आवाज़ हम सबकी
बुधवार तड़के अचानक एक तेज धमाके ने कालाजी-गोराजी कॉलोनी के लोगों को चौंका दिया। रात करीब 3 बजे आई इस आवाज के बाद आसपास के निवासी अपने घरों से बाहर निकले तो सामने का दृश्य देखकर हैरान रह गए। एक विशालकाय पेड़ सड़क पर गिर चुका था और उसके नीचे खड़ी एक कार पूरी तरह दब गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पेड़ गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि कुछ क्षणों के लिए लोगों को किसी बड़े हादसे की आशंका हो गई। मौके पर पहुंचे लोगों ने देखा कि पेड़ का अधिकांश हिस्सा कार पर आ गिरा, जिससे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में कार का बड़ा हिस्सा चकनाचूर हो गया और वाहन को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका दिन के समय काफी व्यस्त रहता है और यहां लगातार लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में यदि यह पेड़ दिन में गिरता तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। पेड़ गिरने का समय अलसुबह होने के कारण सड़क पर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों ने राहत की सांस ली कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। वहीं क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से पुराने और जर्जर हो चुके पेड़ों का सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते ऐसे पेड़ों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की संभावना को रोका जा सके।
राष्ट्रीय राजमार्ग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त बनाने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से गोगुंदा प्रशासन ने बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है। हाईकोर्ट के आदेश, जिला सड़क सुरक्षा समिति के निर्णय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के निर्देशों की पालना में यह कार्रवाई की जा रही है। गोगुंदा उपखंड अधिकारी आईएएस शुभम भैसारे के निर्देशन में एनएचएआई, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने हाईवे किनारे बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर बुलडोजर की मदद से अवैध ढांचों को ध्वस्त किया गया। यह अभियान झाड़ोली, जसवंतगढ़, गोगुंदा, खाखड़ी, विजय बावड़ी और नयागुड़ा सहित विभिन्न गांवों में चलाया जा रहा है, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग की सीमा के भीतर अवैध कब्जे किए गए थे। तहसीलदार प्रवीण कुमार सैनी के मुताबिक तहसील क्षेत्र में कुल 53 अवैध अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। इनमें से अब तक 24 अतिक्रमण पूरी तरह हटाए जा चुके हैं, जबकि शेष अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। हटाए जा रहे ढांचों में हाईवे किनारे संचालित दुकानें, होटल-ढाबे, रेस्टोरेंट, अस्थायी केबिन और कुछ आवासीय निर्माण शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि ये निर्माण सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे थे और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा रहे थे। कार्रवाई से पहले सभी कब्जाधारकों को नियमानुसार नोटिस जारी किए गए थे। साथ ही सीमांकन कर अतिक्रमण वाले स्थानों पर लाल निशान भी लगाए गए थे। निर्धारित समय सीमा के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाने पर प्रशासन ने ध्वस्त करने की कार्रवाही को अंजाम दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग की भूमि पर किसी भी नए अतिक्रमण को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आमजन की सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए यह अभियान आगामी दिनों में भी लगातार जारी रहेगा।
उदयपुर से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। शहर की सूरजपोल थाना पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग स्थानों से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पहला आरोपी राजेंद्र सिंह को उदियापोल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक धारदार चाकू बरामद किया गया। वहीं दूसरी कार्रवाई में पुलिस ने रोशनलाल स्कूल के पीछे इलाके में दबिश देकर लक्ष्मण सिंह को अवैध छुरी के साथ पकड़ा। दोनों आरोपियों के पास से बरामद हथियारों को जब्त कर लिया गया है।पुलिस का कहना है कि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर दोनों स्थानों पर कार्रवाई की गई।फिलहाल दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि बरामद किए गए हथियार कहां से लाए गए थे और इनके पीछे कोई आपराधिक नेटवर्क या अन्य गतिविधियां तो नहीं जुड़ी हैं।सूरजपोल थाना पुलिस की इस कार्रवाई को शहर में अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस जल्द ही कई अहम खुलासे कर सकती है।
शंकरलाल पालीवाल चाकू हमला कांड मामला दो माह से लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा देने वाले दो आरोपी बीकानेर से गिरफ्तार जिले की गोगुंदा पुलिस ने दूध व्यवसायी शंकरलाल पालीवाल पर हुए जानलेवा हमले के मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो माह से फरार चल रहे दो मुख्य आरोपियों को बीकानेर से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में वीरेंद्र सिंह उर्फ विज्जू (22) पुत्र पनसिंह राजपूत निवासी खंडावली, घोड़च थाना खमनौर तथा मनीष गमेती उर्फ मुना उर्फ राणा (25) पुत्र कालू गमेती निवासी शिकारियों की भागल, रामा थाना सुखेर शामिल हैं।थानाधिकारी श्याम सिंह चारण ने बताया कि 2 अप्रैल की शाम वणी स्थित एक होटल के समीप सेमटाल निवासी दूध व्यवसायी शंकरलाल पालीवाल पर लूट एवं हत्या की नीयत से चाकू से ताबड़तोड़ हमला किया गया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस जांच में सामने आया कि दूध व्यवसाय को लेकर चली आ रही पुरानी रंजिश के चलते सुपारी देकर इस हमले को अंजाम दिलाया गया था। पुलिस ने मामले में पूर्व में सुपारी देने वाले लक्ष्मण सिंह निवासी वणी, हमलावर टीकम उर्फ टिक्सा पुत्र मोहनलाल गमेती निवासी रामा तथा मुंबई से बुलाए गए सुपारी किलर मनोहर सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि घटना के दो मुख्य आरोपी वारदात के बाद से लगातार फरार चल रहे थे। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ अमृता दुहन के निर्देशन एवं गिरवा वृत्ताधिकारी गोपाल चंदेल के सुपरविजन में गोगुंदा थानाधिकारी श्याम सिंह चारण के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने बीकानेर में दबिश देकर दोनों फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदलकर पुलिस से बचने और जांच को गुमराह करने का प्रयास कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उनसे मामले में विस्तृत पूछताछ की जा रही है। इस कार्रवाई में थानाधिकारी श्याम सिंह चारण, एएसआई हरिसिंह, कांस्टेबल प्रदीप एवं सत्यनारायण की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उदयपुर की झीलों, तालाबों और जल निकायों के संरक्षण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की अवकाशकालीन खंडपीठ के न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश रेखा बोराणा ने सुनवाई के दौरान कहा कि उदयपुर की झीलें केवल पर्यटन का आकर्षण नहीं हैं, बल्कि शहर के पर्यावरणीय और सामाजिक जीवन की आधारशिला हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में शायर जयकृष्ण चौधरी हबीब की प्रसिद्ध नज़्म उदयपुर का उल्लेख करते हुए कहा कि उदयपुर को रश्क-ए-फ़िरदौस-ए-ज़माना यानी ऐसा शहर कहा गया है जिसकी सुंदरता पर जन्नत भी रश्क करे। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह केवल काव्यात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उदयपुर की वास्तविक पहचान है। अदालत ने कहा कि शहर की झीलें, नहरें, पाल और उनसे जुड़ा पूरा पारिस्थितिक तंत्र उदयपुर के अस्तित्व से अलग नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि झीलें केवल पानी के भंडार नहीं हैं, बल्कि सदियों से क्षेत्र के इतिहास, अर्थव्यवस्था और सामूहिक संस्कृति को आकार देती रही हैं। इन्हीं जलाशयों के कारण भूजल रिचार्ज, जल सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु संतुलन बना हुआ है। अदालत ने माना कि झीलों पर बढ़ता अतिक्रमण, प्रदूषण और अनियंत्रित विकास वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। कोर्ट ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जल संसाधन विभाग और उदयपुर विकास प्राधिकरण सहित संबंधित एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही झीलों, तालाबों, नहरों और कैचमेंट क्षेत्रों में किसी भी नए निर्माण, अतिक्रमण या भौतिक बदलाव पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी, जहां उदयपुर की प्रमुख झीलों और जलाशयों की स्थिति पर रिपोर्ट पेश की जाएगी।
उदयपुर में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर हनीट्रैप के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस को दी गई रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित डॉक्टर की फरवरी 2026 में कृष्णा नामक युवती से पहचान हुई थी। कुछ समय बाद कृष्णा ने अपनी परिचित कशिश भारद्वाज से भी डॉक्टर की मुलाकात करवाई। शिकायत के मुताबिक मार्च 2026 में कशिश डॉक्टर के फ्लैट पर पहुंची, जहां दोनों के बीच रिलेशन बने। आरोप है कि अगले ही दिन कृष्णा ने फोन कर बताया कि डॉक्टर और कशिश का वीडियो बना लिया गया है। इसके बाद वीडियो वायरल करने, पत्नी और परिवार को भेजने और घर पर हंगामा करने की धमकियां देकर मोटी रकम की मांग शुरू कर दी गई। पीड़ित के अनुसार पहले 30 लाख रुपए मांगे गए और बाद में 25 लाख रुपए देने की बात तय हुई। शिकायत में कहा गया है कि लगातार दबाव और ब्लैकमेलिंग के कारण वह मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति में पहुंच गया। रकम की व्यवस्था करने के लिए उसे बैंक से लोन तक लेना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर ने तीन अलग-अलग किस्तों में कुल 25 लाख रुपए उदियापोल बस स्टैंड के पीछे कृष्णा को दिए। आरोप है कि रकम मिलने के बाद दोनों युवतियों ने वीडियो डिलीट करने और भविष्य में परेशान नहीं करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन करीब तीन महीने बाद मामला फिर सामने आया। पीड़ित ने बताया कि 30 मई को कृष्णा का मैसेज आया और उसी दिन कशिश उसके फ्लैट पर पहुंची। आरोप है कि उसने 10 लाख रुपए की नई मांग करते हुए वीडियो वायरल करने, झूठे मुकदमों में फंसाने तथा घर और कार्यालय के बाहर हंगामा करने की धमकी दी। लगातार ब्लैकमेलिंग से परेशान डॉक्टर ने हिरणमगरी थाना पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जाल बिछाया और कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपी युवतियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब मामले की गहन जांच कर रही है तथा कथित रूप से वसूली गई राशि की बरामदगी सहित अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
उदयपुर में डुप्लीकेट 'उपकार' नाम से बिक रहे थे मसाले:फर्जी तरीके से लिया गया FSSAI लाइसेंस निरस्त, CMHO ने की कार्रवाई उदयपुर में व्यापारी फर्जी लाइसेंस प्राप्त कर उपकार नाम से मसाले तैयार कर बेच रहा था। अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उदयपुर ने व्यापारी का FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड्स ऑन) लाइसेंस निरस्त कर दिया है।वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि साल 1972 से इसके मालिक कुतुबुद्दीन कनोड़वाला हैं, जिनके पास उपकार नाम से वैध लाइसेंस हैं। इनके नाम से फर्जी लाइसेंस लेकर व्यापारी मसाले बेच रहा था।व्यापारी ने विभाग को गुमराह करने की कोशिश की सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने बताया कि व्यवसायी सेफुद्दीन जाकिर हुसैन कानोड़वाला ने लाइसेंस के लिए फर्जी दस्तावेज लगाकर विभाग को गुमराह करने की कोशिश की। अब इस कार्रवाई के बाद वह मसालों का किसी भी तरह कोई निर्माण या व्यापार नहीं कर सकता है। इसके बाद भी वह ऐसा करते पाया गया तो फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन के तहत इनकी फैक्ट्री सीज करते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मालिक बोले- मेरे नाम के डॉक्यूमेंट लगाकर लिया था लाइसेंस कुतुबुद्दीन कनोड़वाला ने बताया कि जेड ए कनोड़वाला नाम से फर्म मेरी है, जिसमें उपकार नाम से मिर्च-मसाले बनाए जाते हैं। सेफुद्दीन और बुरहानुद्दीन ने मिलकर जेड ए कनोड़वाला नाम से फर्जी फर्म खोल ली और सुखेर में फैक्ट्री लगा ली। स्वास्थ्य विभाग में फर्जी दस्तावेज लगाकर FSSAI लाइसेंस ले लिया। मुझे इसका पता लगा तो मैंने आरटीआई से स्वास्थ्य विभाग से इनके लाइसेंस संबंधी कागजात मांगे। आरटीआई से सूचना मिली तो वह देखकर मैं हैरान रह गया। फर्जी लाइसेंस में मेरे नाम से जुड़े डॉक्यूमेंट लगे थे। कई जगह मेरा नाम लिखा गया। जबकि इससे पहले एडीजे-1 कोर्ट में भी मैंने दावा किया था। तब मेरे पक्ष में फैसला आया था। इसके बावजूद सेफुद्दीन और बुरहानुद्दीन ने ये कारनामा किया।
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