आवाज़ हम सबकी
जिला उपभोक्ता आयोग तृतीय की अध्यक्ष देवेंद्र मोहन माथुर और सदस्य पवन कुमार भारद्वाज की पीठ ने उपभोक्ता प्रमोद कुमार खंडेलवाल की ओर से दायर दो अलग-अलग परिवादों का निस्तारण करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। आयोग ने माना कि दोनों मामलों में रिलायंस स्टोर की ओर से उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सेवाओं में कमी रही और कंपनी ने अनुचित व्यापारिक प्रथा अपनाई। पहला मामला 24 मार्च 2025 का है। परिवादी प्रमोद कुमार खंडेलवाल ने आमेर रोड स्थित रिलायंस स्मार्ट प्वाइंट से ब्रिटानिया टोस्ट का एक पैकेट खरीदा था। आरोप था कि स्टोर ने पैकेट पर अंकित मूल्य से एक रुपए अधिक वसूले। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि परिवादी ने अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त तथ्य प्रस्तुत किए, जबकि रिलायंस स्टोर अपनी सफाई में ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इसके बाद आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक प्रथा माना। आयोग ने एक रुपए की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने, मानसिक संताप के लिए 2 हजार 500 रुपए और वाद व्यय के लिए 2 हजार 500 रुपए, कुल 5 हजार रुपए देने के निर्देश दिए। साथ ही आयोग ने प्रमोद कुमार खंडेलवाल को जागरूक उपभोक्ता बताते हुए उनके प्रयासों की सराहना भी की। दूसरा मामला 11 मार्च 2025 का है, जब परिवादी ने रामगढ़ मोड़ स्थित रिलायंस स्मार्ट बाजार से 3 हजार 754 रुपए 32 पैसे की खरीदारी की थी। होली के अवसर पर स्टोर ने 2 हजार 499 रुपए या उससे अधिक की खरीदारी पर मात्र 9 रुपए अतिरिक्त देकर एक किलो चीनी देने का ऑफर घोषित किया था। खरीदारी पूरी होने के बाद जब परिवादी ने ऑफर के तहत चीनी मांगी तो कैशियर ने बारकोड नहीं होने का हवाला देकर चीनी देने से इनकार कर दिया। बाद में न तो चीनी दी गई और न ही उसके बदले कोई राशि लौटाई गई। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि यदि कोई व्यापारी किसी ऑफर के माध्यम से ग्राहकों को आकर्षित करता है तो उस ऑफर का लाभ उपलब्ध कराना उसका कानूनी और नैतिक दायित्व है। आयोग ने रिलायंस को परिवादी से 9 रुपए लेकर एक किलो चीनी या उसके बराबर बाजार मूल्य देने और मानसिक परेशानी और वाद दाखिल करने में जो खर्च हुआ उसके बदले में 5 हजार रुपए का भुगतान करने के आदेश दिए। इस प्रकार दोनों मामलों में रिलायंस स्मार्ट प्वाइंट और रिलायंस स्मार्ट बाजार पर कुल 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
डिजिटल दौर में साइबर अपराध लगातार नए तरीके अपना रहे हैं और अब उदयपुर पुलिस ऐसे गिरोहों पर लगातार शिकंजा कस रही है। बीते चौबीस घंटों के दौरान जिले के गोगुंदा, प्रतापनगर और सूरजपोल थाना क्षेत्रों में साइबर अपराध और बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़े कई गंभीर प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जांच में ऐसे बैंक खातों का खुलासा हुआ है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठग अवैध रूप से रकम ट्रांसफर करने और ठगी की राशि को इधर-उधर करने के लिए कर रहे थे। गोगुंदा थाना क्षेत्र में गोगुंदा निवासी आरोपी प्रकाश मेघवाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उसने फर्जी तरीके से बैंक खाते का दुरुपयोग कर अवैध धनराशि प्राप्त की। प्रतापनगर थाना पुलिस ने भी अलग-अलग कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए हैं। पहली कार्रवाई में बोहरा गणेश जी चौराहा निवासी रींकू यादव, दूसरी में एफ ब्लॉक निवासी हरि सिंह राजपूत, तीसरी में पुरोहितों की मादड़ी निवासी भैरू सिंह चारण और चौथी कार्रवाई जयराम कॉलोनी निवासी नवीन सिंह के खिलाफ की गई है। इन सभी मामलों में आरोप है कि उनके बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में किया गया। वहीं सूरजपोल थाना क्षेत्र में परिवादिनी माया कुमारी ने शिकायत दर्ज कराई कि मोबाइल पर एक मैसेज आने के दौरान उनके खाते से अलग अलग ट्राजेंक्शन जरिये करीब डेढ रुपये निकाल लिए गए। इस मामले में थानाधिकारी पुलिस निरीक्षक सूर्यभान सिंह के निर्देशन में अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इन सभी मामलों के तार जोड़ते हुए साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और उसके सरगनाओं तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
सागरमल जैन हत्याकांड के बाद हुई यूडीए की ध्वस्तीकरण कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राव समाज के पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिवक्ता राव रतन सिंह ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि जिस निर्माण को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया, वह आरोपी प्रवीण सिंह का नहीं बल्कि कैलाश कंवर राव का निर्माणाधीन मकान है। उनका कहना है कि भवन के लिए वैधानिक स्वीकृति ली गई थी और मामले में न्यायालय का स्थगन आदेश भी प्रभावी था। वरिष्ठ अधिवक्ता राव रतन सिंह ने सवाल उठाया कि यदि न्यायालय का स्थगन आदेश लागू था तो यूडीए ने किस कानूनी आधार पर कार्रवाई की। यदि निर्माण अवैध था तो पहले नोटिस क्यों नहीं दिया गया। यदि भवन किसी अन्य व्यक्ति के नाम था तो आरोपी के नाम पर ध्वस्तीकरण किस आधार पर किया गया। यदि निर्माण कई मंजिल तक पहुंच चुका था तो शुरुआती चरण में कार्रवाई क्यों नहीं हुई और बुलडोजर हत्या की घटना के बाद ही क्यों पहुंचा। राव समाज ने यह भी दावा किया कि घटना से जुड़े वीडियो की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम के सभी पहलुओं की जांच किए बिना एक पक्षीय कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। समाज ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ध्वस्तीकरण की पूरी प्रक्रिया, नोटिस, स्वीकृति, न्यायालय के आदेश और यूडीए की कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही उन्होने कहा कि यह कार्यवाही समुदाय विशेष के दबाव में की गयी है। मेवाड़ शासक राव समाज के अध्यक्ष रोड सिंह ने भी आरोप लगाया कि प्रवीण सिंह के खिलाफ दबाव में कार्रवाई की गई है। वहीं कैलाश कंवर राव ने दावा किया कि निर्माणाधीन भवन उनका है, जिसे उन्होंने अपने नाम से खरीदी गई भूमि पर लोन लेकर बनवाया था और प्रवीण सिंह केवल निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे थे। राव समाज ने चेतावनी दी है कि यदि ध्वस्तीकरण की वैधानिकता की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और उनके सवालों का जवाब नहीं मिला तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। अब इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यूडीए ने ध्वस्तीकरण से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया? क्या भवन स्वामी को नोटिस दिया गया था? क्या न्यायालय के किसी स्थगन आदेश की अनदेखी हुई? क्या कार्रवाई तथ्यों के आधार पर हुई या समुदाय विशेष के दबाव में निर्णय लिया गया?
उदयपुर में गोगुंदा-पिंडवाड़ा हाईवे पर कार ने स्कूटी को टक्कर मार दी। हादसे में स्कूटी सवार पति-पत्नी और उनके छोटे बेटे की मौत हो गई। एक्सीडेंट के बाद आरोपी ड्राइवर व कार सवार दूसरे लोग मौके से फरार हो गए। हादसा बेकरिया थाना क्षेत्र में आकियावड़ के पास गुरुवार रात करीब 8:30 बजे हुआ। पुलिस के अनुसार एक्सीडेंट में राजसमंद जिले के रहने वाले नवनीत मीणा (36), संगीता (33) और उनके 8 साल के बेटे तुषार की मौत हुई है। वहीं, बड़ा बेटा निखिल (14) गंभीर घायल है।गोगुंदा थाना के एएसआई योगेंद्र सिंह ने बताया कि परिवार चक्की (राजसमंद) से पिंडवाड़ा की ओर जा रहा था। स्कूटी को आकियावड़ के पास कार ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूटी के परखच्चे उड़ गए। सभी घायलों को पुलिस ने गोगुंदा हॉस्पिटल में एडमिट कराया। यहां डॉक्टर ने तुषार को मृत घोषित कर दिया। अन्य तीन घायलों को उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल रेफर कर दिया।उदयपुर में इलाज के दौरान शुक्रवार सुबह सुबह पति-पत्नी मौत हो गई। बड़े बेटे निखिल की हालत गंभीर है। पुलिस के अनुसार हादसे के बाद कार में सवार लोग गाड़ी छोड़कर भाग गए थे। पुलिस ने दोनों दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को जब्त कर लिया है। फरार कार ड्राइवर की तलाश की जा रही है।
देवस्थान विभाग के अधीन सवीना मठ की करोड़ों रुपये मूल्य की कृषि भूमि को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि मंदिर की भूमि को सुनियोजित तरीके से खुर्द-बुर्द कर राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता राधा कृष्ण चावरिया ने आरोप लगाया कि सवीना मठ की कृषि भूमि देवस्थान विभाग के अधीन है, लेकिन तत्कालीन पटवारी मोहन सिंह राठौड़ और कथित भू-माफियाओं की मिलीभगत से इस भूमि का अवैध रूप से नामांतरण कर पट्टे आवंटित कर दिए गए। उन्होंने मांग की कि पूरी भूमि दोबारा देवस्थान विभाग के नाम दर्ज की जाए और इस पूरे मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया जा चुका है और आवश्यकता पड़ने पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में भी शिकायत दर्ज कराई जाएगी। वहीं हिंदू समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर रामलाल गुर्जर ने आरोप लगाया कि सवीना मठ में स्थित श्रीकृष्ण, राधा और भगवान शिव मंदिर की सेवा में लगे पुजारी गोपाल गिरि गोस्वामी ने शांतिलाल वेलावत, दिनेश और तत्कालीन पटवारी मोहन सिंह राठौड़ के साथ मिलीभगत कर मंदिर की भूमि को अपना पैतृक अधिकार बताकर बेच दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में इस भूमि की रजिस्ट्रियां कर अन्य लोगों को बेच दिया गया। ज्ञापन में दिनेश जैन, शशिकला मेहता, सुधा मेहता, ओमप्रकाश, रमेश, राकेश मूंदड़ा, गोपाल मुणोत, गोपाल गिरि गोस्वामी और तत्कालीन पटवारी मोहन सिंह राठौड़ के नाम का उल्लेख करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, अवैध रजिस्ट्रियां निरस्त करने और भूमि को फिर से मंदिर एवं देवस्थान विभाग के नाम दर्ज करने की मांग की गई है।
उदयपुर की भूपालपुरा थाना पुलिस ने 23 स्थाई वारंटों में 15 साल से फरार चल रहे आरोपी को साधु के भेष में उत्तराखंड के ऋषिकेश से गिरफ्तार किया है। आरोपी अपनी पहचान छिपाकर साधु के रूप में रह रहा था। डीएसपी छवि शर्मा के सुपरविजन में टीम को गठन किया गया। 15 साल से दे रहा था चकमा गिरफ्तार आरोपी श्यामालाल (78) पुत्र परसराम निवासी मीरा कॉलोनी पिछले 15 साल से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी साधु का भेष धारण कर उत्तराखंड में छिपा हुआ है। इस पर पुलिस की टीम उत्तराखंड पहुंची। जहां पुलिस ने आरोपी को जगह-जगह तलाशा। पुलिस को उसके ऋषिकेश में होने का अंदेशा हुआ। पुलिस ने लोगों को पुराने फोटो दिखाए पुलिस ऋषिकेश पहुंची। वहां मंदिरों और घाटों पर जा जाकर आरोपी की पुरानी तस्वीरें दिखाई। जगह-जगह लोगों से पूछताछ करते हुए आरोपी का पता किया। जिसके बाद आरोपी एक मंदिर में साधु के वेष में मिला। बाद में आरोपी को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई में कॉन्स्टेबल आसुराम और रघुवीर सिंह की विशेष भूमिका रही।
भूताला गांव में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब तालाब के ऊपर से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन लाइन अचानक टूटकर सीधे तालाब में गिर गई। लाइन गिरते ही तालाब के पानी में करंट दौड़ गया। इस दौरान वहां मौजूद एक बच्ची बाल-बाल बच गई, जबकि कुछ महिलाओं को करंट का जोरदार झटका लगने की सूचना है। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल बन गया। हादसे की सूचना मिलते ही गांव के सरपंच मोहन सिंह राजपूत मौके पर पहुंचे और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ अनोखा विरोध शुरू कर दिया। सरपंच बिजली के खंभे पर चढ़ गए और घोषणा की कि जब तक प्रशासन की ओर से हाईटेंशन लाइन को लेकर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं दिया जाएगा, तब तक वह नीचे नहीं उतरेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब एक माह पहले आयोजित रात्रि चौपाल के दौरान भी जिला कलेक्टर के सामने तालाब के ऊपर से गुजर रही इस हाईटेंशन लाइन को हटाने या दुरुस्त करने की मांग उठाई गई थी। बावजूद इसके बिजली विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते लाइन को ठीक कर दिया जाता तो यह हादसा नहीं होता। शाम तक सरपंच मोहन सिंह राजपूत खंभे पर ही डटे रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि देर शाम तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और न ही सरपंच से संपर्क करने का प्रयास किया गया। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए और बिजली विभाग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे।
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