सूक्ष्म शिल्पकला का अद्भुत नमूना पेश करते हुए डॉ. इकबाल सक्का ने केवल 1×1 सेंटीमीटर आकार का भगवान जगन्नाथ का रथ तैयार किया है। इस रथ में एक सेंटीमीटर का चांदी का मंदिर, एक मिलीमीटर का कलश और केसरी पताका बनाई गई है, जिस पर ॐ अंकित किया गया है। रथ के भीतर मूंग के दाने से भी छोटी चांदी की भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा सिंहासन पर स्थापित की गई है, जिसे केवल लेंस की सहायता से ही देखा जा सकता है। रथ को पूर्ण स्वरूप देने के लिए डॉ. सक्का ने चांदी से एक सेंटीमीटर आकार का घोड़ा भी बनाया है, जिसे भगवान जगन्नाथ के रथ को आगे बढ़ाते हुए दर्शाया गया है। उन्होंने बताया कि इस पूरी कलाकृति को तैयार करने में 7 ग्राम चांदी, 300 मिलीग्राम सोने का उपयोग किया गया और इसे बनाने में करीब 36 घंटे का समय लगा। डॉ. इकबाल सक्का के अनुसार यह रथ केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि कौमी एकता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस विशेष रथ को वे विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर, पुरी, को भेंट करना चाहते हैं और इस संबंध में श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट कमेटी को पत्र भी भेजा गया है। डॉ. सक्का का दावा है कि अब तक इंटरनेशनल बुक में दर्ज सबसे छोटा जगन्नाथ रथ 3×2 सेंटीमीटर का है, जिसे ओडिशा के एक कलाकार ने बनाया था। उनका कहना है कि 1×1 सेंटीमीटर का यह सोने-चांदी का रथ उस रिकॉर्ड से भी छोटा है और यह विश्व का सबसे छोटा सोने-चांदी का जगन्नाथ रथ होने का नया विश्व कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।
उदयपुर जिले के नेशनल हाईवे-58-ई पर झाड़ापीपला के पास रविवार शाम हुए भीषण सड़क हादसे में गुजरात के दो पर्यटक गंभीर हादसे का शिकार हो गए। तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार दोनों युवक वाहन के भीतर ही फंस गए। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर कार का दरवाजा तोड़ा और दोनों युवकों को बाहर निकाला। इसके बाद बिना समय गंवाए दोनों को निजी वाहन से झाड़ोल उपजिला चिकित्सालय पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने एक युवक को मृत घोषित कर दिया, जबकि दूसरे युवक की हालत गंभीर होने पर प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए उदयपुर रेफर कर दिया गया। घायल का उपचार जारी है। वहीं मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए उदयपुर की मोर्चरी में रखवाया गया है। घटना की सूचना मिलते ही फलासिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त वाहन को हटवाकर यातायात सुचारू कराया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए और मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसा कार के अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराने के कारण हुआ। फिलहाल पुलिस दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच कर रही है। वहीं इस दर्दनाक हादसे के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है और सड़क सुरक्षा को लेकर भी एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
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