आवाज़ हम सबकी
त्योहारों की तैयारियों के बीच रसोई के बजट पर महंगाई की मार लगातार बढ़ती जा रही है। पहले चीनी, फिर सूखे मेवे, मावा और मिठाइयों के दाम बढ़े और अब रोजमर्रा की जरूरत वाले प्याज के भाव भी तेजी से ऊपर पहुंच गए हैं। प्याज के दाम में 50 से 60 रुपये तक की बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ता की चिंता बढ़ा दी है। घर का ऐसा कोई खाना नहीं, जिसमें प्याज की जरूरत न पड़ती हो। ऐसे में प्याज महंगा होने का सीधा असर महीने के रसोई बजट पर पड़ रहा है। व्यापारियों के मुताबिक बाजार में आवक और मांग के बीच अंतर का असर प्याज की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से कीमतों में और तेजी का असर भी बाजार में नजर आ रहा है। त्योहार खुशियों का मौका होता है, लेकिन बढ़ती महंगाई ने इन खुशियों के बीच खर्च की चिंता भी बढ़ा दी है। मिठास के सामान से लेकर रोजमर्रा की सब्जियों तक, बढ़ते दाम आम आदमी की जेब पर लगातार दबाव बना रहे हैं।
जश्ने ईद मिलादुन्नबी पर्व के नजदीक आते ही उदयपुर के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में त्योहार की रौनक दिखाई देने लगी है। 26 अगस्त को मनाए जाने वाले पर्व को लेकर स्थानीय लोग अपने-अपने इलाकों को सजाने में जुटे हुए हैं। घरों से लेकर गलियों और प्रमुख रास्तों तक रंग-बिरंगी विद्युत सजावट की जा रही है।सिलावटवाड़ी और सविना खेड़ा के साथ बरकत कॉलोनी, किशनपोल तथा अंबावगढ़ कच्ची बस्ती में भी सजावट का काम तेजी से चल रहा है। शाम ढलते ही विद्युत रोशनी से सजे इलाके आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। स्थानीय लोग पर्व से पहले सजावट को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। पर्व को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों में उत्साह का माहौल है। घरों और आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई के साथ सजावट का काम भी किया जा रहा है। प्रमुख मार्गों और गलियों को रोशनी से सजाने के लिए अलग-अलग तरह की विद्युत झालरें लगाई जा रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार बारावफात का पर्व उनके लिए धार्मिक आस्था और उत्साह से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। इसी को देखते हुए तैयारियां पहले से शुरू कर दी गई थी।
श्रावण मास के चौथे सोमवार के पावन पर्व पर उदयपुर शहर पूरी तरह से शिवमय नजर आया। रानी रोड स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का दौर जारी रहा। इसके बाद भव्य पालकी में विराजित कर भगवान महाकाल की शाही सवारी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। सवारी के दौरान बाबा महाकाल के स्वरूप का बहुत ही आकर्षक और मनमोहक श्रृंगार किया गया था। पालकी को रंग-बिरंगे और खुशबूदार फूलों से सजाया गया। यात्रा के आगे-आगे पारंपरिक वेशभूषा में चंवर डुलाते भक्त, ढोल-नगाड़े और ताशे बजाते कलाकार चल रहे थे। वहीं उनके पीछे भारी संख्या में श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए झूमते-गाते आगे बढ़ रहे थे। सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से पुलिस प्रशासन की ओर से भी कड़े इंतजाम किए गए थे। यात्रा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी और प्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई थी। जैसे-जैसे सवारी शहर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरी, रास्ते में खड़े श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।
22 अगस्त की रात करीब 10 बजे भुताला गांव में उस समय परिजनों की चिंता बढ़ गई, जब घर की एक युवती अचानक लापता हो गई। रात में काफी तलाश करने के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिवार के लोगों ने आसपास और संभावित स्थानों पर उसकी जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान परिजनों को जानकारी मिली कि युवती अपने ही देवर नरेश के साथ कहीं चली गई है। परिवार की ओर से काफी खोजबीन और पूछताछ की गई, लेकिन युवती का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद प्रार्थी ने गोगुंदा पुलिस थाने पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने युवती की तलाश के लिए कार्रवाई तेज कर दी है। जांच की जिम्मेदारी सहायक उप निरीक्षक विनेश कुमार को सौंपी गई है। पुलिस के अनुसार शिकायत में नामजद आरोपी नरेश और लापता युवती की तलाश की जा रही है। पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और युवती से जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच अधिकारी का कहना है कि युवती को जल्द दस्तयाब करने के साथ पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मामले में आगे की कार्रवाई युवती के मिलने और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
उदयपुर के सज्जनगढ़ लॉयन सफारी में साढ़े 5 साल की मादा एशियाटिक शेरनी सुनैना की रविवार दोपहर को मौत हो गई। वह पिछले करीब तीन महीने यानी 24 मई से बीमार चल रही थी और उसका उपचार किया जा रहा था। मौत के बाद मेडिकल बोर्ड की टीम ने पोस्टमॉर्टम किया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत शेरनी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मौत के कारणों की जानकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट होगी। सज्जनगढ़ लॉयन सफारी में लायनेस ‘सुनैना’ की मौत के बाद अब सिर्फ ‘सम्राट’ लायन बचा है। इसी साल 16 फरवरी को लॉयन सफारी की शुरुआत हुई थी। तब इन दोनों लॉयन को यहां शिफ्ट किया था।बता दें कि सुनैना ने 21 जुलाई से 20 अगस्त तक पूरा भोजन लिया और इलाज से लगातार सुधार दिखने लगा था। लेकिन 21 अगस्त को उसकी तबीयत वापस बिगड़ गई और सुबह उसने आंशिक भोजन ही लिया, जिसके बाद मेडिकल टीम ने तुरंत सेंपल लेकर जांच के आधार पर इलाज शुरू किया। इसी बीच रविवार दोपहर अचानक स्थिति गंभीर होने से उसकी मौत हो गई।मादा एशियाटिक शेरनी सुनैना का 24 मई से लगातार पशु डॉक्टर्स की निगरानी में उपचार चल रहा था। हालांकि, 21 जुलाई से 20 अगस्त के बीच उसकी सेहत में काफी अच्छा सुधार देखा गया था। इस एक महीने के दौरान वह नियमित रूप से पूरा भोजन ले रही थी और दिए जा रहे उपचार पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दर्शा रही थी। 21 अगस्त की सुबह केयरटेकर्स ने देखा कि सुनैना ने रात में दिए गए भोजन में से केवल आंशिक भोजन ही लिया था। इसके बाद मेडिकल टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर उसके रक्त के नमूने लिए और प्राथमिक उपचार शुरू किया। 22 अगस्त और 23 अगस्त को भी रक्त जांच की रिपोर्ट के आधार पर उसे लगातार दवाइयां और जरूरी उपचार दिया गया। रविवार दोपहर अचानक सुनैना की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उसकी स्थिति गंभीर होने से उसकी मौत हो गई।एशियाटिक शेरनी की मौत के तुरंत बाद पोस्टमॉर्टम के लिए तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। शाम 4:30 बजे गठित मेडिकल बोर्ड के सदस्य डॉ. शैलेन्द्र शुक्ला, डॉ. महेन्द्र मेहता और डॉ. हिमांशु व्यास द्वारा सुनैना के शव का पोस्टमॉर्टम किया गया।पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रविवार शाम 6:00 बजे जैविक उद्यान परिसर स्थित श्मशान स्थल पर सुनैना की अंत्येष्टि की गई। इस दौरान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) मुकेश सैनी, क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रभुलाल मीणा, सहायक उप निरीक्षक योगेश कुमार, पटवारी गिरधर सिंह राजपूत सहित सज्जनगढ़ जैविक उद्यान का स्टाफ और स्थानीय ईडीसी सदस्य मौजूद रहे।
राजसमन्द के रेलमगरा क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक से निकलने वाले वेस्टेज, प्रदूषित हवा और प्रतापगढ़ से लाए जा रहे टेलिंग के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रशासनिक कार्यालय के बाहर चल रहे धरने में करीब चार लोग भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलनकारी ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक गतिविधियों और टेलिंग के कारण क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ रहा है और इसका असर खेती, जल स्रोतों तथा आम जनजीवन पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराए जाने की मांग की है।राजसमन्द जिले के रेलमगरा क्षेत्र में ग्रामीणों का विरोध लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। हिंदुस्तान जिंक से निकलने वाले वेस्टेज, केमिकल और प्रदूषित हवा के साथ ही प्रतापगढ़ से क्षेत्र में लाए जा रहे टेलिंग को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।प्रशासनिक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रदूषण का असर आसपास के गांवों तक पहुंच रहा है।आंदोलनकारियों का आरोप है कि वेस्टेज और टेलिंग के कारण क्षेत्र की कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कई स्थानों पर खेती करना पहले की तुलना में मुश्किल होता जा रहा है।ग्रामीणों ने पानी और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।आंदोलन में करीब चार लोग भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं, जबकि बड़ी संख्या में ग्रामीण धरने में शामिल हैं। आंदोलनकारियों की मांग है कि वेस्टेज, केमिकल, प्रदूषण और प्रतापगढ़ से लाए जा रहे टेलिंग की निष्पक्ष जांच कराई जाए।साथ ही लोगों के स्वास्थ्य, कृषि भूमि, जल स्रोतों और पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन कराने की भी मांग की गई है।तीन दिन से जारी इस आंदोलन में ग्रामीण अब ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा।हालांकि, प्रदूषण, खेती और जनजीवन प्रभावित होने के ये आरोप आंदोलनकारी ग्रामीणों की ओर से लगाए गए हैं। इस मामले में हिंदुस्तान जिंक और प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष प्राप्त करने का प्रयास किया गया, उनकी ओर से यह जवाब सामने आया कि आंदोलन करने वाले लोग बाहरी हैं।फिलहाल रेलमगरा में टेलिंग, वेस्टेज और प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज बना हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित कंपनी की ओर से आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
कानोड़ थाना क्षेत्र के गोपा की भागल में सामने आए इस मामले में पीड़ित पिता सुरेश मीणा ने पुलिस को रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के मुताबिक सुरेश मीणा ने अपनी पत्नी सवीता और उसके प्रेमी लक्ष्मण पर सुनियोजित तरीके से साजिश रचने का आरोप लगाया है। आरोप है कि सवीता अपनी दोनों मासूम बच्चियों को घर से बाहर झाड़ियों में अकेला और असुरक्षित हालत में छोड़कर लक्ष्मण के साथ चली गई। झाड़ियों में बच्चियां अकेली पड़ी थीं। इसी दौरान गांव के कुत्तों ने उन्हें घेर लिया। बच्चियों के रोने और कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर वहां से गुजर रहे राहगीरों की नजर उन पर पड़ी। लोगों ने मौके पर पहुंचकर मुस्तैदी दिखाई और दोनों मासूम बच्चियों को सुरक्षित बचा लिया। समय रहते राहगीर मौके पर नहीं पहुंचते तो कुत्तों के हमले से बच्चियों के साथ बड़ा हादसा हो सकता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरेश मीणा की शिकायत पर कानोड़ थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले में आरोपी महिला सवीता मीणा और 8 अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच सहायक उप निरीक्षक कानाराम कर रहे हैं। पुलिस पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच करने के साथ आरोपों से जुड़े तथ्यों और सभी आरोपियों की भूमिका को लेकर कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
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