आवाज़ हम सबकी
हाथों में तख्तियां और नारों की गूंज के साथ उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा के जिला संयोजक निशाकर सिंह डामोर ने नेतृत्व करते हुए सरकार और प्रशासन पर जमकर हमला बोला। डामोर ने बताया कि आज का दिन देशभर के वंचित समाज के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज ही के दिन यूजीसी रेगुलेशन एक्ट को लेकर देशव्यापी मुहिम चलाई जा रही है। छात्रों का आरोप है कि रोहित वेमुला, डॉ. पायल तड़वी और सीकर के डॉ. हेमेश खाट जैसे प्रतिभाशाली छात्रों की आत्महत्या महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि संस्थानों में होने वाली संगठित जातिगत प्रताड़ना का परिणाम है। आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटीज में अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी समाज के छात्रों को जानबूझकर फेल किया जाता है, उनके सेमिनार रोके जाते हैं और थीसिस जमा करने में बाधाएं खड़ी की जाती हैं। निशाकर सिंह ने उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां निर्धारित स्टाफ का 25% भी मौजूद नहीं है। रिक्त पदों पर भर्ती करने के बजाय गेस्ट फैकल्टी के जरिए काम चलाया जा रहा है, जिसका चयन पूरी तरह डीन के विवेकाधीन होता है। छात्रों का दावा है कि इस प्रक्रिया में दलित, आदिवासी और ओबीसी समाज के योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर जातिगत भेदभाव किया जाता है। कई छात्र 7-7 साल से पीएचडी की डिग्री के लिए भटक रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 85% आबादी के अधिकारों की रक्षा करने वाले इस कानून को पुनः प्रभावी नहीं किया गया, तो आने वाले समय में छात्र संगठन देशव्यापी उग्र आंदोलन करेंगे। आज उदयपुर सहित देश के 100 से अधिक विश्वविद्यालयों में यह विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया गया है। ज्ञापन सौंपने के बाद छात्रों ने स्पष्ट किया कि अब यह लड़ाई केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिला मुख्यालयों पर महापड़ाव की तैयारी की जाएगी।
उदयपुर के बड़गांव क्षेत्र में शुक्रवार सुबह लेपर्ड के मूवमेंट से लोगों में दहशत का माहौल बन गया। बड़गांव मेन रोड पर हल्दीघाटी हाउस के पास स्थित श्री कॉम्पलेक्स कॉलोनी में अचानक लेपर्ड आबादी क्षेत्र में आ पहुंचा। कॉलोनीवासियों के अनुसार, लेपर्ड एक घर के एंट्री प्वाइंट पर फाटक से जुड़ी दीवार पर चढ़ा और कुछ सेकेंड रुकने के बाद कूदकर आगे की ओर निकल गया। यह पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सामने आया है। बड़गांव के प्रशासक संजय व्यास ने बताया कि कॉलोनी निवासी मदनलाल व्यास के घर के पास लेपर्ड देखा गया था, जिसके बाद वह गली से होते हुए आगे निकल गया। व्यास परिवार के सदस्य दीपक व्यास ने बताया कि सुबह करीब सवा छह बजे सामने रहने वाली एक महिला ने गली से लेपर्ड निकलने की सूचना दी और सीसीटीवी फुटेज देखने को कहा। जब कैमरे चेक किए गए तो सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर लेपर्ड घर के एंट्री प्वाइंट पर चढ़ता हुआ दिखाई दिया। दीपक व्यास के अनुसार लेपर्ड वहां से आगे कृषि विज्ञान केंद्र की दिशा में चला गया। उन्होंने यह भी बताया कि गत वर्ष 16 जनवरी 2025 को भी इसी गली में लेपर्ड सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ था। घटना की जानकारी फैलते ही कॉलोनी में हड़कंप मच गया। लोग अपने घरों से बाहर निकलने से कतराने लगे और बच्चों को अकेले बाहर न भेजने की सख्त हिदायत दी गई। कॉलोनीवासियों की सूचना पर प्रशासक संजय व्यास ने संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। फिलहाल क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोगों को पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
यह दर्दनाक वाकया गुरुवार तड़के करीब 4 बजे का है, जब जलदा निवासी प्रेम गमेती अपनी रोजमर्रा की मजदूरी के लिए कृषि मंडी जा रहा था। रास्ते में रेलवे पटरी के पास अज्ञात युवकों ने उसे घेर लिया और चाकू से 6-7 वार कर उसे मरणासन्न हालत में छोड़ दिया। घायल प्रेम ने हिम्मत जुटाकर परिजनों को फोन किया, जो उसे तुरंत सैटेलाइट अस्पताल ले गए। वहां से गंभीर हालत देखते हुए उसे एमबी अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन असली त्रासदी यहीं से शुरू हुई। मृतक की पत्नी और परिजनों का आरोप है कि एमबी अस्पताल के स्टाफ ने घायल प्रेम को भर्ती करने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि यह मेडिको लीगल केस है, इसलिए पहले सविना थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज करवाओ, तभी इलाज शुरू होगा। परिजन मिन्नतें करते रहे, लेकिन सिस्टम का दिल नहीं पसीजा। बेबस परिजन जब तक उसे लेकर थाने पहुँचे और कागजी कार्रवाई पूरी की, तब तक शरीर से काफी खून बह चुका था और प्रेम ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस घटना की जानकारी मिलते ही भील समाज के लोग बड़ी संख्या में एमबी अस्पताल पहुँच गए। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि इमरजेंसी में पहले इलाज मिलना चाहिए, पुलिस रिपोर्ट बाद में भी हो सकती है। समाज के लोगों ने दोषी डॉक्टरों और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सहायता राशि की भी मांग उठाई जा रही है। अस्पताल की इस संवेदनहीनता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक गरीब की जान की कीमत कागजी कार्रवाई से कम है? परिजनों का साफ़ कहना है कि अगर समय रहते टांके लग जाते और खून रुक जाता, तो आज प्रेम गमेती जिंदा होता। फिलहाल, अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल है और समाज के लोग एकजुट होकर न्याय की मांग कर रहे हैं ताकि कल किसी और के साथ ऐसी बेरहमी न हो।
उदयपुर में उदयपुर-अजमेर एक्सप्रेस ट्रेन पर किसी ने कांच की बोतल फेंक दी। चलती ट्रेन में बोतल लगने से खिड़की के पास बैठी युवती घायल हो गई। उसकी नाक, मुंह और सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद युवती जोर-जोर से चिल्लाने लगी। जिससे ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई। ट्रेन को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। घटना गुरुवार सुबह देबारी के मेघवालों की घाटी गांव के पास की है। घायल युवती को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। युवती अपनी बहन के साथ सफर कर रही थी। रेलवे पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हमलावर की पहचान करने और हमले के मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रही है।बहन के साथ फतहनगर जा रही थी युवती GRP थानाधिकारी गोवर्धन सिंह ने बताया- घायल शिफा (25) को उदयपुर के एमबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शिफा अपनी बहन के साथ जनरल डिब्बे में उदयपुर से फतहनगर जा रही थी। राणा प्रताप नगर स्टेशन (उदयपुर) से 11:34 बजे ट्रेन रवाना हुई, करीब 11:47 पर यह घटना हुई। घायल युवती के बताए गए स्थान के अनुसार, पुलिस ने घटनास्थल से करीब 4 से 5 किलोमीटर के क्षेत्र को चिह्नित किया है। चेन खींचकर ट्रेन को रुकवाया प्रत्यक्षदर्शी एडवोकेट मधु गर्ग ने बताया- मैं उदयपुर से कपासन में कोर्ट के काम से जा रही थी। मेघवालों की घाटी बस्ती के पास अचानक एक युवती के चिल्लाने की आवाज आई। हम लोग कुछ दूरी पर थे, भागकर युवती तक पहुंचे। युवती की नाक के पास गंभीर चोट लगी थी, खून बह रहा था। ट्रेन की चैन मैंने खींची। इसके बाद लोगों ने देखा भी, मगर दूर तक कोई नजर नहीं आया। करीब 1 किलोमीटर आगे देबारी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को रोककर युवती को स्ट्रेचर पर उतारा गया। 15 मिनट बाद एंबुलेंस आई, जिसके बाद ट्रेन रवाना हुई। संभवतया किसी ने बोतल फेंकी होगी, क्योंकि युवती के बैठने की जगह पर वहां कुछ कांच के टुकड़े मिले हैं। रेलवे पुलिस ने भी मौके पर चेकिंग की ।
कालीबाई भील और देवनारायण स्कूटी योजना के तहत जिन स्कूटियों को छात्राओं के हाथों में होना चाहिए था, वे आज उदयपुर के मीरा गर्ल्स कॉलेज में मिट्टी की परतों के नीचे दबी हैं। कॉलेज परिसर में ऐसी 112 स्कूटियां खड़ी हैं, जिनमें से 25 स्कूटियां पिछले 3-4 साल से वितरण का इंतजार कर रही हैं, जबकि 87 स्कूटियां इसी साल जनवरी में आई थीं। हालत यह है कि धूप और बारिश में खड़े-खड़े इन नई स्कूटियों के टायर और इंजन जवाब देने लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि जब इन फटी हुई सीटों और कबाड़ होती स्कूटियों पर सवाल पूछा गया, तो प्राचार्य दीपक माहेश्वरी ने अजीबोगरीब तर्क दिया। उन्होंने कहा कि कॉलेज में आवारा कुत्तों ने स्कूटियों की सीटें फाड़ दी हैं और इसके लिए नगर निगम को पत्र लिखा गया है। प्रबंधन का यह भी कहना है कि छात्राओं के मोबाइल नंबर बदलने या गलत होने की वजह से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है, इसलिए वितरण में देरी हो रही है। हालांकि, कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय इस दलील से संतुष्ट नहीं है। आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश बैरवा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राचार्य को मंगलवार को जयपुर मुख्यालय उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, स्कूटी वितरण को लेकर हुई महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी प्राचार्य अनुपस्थित रहे थे, जिसे आयुक्त ने अनुशासनहीनता माना है। वीसी में प्राचार्य की जगह शामिल हुए कार्मिक के पास भी योजना की स्पष्ट जानकारी नहीं थी, जिससे विभाग की नाराजगी और बढ़ गई। अब प्राचार्य को साल 2021 से लेकर 2024 तक की स्कूटी वितरण की पूरी रिपोर्ट के साथ स्पष्टीकरण देना होगा। दूसरी ओर, प्राचार्य का दावा है कि जिन छात्राओं के दस्तावेजों की जांच पूरी हो चुकी है, उन्हें स्कूटियां सौंपी जा चुकी हैं और शेष छात्राओं को दस्तावेज सत्यापन के बाद जल्द ही स्कूटियां बांट दी जाएंगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या उधड़ी हुई सीटों और खराब मशीनरी वाली ये स्कूटियां उन होनहार छात्राओं के किसी काम आएंगी?
मीरा गर्ल्स कॉलेज के गलियारे आज छात्राओं की नारेबाजी से गूंज उठे। बीए और बीएससी द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के परिणाम आने के बाद से ही छात्राओं में असंतोष था। छात्राओं का कहना है कि विश्वविद्यालय ने जानबूझकर उन्हें फेल किया है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि कई विषयों में परीक्षा देने के बावजूद उन्हें एब्सेंटश् दिखा दिया गया है। प्रदर्शनकारी छात्रा सुमन कुंवर ने बताया कि फीस में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है, लेकिन परिणामों के नाम पर मेधावी छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब छात्राओं ने प्रिंसिपल चैंबर को बाहर से लॉक कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश कर ताला खुलवाया, जिसके बाद छात्राएं कॉरिडोर में धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन का दूसरा बड़ा कारण स्कूटी वितरण में देरी है। छात्राओं का कहना है कि पिछले 3 सालों से मेधावी छात्राओं के लिए आई स्कूटियां कॉलेज परिसर में खड़ी-खड़ी धूल फांक रही हैं। रखरखाव के अभाव में कई स्कूटियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं, लेकिन प्रशासन इन्हें पात्र छात्राओं को आवंटित नहीं कर रहा है।
बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ थाना क्षेत्र के बावलिया पाड़ा गांव स्थित एक सरकारी स्कूल में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब स्कूल में खेलते हुए तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 9 वर्षीय छात्र राधेश्याम की आंखों में गलती से फेवीक्विक गिर गया। आंखों में तेज जलन के कारण मासूम ने घबराकर आंखों को मसल लिया, जिससे कुछ ही पलों में दोनों आंखों की पलकें बुरी तरह आपस में चिपक गईं। बच्चे के तेज रोने और चीख-पुकार पर स्कूल स्टाफ मौके पर पहुंचा और स्थिति को संभालने की कोशिश की। तत्काल परिजनों को सूचना दी गई, जिसके बाद परिवार के लोग बच्चे को लेकर कुशलगढ़ अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन आंखों की गंभीर स्थिति और ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चे को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में भी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने राधेश्याम को बेहतर इलाज के लिए उदयपुर स्थित एमबी हॉस्पिटल रेफर कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार फेवीक्विक में मौजूद केमिकल के कारण आंखों की पलकें चिपक गई थीं, जिससे बिना विशेषज्ञ उपचार के उन्हें खोलना संभव नहीं था। वहीं इस हादसे ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, निगरानी और स्कूल परिसर में खतरनाक सामग्री की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन से मांग की जा रही है कि स्कूलों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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