आवाज़ हम सबकी
उदयपुर में लंबे समय से चल रहा एलीवेटेड रोड प्रोजेक्ट अब धीरे-धीरे मूर्त रूप लेता नजर आ रहा है। शहर के कई हिस्सों में इस रोड का ढांचा तैयार हो चुका है और अब प्रोजेक्ट के महत्वपूर्ण हिस्से कोर्ट चौराहे पर भी निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। यह एलीवेटेड रोड कलेक्टर आवास से पारस सर्कल तक करीब 2.7 किलोमीटर लंबा बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य शहर के व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक दबाव को कम करना और लोगों को तेज और सुगम आवागमन की सुविधा देना है। कोर्ट चौराहे पर शुरू हुए निर्माण कार्य को इस प्रोजेक्ट का अहम चरण माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र हॉस्पिटल और शहर के प्रमुख मार्गों से जुड़ा हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए यहां रोड को नीचे उतारने की योजना बनाई गई है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को सीधे पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। एलीवेटेड रोड के निर्माण से उदियापोल से कलेक्ट्रेट और सिटी रेलवे स्टेशन से कोर्ट चौराहा तक का सफर आसान और कम समय में पूरा हो सकेगा। प्रशासन का दावा है कि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या में काफी हद तक कमी आएगी। फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और आने वाले समय में इस प्रोजेक्ट के पूरी तरह तैयार होने पर उदयपुर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
झीलों की खूबसूरती और साफ-सफाई के लिए मशहूर उदयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना दिखाया गया था, लेकिन धरातल पर तस्वीरें कुछ और ही कहानी कह रही हैं। शहर के मुख्य बाजारों से लेकर रिहायशी इलाकों तक, शायद ही कोई ऐसी जगह बची हो जहाँ कचरे के ढेर ने अपना ठिकाना न बनाया हो। उदयपुर की सड़कों पर बिखरा यह कूड़ा न केवल शहर की सुंदरता को दागदार कर रहा है, बल्कि स्वच्छता अभियान के उन दावों की भी पोल खोल रहा है, जिन पर नगर निगम हर साल करोड़ों रुपए खर्च करता है। नगर निगम का दावा है कि शहर के हर वार्ड में कचरा संग्रहण की गाड़ियां समय पर पहुंचती हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इन गाड़ियों के चलने के बावजूद जगह-जगह कचरे के पॉइंट बन गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरा संग्रहण की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कई बार गाड़ियां मोहल्लों में नहीं पहुंचती, जिसकी वजह से लोग मजबूरन सड़कों के किनारे कचरा फेंक रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि सिर्फ कागजों पर सफाई दिखाने से शहर स्मार्ट नहीं बनेगा। यदि समय रहते कचरा प्रबंधन की इस व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो उदयपुर की साख पर लगा यह गंदगी का दाग और गहरा होता जाएगा। स्मार्ट सिटी के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश में जुटे प्रशासन के पास फिलहाल इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन इस बदहाली पर कब जागता है।
उदयपुर के सवीना थाना क्षेत्र में चोरों के हौसले लगातार बुलंद नजर आ रहे हैं। ताजा मामला डाकन कोटड़ा स्थित पार्श्वनाथ कॉलोनी का है, जहां बदमाशों ने एक सूने मकान को निशाना बनाकर लाखों रुपए की नकदी और जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। मकान मालिक रोशन लाल गर्ग ने बताया कि उनके पिता की तबीयत बिगड़ने के कारण पूरा परिवार गांव खारवा गया हुआ था। घर से निकलते समय उन्होंने अंदर और बाहर दोनों गेट पर ताला लगाकर सुरक्षा के इंतजाम किए थे। लेकिन जब परिवार वापस लौटा तो घर के दरवाजों के ताले टूटे हुए मिले और अंदर का सामान पूरी तरह बिखरा पड़ा था। अलमारियां खुली हुई थीं और घर में रखी नकदी व लाखों रुपए के जेवरात गायब थे। घटना की सूचना मिलते ही सवीना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मौका मुआयना किया। फिलहाल पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर रही है और संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है। पीड़ित परिवार ने पुलिस से जल्द से जल्द चोरों को पकड़ने की मांग की है। वहीं, लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं से क्षेत्र के लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि इस वारदात से एक दिन पहले भी इसी क्षेत्र में बदमाशों ने दो-तीन जगह चोरी का प्रयास किया था, जो लोगों की सतर्कता से टल गया। लगातार हो रही घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
उदयपुर में मजदूर दिवस पर श्रमिक संगठनों का गुस्सा खुलकर सामने आया। कलेक्ट्रेट परिसर में विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने कहा कि देशभर में लगातार बढ़ती महंगाई और गिरते वास्तविक वेतन ने मजदूर वर्ग की स्थिति को बेहद कठिन बना दिया है। पानीपत, नोएडा, भिवाड़ी, नीमराना और सूरत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलनों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि मजदूर लंबे समय से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। श्रमिक संगठनों का कहना है कि वर्तमान न्यूनतम मजदूरी दरें आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसे जरूरी खर्चों के मुकाबले बेहद कम हैं। यह स्थिति जीविका योग्य वेतन की अवधारणा से भी काफी नीचे है और भारतीय श्रम सम्मेलन तथा सर्वाेच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के विपरीत है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि ठेका और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को कई बार तय न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलती। उनसे आठ घंटे से अधिक काम लिया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर कम से कम 26 हजार रुपए प्रतिमाह किया जाए और इसके लिए एक राष्ट्रीय वेज बोर्ड का गठन किया जाए, जिसमें श्रमिक प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की है।
बांसवाड़ा जिले में राज्य सरकार के शुद्ध आहार, मिलावट पर वार अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए आमजन की सेहत से खिलवाड़ का बड़ा खुलासा किया है। नया बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित एक जूस सेंटर पर छापेमारी के दौरान टीम ने करीब 25 किलो सड़े हुए आम बरामद किए, जिनसे जूस तैयार किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि 22 लीटर तैयार आमरस में अत्यधिक मात्रा में कृत्रिम रंग मिलाया गया था, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने मौके पर ही पूरे आमरस को नाले में फिंकवाकर नष्ट करवा दिया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। खाद्य सुरक्षा टीम ने शहर के अन्य प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई करते हुए सैंपल लिए। अबीज फ्रूट एंड जूस सेंटर से आमरस, पूर्णिमा किराना स्टोर से कोल्ड ड्रिंक, श्याम किराना से मिसब्रांड पैकेज्ड पानी और दो डेयरियों से दूध के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने आमजन से अपील की है कि गर्मी के मौसम में खाने-पीने की वस्तुओं को लेकर विशेष सतर्कता बरतें और किसी भी प्रकार की मिलावट की आशंका होने पर तुरंत विभाग को सूचना दें।
देश भर में शुक्रवार से कॉमर्शियल गैस का इस्तेमाल करने वाले व्यापारियों और होटल संचालकों को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष दीपक गहलोत ने नई रेट लिस्ट की पुष्टि करते हुए बताया कि 19 किलोग्राम वाला कॉमर्शियल सिलेंडर अब 2106 रुपए के बजाय 3099 रुपए में मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में आए उछाल को इस भारी बढ़ोतरी का मुख्य कारण बताया जा रहा है। तेल कंपनियों ने न केवल बड़े सिलेंडर, बल्कि 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडर की कीमतों में भी 241 रुपए का इजाफा किया है। पहले यह सिलेंडर 592 से 616 रुपए के बीच मिलता था, जिसके लिए अब उपभोक्ताओं को 833 से 857 रुपए तक चुकाने होंगे। इससे उन स्टूडेंट और मजदूरों पर सीधा असर पड़ेगा जो छोटे सिलेंडर का उपयोग करते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल जनवरी से अब तक कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कुल 1490 रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है। पिछले साल दिसंबर में जो सिलेंडर 1669 रुपए का था, वह 1 मई तक आते-आते 3000 के पार पहुँच गया है। लगातार चौथे महीने हुई इस वृद्धि ने खान-पान के कारोबार से जुड़े लोगों की कमर तोड़ दी है। हालांकि, राहत की खबर आम गृहणियों के लिए है। पेट्रोलियम कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों को यथावत रखा है। राजस्थान में घरेलू सिलेंडर आज भी 916.50 रुपए की पुरानी दर पर ही उपलब्ध रहेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कॉमर्शियल गैस की कीमतों में इस ऐतिहासिक वृद्धि से आने वाले दिनों में होटलों और रेस्टोरेंट में खाने की थाली महंगी हो सकती है।
उदयपुर के डबोक थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-27 पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने मेवाड़ की सांस्कृतिक दुनिया को बड़ा झटका दिया है। इस हादसे में प्रसिद्ध भजन गायक धनराज जोशी की मौत हो गई, जबकि कार चालक राजेन्द्र सोनेरी गंभीर रूप से घायल हो गया। डबोक थानाधिकारी गोपाल नाथ के ने बताया कि हादसा दरोली गांव और एयरपोर्ट के बीच सुबह करीब 5 बजे हुआ। धनराज जोशी बीती रात हल्दीघाटी क्षेत्र के सैमन गांव में आयोजित भजन संध्या में शामिल होकर चित्तौड़गढ़ के बड़वाई स्थित अपने निवास लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी कार अचानक डिवाइडर पर चढ़ गई और अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसा इतना भीषण था कि कार सवार दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची और दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने धनराज जोशी को मृत घोषित कर दिया, जबकि ड्राइवर का इलाज जारी है। जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम से लौटते समय कार में उनका बेटा और अन्य साथी भी मौजूद थे, लेकिन वे किसी काम से उदयपुर में ही उतर गए थे, जिससे वे इस हादसे से सुरक्षित बच गए। पुलिस ने शव को डबोक हॉस्पिटल की मोर्चरी में रखवाया है और पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा। भावुक करने वाली बात यह है कि अपनी आखिरी भजन संध्या में धनराज जोशी ने कहा था कि“चलते रहेंगे काफिले हमारे बग़ैर भी… एक तारा टूट जाने से आसमान सूना नहीं होता… मैं चला जाऊँगा तो दूसरे धनराज जोशी पैदा हो जाएंगे।” उनके ये शब्द अब सच्चाई बनकर लोगों को भावुक कर रहे हैं। इस घटना के बाद से मेवाड़ और मारवाड़ में शोक की लहर है और उनके भजन हमेशा लोगों के दिलों में गूंजते रहेंगे। आपको बता दे कि धनराज जोशी अपने भजनों और खास कॉमेडी अंदाज के लिए बेहद लोकप्रिय थे। उनकी असमय मौत से उनके चाहने वालों में गहरा शोक व्याप्त है।
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