आवाज़ हम सबकी
बिजनोल-पाखंड मार्ग पर स्थित तकड़ियों का गुड़ा मंडी के पास का खतरनाक मोड़ लंबे समय से दुर्घटनाओं का केंद्र बना हुआ है। 31 मई 2026 को हुए सड़क हादसे में आकोदड़ा निवासी बाबूलाल मेघवाल की मौत के बाद ग्रामीणों ने इस स्थान पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग तेज कर दी थी। अब न्यूज 91 द्वारा प्रमुखता से मुद्दा उठाए जाने के बाद विभाग हरकत में आया है। मौके पर विभाग द्वारा चेतावनी संकेतक बोर्ड लगाए जा रहे हैं और एक स्पीड ब्रेकर का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है। लेकिन ग्रामीण इस व्यवस्था को अपर्याप्त मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह मोड़ अत्यंत खतरनाक है और यहां एक नहीं बल्कि तीन स्पीड ब्रेकर लगाए जाने चाहिए, ताकि वाहन चालकों की गति नियंत्रित हो सके और भविष्य में हादसों को रोका जा सके। ग्रामीणों के मुताबिक इस विकट मोड़ पर पूर्व में भी 35 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। बाबूलाल मेघवाल की मौत के बाद लोगों में भारी आक्रोश है और वे स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। मड़ियाना प्रशासक भरत सिंह चुंडावत के साथ समाजसेवी प्रवीण सिंह चुंडावत, रघुवीर सिंह, किशन सिंह, मनीष वैष्णव, रतनलाल, अरविंद सिंह, लोकेश गुर्जर, चम्पालाल, सुरेंद्र सिंह, दलपत सिंह, जीवन सिंह तथा गो-रक्षक प्रवीण सिंह चुंडावत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचकर तीन स्पीड ब्रेकर लगाने की मांग पर अड़े हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक तीनों स्पीड ब्रेकर नहीं लगाए जाते, तब तक इस दुर्घटना संभावित क्षेत्र में लोगों की जान जोखिम में बनी रहेगी। अब सभी की नजर विभाग के अगले कदम पर टिकी हुई है।
उदयपुर जिले के कानोड़ कस्बे स्थित उचित मूल्य दुकान कानोड़-बी एक बार फिर विवादों में आ गई है। इस बार मामला सरकारी गेहूं के वितरण में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जहां उपभोक्ताओं को राशन सामग्री देने के बजाय नकद राशि देकर भेजे जाने के आरोप लगे हैं। पीपलवास निवासी उपभोक्ता लालू राम मीणा ने राशन डीलर के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि लंबे समय से उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा में सरकारी गेहूं नहीं दिया जा रहा था। उनका कहना है कि जब वे अपनी पात्रता के अनुसार गेहूं लेने दुकान पर पहुंचे तो डीलर ने उन्हें गेहूं देने के बजाय अपनी ओर से कुछ नकद राशि दे दी और वहीं से रवाना कर दिया। लालू राम मीणा का आरोप है कि जब उन्होंने बाजार मूल्य के अनुसार पूरी राशि या फिर अपने हिस्से का पूरा गेहूं देने की मांग की तो डीलर ने टालमटोल शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत संबंधित विभाग को दी। शिकायत मिलने पर जिला रसद विभाग उदयपुर से खाद्य निरीक्षक विशेष मीणा मंगलवार को कानोड़ पहुंचे। उन्होंने उचित मूल्य दुकान पर पहुंचकर मामले की जांच की और शिकायतकर्ता के बयान भी दर्ज किए। हालांकि जांच के बाद शिकायतकर्ता ने पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। लालू राम मीणा का कहना है कि उनके बयान तो दर्ज किए गए, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया कि बयान में क्या लिखा गया है। उनका आरोप है कि बयान पढ़कर नहीं सुनाए गए और न ही उनसे हस्ताक्षर करवाए गए। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि मामले को ठंडे बस्ते में डालने और संबंधित डीलर को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय ग्रामीणों और उपभोक्ताओं में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार द्वारा भेजे जाने वाले राशन में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। अब सभी की नजरें रसद विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होगी या मामला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।
उदयपुर के जेपी ऑर्थाेपेडिक हॉस्पिटल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट और हंगामे का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के विरोध में बुधवार को शहर के सभी चिकित्सक संगठनों ने आरएनटी मेडिकल कॉलेज में बैठक कर कड़ा विरोध जताया। इसके बाद डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और आरोपियों की गिरफ्तारी तथा सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं पुलिस ने अब तक 9 लोगों को हिरासत में लिया है और मामले में जांच जारी है। - उदयपुर के जेपी अस्पताल में सड़क हादसे में घायल कपड़ा व्यापारी कुलदीप जैन के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर परिजनों ने जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की। स्थिति बिगड़ने पर एएसपी उमेश ओझा सहित तीन थानों के जाब्ते ने मामला संभाला। बाद में घायल को गीतांजलि अस्पताल रेफर किया गया। पुलिस के अनुसार मंगलवार रात सूचना मिली थी कि जेपी ऑर्थाेपेडिक हॉस्पिटल के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंचा। इसके बाद डॉक्टरों की ओर से लिखित शिकायत दी गई, जिसमें इलाज में कथित लापरवाही को लेकर अस्पताल में तोड़फोड़ और डॉक्टरों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उच्च अधिकारियों को मौके पर भेजा गया और कानून व्यवस्था संभाली गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा राजस्थान चिकित्सा सेवा व्यक्ति और चिकित्सा सेवा संस्थान अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना में शामिल 9 लोगों को हिरासत में ले लिया है और उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हालांकि इस मामले में मरीज के परिजनों द्वारा भी पुलिस में एक परिवाद दिया गया है जिसमें डॉक्टर्स पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। उसकी भी जांच की जा रही है। मंगलवार देर रात जेपी ऑर्थाेपेडिक हॉस्पिटल में हुए हंगामे के बाद बुधवार को चिकित्सक समुदाय में गहरा आक्रोश देखने को मिला। आरएनटी मेडिकल कॉलेज में विभिन्न चिकित्सक संगठनों के पदाधिकारियों ने बैठक कर घटना की निंदा की और डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। इसके बाद डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल एसपी कार्यालय पहुंचा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। इधर घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। फुटेज में कुछ लोग अस्पताल परिसर में हंगामा करते और फर्नीचर उठाकर डॉक्टरों की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टर आनंद गुप्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में ही डॉक्टर जेपी शर्मा को गले से पकड़कर घसीटा गया। उन्होंने कहा कि बीच-बचाव करने पर उनके साथ भी मारपीट की गई और जान से मारने का प्रयास किया गया। इस घटना को लेकर डॉक्टर्स में काफी आक्रोश देखने को मिला। डॉक्टर्स का एक प्रतिनिधि मंडल ने एसपी अमृता दुहन से मुलाकात कर पुरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। डॉं आनंद गुप्ता ने बताया कि एसपी ने उन्हे आश्वासन दिया है कि इस मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन कर सभी दोषियों के खिलाफ कडी कार्रवाही की जायेगी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और शेष आरोपियों की तलाश जारी है। वहीं हादसे में घायल कपड़ा व्यापारी कुलदीप जैन को बेहतर उपचार के लिए गीतांजलि अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहत की बात यह है कि उन्हें होश आ गया है और उनकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। वही एसपी के आश्वासन के बाद अब डॉक्टस एसोसिएशन जो पांच दिन का कार्य बहिष्कार का एलान किया था उसे भी वापस ले लिया है।
उदयपुर के सुखेर थाना क्षेत्र में एक अधेड़ व्यक्ति के साथ कथित रूप से शादी के नाम पर धोखाधड़ी और आर्थिक शोषण का मामला सामने आया है। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि पत्नी की मृत्यु के बाद एक महिला और उसके कथित सहयोगियों ने उससे नाता विवाह कर विश्वास हासिल किया और बाद में लाखों रुपए तथा जेवरात लेकर अलग हो गए। पुलिस के मुताबिक सुखेर हवा मंगरी निवासी रामलाल सुधार ने बाउड़ी देवी, मंजू जांगिड़, जगदीश जांगिड़, शांता उर्फ शांति देवी और जेठाराम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि साल 2021 में पत्नी के निधन के बाद उसकी पहचान बाउड़ी देवी से हुई, जो उस समय उसके घर के सामने किराए के मकान में रहती थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच परिचय बढ़ा और बाद में विवाह का प्रस्ताव रखा गया। पीड़ित का आरोप है कि 15 नवंबर 2021 को नाता विवाह कराया गया, जिसमें कुछ लोगों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। विवाह के बाद शुरुआती कुछ माह तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में महिला का व्यवहार बदल गया। शिकायतकर्ता के अनुसार वह अक्सर विवाद करती, घर छोड़कर चली जाती और विभिन्न जरूरतों का हवाला देकर पैसों की मांग करती थी। इस दौरान उससे लाखों रुपए लिए गए। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि अगस्त 2024 में महिला अपने पीहर चली गई और वापस नहीं लौटी। इसके बाद घर की जांच करने पर करीब 25 तोला सोने के जेवर गायब मिले। शिकायतकर्ता का दावा है कि पूछने पर महिला ने जेवर अपने पास होने की बात स्वीकार की और बाद में बेटी के नाम प्लॉट और मकान खरीदने की शर्त रखी। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि मांग पूरी नहीं करने पर उसे झूठे मुकदमों में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकियां दी जा रही हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए सुखेर थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच कर रही है।
उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट पर मंगलवार को घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के सैकड़ों लोग अपने अधिकारों और आरक्षण की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन की खास बात यह रही कि आंदोलनकारी पारंपरिक वेशभूषा में ऊंटों पर सवार होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जिससे यह प्रदर्शन आम विरोध प्रदर्शनों से अलग नजर आया। घुमंतू विमुक्त जाति परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रतननाथ कालबेलिया के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में गाडोलिया, बंजारा, कालबेलिया, भोपा, रायका, रेबारी और देवासी सहित विभिन्न समुदायों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्षों से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। उनका आरोप है कि रेनके आयोग, इदाते आयोग और न्यायालयों की विभिन्न टिप्पणियों और सिफारिशों के बावजूद घुमंतू और विमुक्त जातियों को उनका अधिकार नहीं मिल पाया है। प्रदर्शनकारी आंध्र प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान में भी घुमंतू जातियों को 10 प्रतिशत संवैधानिक आरक्षण देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान रतननाथ कालबेलिया ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 1 जुलाई को जयपुर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि घुमंतू समाज की समस्याएं केवल आरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आज भी कई परिवारों के सामने भूमि और मूलभूत अधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दे मौजूद हैं। वहीं डीएनटी संघर्ष समिति के सह-अध्यक्ष कालूराम योगी ने भी सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की। प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और भारी पुलिस जाब्ता मौके पर तैनात रहा।
शहर में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए उदयपुर विकास प्राधिकरण ने मंगलवार को छोटा हवाला क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। सुबह से शुरू हुए इस अभियान में यूडीए की टीम ने भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माणों को हटाया। कार्रवाई के लिए पांच बुलडोजरों को लगाया गया, जिन्होंने चिन्हित अतिक्रमणों को एक-एक कर ध्वस्त करना शुरू किया। यूडीए अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रहकर पूरे अभियान की निगरानी की और निर्धारित योजना के अनुसार कार्रवाई को आगे बढ़ाया। जैसे ही बुलडोजरों की कार्रवाई शुरू हुइ तो मौके पर लोगों की भीड जमा होनी शुरू हो गयी। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को मौके पर तैनात किया गया, जिन्होंने पूरे क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखी। कार्रवाई की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर जमा हो गए। कई लोग पूरी कार्रवाई को देखने के लिए घटनास्थल पर मौजूद रहे। हालांकि भीड़ के बावजूद प्रशासन ने अभियान को व्यवस्थित ढंग से जारी रखा और किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होने दी। जानकारी के मुताबिक जिन निर्माणों पर कार्रवाई की गई, उन्हें पहले से सरकारी भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के रूप में चिन्हित किया गया था। संबंधित पक्षों को नियमानुसार नोटिस जारी करने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही यह कार्रवाई अमल में लाई गई। यूडीए अधिकारियों का कहना है कि शहर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और अनधिकृत निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा। प्राधिकरण के अनुसार शहर के अन्य क्षेत्रों में चिन्हित अतिक्रमणों को हटाने के लिए भी आगामी दिनों में इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
उदयपुर मे सोमवार देर रात हिरण मगरी क्षेत्र के पानेरियों की मादड़ी में भट्ट तलाई नोहरे के पास स्थापित 11 केवी डीपी में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और इसके बाद वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रांसफार्मर से लगातार चिंगारियां निकलने लगीं और कुछ ही क्षणों में सूतली बम जैसे तेज धमाकों की आवाजें सुनाई देने लगीं। स्थिति इतनी गंभीर थी कि करीब 15 मिनट तक लगातार धमाके होते रहे। ट्रांसफार्मर से निकल रही चिंगारियां और तेज आवाजें सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। देखते ही देखते मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। इलाके में दहशत का माहौल बन गया और लोगों को किसी बड़े हादसे की आशंका सताने लगी। घटना के समय पास स्थित समाज के नोहरे में मांगलिक जागरण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था, जहां बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे और भोजन व्यवस्था भी चल रही थी। इसके अलावा नोहरे के बाहर कई वाहन खड़े थे। ऐसे में यदि आग फैलती या ट्रांसफार्मर फटता तो बड़ा नुकसान हो सकता था। हालात को भांपते हुए स्थानीय लोगों और समाजजनों ने तुरंत सक्रियता दिखाई। बिजली विभाग के कार्यालय को सूचना देकर तत्काल पावर कट कराया गया, जिससे स्थिति और ज्यादा बिगड़ने से बच गई। सूचना मिलते ही बिजली विभाग के कर्मचारी और स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गए और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित किया गया। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और न ही कोई व्यक्ति घायल हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बिजली आपूर्ति बंद नहीं करवाई जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। आवश्यक कार्रवाई और जांच के बाद देर रात क्षेत्र में बिजली आपूर्ति पुनः बहाल कर दी गई।
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