आवाज़ हम सबकी
उदयपुर में चल रहे गरबा उत्सव के बीच आयोजकों की ओर से परिधानों और वेशभूषा को लेकर संदेश देने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। शहर के प्रमुख गरबा स्थलों पर लगाए गए इन पोस्टरों में खासतौर पर बैकलेस और पश्चिमी शैली के परिधानों की तस्वीरें दिखाते हुए माताओं-बहनों से इस तरह के पहनावे से बचने का आग्रह किया गया है। पोस्टर्स के जरिये संदेश दिया गया है कि गरबा मूल रूप से मां शक्ति की भक्ति और आराधना का पावन उत्सव है, न कि फैशन और व्यक्तिगत प्रदर्शन का मंच। पोस्टरों में भारतीय संस्कृति और त्यौहार की गरिमा के अनुरूप पारंपरिक पोशाक पहनने पर जोर दिया गया है। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य गरबा पंडालों में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को बनाए रखना है। इस अपील को लेकर शहरवासियों और गरबा प्रेमियों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहाँ कुछ लोग इसे संस्कृति की रक्षा का प्रयास मान रहे हैं, वहीं अन्य इसे व्यक्तिगत पसंद का विषय बता रहे हैं। फिलहाल, यह विषय शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
उदयपुर में आम जनता को पैदल चलने का पाठ पढ़ाने वाले और फुटपाथों से गाड़ियां हटवाने का दावा करने वाले नगर निगम प्रशासन को अपने ही 'नाक के नीचे' हो रहा भारी अतिक्रमण नजर नहीं आ रहा है। यह मामला नगर निगम उदयपुर की दीवार से ठीक सटी हुई ठक्कर बापा कॉलोनी का है, जहाँ प्रशासनिक दोहरे रवैये की पोल खुलकर सामने आ गई है। इस पूरे मार्ग पर टायरों को रिट्रेड करने वाली दुकानें स्थित हैं। दुकानें तो साइज में बेहद छोटी हैं, लेकिन इनका पूरा का पूरा कारोबार आधी से ज्यादा मुख्य सड़क पर फैला रहता है। दिनभर सड़क पर खुलेआम टायर बिखरे रहते हैं, जिससे न केवल यातायात अवरुद्ध होता है बल्कि राहगीरों का निकलना भी दुभर हो गया है। हैरानी की बात यह है कि निगम के आला अधिकारी रोज़ इसी रास्ते से गुजरते हैं, फिर भी उनकी नजर इस अवैध कब्जे पर नहीं पड़ती। जबकि यह मार्ग यातायात प्रबंधन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सूरजपोल चौराहे पर जब भी वाहनों का दबाव बढ़ता है, तो आपातकालीन परिस्थितियों में दुपहिया वाहनों को इसी रास्ते से डाइवर्ट किया जा सकता है। नगर निगम की दीवार से सटा यह रास्ता सीधे पीछे की तरफ शक्तिनगर-मेवाड़ मोटर्स लिंक रोड पर जाकर खुलता है। सवाल यह खड़ा होता है कि नगर निगम जब पूरे शहर में बुलडोजर चलाकर व्यापारियों की चबूतरियां तोड़ रहा है और आम रहवासियों को गाड़ियां हटाने की हिदायत दे रहा है, तो फिर अपने ही दफ्तर के बगल में पूरी सड़क घेरकर बैठे टायर दुकानदारों पर मेहरबानी क्यों? करीब तीन साल पहले प्रदूषण और शिकायतों के चलते यहाँ कार्रवाई हुई थी, लेकिन अब फिर से रहवासी जहरीले प्रदूषण और इस अतिक्रमण से त्रस्त हैं। अब देखना होगा कि निगम का बुलडोजर इस 'अंधेरे' को कब साफ करता है।
कानोड़ क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आकोला से शिक्षा विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ कार्यवाहक प्रधानाचार्य भंवर लाल पर विद्या संबल योजना के तहत नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए अपने ही रिश्तेदार को बैकडोर से राजनीति विज्ञान व्याख्याता के पद पर लगाने का गंभीर आरोप लगा है। मामला तब भड़का जब कानोड़ के जागरूक अभ्यर्थी सोहन लाल माली ने चयन प्रक्रिया की पोल खोलते हुए उच्च अधिकारियों से लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, सीकर से बुलाए गए अभ्यर्थी प्रदीप के आवेदन और अटेंडेंस रजिस्टर के हस्ताक्षरों में भारी भिन्नता पाई गई, जो पूरी प्रक्रिया के फर्जीवाड़े की ओर इशारा करती है। धांधली की परतें खुलीं तो विभाग ने नरेंद्र दक की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी। लेकिन मामला यहीं नहीं थमा! आरोप है कि खुद को फंसता देख कार्यवाहक प्रधानाचार्य भंवर लाल ने 14 और 15 सितंबर को पुरानी चयन कमेटी के सदस्यों पर 31 अगस्त की बैक डेट में दस्तखत करने का अनुचित दबाव बनाया। जब सदस्यों ने इस फर्जीवाड़े का हिस्सा बनने से इनकार किया, तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर सर्विस बुक फाड़ने तक की धमकियां दी गईं और मनमाने ढंग से नई कमेटी का गठन कर दिया गया। लगातार बढ़ती शिकायतों पर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (समग्र शिक्षा) भींडर ने तीन सदस्यीय एक और जांच टीम का गठन कर दिया। चारों तरफ से घिरने और कानूनी शिकंजे के डर से कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने आनन-फानन में 12 अक्टूबर को अपने रिश्तेदार से इस्तीफा लिखवा दिया। हेडमास्टर की इस मनमानी की सजा अब स्कूल के उन मासूम छात्रों को भुगतनी पड़ रही है, जिनका पद फिर से खाली हो गया है। गौर करने वाली बात यह भी है कि विवादों से भंवर लाल का पुराना नाता रहा है; इससे पहले भी एक महिला कार्मिक से छेड़छाड़ और प्रताड़ना के मामले में उनके खिलाफ जांच लंबित है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस पूरे फर्जीवाड़े पर केवल कागजी कमेटियां ही बनाता है या आरोपी प्रधानाचार्य पर कोई ठोस सख्त कार्रवाई भी करता है।
उदयपुर में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर आयुक्तालय की एंटी-इवेजन विंग ने अवैध सिगरेट कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए डाकन कोटड़ा स्थित दो गोदामों पर छापेमारी की। इस दौरान 45.90 लाख रूपए कीमत की सिगरेट जब्त की गई। अधिकारियों के अनुसार, गोदामों में रखी सिगरेट बिना बिल और वैधानिक चेतावनी के मिली। जांच में सिगरेट के पैकेटों पर एक्सपायरी डेट और स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी भी नहीं पाई गई। इन कमियों के आधार पर खेप के विदेशी माल होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, सिगरेट के विदेशी मूल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विभाग ने जब्त की गई सिगरेट को राजसात करने के लिए अदालत में परिवाद पेश किया है। फिलहाल, मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। जब्त सिगरेट की कुल संख्या के बारे में जानकारी सामने नहीं आई है।
सविना बाईपास नवाघर क्रॉसिंग स्थित मां भगवती मेलड़ी माता मंदिर परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महंत विराम नाथ महाराज ने भूमाफियाओं के बढ़ते आतंक पर गहरा रोष जताया। महाराज ने चिंता जताते हुए कहा कि आज भूमाफियाओं की नजर मंदिरों की जमीनों पर टिकी है और वे संतों को खुलेआम धमकियां दे रहे हैं। मेलड़ी माता मंदिर परिसर में भी ऐसी हरकतों को अंजाम देने की कोशिशें की जा रही हैं। इसी दौरान महंत ने मंदिर के पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व पर से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 में पाकिस्तान स्थित प्रसिद्ध हिंगलाज माता मंदिर से अखंड ज्योत लाकर यहां प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इसके अलावा, मां भगवती मेलड़ी माता की लगभग 7वीं शताब्दी की प्राचीन पछेड़ी, जो किसी कारणवश विदेश चली गई थी, उसे वापस लाया गया है। प्रेस वार्ता में देवी पूजन सेवा समिति के नरेंद्र दलवाड़िया ने बताया कि यह आश्रम सिर्फ मंदिर नहीं, बल्कि गौशाला, भोजनशाला और हिंगलाज माता, बगलामुखी, हनुमान जी, राधा-कृष्ण व रामापीर सहित कई देवी-देवताओं का पवित्र धाम है। नवरात्रि के अवसर पर यहां डांडिया रास और विशाल महाप्रसाद का आयोजन किया जा रहा है।
मेरठ में देश को झकझोर देने वाले बहुचर्चित 'नीले ड्रम हत्याकांड' में अदालत ने ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पति सौरभ राजपूत की हत्या के जुर्म में उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल दोनों को फांसी की सजा सुनाई है। इस खौफनाक वारदात में सौरभ के शव को पांच टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में भर दिया गया था। फैसला सुनाए जाने के दौरान जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मुस्कान और साहिल को जोड़ा गया, तो दोनों फूट-फूटकर रो पड़े। अदालत ने इस मामले को 'नृशंस हत्याकांड' करार देते हुए किसी भी तरह की नरमी बरतने से साफ इनकार कर दिया है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में 3 मार्च 2025 को हुए सनसनीखेज सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने इंसाफ का बड़ा ऐलान किया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह एक अत्यंत नृशंस हत्याकांड है, जिसके लिए किसी भी प्रकार की माफी स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर धारा 302 के तहत पचास-पचास हजार और धारा 238A के तहत बीस-बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जब सजा का ऐलान हुआ, तो दोनों की आंखों से आंसू छलक आए और वे सदमे में नजर आए। सुनवाई के दौरान जब जज ने मुस्कान से उसकी आखिरी इच्छा पूछी, तो उसने रोते हुए बस इतना कहा कि "मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।" वहीं, साहिल खामोश खड़ा रहा। फैसला आने के बाद मृतक सौरभ के परिवार ने राहत की सांस ली है। सौरभ की मां और भाई ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अदालत के इस फैसले से उन्हें शांति मिली है। कानूनी जानकारों का मानना है कि देश की अदालतों में किसी महिला को फांसी की सजा सुनाया जाना अपने आप में एक बड़ा और कड़ा संदेश है, जो ऐसे जघन्य अपराधों के खिलाफ एक मजबूत मिसाल पेश करता है।
चूरू जिले के तारानगर तहसील के चंगोई गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां सरपंच का चुनाव लड़ने की जिद में एक पिता ने अपने ही इकलौते बेटे और बहू की बोलेरो से कुचलकर हत्या कर दी। घटना मंगलवार रात करीब 12:50 बजे की है। परिवार में पिछले कई दिनों से इस बात को लेकर विवाद चल रहा था कि पिता रामचंद्र जाट इस बार सरपंच का चुनाव लड़ना चाहता था, जबकि उसका बेटा रविंद्र और बहू महिंद्रा इसके सख्त खिलाफ थे। पुलिस ने आरोपी पिता को डिटेन कर लिया है और बोलेरो गाड़ी को भी जब्त कर लिया है। जानकारी के अनुसार, चंगोई गांव निवासी रामचंद्र जाट का गांव में ही धर्मकांटा है और वह हाल ही में अलग बनी ग्राम पंचायत चंगोई से सरपंच पद का चुनाव लड़ना चाहता था। उसका 40 वर्षीय बेटा रविंद्र जो ई-मित्र चलता था और 35 वर्षीय बहू महिंद्रा उसे लगातार चुनाव लड़ने से मना कर रहे थे, जिसके चलते घर में अक्सर कलह होती थी। मंगलवार रात को भी घर पर विवाद के बाद पिता और पुत्र धर्मकांटा पर चले गए थे, जहां कुछ देर बाद बहू महिंद्रा भी पहुंच गई। वहां तीनों के बीच फिर से तीखी बहस और झगड़ा हुआ। जब रविंद्र और महिंद्रा वहां से लौट रहे थे, तभी पीछे से रामचंद्र ने अपनी बोलेरो गाड़ी से दोनों को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से गांव में मातम पसरा हुआ है और सरकारी अस्पताल में ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई है। तारानगर पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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