आवाज़ हम सबकी
उदयपुर में एक बुजुर्ग महिला पर चाकू से जानलेवा हमला कर बदमाश उसके गले से मादलिया लूटकर फरार हो गए। हमले में महिला बुरी तरह घायल हो गई। उसके चेहरे और हाथ पर चोटें आई हैं। आसपास के लोगों को जब तक पता चलता, तब तक हमलावर भाग चुके थे। पड़ोसियों द्वारा घायल बुजुर्ग महिला को तुरंत स्थानीय सरकारी हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। वहीं, पुलिस आसपास के सीसीटीवी खंगालते हुए लुटेरों की तलाश में जुटी है। यह मामला कानोड़ थाना क्षेत्र के कुम्हारों के मोहल्ले का है और घटना शुक्रवार शाम की है।"थानाधिकारी हुकमसिंह ने बताया- घटना कुम्हारों का मोहल्ला क्षेत्र में शुक्रवार शाम की है। जब 75 वर्षीय घीसी बाई खटीक घर में अकेली बैठी हुई थीं, तभी अज्ञात बदमाशों ने पीछे से उन पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। इसके बाद बदमाश उनके गले से सोने का मादलिया लूटकर फरार हो गए। महिला के चीखने की आवाज सुनकर आस-पड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे, तो बुजुर्ग महिला को घायल अवस्था में देखकर दंग रह गए। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए आरोपियों की तलाश में जुटी है। थानाधिकारी ने बताया- घीसी बाई घर में अकेली रहती हैं और उनके बच्चे बाहर काम करते हैं।
नाबालिक के साथ दुष्कर्म की घटना के विरोध में शुक्रवार को वल्लभनगर कस्बे का बाजार पूरी तरह बंद रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीण और व्यापारी सड़क पर उतरे और वल्लभनगर-मावली मुख्य मार्ग पर बैठकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के कारण कुछ समय तक यातायात भी प्रभावित रहा। इसके बाद प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में एसडीएम कार्यालय पहुंचे और एसडीएम रमेश चन्द्र वडेरा को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने, मामले की निष्पक्ष जांच करने, शीघ्र चालान पेश करने और पीड़िता को जल्द न्याय दिलाने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों का कहना था कि इस तरह की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई ही अपराधियों में कानून का भय पैदा कर सकती है। मामले को लेकर पुलिस उपाधीक्षक सरवन दास संत ने बताया कि करीब दो माह पहले नाबालिग के परिजनों ने वल्लभनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार चार युवकों ने कथित रूप से प्रलोभन देकर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। शिकायत में एक अन्य युवक पर भी दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है। पुलिस के अनुसार अब तक इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द उसे भी गिरफ्तार किए जाने की बात पुलिस ने कही है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। वहीं, क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा और प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
उदयपुर जिले के सायरा थाना क्षेत्र के नांदेशमा-ढोल मार्ग पर गुरुवार देर रात लेपर्ड की मौजूदगी एक बार फिर लोगों के लिए चिंता का कारण बन गई। ढोल के बड़गांव निवासी शैलेश श्रीमाली अपने भाई नयन श्रीमाली के साथ गोगुंदा से गांव लौट रहे थे। नयन श्रीमाली की गोगुंदा में मोबाइल शॉप है और दोनों भाई उदयपुर से सामान लेकर कार से वापस अपने गांव जा रहे थे। रात करीब 12 बजे जब उनकी कार चामुंडा माता मंदिर से करीब 200 मीटर आगे पहुंची, तब सड़क किनारे पत्थर की दीवार पर एक लेपर्ड बैठा दिखाई दिया। सामने लेपर्ड को देखते ही दोनों भाइयों ने घबराने के बजाय सूझबूझ दिखाई और कार को सुरक्षित दूरी पर रोक दिया। इसके बाद दोनों भाइयों ने मोबाइल से लेपर्ड का वीडियो बनाया। कुछ मिनट तक लेपर्ड दीवार पर बैठा रहा और आसपास का जायजा लेने के बाद धीरे-धीरे जंगल की ओर चला गया। इस दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय निवासी शैलेश श्रीमाली ने बताया कि इस इलाके में लेपर्ड पहले भी कई बार दिखाई दे चुका है। खासकर बाइक से आने-जाने वाले लोगों को अक्सर लेपर्ड नजर आता है, जिससे ग्रामीणों और राहगीरों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने, लेपर्ड की गतिविधियों पर निगरानी रखने और लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
उदयपुर के मुखर्जी चौक स्थित वर्षों पुरानी सब्जी मंडी को हटाने की कार्रवाई के बाद शुक्रवार को नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना मौके पर पहुंचे और मंडी क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने व्यापारियों से बातचीत कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया, लेकिन इस दौरान कार्रवाई को लेकर विरोध के स्वर भी सुनाई दिए। सदर अंजुमन के पदाधिकारी मुख्तार कुरेशी ने नगर निगम के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई एकतरफा है। उनका आरोप था कि प्रभावित व्यापारियों और समाज की बात सुने बिना पहले से तय निर्णय लागू किया गया। उन्होंने कहा कि दशकों पुराने बाजार को केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता और किसी भी समुदाय की आजीविका पर इस तरह का असर उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि संवाद से समाधान नहीं निकला तो प्रभावित पक्ष न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगा। दरअसल, गुरुवार को नगर निगम ने मुखर्जी चौक क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करते हुए करीब 60 वर्षों से व्यापार कर रहे फल और सब्जी विक्रेताओं को हटाया था। इसके विरोध में बड़ी संख्या में व्यापारी निगम कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया। व्यापारियों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना उन्हें हटा दिया गया, जिससे उनका सामान खराब हो रहा है और परिवार की आजीविका संकट में पड़ गई है। दूसरी ओर नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि मुख्य सड़क पर लगने वाला अस्थायी बाजार लंबे समय से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम का उद्देश्य किसी व्यापारी की रोजी-रोटी छीनना नहीं, बल्कि सभी विक्रेताओं को मंडी परिसर के भीतर व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराना है, ताकि यातायात सुचारु रहे और पार्किंग की बेहतर सुविधा विकसित की जा सके।
उदयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा दिए गए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है। एमबी हॉस्पिटल परिसर में स्थित संक्रामक रोग वार्ड और त्वचा रोग विभाग के सामने की सड़कें इस समय सीवरेज के गंदे और बदबूदार पानी से सराबोर हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जो सीवरेज लाइन बिछाई गई थी, वह अब पूरी तरह से चोक हो चुकी है, जिसके कारण गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को पहले से ही संक्रमण का खतरा रहता है, और ऐसे में इस संक्रामक वार्ड के बाहर ही गंदगी का यह अंबार जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अस्पताल प्रशासन और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी इस बड़ी समस्या को देखकर भी पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठे हैं। तीमारदारों का कहना है कि बदबू के कारण वार्डों में बैठना भी मुश्किल हो गया है, जिससे मरीजों की तबीयत और ज्यादा बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने इस बदइंतजामी के लिए सीधे तौर पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के इंजीनियरों और प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि काम में भारी लापरवाही बरती गई है, जिसका नतीजा आज जनता को भुगतना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या के बाद भी नगर निगम के आयुक्त और स्मार्ट सिटी के सीईओ की तरफ से अब तक सीवरेज की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अगर जल्द ही इस उफनते सीवरेज को ठीक नहीं किया गया, तो अस्पताल परिसर में कोई बड़ी महामारी फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
राजसमंद जिला पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल के निर्देश पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर सेक्सटॉर्शन ब्लैकमेलिंग के मामले में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस टीम ने अलवर से दो शातिर आरोपियों माहिर आजाद और मनीष खान को गिरफ्तार किया है। दोनों पर रेलमगरा क्षेत्र के एक व्यापारी से 12 लाख 14 हजार रुपये की ठगी करने का आरोप है। जानकारी के मुताबिक पीड़ित व्यापारी के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से वीडियो कॉल आई। कॉल रिसीव करते ही स्क्रीन पर एक नग्न महिला दिखाई दी। इसी दौरान आरोपियों ने वीडियो रिकॉर्ड कर उसे एडिट कर लिया। इसके बाद शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल। आरोपी कभी खुद को पुलिस अधिकारी बताते रहे और कभी यूट्यूबर बनकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने की धमकी देते रहे। बदनामी के डर से व्यापारी ने अलग-अलग किस्तों में आरोपियों को करीब 12 लाख 14 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद आरोपियों की पैसों की मांग लगातार जारी रही। आखिरकार परेशान होकर पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद टीम ने अलवर पहुंचकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में इस गिरोह से जुड़ी कई अन्य वारदातों का भी खुलासा हो सकता है। राजसमंद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल रिसीव करने से बचें। यदि कोई व्यक्ति अश्लील वीडियो या फोटो के नाम पर ब्लैकमेल करता है, तो घबराकर पैसे न दें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
उदयपुर में गुरुवार को अल्पसंख्यक समाज के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधीश के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए विभिन्न मांगें रखीं। ज्ञापन में राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में मंदिरों, मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों पर कथित प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चिंता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों का कहना है कि ऐसी कार्रवाई संविधान और कानून के अनुरूप निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि सभी समुदायों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान बना रहे और सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो। ज्ञापन में प्रशासन से धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में संवैधानिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई। इसके अलावा, ज्ञापन में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित वीडियो का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि उक्त वीडियो में महिला नाजिया इलाही खान द्वारा इस्लाम धर्म से जुड़े पूजनीय व्यक्तित्वों के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं, जिससे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। ज्ञापन में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की गई। साथ ही ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि यदि संबंधित वीडियो कानून का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके प्रसार पर रोक लगाने और संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अल्पसंख्यक समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी मांग का उद्देश्य कानून व्यवस्था, सामाजिक शांति और आपसी भाईचारे को बनाए रखना है। प्रशासन से पूरे मामले में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया।
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