आवाज़ हम सबकी
त्योहारों के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और आमजन में सुरक्षा का भरोसा कायम करने के उद्देश्य से उदयपुर पुलिस द्वारा शहर के संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला गया। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के नेतृत्व में निकाले गए इस फ्लैग मार्च में पुलिस अधिकारियों और जवानों ने शहर के प्रमुख मार्गों पर पैदल मार्च करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया। फ्लैग मार्च में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर उमेश ओझा, शहर के सभी सीओ, थानाधिकारी, कालिका पेट्रोलिंग यूनिट और पुलिस बल के जवान शामिल रहे। पुलिस का यह मार्च घंटाघर, धानमंडी, हाथीपोल, सूरजपोल और अंबामाता थाना क्षेत्र के संवेदनशील मार्गों से होकर गुजरा। मार्च के दौरान पुलिस ने विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और असामाजिक तत्वों पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए। पुलिस अधिकारियों ने आमजन से भी शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उदयपुर पुलिस का कहना है कि त्योहारों के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और पुलिस की गश्त लगातार बढ़ाई गई है। फ्लैग मार्च समाप्त होने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक लेकर कानून व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही त्योहारों के दौरान सतर्कता बरतने और आमजन से बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी जारी किए गए।
बिजनोल ग्राम पंचायत क्षेत्र में पिछले कई दिनों से पेयजल संकट गहराने के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 20 दिनों से नियमित रूप से पीने के पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जबकि पिछले 45 दिनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि 10 दिन में केवल एक बार और वह भी महज 15 मिनट के लिए पानी की सप्लाई दी जा रही है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। इसी समस्या को लेकर मंगलवार को ग्राम पंचायत मुख्यालय पर सैकड़ों ग्रामीण एकत्रित हुए और जलदाय विभाग के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। महिलाओं ने खाली मटके फोड़कर अपना विरोध जताया और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि घरों में पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं है और उन्हें दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जलदाय विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत करवाया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। जनप्रतिनिधियों को भी स्थिति बताई गई, फिर भी गांव में पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। धरना प्रदर्शन में समाजसेवी प्रवीण सिंह चुंडावत, शंभु सिंह, देवी सिंह, राम सिंह, भंवर सिंह, किशन सिंह, मथुरा लाल गुर्जर, लोकेश गुर्जर, उदय लाल, गोपाल गुर्जर, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कलेक्टर कार्यालय पर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
उदयपुर में बढ़ती छीना-झपटी की घटनाओं के बीच सवीना थाना क्षेत्र में हुई इस वारदात ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पीड़िता शिरीन रूही कुरैशी ने सवीना थाने में शिकायत देकर बताया कि 23 मई की रात करीब 8 बजकर 45 मिनट पर वह सवीना क्षेत्र से अपने घर की ओर जा रही थीं। इसी दौरान अचानक एक ब्ल्यू कलर की बाइक पर सवार तीन युवक उनके पास पहुंचे और उनका पर्स छीनकर फरार हो गए। पीड़िता के अनुसार पर्स में जरूरी दस्तावेजों के साथ करीब 4 हजार रुपए की नकदी भी रखी हुई थी। घटना इतनी तेजी से हुई कि महिला संभल भी नहीं पाई और बदमाश मौके से भाग निकले। वारदात के बाद क्षेत्र में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस पूरी घटना का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बाइक सवार संदिग्ध युवक नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। सवीना थाना पुलिस अब आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि बदमाशों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया गया है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और वारदात में शामिल तीनों बदमाशों की तलाश लगातार जारी है।
महाराष्ट्र में हाल ही में सामने आए टीसीएस धर्मांतरण मामले के बीच अब उदयपुर से जुड़ा यह नया मामला सामने आने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। इस पूरे मामले की शुरुआत मुंबई के बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी है, जहाँ पीड़ित युवक और उसकी पत्नी साथ काम करते थे। पीड़ित ने उदयपुर के सुखेर थाने में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि साल 2022 में बांद्रा ईस्ट निवासी मोहम्मद आदिल ने उसकी पत्नी को झांसे में लेकर उसका ब्रेनवॉश शुरू किया, जिसके बाद पत्नी ने हिजाब पहनना शुरू कर दिया था। आरोप है कि आदिल ने न केवल महिला को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया, बल्कि उनके संयुक्त खाते से 2 लाख 59 हजार रुपए भी ऐंठ लिए। इतना ही नहीं, शारीरिक शोषण के बाद महिला का गर्भपात भी करवाया गया। पीड़ित के मुताबिक, जैसे-तैसे आदिल से पीछा छुड़ाया तो उसने अपने दोस्त और एसबीआई कर्मचारी साफिन गोडल को इस साजिश में शामिल कर लिया। साफिन ने धमकाया कि पत्नी को मोहम्मद आदिल से तो बचा लिया, लेकिन उससे नहीं बचा पाएगा। उसने बताया कि पत्नी बच्ची के साथ जल्द मुस्लिम धर्म अपना लेगी। कुछ दिनों बाद साफिन की महिला मित्र नेहा शर्मा ने कॉल कर पत्नी को मुंबई भेजने के लिए कहा। नहीं मानने पर नौकरी से बर्खास्त कराने की धमकी दी। घर में उर्दू की किताबें मिलने और पत्नी द्वारा सुसाइड की धमकी देने के बाद मामला और गंभीर हो गया। समझाइश पर पत्नी गलत कदम नहीं उठाने के लिए मान गई। उसने मुंबई से उदयपुर ट्रांसफर कराने की बात कही। ऐसे में वह बेटी और पत्नी को उदयपुर छोड़कर वापस मुंबई चले गए। 18 अप्रैल को जब पीड़ित उदयपुर आने वाला था, उससे पहले ही सुबह करीब पौने छह बजे पत्नी अपनी 9 साल की बेटी, 5 लाख रुपए नकद और सोने के जेवर लेकर साफिन गोडल के साथ फरार हो गई। पीड़ित ने आशंका जताई है कि इस पूरी साजिश के पीछे कोई बड़ा धार्मिक संगठन और अपराधी जुड़े हो सकते हैं, जिनका काम दूसरे धर्म की महिलाओं का यौन शोषण और धर्मांतरण कराना है। फिलहाल, सुखेर थानाधिकारी इस मामले की तकनीकी पहलुओं से जांच कर रहे हैं। युवक ने महाराष्ट्र से डाक के जरिए जिला पुलिस अधीक्षक को शिकायत की थी, जिसके आधार पर अब आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसा जा रहा है। उदयपुर एसपी डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि पीड़ित युवक की रिपोर्ट के आधार पर धर्मांतरण के नए कानून की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। मामले का अनुसंधान जारी है। इसके बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो पाएगा। फिलहाल मामले की जांच को लेरक उदयपुर पुलिस की एक टीम मुंबई के लिए रवाना हो गयी है।
सलुम्बर के कूण थाना क्षेत्र से पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। भगवती लाल मीणा, चिराग मीणा, मंजू बाई मीणा सहित पीड़ित परिवार ने सोमवार को उदयपुर आईजी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दी और आरोप लगाया कि 17 मई की रात उनके घर पर गांव के ही लोगों ने हमला कर दिया। शिकायत में पीडित ने बताया कि लोगर मीणा, धना मीणा, शंकर मीणा सहित करीब 35 से 40 लोग लाठी, कुल्हाड़ी, सरिया और पत्थरों के साथ घर में घुस आए और पूरे परिवार पर हमला कर दिया। परिवार का आरोप है कि इस हमले में करीब 11 से 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, घर में तोड़फोड़ की गई और चांदी के जेवर और नकदी भी ले गये। पीड़ितों का कहना है कि घटना के दौरान 112 और कूण थाना पुलिस को फोन किया गया, लेकिन पुलिस ने वाहन और स्टाफ की कमी का हवाला देकर आने से मना कर दिया। शिकायत में कहा गया कि करीब एक घंटे तक हमला चलता रहा। बाद में दो पुलिसकर्मी बाइक से पहुंचे, लेकिन तब तक हमलावर मौके पर मौजूद थे। घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से कई लोगों को उदयपुर रेफर किया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि बाद में जब एफआईआर दर्ज करवाने और फोटो-वीडियो सबूत दिखाने की कोशिश की गई तो पुलिस ने उनका फोन जब्त कर उन्हें थाने से भगा दिया। पीड़ितों का कहना है कि हमलावर अब भी जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं और गांव लौटने पर गर्दन काटने की बात कह रहे हैं। पीड़ित परिवार ने आईजी से निष्पक्ष जांच, आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई और परिवार को सुरक्षा देने की मांग की है।
उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल परिसर में बने जनाना अस्पताल में संचालित निःशुल्क भोजनशाला में सोमवार दोपहर अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। दोपहर करीब 12 बजे हुए इस हादसे के दौरान भोजनशाला में खाना तैयार किया जा रहा था और बड़ी संख्या में लोग भोजन कर रहे थे। अचानक आग भड़कने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग प्लेटें छोड़कर बाहर की तरफ दौड़ पड़े। हादसे में मालदास स्ट्रीट निवासी 65 वर्षीय सज्जन बाई मामूली रूप से झुलस गई। सज्जन बाई ने बताया कि वह पिछले डेढ़ महीने से भोजनशाला में रोटियां बनाने का काम कर रही हैं। उनके अनुसार खाना बनाने की मशीन से जुड़े बिजली के तार में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसके बाद आग भड़क गई। आग से उनकी साड़ी ने भी आग पकड़ ली, जिससे हाथ और पैर झुलस गए और सिर के आगे के बाल भी जल गए। बाद में उन्हें अस्पताल में उपचार दिया गया। प्रत्यक्षदर्शी भूपेंद्र सिंह धायबाई ने बताया कि तेज धमाके की आवाज सुनकर वह अपने स्टाफ के साथ नीचे पहुंचे। वहां सिलेंडर के बाहर गैस प्रेशर के कारण आग भड़क रही थी। ऐसे में हॉस्पिटल की पाइप लाइन से तुरंत आग बुझाने का प्रयास किया गया और सिलेंडर के प्रेशर को रोककर उसे सड़क पर सुरक्षित जगह फेंका गया। उनका कहना है कि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। हादसे के बाद भोजनशाला को बंद कर सभी सिलेंडरों को बाहर सुरक्षित स्थान पर रखवाया गया। वहीं भोजनशाला संचालक अशोक कुमार ने सिलेंडर में आग लगने और किसी के झुलसने की बात से इंकार करते हुए कहा कि हादसा केवल शॉर्ट सर्किट और रद्दी में आग लगने से हुआ था। फिलहाल पूरे मामले को जांच की जा रही है।
लगातार बढ़ रही महंगाई के बीच अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। राजस्थान में एक बार फिर ईंधन के दामों में बढ़ोतरी की गई है। उदयपुर में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 113 रुपए 49 पैसे प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल अब 98 रुपए 52 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं राजधानी जयपुर में पेट्रोल 109 रुपए 84 पैसे से बढ़कर 112 रुपए 66 पैसे और डीजल 95 रुपए 5 पैसे से बढ़कर 97 रुपए 78 पैसे प्रति लीटर हो गया है। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार मई महीने में यह चौथी बार है जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। 15 मई को 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद 19 मई को करीब 90 पैसे, 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हुआ। इसके बाद 25 मई को फिर पेट्रोल 2 रुपए 61 पैसे और डीजल 2 रुपए 71 पैसे प्रति लीटर महंगा कर दिया गया। ईंधन की बढ़ती कीमतों के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को मुख्य वजह माना जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा और घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में इजाफा किया गया। विपक्ष ने बढ़ती कीमतों को लेकर राज्य सरकार से वैट कम करने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सीधा असर मालभाड़े, खेती की लागत, बस-ऑटो किराए और रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से सब्जियां, फल और राशन महंगे हो सकते हैं, जबकि किसानों के लिए ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाना भी ज्यादा खर्चीला हो जाएगा।
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