आवाज़ हम सबकी
राज्य सरकार की आरजीएचएस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन उदयपुर के पारस हॉस्पिटल में सामने आए मामलों ने इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों के अनुसार हॉस्पिटल प्रशासन ने योजना के तहत पात्र मरीजों को मुफ्त इलाज देने से इनकार कर दिया और उपचार के लिए नकद राशि जमा कराने की शर्त रखी। प्रशासनिक जांच में ऐसे करीब पांच मामले सामने आए हैं, जिनमें आरजीएचएस लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं दिया गया। इनमें तीन मरीजों के परिजनों को मजबूरन नकद राशि जमा करानी पड़ी। एक मामले में इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगा, जबकि एक अन्य प्रकरण आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत पैसे लेकर उपचार करने से जुड़ा बताया गया है। रेवेन्यू विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी सुरेश मानावत ने बताया कि दिसंबर 2022 में उनकी पत्नी की तबीयत खराब होने पर उन्हें पारस हॉस्पिटल ले जाया गया था। अस्पताल में भर्ती के दौरान उन्होंने आरजीएचएस से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज पेश किये, लेकिन स्टाफ ने कहा कि नकद राशि जमा कराने पर ही इलाज शुरू होगा। पत्नी की हालत गंभीर होने के कारण उन्होंने मजबूरी में 28 हजार रुपए जमा कराकर उपचार करवाया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक आदित्य ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि आरजीएचएस से अधिकृत कोई भी निजी अस्पताल पात्र मरीज को इलाज देने से मना नहीं कर सकता। ऐसा करना योजना के नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि पारस हॉस्पिटल को मरीजों से ली गई राशि वापस लौटाने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में फिर ऐसी शिकायत सामने आती है तो अस्पताल के खिलाफ लाइसेंस निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही सभी निजी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वे राज्य सरकार की चिकित्सा योजनाओं की सख्ती से पालना सुनिश्चित करें। गौरतलब है कि आरजीएचएस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रति परिवार प्रतिवर्ष पांच लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है, जबकि गंभीर और जानलेवा बीमारियों के लिए अतिरिक्त पांच लाख रुपए का कवर भी दिया जाता है। ऐसे में योजना के लाभार्थियों से वसूली का मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।
निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर उदयपुर का विश्व प्रसिद्ध जगदीश मंदिर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में रंगा नजर आया। तड़के 4 बजे से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया और दिनभर दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। भजनों की मधुर ध्वनि के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ स्वरूप श्री जगदीश के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी रही। निर्जला एकादशी को लेकर मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिला। श्रद्धालु उपवास और पूजा-अर्चना के साथ बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचे। दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए मंदिर मंडल समिति की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम दर्शन के लिए समिति के सदस्य विभिन्न स्थानों पर तैनात रहे और पूरी निष्ठा के साथ व्यवस्थाओं का संचालन करते नजर आए। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर भी विशेष ध्यान रखा गया ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस अवसर पर मंदिर मंडल समिति द्वारा प्रसाद की भी व्यवस्था की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और धार्मिक आयोजन में भाग लिया।
सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों के बीच उदयपुर जिले के नयागांव क्षेत्र का डाडमिया पुल एक बार फिर चर्चा में है। तीन पट्टा मोड़ से सरेरा जाने वाले मार्ग पर तालाब के ऊपर बनाया गया यह पुल अभी दस महीने पहले ही तैयार हुआ था, लेकिन इतनी कम अवधि में ही इसमें दरारें दिखाई देने लगी हैं। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पुल निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण होता तो दस महीने के भीतर पुल में इस तरह की दरारें नहीं आतीं। ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि दरारें लगातार बढ़ रही हैं और यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि पुल निर्माण के दौरान और उसके बाद संबंधित विभागों द्वारा गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई। यदि निर्माण में खामियां थीं तो उन्हें समय रहते क्यों नहीं पकड़ा गया। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जनसुनवाई में शिकायत आने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ, जबकि स्थिति पहले से ही ग्रामीणों के संज्ञान में थी। 11 जून को आयोजित जनसुनवाई में मामला सामने आने के बाद कलेक्टर गौरव अग्रवाल स्वयं मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया। इसके बाद जिला परिषद को जांच के निर्देश दिए गए। अब जिला परिषद की तकनीकी टीम ने कोर कटिंग मशीन के माध्यम से पुल के विभिन्न हिस्सों से कंक्रीट और अन्य निर्माण सामग्री के नमूने लिए हैं। जांच टीम में आशीष धाकड़, प्रियंका चपलोत, धर्मेश लोहार और हेमंत चौबीसा शामिल रहे। मौके पर ग्राम पंचायत सरेरा के रोजगार सहायक नरेश लबाना, वार्ड पंच मनीष भगोरा, समाजसेवी शंकर परमार और ग्रामीण मौजूद रहे। अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि पुल में आई दरारों के पीछे निर्माण गुणवत्ता की कमी जिम्मेदार है या फिर कोई अन्य तकनीकी कारण।
उदयपुर में रात के समय हुई बिजली कटौती ने फतहपुरा क्षेत्र के लोगों की परेशानी बढ़ा दी। क्षेत्रवासियों के मुताबिक बुधवार रात करीब 11 बजे अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई। लंबे समय तक बिजली बहाल नहीं होने पर लोग फतहपुरा चौराहा स्थित बिजली विभाग के शिकायत केंद्र पहुंचे, लेकिन वहां ताला लगा मिला। शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। इसके बाद क्षेत्रवासी मधुबन स्थित एईएन कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां भी गार्ड के अलावा कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं मिला। लोगों का कहना है कि उन्होंने संबंधित एईएन और जेईएन को कई बार फोन किए, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। इससे क्षेत्रवासियों में विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश देखने को मिला। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली बंद होने के बाद लोग लगातार शिकायत करने का प्रयास करते रहे, लेकिन विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ी। रात करीब 12 बजकर 30 मिनट पर बिजली आपूर्ति बहाल होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं क्षेत्रवासी और जल संसाधन विभाग में सहायक अभियंता सौरभ वशिष्ट ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती करना अब आम बात हो गई है। उनका कहना है कि विभाग की ओर से जवाबदेही दिखाई नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल जमा नहीं होने पर विभाग तुरंत कार्रवाई करता है, लेकिन बिजली बंद होने पर अधिकारी और कर्मचारी फोन तक नहीं उठाते। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि बिजली विभाग रात्रिकालीन शिकायत व्यवस्था को प्रभावी बनाए और बिजली कटौती की स्थिति में अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
उदयपुर नगर निगम ने अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले दो प्रतिष्ठानों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के निर्देश पर मेवाड़ बैंक्वेट और बालाजी कोचिंग संस्थान को सीज कर दिया गया। निगम का कहना है कि पूर्व में नोटिस जारी कर आवश्यक अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन संबंधित संचालकों ने निर्धारित समय में सुधार नहीं किया। इसके बाद निगम ने सख्त कदम उठाया। वीओ - उदयपुर शहर में अग्नि सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत नगर निगम उदयपुर ने सख्त रुख अपनाते हुए दो प्रतिष्ठानों को सीज कर दिया है। यह कार्रवाई नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के निर्देश पर की गई, जो लगातार शहर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निगरानी बनाए हुए हैं। आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि नगर निगम के अग्निशमन विभाग द्वारा शहर के विभिन्न व्यावसायिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों का लगातार निरीक्षण और सर्वे किया जा रहा है। इसी दौरान मेवाड़ बैंक्वेट और बालाजी कोचिंग संस्थान में अग्नि सुरक्षा उपकरणों और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की गंभीर कमी पाई गई थी। मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी ने बताया कि दोनों प्रतिष्ठानों को पूर्व में नोटिस जारी कर अग्निशमन उपकरण स्थापित करने, फायर सेफ्टी सिस्टम दुरुस्त करने, आपातकालीन निकास मार्ग सुनिश्चित करने और अन्य सुरक्षा मानकों की पालना के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए निर्धारित समयावधि भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद संचालकों ने आवश्यक सुधार नहीं किए और सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने में लापरवाही बरती। नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने स्पष्ट कहा कि शहरवासियों की सुरक्षा निगम की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। बैंक्वेट हॉल, कोचिंग संस्थान, होटल, अस्पताल, व्यावसायिक भवन और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी सीधे तौर पर जनजीवन को खतरे में डाल सकती है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी ने बताया कि शहर में अन्य प्रतिष्ठानों का भी सर्वे और निरीक्षण लगातार जारी है। जहां भी अग्नि सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएंगी, वहां नियमानुसार नोटिस जारी किए जाएंगे और समय पर सुधार नहीं होने पर सीजिंग सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी, अग्निशमन अधिकारी शिवराम मीणा, सहायक अग्निशमन अधिकारी नवदीप सिंह बग्गा और निगम पुलिस निरीक्षक मांगीलाल डांगी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। निगम ने सभी संस्थान संचालकों से अग्नि सुरक्षा मानकों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने की अपील भी की है।
उदयपुर के तितरड़ी स्थित मेवाड़ बीएससी नर्सिंग महाविद्यालय परिसर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। एआईसीसी और पीसीसी के निर्देशानुसार आयोजित कार्यक्रम में छात्रों को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा कोटा में आयोजित संवाद का प्रदर्शन प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाया गया। कार्यक्रम के बाद उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का युवा शिक्षा और रोजगार के गंभीर संकट से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र लीक की लगातार घटनाएं, परीक्षाओं का रद्द होना, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बढ़ती बेरोजगारी ने करोड़ों युवाओं के भविय को संकट में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों को परीक्षा केंद्र की परीक्षा के साथ-साथ धैर्य और मानसिक तनाव की परीक्षा भी देनी पड़ रही है। उदयपुर देहात एवं शहर जिला कांग्रेस सह-प्रभारी डिंपल कुंवर राठौड़ ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों और संस्थागत विफलताओं ने छात्रों के बीच निराशा, तनाव और असुरक्षा का माहौल बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रटाचार और अक्षमता के कारण पेपर लीक, परीक्षाओं का रद्द होना और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़ ने कहा कि पेपर लीक, परीक्षा का खराब प्रबंधन, रद्द होती भर्तियां, बढ़ती फीस, निजीकरण और घोटालों के कारण छात्रों के सपने टूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों की गूंज केवल अभियान नहीं बल्कि युवाओं के अधिकारों की आवाज है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कार्यक्रम में पीसीसी उपाध्यक्ष हीरालाल दरांगी, लोकसभा प्रत्याशी ताराचंद मीणा, पूर्व विधायक प्रीति गजेंद्र सिंह शक्तावत, पीसीसी महासचिव पंकज शर्मा, पीसीसी सचिव भीम सिंह चुंडावत सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
एकतरफा रिश्ते की नाराजगी किस हद तक पहुंच सकती है, इसका चौंकाने वाला मामला मध्यप्रदेश के भोपाल से सामने आया है, जहां एक युवती ने उदयपुर निवासी युवक पर लगातार साइबर उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। पीड़िता के अनुसार उसकी बहन ने विवाह के लिए जीवनसाथी डॉट कॉम पर प्रोफाइल बनाई थी। इसी दौरान उदयपुर निवासी युवक से संपर्क हुआ और परिवार की मौजूदगी में दोनों की एक मुलाकात भी हुई। हालांकि युवक का व्यवहार संदिग्ध लगने पर परिवार ने रिश्ते को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। युवती का आरोप है कि इसके बाद युवक लगातार कॉल और मैसेज कर उसे परेशान करने लगा। जुलाई 2025 में उसका नंबर ब्लॉक करने के बावजूद आरोपी अलग-अलग नंबरों से संपर्क करने की कोशिश करता रहा और परिवार के अन्य सदस्यों को भी परेशान करने लगा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि जनवरी 2026 में युवक ने उसके घर के पते पर ओला, उबर और रैपिडो के माध्यम से लगातार बुकिंग कराईं। एक ही दिन में करीब 500 टैक्सी और बाइक उसके घर पहुंच गईं। आरोपी ने उज्जैन के लिए लंबी दूरी की राइड बुक की थी, जिसके कारण अधिक कमाई की उम्मीद में कई ड्राइवरों ने बुकिंग स्वीकार कर ली और उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ा। युवती के मुताबिक ब्लॉक किए जाने के बाद आरोपी ने किसी अन्य व्यक्ति की तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल बनाई और उसके निजी जीवन की जानकारी जुटाने का प्रयास किया। इतना ही नहीं, उसने युवती की गोद भराई के फर्जी निमंत्रण पत्र भी छपवाए। इन कार्डों में मेहमानों को चांदी का सिक्का देने का उल्लेख किया गया, ताकि अधिक से अधिक लोग कार्यक्रम में पहुंचें। बाद में हॉकर के जरिए पूरी कॉलोनी में ये कार्ड बंटवाए गए। पीड़िता का आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी ने एआई की मदद से शादी और हनीमून की फर्जी तस्वीरें बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दीं। मामले की शिकायत मध्यप्रदेश महिला आयोग में की गई है, जहां हाल ही में युवती ने अपने बयान दर्ज कराए हैं और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं साइबर एक्सपर्ट शृंगारिता खरे के अनुसार एआई से किसी व्यक्ति की फर्जी या मॉर्फ्ड तस्वीरें बनाना निजता का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। फिलहाल महिला आयोग पूरे मामले की जांच कर रहा है।
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