आवाज़ हम सबकी
जालोर जिले के बागोड़ा क्षेत्र के दादाल गांव में इंडस्ट्रियल पार्क को लेकर चल रहा विरोध अब टकराव की स्थिति तक पहुंच गया है। ग्रामीण पिछले छह दिनों से धरने पर बैठकर इंडस्ट्रियल पार्क के लिए भूमि आवंटन का विरोध कर रहे हैं। मंगलवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता थान सिंह डोली भी धरना स्थल पहुंचे और ग्रामीणों के समर्थन में नारेबाजी की। इसी दौरान इंडस्ट्रियल पार्क प्रबंधन की ओर से ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनों के जरिए जमीन समतल करने का काम शुरू किया गया। ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए साफ कहा कि वे इस जमीन पर इंडस्ट्रियल पार्क नहीं बनने देंगे। आरोप है कि विरोध के दौरान कंपनी स्टाफ की तरफ से तेज रफ्तार में ट्रैक्टर दौड़ाए गए, जिससे धरना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें डराने और दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। वहीं दूसरी तरफ कंपनी स्टाफ ने ग्रामीणों पर पथराव करने और काम में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। सूचना मिलने पर बागोड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। इंडस्ट्रियल पार्क प्रबंधन से जुड़े अशोक जैन ने बताया कि सरकार के साथ एमओयू साइन होने के बाद करीब एक महीने पहले 8 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी। यहां हॉस्पिटल, सोलर फार्म, बैटरी स्टोरेज और अन्य फैक्ट्रियां स्थापित करने की योजना है, जिसके तहत जमीन समतलीकरण का कार्य किया जा रहा था।
राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर में दर्ज दुष्कर्म के प्रयास के मामले में आरोपी भाजपा नेता को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने पहले से लागू गिरफ्तारी पर रोक को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि मामले की परिस्थितियां गंभीर हैं और इसकी गहन जांच आवश्यक है। न्यायाधीश मुननुरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए तर्क अदालत को संतुष्ट नहीं कर सके, इसलिए जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना जा सकता। मामला 5 जून 2025 की घटना से जुड़ा है। पीड़िता ने 6 जून को आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए जबरन घर में घुसने, बदसलूकी करने और दुष्कर्म के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। मामले के बाद 4 अगस्त 2025 को आरोपी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी, लेकिन अब हाईकोर्ट ने उस रोक को हटा दिया है। मामले में आरोपी पक्ष ने आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए इसे व्यापारिक विवाद से जोड़कर साजिश करार दिया था। आरोपी ने घटना के अगले ही दिन क्रॉस केस भी दर्ज कराया था। फिलहाल पुलिस दोनों एफआईआर की जांच पूरी कर चुकी है, हालांकि अब तक अदालत में चार्जशीट पेश नहीं की गई है। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब पुलिस दोबारा सक्रिय होकर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकेगी।
डबोक थाना क्षेत्र के हरियाव गांव में मेघवाल समाज की बिंदोली पर हुए पथराव मामले को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ कार्रवाई कर रहा है। मावली सीओ आसिमा वासवानी ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे भ्रामक संदेशों और अफवाहों पर विश्वास नहीं किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि माहौल खराब करने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दे कि पूरा मामला 29 अप्रैल का है, जब 112 नंबर के जरिए पुलिस को सूचना मिली थी कि हरियाव गांव में पूजा मेघवाल की बिंदोली के दौरान असामाजिक तत्वों ने पथराव कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कुछ बदमाशों को डिटेन कर धारा 151 के तहत पाबंद किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए 30 अप्रैल को सुबह करीब 3 बजे नामजद आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 2 मई को चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान अन्य नामजद आरोपियों की कॉल डिटेल खंगाली गई, जिसमें उनकी लोकेशन उदयपुर के बजाय गुजरात में मिली। इसी आधार पर पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के जरिए आगे की कार्रवाई कर रही है। पथराव की घटना में घायल लोगों का मेडिकल भी करवाया गया है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों को गंभीर चोटें आई हैं, हालांकि सभी चोटें ब्लंट नेचर की पाई गई हैं। पुलिस प्रशासन ने आमजन से शांति बनाए रखने और किसी भी भ्रामक जानकारी को साझा नहीं करने की अपील की है।
उदयपुर में बुधवार को दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित नजर आया, जब ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिलेभर के केमिस्ट और ड्रगिस्ट सांकेतिक हड़ताल पर उतर आए। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर जिले की करीब 750 दवा दुकानों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर आंदोलन को समर्थन दिया। दवा व्यापारियों ने रैली निकालते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा। उदयपुर जिला केमिस्ट्स ऑर्गेनाइजेशन के सचिव दिलीप सामर और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि दवाएं सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं और इनके वितरण व बिक्री में सख्त नियमन आवश्यक है। संगठन का कहना है कि बिना चिकित्सकीय निगरानी के ऑनलाइन दवा बिक्री मरीजों की सुरक्षा और जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रही है। साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भारी छूट की नीति से छोटे लाइसेंसधारी दवा व्यापारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो रहा है। केमिस्ट संगठनों ने केंद्र सरकार से जीएसआर 220(ई) और जीएसआर 817(ई) को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग भी उठाई। हालांकि हड़ताल के दौरान आवश्यक और आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने का दावा भी संगठन की ओर से किया गया। इधर मेडिकल स्टोर बंद रहने से आम लोगों को दवाइयां खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग सरकारी दवाखानों के चक्कर लगाते नजर आए।
सायरा थाना क्षेत्र स्थित तिरोल गांव में बुधवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब बिजली की डीपी से कॉपर और तेल चोरी करने का प्रयास कर रहे दो युवक करन्ट की चपेट में आ गए। जानकारी के अनुसार दोनों युवक चालू लाइन वाले ट्रांसफार्मर पर चढ़े हुए थे और कॉपर निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज करन्ट दौड़ गया और दोनों युवक जोरदार झटके के साथ नीचे गिर पड़े। हादसा इतना खतरनाक था कि मौके पर मौजूद ग्रामीण भी दहशत में आ गए। दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, हालांकि राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी की मौत नहीं हुई और एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करन्ट लगते ही जोरदार आवाज हुई और दोनों युवक जमीन पर गिर पड़े। ग्रामीणों ने तुरंत बचाव का प्रयास किया। इसी दौरान कुछ लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। घटना के बाद इलाके में बिजली ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा और लगातार बढ़ रही चोरी की वारदातों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।
उदयपुर विकास प्राधिकरण की टीम मंगलवार को पूरी तैयारी के साथ सड़कों पर उतरी। शहर के माली कॉलोनी से लेकर 100 फीट रोड तक के पूरे इलाके में अवैध निर्माणों को चिन्हित कर यह बड़ी कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासनिक अमले के पहुंचते ही अवैध कब्जा करने वालों में हड़कंप मच गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान नियमों को ताक पर रखकर खड़ी की गई करीब 25 से 30 दुकानों के अवैध अतिक्रमण को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान कई जगह स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने विरोध दर्ज कराने की कोशिश की। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और यूडीए के अधिकारियों के साथ लोगों की तीखी बहस भी देखने को मिली। लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों और भारी पुलिस जाब्ते के आगे किसी की एक न चली और दस्ता लगातार आगे बढ़ता रहा। जांच में सामने आया कि क्षेत्र में कई रिहायशी मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना किसी वैध अनुमति के बनाए गए थे। भवन निर्माताओं ने सेट-बैक के नियमों का भी पालन नहीं किया था। यूडीए की मशीनों ने इन नियमों को तोड़ने वाले पक्के ढांचों, दुकानों के आगे निकले हुए अवैध शेड और होर्डिंग्स को पूरी तरह से हटा दिया। यूडीए के अधिकारियों का साफ कहना है कि शहर के विकास और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए सेट-बैक का उल्लंघन करने वालों और अवैध निर्माणकर्ताओं के खिलाफ आगे भी इसी तरह की जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
फतहसागर झील में डूबे तैराक ललित मेहता का शव मंगलवार सुबह आखिरकार बरामद कर लिया गया। सिविल डिफेंस और नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम पिछले दो दिनों से लगातार झील में उनकी तलाश कर रही थी। मंगलवार सुबह करीब साढ़े छह बजे झील के फाउंटेन के पास शव दिखाई दिया, जिसके बाद उसे बाहर निकालकर अंबामाता थाना पुलिस को सुपुर्द किया गया। पुलिस के मुताबिक ललित मेहता पिछले करीब 20 वर्षों से नियमित तैराकी करते थे और कई लोगों को तैरना भी सिखाते थे। उनका धानमंडी क्षेत्र में अनाज ट्रेडिंग का व्यवसाय था। रविवार सुबह करीब 8 बजे वे रोजाना की तरह फतहसागर झील पहुंचे थे। परिजनों ने बताया कि काफी देर तक फोन रिसीव नहीं होने पर वे उन्हें तलाशते हुए झील पहुंचे, जहां उनकी गाड़ी, कपड़े और अन्य सामान झील किनारे मिला। इसके बाद परिजनों ने आसपास तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही अंबामाता थाना पुलिस और नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची। रविवार को करीब सात घंटे तक झील के अलग-अलग हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। सोमवार को भी तलाश अभियान जारी रहा और आखिरकार मंगलवार सुबह शव बरामद कर लिया गया। झील किनारे लगे सीसीटीवी फुटेज में ललित मेहता रोजाना की तरह सुबह फतहसागर पहुंचते, व्यायाम करते और फिर पानी में उतरते दिखाई दिए हैं। सिविल डिफेंस के सदस्य कैलाश मेनारिया ने बताया कि परिजनों के अनुसार करीब पांच महीने पहले ललित मेहता के हार्ट में स्टंट लगाने का ऑपरेशन हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि वे लंबी छलांग लगाकर गहराई में चले गए होंगे और झाड़ियों में फंसने के कारण बाहर नहीं निकल पाए। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर मौत के कारणों की जांच में जुटी हुई है।
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