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बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ थाना क्षेत्र के बावलिया पाड़ा गांव स्थित एक सरकारी स्कूल में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब स्कूल में खेलते हुए तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 9 वर्षीय छात्र राधेश्याम की आंखों में गलती से फेवीक्विक गिर गया। आंखों में तेज जलन के कारण मासूम ने घबराकर आंखों को मसल लिया, जिससे कुछ ही पलों में दोनों आंखों की पलकें बुरी तरह आपस में चिपक गईं। बच्चे के तेज रोने और चीख-पुकार पर स्कूल स्टाफ मौके पर पहुंचा और स्थिति को संभालने की कोशिश की। तत्काल परिजनों को सूचना दी गई, जिसके बाद परिवार के लोग बच्चे को लेकर कुशलगढ़ अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन आंखों की गंभीर स्थिति और ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चे को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में भी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने राधेश्याम को बेहतर इलाज के लिए उदयपुर स्थित एमबी हॉस्पिटल रेफर कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार फेवीक्विक में मौजूद केमिकल के कारण आंखों की पलकें चिपक गई थीं, जिससे बिना विशेषज्ञ उपचार के उन्हें खोलना संभव नहीं था। वहीं इस हादसे ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, निगरानी और स्कूल परिसर में खतरनाक सामग्री की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन से मांग की जा रही है कि स्कूलों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में नई लॉयन सफारी की शुरुआत से पहले वन विभाग के लिए पिछला हफ्ता चुनौतीपूर्ण रहा। एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत गुजरात के जूनागढ़ से लाए गए 7 वर्षीय शेर सम्राट और 3 वर्षीय शेरनी सुनयना को नए वातावरण के अभ्यास के लिए खुले बाड़े में छोड़ा गया था। शेर सम्राट तो समय पर लौट रहा था, लेकिन सुनयना को जंगल की आबोहवा इतनी रास आ गई कि वह पिछले चार दिनों से शेल्टर होम नहीं लौटी। 20 हेक्टेयर के विशाल सफारी क्षेत्र में ऊंची घास और घनी झाड़ियों के कारण शेरनी बार-बार नजरों से ओझल हो रही थी। वन विभाग की सबसे बड़ी चिंता फेसिंग के बाहर इंसानी आवाजाही को लेकर थी। शेरनी की तलाश के लिए वनकर्मियों की टीम ने सफारी के सबसे ऊंचे पॉइंट क्लाउड-9 पहाड़ी पर बने कमरों की छतों को अपना वॉच टावर बनाया। दिन-रात दूरबीन से की गई निगरानी के दौरान जब शुक्रवार को शेरनी की लोकेशन ट्रेस हुई, तो विभाग ने तुरंत रणनीति बदली। एक विशेष वाहन के जरिए शेरनी की घेराबंदी की गई और उसे धीरे-धीरे शेल्टर होम की दिशा में धकेला गया। करीब एक घंटे के प्रयास के बाद शाम साढ़े छह बजे सुनयना ने सही रास्ता पकड़ा और सुरक्षित अपने एनक्लोजर में दाखिल हो गई। गौरतलब है कि इस लॉयन सफारी का शिलान्यास जून 2024 में हुआ था, जो शहर से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित है। अब जबकि शेरनी अपने खाने-पीने की नियत जगह से परिचित हो गई है, वन अधिकारियों को उम्मीद है कि वह जल्द ही इस नए ठिकाने में पूरी तरह ढल जाएगी। अगले माह प्रस्तावित लॉयन सफारी के भव्य उद्घाटन की तैयारियों में जुटे प्रशासन के लिए सुनयना की यह घर वापसी किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। अब जल्द ही पर्यटक यहाँ सम्राट और सुनयना की दहाड़ सुन सकेंगे।
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