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न्यूज-91 में प्रमुखता से खबर प्रसारित होने के बाद उदयपुर के हिरण मगरी सेक्टर-4 स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा में दिव्यांग महिला के साथ हुए अमानवीय व्यवहार पर राजस्थान सरकार का विशेष योग्यजन आयोग सख्त हो गया। अधिकार संघर्ष एवं न्याय हित मंच के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश जाटव की शिकायत पर आयोग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बैंक प्रबंधन को कड़े निर्देश जारी किए हैं। दरअसल, बैंक के मुख्य प्रवेश द्वार पर बना रैंप अत्यधिक ढलानयुक्त होने के कारण दिव्यांग महिला बैसाखियों के सहारे ऊपर नहीं चढ़ सकी। मजबूरी में उसे हाथों और घुटनों के बल रेंगकर बैंक के भीतर जाना पड़ा। घटना के दौरान मौजूद बैंक कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड सहायता करने के बजाय मूकदर्शक बने रहे, जिससे संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। न्यूज-91 में मामला सामने आने के बाद आयोग ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत बैंक प्रबंधन को निर्देश दिए कि परिसर में मानकों के अनुरूप सुरक्षित और सुगम रैंप का तत्काल निर्माण कराया जाए। साथ ही घटना के समय सहायता नहीं करने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों और सुरक्षा गार्ड के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। आयोग ने बैंक ऑफ इंडिया प्रबंधन से निर्देशों की पालना करते हुए निर्धारित समय सीमा में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा आयोग ने बैंक प्रबंधन से निर्देशों के पालना की रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में पेश करने को भी कहा है।
उदयपुर जिले के वल्लभनगर थाना क्षेत्र के पिपली चौक निवासी 38 वर्षीय भूरी देवी लोहार साइबर ठगों का शिकार हो गईं। पीड़िता ने साइबर थाने में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि ठगों ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से संपर्क किया। कुछ कॉल इंटरनेशनल नंबरों से भी किए गए और गिफ्ट के रूप में सोना-चांदी तथा विदेशी करेंसी का पार्सल भेजने का लालच दिया गया। ठगों ने महिला को विश्वास में लेने के बाद रजिस्ट्रेशन, कस्टम क्लियरेंस और अन्य औपचारिकताओं का हवाला देते हुए अलग-अलग किश्तों में ऑनलाइन रकम जमा कराने के लिए कहा। 28 जून से 15 जुलाई के बीच महिला ने अपने खाते से कई बार ऑनलाइन भुगतान किया। इसके बाद ठगों के कहने पर उसने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर भी रकम ट्रांसफर कर दी। पीड़िता के अनुसार इस तरह कुल 23 लाख 28 हजार रुपये ठगों के खातों में भेज दिए गए। जब गिफ्ट नहीं मिला और कॉल करने वाले लोगों के मोबाइल बंद हो गए, तब उसे अपने साथ ठगी होने का एहसास हुआ। इसके बाद उसने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। साइबर थाने के डीएसपी विनय चौधरी ने बताया कि जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की गई है, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही जिन मोबाइल नंबरों और इंटरनेशनल नंबरों से कॉल किए गए, उनकी भी जांच की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, गिफ्ट ऑफर या लालच में आकर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर न करें और अपनी निजी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
उदयपुर के नगर निगम परिसर में युवाओं का यह हुजूम नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। सीजेपी के बैनर तले जुटे सैकड़ों छात्रों और कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में नीट इज नॉट नीट और एजुकेशन इज नॉट अ बिजनेस जैसे नारों वाली तख्तियां लेकर विरोध जता रहे हैं। छात्रों का कहना है कि धांधली के कारण लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है, इसलिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में जारी आंदोलन और समाजसेवी सोनम वांगचुक के समर्थन में भी आवाज उठाई। गौरतलब है कि समाजसेवी सोनम वांगचुक पिछले करीब 23 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं। बीते 18 जुलाई को प्रशासन ने उन्हें धरना स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां भी उनका अनशन लगातार जारी है। इससे पहले 20 जून को जब प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च करने का प्रयास किया था, तब भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसमें कई छात्र घायल हो गए थे। उदयपुर में जुटे युवाओं का साफ तौर पर कहना है कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता और धांधली के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा। आपको बता दे कि सोमवार को दिल्ली में हुए घटनाक्रम ने पूरे देश में आंदोलन खड़ा कर दिया है अब यह प्रदर्शन सिर्फ सीजेपी तक सीमित नहीं है बल्कि युवाओं के साथ उनके परिजन और शिक्षक भी इसमें शामिल हो रहे हैं। देश भर में हो रहे प्रदर्शनों के बीच अब शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक के चलते जान देने वाले छात्रों के परिवार को मुआवजे के साथ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचूक को हॉस्पीटल से डिस्चार्ज करने की मांग भी तेज हो गयी है। इसके साथ ही लाठीचार्ज और आसूगैस के गोले छोडने के दौरान जो छात्र घायल हुए है। उन्हे भी न्याय दिलाने की मांग उठाई जा रही है।
लेकसिटी में कानून व्यवस्था और आबकारी विभाग की मुस्तैदी की जमीनी हकीकत इन तस्वीरों में साफ नजर आ रही है। सुखेर थाना इलाके में शराब माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि तय समय सीमा खत्म होने के बाद भी कारोबार धड़ल्ले से जारी है। दुकान का मुख्य शटर बंद करके एक छोटी खिड़की के जरिए अवैध तरीके से शराब की बिक्री की जा रही है। खरीदार आ रहे हैं, खिड़की से पैसे दे रहे हैं और शराब लेकर आसानी से रवाना हो रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम से ऐसा लगता है जैसे इन शराब ठेकेदारों को न तो आबकारी विभाग की कार्रवाई का डर है और न ही स्थानीय पुलिस का कोई खौफ। चौंकाने वाली बात यह भी है कि नियमों की यह धज्जियां सिर्फ सुखेर थाना क्षेत्र तक ही सीमित नहीं हैं। कमोबेश शहर के अन्य थाना क्षेत्रों में भी इसी तरह देर रात तक बेखौफ होकर शराब की अवैध बिक्री की जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदार आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन को इस अवैध कारोबार की भनक तक नहीं है? या फिर सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं? आखिर किसके शह पर शराब व्यवसायी सरकार के आदेशों को नजर अंदाजन कर रहे हैं? क्या उदयपुर जिला प्रशासन और आबकारी अधिकारी इन बेखौफ शराब माफियाओं पर कोई सख्त कार्रवाई करेंगे या फिर कागजी दावों के पीछे यूं ही लापरवाही छिपती रहेगी?
उदयपुर शहर के स्वरूपसागर में सोमवार सुबह एक 56 साल की महिला ने झील में कूदकर सुसाइड का प्रयास किया। मौके पर मौजूद दो लोगों ने बिना देर किए झील में छलांग लगाकर महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद कालिका पेट्रोलिंग टीम की महिला पुलिसकर्मियों की तत्परता से महिला को तत्काल एमबी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। घटना सुबह करीब 9 बजे की है। स्वरूपसागर के पास स्थित पार्क में रोजाना की तरह लोग मॉर्निंग वॉक कर रहे थे। इसी दौरान एक महिला अचानक झील में कूद गई। महिला को झील में गिरते देख वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। दो युवकों ने तुरंत झील में छलांग लगाई और झील में सफाई कर रहे कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसी दौरान क्षेत्र में राउंड कर रही पुलिस की कालिका पेट्रोलिंग टीम भी मौके पर पहुंच गई। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए टीम की हेड कॉन्स्टेबल भंवर कुंवर और कॉन्स्टेबल सुनीता मदद में जुट गई।पास के ऑटो स्टैंड से वाहन लाने को लेकर हेड कॉन्स्टेबल भंवर कुंवर करीब 200 मीटर दौड़कर ऑटो लेकर आई। इसके बाद लोगों की मदद से महिला को ऑटो में बैठाकर एमबी अस्पताल के ट्रॉमा इमरजेंसी वार्ड पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया। हेड कॉन्स्टेबल भंवर कुंवर ने बताया कि महिला की पहचान विमला के रूप में हुई है। वह स्वरूपसागर क्षेत्र में ही रहती है और मूल रूप से चूरू की निवासी है। सूचना मिलने पर उनके बेटे और बहू भी अस्पताल पहुंच गए। बेटे-बहू दोनों डॉक्टर भंवर कुंवर ने बताया कि बेटे-बहू दोनों पेशे से डॉक्टर हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार महिला पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। सोमवार सुबह वह घर से उस समय निकल गईं, जब परिवार के अन्य सदस्य सो रहे थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
राजसमंद में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सरकारी अस्पताल में कथित रिश्वतखोरी के मामले का खुलासा करते हुए एक डॉक्टर को ट्रैप कार्रवाई में गिरफ्तार किया है। एसीबी की यह कार्रवाई एडिशनल एसपी हिम्मत सिंह चारण के नेतृत्व में आरके जिला अस्पताल में की गई। एसीबी के अनुसार परिवादी के पुत्र की आंख के पास एक गांठ थी, जिसे हटाने के लिए वह सरकारी अस्पताल पहुंचा था। आरोप है कि उपचार और ऑपरेशन की प्रक्रिया के लिए जूनियर स्पेशलिस्ट सर्जरी डॉ. पंकज जैन ने परिवादी से 2 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। बाद में दोनों पक्षों के बीच 1800 रुपए में सहमति बनी। परिवादी ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान आरोपी डॉक्टर ने पहली किस्त के रूप में 500 रुपए ले लिए, जिससे शिकायत की पुष्टि हो गई। इसके बाद एसीबी टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की। जैसे ही आरोपी डॉ. पंकज जैन परिवादी से शेष 1300 रुपए की रिश्वत ले रहा था, टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। एसीबी ने रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली। फिलहाल एसीबी आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच जारी है और रिश्वतखोरी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी।
26 मई को दोपहर करीब एक बजे एक विवाहिता अपनी बहन के यहां कोटड़ा में कलश कार्यक्रम में जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन देर रात तक भी वह घर नहीं पहुंची। परिजनों ने जब उससे संपर्क करने का प्रयास किया तो उसका मोबाइल बंद या नेटवर्क से बाहर मिला। रिश्तेदारों और ससुराल पक्ष में भी तलाश की गई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। महिला के पति किशनसिंह के अनुसार 9 जून को एक परिचित से जानकारी मिली कि उसकी पत्नी कथित रूप से सायरा थाना क्षेत्र के चरावो का गुडा निवासी आरोपी हिम्मतसिंह पुत्र शंकरसिंह के साथ है। पति का आरोप है कि आरोपी ने उसकी पत्नी को बहला-फुसलाकर अपने साथ रखा हुआ है। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाहिता घर से उसकी मां के लाखों रुपए मूल्य के सोने-चांदी के जेवर और अलमारी में रखे 35 हजार रुपए नकद भी साथ ले गई। शिकायत के अनुसार चोरी हुए सामान में चांदी के दो कंदौरे, सोने का बोर, सोने की टोकरियां और चांदी की गारनी शामिल हैं। पति ने यह भी आरोप लगाया है कि उसकी दोनों नाबालिग संतानों को भी साथ ले जाया गया है। साथ ही आरोपी पर विवाहिता को बहकावे में लेकर जेवर अपने कब्जे में रखने का भी आरोप लगाया गया है। इस मामले में पिडित किशनसिंह की शिकायत पर गोगुंदा थाना पुलिस ने आरोपी हिम्मतसिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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