आवाज़ हम सबकी
प्रतापनगर थाना क्षेत्र की ढेबर कॉलोनी में गुरुवार रात एक मामूली कहासुनी ने ऐसा मोड़ लिया कि मामला हाथापाई और मारपीट तक पहुंच गया। घटना के दौरान सड़क पर लोगों की भीड़ लग गई और कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। जानकारी के मुताबिक ढेबर कॉलोनी निवासी गोपाल वाघेला रात को भोजन के बाद टहलने के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात देवराज नामक युवक से हुई। किसी पुरानी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि देवराज नशे की हालत में था और विवाद बढ़ने पर उसने अपना आपा खो दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए गोपाल वाघेला के साथ मारपीट शुरू कर दी। अचानक हुए हमले में गोपाल वाघेला को शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं। घटना के समय आसपास मौजूद लोगों और नाबालिग बच्चों में भी दहशत फैल गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल हस्तक्षेप कर दोनों को अलग किया और स्थिति को शांत कराया। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और घायल को उपचार के लिए अस्पताल लेकर गए। इलाज के बाद गोपाल वाघेला ने प्रतापनगर थाने में आरोपी देवराज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई। प्रतापनगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं क्षेत्रवासियों ने कॉलोनी में बढ़ती ऐसी घटनाओं पर चिंता जताते हुए नियमित पुलिस गश्त और असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उदयपुर शहर के पंचवटी स्थित ज्वेलरी शॉप से एक करोड़ की ज्वेलरी चोरी के मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि मास्टरमाइंड सहित अभी 3 आरोपी फरार हैं। पुलिस की टीम प्रदेश सहित बाहरी राज्यों में दबिश देते हुए फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। जिसके बाद ही इनसे ज्वेलरी बरामद की जाएगी। मामला हाथीपोल थाना इलाके का है। यूपी के इटावा में छिपा था थानाधिकारी राजू देवी ने बताया कि आगरा निवासी धनपाल उर्फ धांधु वर्मा को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी यूपी के इटावा में छिपा था। आरोपी इतने शातिर हैं कि ट्रेप होने से बचने के लिए मोबाइल भी नहीं रखते थे। पुलिस बाकी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर ज्वेलरी बरामद करेगी।पुलिस के अनुसार- 28 जुलाई को आरोपी धनपाल और उसके साथी मनोज कुमार उर्फ डॉक्टर, आनंद वर्मा और एक अन्य के साथ आगरा से सीकर स्थित खाटूश्याम मंदिर पहुंचे थे। दर्शन करने के बाद सभी सीकर के पास पलसाना गांव गए थे। वहां एक ज्वेलरी शॉप में चोरी की तैयारी थी लेकिन रात में गार्ड की तैनातगी के कारण उनका प्लान फेल हो गया था। आरोपी 29 जुलाई को सुबह सभी उदयपुर आ गए। यहां पंचवटी में नवीन ज्वेलरी शॉप की रैकी की। इसके बाद रात को वारदात को अंजाम दिया। एक-दो आरोपियों ने उदयपुर में पहले नौकरी की हुई है। ऐसे में आरोपी उदयपुर शहर से परिचित थे और इसीलिए वारदात करने पहुंचे थे।आरोपी 79 मिनट में करोड़ों के सोना-चांदी, डायमंड के जेवर और नकदी चुराकर ले गए थे। जिसमें 350 ग्राम सोना, 12 किलो चांदी, 22 लाख के डायमंड और 9.75 लाख रुपए की ज्वेलरी लेकर भागे थे।
उदयपुर जिला मुख्यालय पर गुरुवार को बारां फला, लखमान क्षेत्र के ग्रामीण और पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर पहुंचे। पीड़ित नन्दलाल मीणा ने जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि 5 अगस्त की सुबह करीब साढ़े सात बजे उनका बेटा आशिष सहित कई बच्चे स्कूल जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया और लाठी, लोहे के पाइप, पत्थरों, धारदार हथियारों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। ज्ञापन में बताया कि बच्चों की चीख-पुकार सुनकर हिम्मत मीणा, प्रेमचंद मीणा, ओमप्रकाश मीणा और सुशील मीणा बीच-बचाव के लिए पहुंचे, लेकिन उनके साथ भी मारपीट की गई और जान से मारने की कोशिश की गई। इस हमले में कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। पीड़ित परिवार का कहना है कि मुख्य आरोपी नाना ने बच्चों को रास्ते में रोककर जमीन को लेकर विवाद किया और रोहित नाम के छात्र के साथ मारपीट की इस मारपीट में रोहित के सिर पर चार टांके आए, आशिष के सिर पर छह टांके लगे, जबकि बादल के हाथ में गंभीर चोट आने से फ्रैक्चर हो गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना की रिपोर्ट टीड़ी थाने में दर्ज कराई गई थी। उनका आरोप है कि पुलिस कुछ नामजद आरोपियों को थाने लेकर आई, लेकिन मुख्य आरोपी नाना को छोड़ दिया गया। परिवार का कहना है कि आरोपी अब गांव में खुलेआम घूमकर लोगों में डर का माहौल बना रहा है, जिससे किसी भी समय बड़ी घटना होने की आशंका बनी हुई है। इसी को लेकर पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई, सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और गांव में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को गोवर्धन विलास थाना क्षेत्र के बलिचा चौराहे पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने विशेष जांच अभियान चलाया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के तत्वावधान में यह कार्रवाई जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश गुप्ता के निर्देश पर की गई। अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से बस संचालकों में हड़कंप मच गया। जांच टीम ने मौके पर एक-एक कर कुल 10 यात्री बसों की गहन जांच की। निरीक्षण के दौरान कई बसों में मूल बनावट में बिना अनुमति किए गए बदलाव सामने आए, जिन्हें यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना गया। जांच में मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर पांच बसों के खिलाफ मौके पर ही चालान की कार्रवाई की गई। इन बस संचालकों से कुल 75 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। वहीं गंभीर अनियमितताएं मिलने पर तीन लग्जरी स्लीपर बसों को जब्त कर सीज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान अपर जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राहुल चौधरी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार जोशी और जिला परिवहन अधिकारी मुकेश डाड सहित न्यायपालिका, परिवहन विभाग, प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि बिना अनुमति वाहनों की बनावट में बदलाव करना और परिवहन नियमों की अनदेखी करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यात्रियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वाले बस संचालकों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
उदयपुर नगर निगम के 272 प्लॉट के बहुचर्चित घोटाले मामले में गिरफ्तार हुए एक महिला और उसके पति को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें 5 दिन की रिमांड पर भेजा है। रिमांड के दौरान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) टीम प्लॉट प्रकरण में आरोपियों की भूमिका को लेकर पूछताछ करेगी। साथ ही बेनामी सम्पत्ति को लेकर जांच की जाएगी। बता दें SOG ने एक दिन पहले पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उसके पति निरंजन मोगरा को जोधपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान इनके आवास से करीब 2 किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपए नकद बरामद किए थे। जिसकी जांच की जा रही है। बता दें, एसओजी इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। ये है पूरा मामला जानकारी के अनुसार- 272 प्लॉटों के घोटाले में साल 2022 में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसमें बताया गया था कि आरोपियों ने नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से हिरण मगरी सेक्टर-11 में निगम के 546 नंबर प्लॉट के फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। फर्जी व्यक्ति किशन पटेल के नाम से निगम में लीजडीड और नामांतरण पत्र जारी करवा लिए। फिर सलूंबर निवासी अनिल कचौरिया को 50.01 लाख में बेच दिया।मामले में एसओजी ने जांच करते हुए आरोपी राजेंद्र धाकड़ को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया कि इसने एकलव्य बस्ती मल्लातलाई निवासी किशनलाल गमेती के बैंक खाते में 7 लाख रुपए जमा कराए थे। किशन ने यह रुपए निकालकर किशन मारवाड़ी और राकेश सोलंकी को दिए। दोनों ने पैसे विक्रम ताकड़िया तक पहुंचाए थे। बता दें कि यूडीए ने साल 2012 में नगर निगम को कुछ कॉलोनियां ट्रांसफर की थी। इनमें कई भूखंड खाली और अधिकांश कॉर्नर के थे। सार-संभाल नहीं करने से लोगों ने इन पर कब्जा कर लिया। कई भूखंडों के फर्जी दस्तावेज बनवाकर नामांतरण खुलवा लिए गए और कुछ दलालों को बेच दिए। राज्यपाल कटारिया और वर्तमान विधायक उठा चुके मुद्दा इस मुद्दे को सबसे पहले साल 2022 में कांग्रेस पार्षद अजय पोरवाल ने उठाया था। जांच के बाद 48 पट्टों को निगम ने निरस्त कर दिया। इस बीच पंजाब राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और वर्तमान उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने भी इस मुद्दे को कई बार उठाया था। इसे 500 करोड़ को घोटाला बताया था। अप्रैल 2022 से एसओजी मामले की जांच कर रही है। सबसे पहले एसओजी ने गुजरात के पंचमहल के पूर्व वार्ड पंच राकेश सोलंकी, उदयपुर निवासी दीपक सिंह और किशनलाल को गिरफ्तार किया था।
खेरवाड़ा पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले बावलवाड़ा उप तहसील क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर लाडदेश पट्टा संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी और क्षेत्रवासी बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंचे। जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में क्षेत्र की 14 सूत्रीय मांगों के शीघ्र समाधान की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आजादी के बाद से अब तक क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।मोर्चा ने ज्ञापन में बताया कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। कई स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त कक्ष नहीं हैं और शौचालय, पेयजल एवं खेल मैदान जैसी आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव है। ग्राम पंचायत ढीकवास के भलाई और मगरा सहित कई विद्यालयों में कक्ष-कक्ष और शिक्षकों की समस्या गंभीर बनी हुई है। कई जर्जर विद्यालयों की मरम्मत नहीं कराई गई है, जबकि कुछ स्कूलों का संचालन निजी मकानों में किया जा रहा है।ज्ञापन में बरसात के दौरान सड़क और पुलिया क्षतिग्रस्त होने से दर्जनों गांवों का संपर्क टूटने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। विशेष रूप से सुकड़ी नदी पर बने रपट पुल की वर्षों से मरम्मत नहीं होने का उल्लेख करते हुए क्षेत्रवासियों ने कहा कि इससे आमजन, विद्यार्थी, कर्मचारी और मजदूरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को क्षेत्र का दौरा कर वास्तविक स्थिति देखने का निमंत्रण भी दिया। प्रतिनिधियों का कहना है कि जिला कलेक्टर ने क्षेत्र का निरीक्षण करने का आश्वासन दिया है। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि विकास के मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। साथ ही आगामी पंचायती राज चुनाव में भी क्षेत्र की जनता अपनी रणनीति तय करेगी।
ड्यूटी पर जाने की तैयारी के बीच हुई एक दर्दनाक घटना ने भीलवाड़ा पुलिस महकमे को गहरे सदमे में डाल दिया। सदर थाना प्रभारी लोकपाल सिंह मंगलवार शाम अपने नेहरू विहार स्थित घर पर वर्दी पहन रहे थे। परिजनों के मुताबिक, शाम सात बजे थाना क्षेत्र में प्रस्तावित नाकाबंदी के लिए उन्हें निकलना था। उन्होंने पहले अपने अधीनस्थ उपनिरीक्षक को फोन कर वाहन तैयार रखने के निर्देश भी दिए थे। इसी दौरान अचानक उनकी सर्विस रिवॉल्वर से गोली चल गई। गोली लोकपाल सिंह की कनपटी में लगी और सिर को आर-पार करते हुए निकल गई। गंभीर रूप से घायल होकर वह फर्श पर गिर पड़े। घर पर मौजूद उनकी पत्नी ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और उन्हें तुरंत महात्मा गांधी जिला अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए रामस्नेही प्राइवेट हॉस्पिटल रेफर किया गया।जिला पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने चिकित्सकों की सलाह पर बेहतर उपचार के लिए उन्हें उदयपुर के गीतांजलि हॉस्पिटल भेजने का निर्णय लिया। इसके बाद भीलवाड़ा से उदयपुर तक 157 किलोमीटर लंबे मार्ग पर विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। पूरे रास्ते यातायात को नियंत्रित किया गया और प्रत्येक थाना क्षेत्र में पुलिस एस्कॉर्ट की व्यवस्था की गई, जिससे एम्बुलेंस बिना किसी बाधा के महज 95 मिनट में उदयपुर पहुंच गई।अस्पताल पहुंचने से पहले ही सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम को अलर्ट कर दिया गया था। गीतांजलि हॉस्पिटल पहुंचते ही लोकपाल सिंह को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर इलाज शुरू किया गया। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी करते रहे, लेकिन गोली से हुए गंभीर घाव के कारण करीब आठ घंटे बाद बुधवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। भीलवाड़ा पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि गोली सिर को आर-पार निकल गई थी, जिससे स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। 38 वर्षीय लोकपाल सिंह अजमेर जिले के विजयनगर क्षेत्र के नादसी गांव के निवासी थे। उनकी पहली पत्नी से तलाक हो चुका था और करीब दो महीने पहले ही उन्होंने दूसरी शादी की थी। परिवार में उनके माता-पिता और तीन भाई हैं। उनकी असामयिक मृत्यु से पुलिस विभाग और उनके परिचितों में शोक का माहौल है। मौत के बाद मृतक का एमबी अस्पताल में पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है। गुरुवार को उनके पैतृक गांव विजयनगर में अंतिम संस्कार होगा
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