आवाज़ हम सबकी
जगदीश मंदिर में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। रथ यात्रा समिति की ओर से शोभायात्रा को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। इस वर्ष की रथयात्रा का मुख्य आकर्षण मंदिर का लगभग 370 वर्ष पुराना ऐतिहासिक रथ रहेगा, जो मंदिर के निर्माण काल से ही धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। रथ को सजाने-संवारने का काम पूरा हो चुका है।ऐतिहासिक रथ पर हाथी, घोड़े और ठाकुरजी के वाहन की आकर्षक नक्काशी इसकी भव्यता को और विशेष बनाती है। रथयात्रा के दिन इसी रथ पर जुगल जोड़ी सरकार और लड्डू गोपाल जी को विराजमान किया जाएगा। नगर भ्रमण से पहले रथ को मंदिर परिसर के परिक्रमा मार्ग में विधिवत घुमाया जाएगा। कार्यक्रम से जुड़े जगदीश पुजारी ने बताया कि धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह 5 बजे मंगला आरती से होगी। इसके बाद सुबह 5:30 बजे पुरुष सूक्त के मंत्रोच्चार के साथ भगवान का महास्नान कराया जाएगा। सुबह 10 बजे से 10:15 बजे तक शृंगार आरती होगी और भगवान को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। सुबह 11:30 बजे राजभोग आरती संपन्न होगी। राजभोग आरती के बाद रथयात्रा से जुड़ी सभी धार्मिक प्रक्रियाएं शुरू होंगी। विधि-विधान और पूजा-अर्चना के बाद रथ को परिक्रमा के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। सूर्य मंदिर के समीप रथ का अल्प विश्राम होगा, जहां भगवान की विशेष आरती की जाएगी। इसके बाद भगवान जगन्नाथ ऐतिहासिक रथ में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे और श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। रथयात्रा को लेकर भक्तों और पुजारी परिवार में भारी उत्साह का माहौल बना हुआ है।
उदयपुर के विश्व रिकॉर्ड होल्डर स्वर्ण शिल्पी डॉ. इकबाल सक्का की एक और अनूठी कलाकृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के अवसर पर उनके द्वारा तैयार किया गया दुनिया का सबसे छोटा सोने और चांदी का भगवान जगन्नाथ रथ, मंदिर, भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा, ओम अंकित पताका और घोड़े सहित संपूर्ण कलाकृति को होप इंटरनेशनल वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान दिया गया है। डॉ. सक्का ने बताया कि यह सूक्ष्म कलाकृति लगभग एक सेंटीमीटर आकार की है, जिसे विशेष तकनीक और महीन स्वर्ण-रजत शिल्पकला के माध्यम से तैयार किया गया। इस अद्वितीय रचना को विश्व की सबसे छोटी धार्मिक कलाकृतियों में शामिल करते हुए होप इंटरनेशनल वर्ल्ड बुक ने आधिकारिक रूप से विश्व रिकॉर्ड घोषित किया। होप इंटरनेशनल वर्ल्ड बुक के भारतीय फाउंडेशन के मुख्य संपादक डॉ. अहमद शेख ने डॉ. इकबाल सक्का को प्रमाण पत्र और गोल्ड मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही इस उपलब्धि पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। डॉ. सक्का ने बताया कि उनकी इस उपलब्धि को अब राजस्थान करंट अफेयर्स और राजस्थान सामान्य ज्ञान के प्रश्नों में भी शामिल किया गया है। इसमें पूछा जा रहा है कि एक सेंटीमीटर का स्वर्ण-रजत भगवान जगन्नाथ रथ बनाने वाले राजस्थान के शिल्पी कौन हैं। डॉ. इकबाल सक्का ने इस सम्मान को उदयपुर और राजस्थान की समृद्ध कला परंपरा को समर्पित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के शिल्प और भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली है।
उदयपुर जिले के फतहनगर कस्बे के जवाहर नगर कॉलोनी में पोस्ट ऑफिस के पीछे स्थित एक मकान में चोरों ने देर रात बड़ी वारदात को अंजाम दिया। घटना 13 जुलाई की रात करीब दो बजे की है, जब आरोपी दीवार फांदकर मकान में दाखिल हुए और अलमारी के साथ-साथ घर के मंदिर को भी निशाना बनाया। चोर मकान से सोने-चांदी के आभूषण, धार्मिक पूजन सामग्री, नकदी और पुराने दुर्लभ सिक्के चोरी कर फरार हो गए। चोरी गए सामान में चांदी की महादेव जलहरी नाग सहित, ठाकुरजी की जलधारी, सोने की चेन और अंगूठी, चांदी की चेन और बिछुड़ियां, लक्ष्मी पूजन के चांदी के सिक्के, पुरानी चांदी की अंगूठियां, पीतल की गणेश प्रतिमाएं, ठाकुरजी की बांसुरी, एक और दो रुपए के पुराने दुर्लभ सिक्के, करीब चार हजार रुपए के सिक्के और लगभग दो हजार रुपए की नकदी शामिल है। पूरी वारदात घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसमें आरोपी दीवार फांदकर घर में प्रवेश करते और चोरी की घटना को अंजाम देते दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है और स्थानीय लोगों ने रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है।
उदयपुर जिले के सायरा थाना क्षेत्र के कमोल गांव में सामाजिक नियमों के नाम पर युवक के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। घटना 12 मई की बताई जा रही है, लेकिन इसका वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। वीडियो सामने आते ही पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।सायरा थानाधिकारी कानाराम सीरवी ने बताया कि कमोल गांव में समाज के पंचों ने अपने स्तर पर शराबबंदी लागू कर रखी है। पुलिस के अनुसार 11 मई को चूनाराम गमेती शराब पीकर नशे की हालत में घर पहुंचा था। आरोप है कि पिता के टोकने पर उसने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट भी की।इसके अगले दिन यानी 12 मई को भील बस्ती में समाज के पंचों ने बैठक बुलाई। बैठक में शराबबंदी का नियम तोड़ने का दोषी मानते हुए चूनाराम गमेती पर 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। इसके बाद पंचों ने युवक का एक पैर रस्सी से बांधकर बरगद के पेड़ पर उल्टा लटका दिया और उसके साथ मारपीट की। इस दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया।करीब दो महीने बाद मंगलवार को यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई शुरू की।सायरा थानाधिकारी कानाराम सीरवी ने बताया कि मामले में अब तक 11 लोगों को डिटेन किया गया है। सभी से पूछताछ की जा रही है और उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है और घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। मामले में साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना ने सामाजिक फैसलों के नाम पर कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब तीन हजार वर्गमीटर भूमि पर बन रहे भाजपा जिला कार्यालय को लेकर पश्चिम मध्य रेलवे ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। रेलवे के वरिष्ठ मंडल अभियंता की ओर से 16 जून को जारी पत्र में कहा गया है कि संबंधित भूमि वर्ष 2008 में तत्कालीन यूआईटी को केवल सड़क निर्माण के उद्देश्य से 35 वर्ष की लीज पर दी गई थी। लीज की शर्तों के अनुसार इस जमीन का किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता, जबकि यहां भाजपा जिला कार्यालय का निर्माण कराया जा रहा है।रेलवे ने कोटा डेवलपमेंट अथॉरिटी को निर्माण कार्य रोकने और नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो रेलवे स्वयं अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।वहीं भाजपा और राज्य सरकार का कहना है कि केडीए के रिकॉर्ड के अनुसार यह भूखंड विधिवत भाजपा को आवंटित किया गया है और निर्माण पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत कराया जा रहा है। विवाद की एक बड़ी वजह भूमि रिकॉर्ड में अंतर भी है। रेलवे ने अपने वर्ष 1965 के लैंड प्लान का हवाला देते हुए संबंधित भूमि को अपनी संपत्ति बताया है, जबकि संयुक्त सर्वे के दौरान राजस्व विभाग ने वर्ष 1982 के रिकॉर्ड के आधार पर मौके पर रेलवे भूमि की चौड़ाई अलग दर्ज की। इसी अंतर के चलते मामला और उलझ गया है।गौरतलब है कि वर्ष 2016 में भाजपा सरकार के दौरान भूखंड का आवंटन हुआ, वर्ष 2020 में कांग्रेस सरकार के समय इसे निरस्त किया गया और वर्ष 2025 में भाजपा सरकार बनने के बाद आवंटन दोबारा बहाल कर दिया गया। अब रेलवे की आपत्ति के बाद इस पूरे मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
दिव्यांगजनों को न्याय व्यवस्था तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने और उनके अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में राजस्थान में एक अहम पहल शुरू हुई है। गृह विभाग और राजस्थान पुलिस अब ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता के साथ दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 की संबंधित धाराओं को भी शामिल करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। साथ ही प्रदेश के पुलिस थानों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी दिव्यांगजन के साथ अपराध, शोषण, मारपीट, भेदभाव या उत्पीड़न होता है, तो उसे केवल सामान्य आपराधिक कानून के तहत ही नहीं, बल्कि उसके विशेष अधिकारों की रक्षा करने वाले कानून का भी संरक्षण मिल सके। इससे पुलिस कार्रवाई अधिक संवेदनशील, प्रभावी और अधिकार आधारित होगी। पेनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के संस्थापक और अर्थ डायग्नोस्टिक्स के सीईओ डॉ. अरविंदर सिंह ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर सभी पुलिस थानों में रैंप, रेलिंग, व्हीलचेयर सुविधा, ब्रेल संकेतक, सुगम शौचालय और बाधा-रहित प्रवेश जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की थी। उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 की धाराओं को भी अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। डॉ. अरविंदर सिंह और पेनेशिया के प्रयासों के बाद यह विषय प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर गंभीरता से आगे बढ़ा है। यह पहल उन हजारों दिव्यांगजनों के लिए राहत लेकर आ सकती है, जिन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए सबसे पहले थाने तक पहुंचने में ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। डॉ. अरविंदर सिंह ने इस पहल के लिए पुलिस विभाग और उच्च अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय दिव्यांगजनों को न्याय, सम्मान और समान अधिकार दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि पेनेशिया भविष्य में भी दिव्यांगजनों के अधिकार, सुगम्यता और जन-जागरूकता के लिए अपने प्रयास लगातार जारी रखेगी।
उदयपुर में रविवार को निकली धार्मिक शोभायात्रा के दौरान हुई चेन स्नेचिंग की छह वारदातों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने सवीना थाने में आसूचना अधिकारी के रूप में कार्यरत कॉन्स्टेबल छगनलाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस के मुताबिक कॉन्स्टेबल छगनलाल कई वर्षों से थाना क्षेत्र में इंटेलिजेंस ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ऐसे में क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों और संभावित अपराधों की जानकारी जुटाकर वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी थी। आरोप है कि उन्होंने शोभायात्रा में इस तरह की वारदात की आशंका को लेकर समय रहते कोई इनपुट नहीं दिया। साथ ही महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की संभावित संख्या का भी सही आकलन उपलब्ध नहीं कराया।सवीना थानाधिकारी दलबीर सिंह ने बताया कि उनकी ज्वॉइनिंग के दूसरे ही दिन यह घटना हुई। उनके लिए थाना क्षेत्र नया था। यदि पहले से पर्याप्त आसूचना और इनपुट मिलते तो पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर तरीके से तैयार कर अपराध रोकने का प्रयास करती। थानाधिकारी ने बताया कि चेन स्नेचिंग के मामले में पुलिस लगातार जांच कर रही है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। इसके अलावा शोभायात्रा के दौरान समाज की ओर से ड्रोन के माध्यम से की गई रिकॉर्डिंग भी जांच में शामिल की गई है। पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया गया है। आपको बता दे कि मुनि आदित्य सागर महाराज ससंघ के मंगल प्रवेश के उपलक्ष्य में निकाली गई शोभायात्रा में करीब 800 से 1000 श्रद्धालु शामिल हुए थे। महिलाओं की संख्या अधिक होने का फायदा उठाते हुए बदमाशों ने सेक्टर-11 स्थित आलोक स्कूल से जैन मंदिर के बीच छह महिलाओं को निशाना बनाया। सभी पीड़ित महिलाओं की उम्र 55 से 65 वर्ष के बीच बताई गई है। घटना के बाद सभी ने सवीना थाने में सोने के मंगलसूत्र और चेन झपटने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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