आवाज़ हम सबकी
उदयपुर विकास प्राधिकरण की टीम मंगलवार को पूरी तैयारी के साथ सड़कों पर उतरी। शहर के माली कॉलोनी से लेकर 100 फीट रोड तक के पूरे इलाके में अवैध निर्माणों को चिन्हित कर यह बड़ी कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासनिक अमले के पहुंचते ही अवैध कब्जा करने वालों में हड़कंप मच गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान नियमों को ताक पर रखकर खड़ी की गई करीब 25 से 30 दुकानों के अवैध अतिक्रमण को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान कई जगह स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने विरोध दर्ज कराने की कोशिश की। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और यूडीए के अधिकारियों के साथ लोगों की तीखी बहस भी देखने को मिली। लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों और भारी पुलिस जाब्ते के आगे किसी की एक न चली और दस्ता लगातार आगे बढ़ता रहा। जांच में सामने आया कि क्षेत्र में कई रिहायशी मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना किसी वैध अनुमति के बनाए गए थे। भवन निर्माताओं ने सेट-बैक के नियमों का भी पालन नहीं किया था। यूडीए की मशीनों ने इन नियमों को तोड़ने वाले पक्के ढांचों, दुकानों के आगे निकले हुए अवैध शेड और होर्डिंग्स को पूरी तरह से हटा दिया। यूडीए के अधिकारियों का साफ कहना है कि शहर के विकास और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए सेट-बैक का उल्लंघन करने वालों और अवैध निर्माणकर्ताओं के खिलाफ आगे भी इसी तरह की जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
फतहसागर झील में डूबे तैराक ललित मेहता का शव मंगलवार सुबह आखिरकार बरामद कर लिया गया। सिविल डिफेंस और नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम पिछले दो दिनों से लगातार झील में उनकी तलाश कर रही थी। मंगलवार सुबह करीब साढ़े छह बजे झील के फाउंटेन के पास शव दिखाई दिया, जिसके बाद उसे बाहर निकालकर अंबामाता थाना पुलिस को सुपुर्द किया गया। पुलिस के मुताबिक ललित मेहता पिछले करीब 20 वर्षों से नियमित तैराकी करते थे और कई लोगों को तैरना भी सिखाते थे। उनका धानमंडी क्षेत्र में अनाज ट्रेडिंग का व्यवसाय था। रविवार सुबह करीब 8 बजे वे रोजाना की तरह फतहसागर झील पहुंचे थे। परिजनों ने बताया कि काफी देर तक फोन रिसीव नहीं होने पर वे उन्हें तलाशते हुए झील पहुंचे, जहां उनकी गाड़ी, कपड़े और अन्य सामान झील किनारे मिला। इसके बाद परिजनों ने आसपास तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही अंबामाता थाना पुलिस और नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची। रविवार को करीब सात घंटे तक झील के अलग-अलग हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। सोमवार को भी तलाश अभियान जारी रहा और आखिरकार मंगलवार सुबह शव बरामद कर लिया गया। झील किनारे लगे सीसीटीवी फुटेज में ललित मेहता रोजाना की तरह सुबह फतहसागर पहुंचते, व्यायाम करते और फिर पानी में उतरते दिखाई दिए हैं। सिविल डिफेंस के सदस्य कैलाश मेनारिया ने बताया कि परिजनों के अनुसार करीब पांच महीने पहले ललित मेहता के हार्ट में स्टंट लगाने का ऑपरेशन हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि वे लंबी छलांग लगाकर गहराई में चले गए होंगे और झाड़ियों में फंसने के कारण बाहर नहीं निकल पाए। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर मौत के कारणों की जांच में जुटी हुई है।
चित्रकूट नगर स्थित पीएफ कार्यालय के बाहर शनिवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब परिसर के बाहर लगे एक मोबाइल टावर में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही देर में टावर से ऊंची लपटें और काला धुआं उठने लगा। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आग तेजी से फैलती दिखाई दे रही है। टावर में आग लगते ही क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति को गंभीर होता देख कार्यालय कर्मचारियों ने तुरंत भवन खाली किया और सुरक्षा उपाय शुरू किए। पीएफ कार्यालय के केयर टेकर कुलदीप सिंह राठौड़ और चंद्र प्रकाश ने बिना समय गंवाए अग्निशमन विभाग को सूचना दी। आग तेजी से फैल रही थी, लेकिन दोनों कर्मचारियों ने घबराने के बजाय कार्यालय में मौजूद फायर फाइटिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर आग पर शुरुआती नियंत्रण पाने का प्रयास शुरू कर दिया। उनकी सूझबूझ और तत्परता के चलते आग को आसपास फैलने से रोका जा सका। कुछ ही देर बाद अग्निशमन दल मौके पर पहुंचा और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पीएफ क्षेत्रीय आयुक्त-प्रथम प्रशांत कुमार सिन्हा ने बताया कि यदि समय रहते हालात नियंत्रित नहीं किए जाते तो टावर गिरने या आग आसपास के क्षेत्र में फैलने से बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। मामले की जांच की जा रही है।
रविवार को एसीबी की टीम द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कमेंट्स का सैलाब आ गया है। जनता इस रिश्वखोरी से इतनी आहत है कि कमेंट सेक्शन में लोग लिख रहे हैं चले थे गालिब बंद कराने तवायफों के कोठे, सिक्कों की खनक देखकर खुद ही मुजरा कर बैठे। वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि उदयपुर के लोग इसे असली सिंघम बोलते थे, लेकिन सिंघम सर आप तो बिक गए। यूजर्स का गुस्सा यहीं नहीं थमा; कमेंट्स में लिखा जा रहा है कि ऐसे ही रिश्वतखोर पुलिस वालों की वजह से पूरी पुलिस कम्युनिटी बदनाम होती है, चोरी एक करता है और नाम सबका खराब होता है। लोग इस बात पर भी हैरानी जता रहे हैं कि जो पुलिसकर्मी प्रतापगढ़ के एक केस पर बनी फिल्म सागवान में जाबांज बनकर अपराध और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ रहा था, वो खुद इतना भ्रष्ट निकलेगा। जनता सीधे तौर पर कह रही है कि जैसी करनी, वैसी भरनी और पाप का अंत हुआ। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक मांग कर दी है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के घर गिराए जाने चाहिए और इनकी पूरी संपत्ति की जांच होनी चाहिए। गौरतलब है कि आरोपी एएसआई पहले भी विवादों में रहा है। सितंबर 2025 में सुखेर थाने में तैनाती के दौरान आरडीएक्स क्लब मारपीट मामले में कार्रवाई न करने और अक्टूबर 2025 में फिर से लापरवाही बरतने पर इसे लाइन हाजिर किया गया था। फिलहाल आरोपी को कोर्ट के आदेश के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। लेकिन सोशल मीडिया पर भड़की यह आग शांत होने का नाम नहीं ले रही है।
ईरान -अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर उदयपुर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। शहर के कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी की स्थिति बनने से वाहन चालकों की चिंता बढ़ गई है। उदयपुर के पंचवटी स्थित एक पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को बताया गया कि पेट्रोल और डीजल की सप्लाई लेकर आने वाली गाड़ी शाम तक पहुंचेगी। वहीं फतहपुरा स्थित नायरा पेट्रोल पंप पर भी सप्लाई इंधन की सप्लाई देरी से हुई। इन हालातों के चलते कई वाहन चालक परेशान नजर आए। जानकारी के अनुसार प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर मौखिक रूप से सीमा तय किए जाने की भी चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है। इधर ईंधन की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी जारी है। बीते पांच दिनों में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। मंगलवार को पेट्रोल की कीमत में 94 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। उदयपुर में वर्तमान में पेट्रोल की कीमत 109 रुपए 72 पैसे प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल 94 रुपए 88 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण आमजन और वाहन चालकों में चिंता का माहौल बना हुआ है। वहीं लोग अब पेट्रोल पंपों पर पहले से ज्यादा सतर्कता के साथ ईंधन भरवाते नजर आ रहे हैं।
उदयपुर में एसीबी की इस कार्रवाई ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतापनगर थाने में तैनात एएसआई सुनील बिश्नोई पर आरोप है कि उसने रेप की कोशिश और छेड़छाड़ के एक मामले में कार्रवाई नहीं करने के बदले शिकायतकर्ता से एक लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। इतना ही नहीं, रिश्वत नहीं देने पर शिकायतकर्ता को केस में फंसाने की धमकी भी दी जा रही थी। परेशान होकर शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की शिकायत उदयपुर एसीबी को दी। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने जाल बिछाया और रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे शोभागपुरा स्थित ऑर्बिट रिसॉर्ट की पार्किंग में कार्रवाई को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता ने जैसे ही एएसआई सुनील बिश्नोई को एक लाख रुपए दिए, पहले से मौके पर मौजूद एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। एसीबी के एडिशनल एसपी अनंत कुमार ने बताया कि आरोपी एएसआई से पूछताछ की जा रही है और पूरे मामले की जांच जारी है। जानकारी के अनुसार एक महिला ने रेप की कोशिश और छेड़छाड़ के आरोप में थाने में लिखित शिकायत दी थी। लेकिन मामला दर्ज करने की बजाय शिकायत को दबाकर रखा गया और आरोपी पक्ष से पैसों की मांग शुरू कर दी गई। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि एएसआई सुनील बिश्नोई फिल्म सागवान में एक ईमानदार और बहादुर पुलिसकर्मी की भूमिका निभा चुका है। दक्षिणी राजस्थान के जंगलों और प्रतापगढ़ की वास्तविक घटना पर बनी इस फिल्म में उसने अपराध और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाले पुलिसकर्मी का किरदार निभाया था। लेकिन अब वही पुलिसकर्मी असल जिंदगी में रिश्वत लेते पकड़ा गया। आपको बता दे कि यह पहला मामला नहीं है जब सुनील बिश्नोई विवादों में आया हो। इससे पहले सुखेर थाने में तैनाती के दौरान आरडीएक्स क्लब एंड बार में ग्राहकों के साथ मारपीट मामले में कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगे थे। उस समय एसपी ने उसे हटाकर डीएसपी ऑफिस वेस्ट में अटैच किया था और विभागीय जांच भी शुरू की गई थी। बाद में एक अन्य मामले में लापरवाही सामने आने पर उसे लाइन हाजिर भी किया जा चुका है।
कानून के रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं और नियमों की धज्जियाँ उड़ाने लगें, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? उदयपुर के भूपालपुरा थाने में तैनात खाकीधारियों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने मारपीट के एक मामले में शुक्रवार शाम एक युवक के साथ उसके 16 वर्षीय साथी को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पहली और सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि उन्होंने आरोपी का आधार कार्ड चेक करने की जहमत तक नहीं उठाई और अपनी रिपोर्ट में उसे 18 साल का बालिग बात दिया। इतना ही नहीं, पीड़ित किशोर और उसके वकीलों का आरोप है कि पुलिस ने उसे 24 घंटे तक थाने के लॉकअप में बंद रखा। इस दौरान उसके साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उससे जबरन थाने के टॉयलेट तक साफ करवाए गए। शनिवार शाम जब पुलिस उसे बालिग बताकर तहसीलदार जब्बरसिंह चारण की कोर्ट में पेश करने पहुँची, तो वहां मौजूद वकील वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने युवक की उम्र पर आपत्ति जताई। जैसे ही उसका आधार कार्ड मंगवाया गया, पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई। दस्तावेज में उसकी उम्र महज 16 साल 6 महीने निकली। तहसीलदार जब्बरसिंह चारण भी पुलिस की इस कार्यप्रणाली को देख हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत पेशी लेने से इनकार कर दिया। कलेक्ट्री परिसर में करीब दो घंटे तक वकीलों और पुलिस के बीच तीखी बहस और हंगामा चलता रहा। नियमानुसार नाबालिग को गिरफ्तार नहीं बल्कि डिटेन किया जाता है और उसे किशोर न्याय बोर्ड में पेश करना अनिवार्य है, लेकिन भूपालपुरा पुलिस नियमों को दरकिनार कर उसे कलेक्ट्री ले आई। जब इस पूरे प्रकरण पर थानाधिकारी आदर्श कुमार परिहार से सवाल किया गया, तो वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। उनका तर्क था कि परिजनों ने उम्र 18 साल बताई थी, जबकि कानूनन पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह आयु का दस्तावेजी सत्यापन करे। इस मामले को जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। एसपी ने साफ कहा है कि इस मामले की गहन जांच करवाई जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी खामी किसके स्तर पर हुई। पुलिस कप्तान ने थानाधिकारी आदर्श कुमार से रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत दिए हैं। वही पिडित ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस वालों ने उसे यह भी धमकी दी कि 6 महिने बाद उसे फिर से थाने में बंद करेंगे। और उस पर यह भी दबाव बनाया गया कि वो कोर्ट में यह बोल दे की उसकी उम्र 18 साल है। फिलहाल पीड़ित किशोर को सोमवार को जेजे बोर्ड में पेश किया गया है, लेकिन इस घटना ने उदयपुर पुलिस की छवि पर गहरा दाग लगा दिया है।
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