आवाज़ हम सबकी
नीट पेपर लीक को लेकर पिछले एक महीने से सीजेपी सरकार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रही थी और यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि देश के कई शहरों में इसके समर्थन में प्रदर्शन की तस्वीरें भी सामने आई थीं। इस बड़े आंदोलन के दौरान समाजसेवी सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में अनशन पर भी रहे थे और देश भर के युवाओं तथा आंदोलनकारियों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग यही थी कि पेपर लीक मामले की जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री अपने पद से त्यागपत्र दें। प्रदर्शन के 36वें दिन आखिरकार सरकार को इन मांगों के आगे झुकना पड़ा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मंत्री ने खुद अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लेटर जारी करके अपने इस्तीफे की अधिकारिक जानकारी साझा की है, जिसके बाद से राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। इस घटनाक्रम से साफ हो गया है कि लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन का बड़ा असर देखने को मिला है और अब आगे की राजनीतिक परिस्थितियों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
उदयपुर में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया। दिल्ली निवासी सोनू सिंह तोमर अपनी पत्नी और दो वर्षीय बच्ची के साथ घूमने के लिए उदयपुर आए थे और पिछोला झील किनारे स्थित जगत निवास पैलेस होटल में ठहरे हुए थे। सुबह करीब आठ बजे परिवार होटल के सेकंड फ्लोर स्थित रेस्टोरेंट में नाश्ता करने पहुंचा। इसी दौरान बच्ची अचानक खिड़की की ओर गई और हाथ फिसलने से सीधे झील में गिर गई। बच्ची के पानी में गिरते ही होटल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल झील से बच्ची को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। सूचना मिलने पर घंटाघर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवाया। घंटाघर थाने के एएसआई ईशाक मोहम्मद ने बताया कि पिता की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह एक हादसा है और फिलहाल किसी प्रकार की संदिग्ध बात सामने नहीं आई है। पुलिस के अनुसार परिवार होटल में ही ठहरा हुआ था और घटना नाश्ते के दौरान सेकंड फ्लोर पर हुई। हालांकि घटना के बाद होटल की सुरक्षा व्यवस्था और भवन की बनावट को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर दो वर्षीय बच्ची खिड़की तक कैसे पहुंची, सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं और ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या मानक अपनाए गए थे, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। होटल प्रबंधन से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। अब सवाल है कि क्या होटल की सुरक्षा व्यवस्था और खिड़की की डिजाइन बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त थी? और मां की गोद और माता-पिता की मौजूदगी के बावजूद आखिर यह दर्दनाक हादसा कैसे हुआ।
उदयपुर जिले के सेमटाल में हुए इस भीषण सड़क हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जानकारी के मुताबिक निजी बस गोगुंदा से बरवाड़ा की ओर जा रही थी। इसी दौरान रावलिया खुर्द से गोगुंदा की ओर आ रहे बाइक सवार धनाराम नट और भारत नट बस की चपेट में आ गए। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों भाई गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। सूचना मिलते ही 108 एंबुलेंस और गोगुंदा थाने के हेड कांस्टेबल चरण सिंह मौके पर पहुंचे और दोनों घायलों को तत्काल गोगुंदा अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद धनाराम नट को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल भारत नट की हालत नाजुक होने पर प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। घटना के बाद पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त निजी बस को जब्त कर चालक को डिटेन कर लिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच की जा रही है। साथ ही पुलिस सभी आवश्यक साक्ष्य जुटाकर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।
कोटा में इस साल डेंगू के मुकाबले स्क्रब टायफस के मरीजों की संख्या स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई है। चिकित्सा विभाग के अनुसार, अब तक जिले में डेंगू के 50 मरीज सामने आए हैं, जबकि स्क्रब टायफस से संक्रमित मरीजों की संख्या 104 तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्क्रब टायफस एक संक्रमणकारी बीमारी है, जो संक्रमित चिगर माइट के काटने से फैलती है। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में देखी जाती थी, लेकिन अब शहरी इलाकों में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। विज्ञान नगर, कुन्हाड़ी और इटावा ग्रामीण ब्लॉक को प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया गया है। मानसून के दौरान नमी और झाड़ियों के बढ़ने से संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में मानसून के बाद स्थिति और चुनौतीपूर्ण होने की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से साफ-सफाई रखने, झाड़ियों और घास वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने तथा बुखार, सिरदर्द या शरीर में दर्द जैसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते सावधानी बरतने से बीमारी के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है।
राजस्थान में चांदीपुरा वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है। गुजरात में इलाज के दौरान डूंगरपुर जिले के रतनपुरा गांव की 6 वर्षीय बच्ची और सिरोही जिले की 2 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। दोनों बच्चियों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि होने के बाद राजस्थान का स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है और प्रभावित जिलों में निगरानी तेज कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा ब्लॉक के रतनपुरा गांव की 6 वर्षीय बच्ची 12 जुलाई को बीमार हुई थी। 13 जुलाई को परिजन उसे सीमलवाड़ा के एक निजी अस्पताल ले गए। इसके बाद बच्ची का उपचार मोडासा के निजी अस्पतालों में कराया गया। हालत गंभीर होने पर 14 जुलाई को गुजरात के हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चांदीपुरा वायरस की आशंका के चलते उसी दिन सैंपल लिए गए। 15 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे बच्ची की मौत हो गई। 23 जुलाई को गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर से प्राप्त जांच रिपोर्ट में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हुई। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्विलांस बढ़ा दिया है। डूंगरपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलंकार गुप्ता ने बताया कि सीमलवाड़ा ब्लॉक के रतनपुरा गांव में 75 घरों का सर्वे किया गया और बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई, हालांकि वहां कोई नया संदिग्ध मामला सामने नहीं आया। प्रदेश में अब तक चांदीपुरा वायरस के तीन संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें ये दोनों मौतें भी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सिरोही, उदयपुर और डूंगरपुर में 15 वर्ष तक के बच्चों की विशेष स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। रैपिड रिस्पॉन्स टीमें तेज बुखार, उल्टी, दौरे और होश में बदलाव जैसे लक्षणों पर नजर रख रही हैं। साथ ही घर-घर सर्वे, स्कूलों में बच्चों की जांच, लोगों को जागरूक करने और किसी भी लक्षण पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की जा रही है। पशुपालन विभाग भी मवेशियों की जांच और प्रभावित क्षेत्रों में स्प्रे करवाने का कार्य कर रहा है।
उदयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्पेशल यूनिट ने गुरुवार को ट्रैप कार्रवाई के दौरान गोवर्धनविलास थाना पुलिस के कांस्टेबल राजेन्द्र कुमार मीणा को रिश्वत लेते हुए पकड़ने का प्रयास किया। हालांकि आरोपी रिश्वत की राशि लेने के बाद नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का फायदा उठाकर मोटरसाइकिल से फरार हो गया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि एसीबी हेल्पलाइन पर शिकायत मिलने के बाद 19 जुलाई को स्पेशल यूनिट उदयपुर में परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गोवर्धनविलास थाने में उसके खिलाफ दर्ज मारपीट की शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने की एवज में कांस्टेबल राजेन्द्र कुमार मीणा 3 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था। शिकायत मिलने के बाद एसीबी के उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में स्पेशल यूनिट उदयपुर के प्रभारी अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजीव जोशी के नेतृत्व में पुलिस निरीक्षक लक्ष्मण डांगी ने रिश्वत मांग का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई। 23 जुलाई को एसीबी टीम ने तय योजना के अनुसार कार्रवाई की। आरोपी कांस्टेबल ने अपनी मांग के अनुसार परिवादी से 3 हजार रुपए की रिश्वत राशि ली। जैसे ही टीम ने उसे डिटेन करने का प्रयास किया, वह नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का फायदा उठाते हुए मोटरसाइकिल से फरार हो गया। फिलहाल एसीबी की टीम फरार आरोपी कांस्टेबल राजेन्द्र कुमार मीणा की तलाश में जुटी हुई है। मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत अग्रिम कानूनी कार्रवाई जारी है।
उदयपुर के डबोक क्षेत्र स्थित धुणी मात क्षेत्र में जेके लक्ष्मी सीमेंट फैक्ट्री से फैल रहे दूषित पानी की समस्या को लेकर गुरुवार को ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने से नाराज प्रशासक, उपसरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर फैक्ट्री के मुख्य गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण पर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फैक्ट्री के कारण इलाके का भूजल और पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि पानी इतना दूषित हो चुका है कि वह पीने के साथ-साथ घरेलू उपयोग के लिए भी उपयुक्त नहीं रहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन स्थानीय लोगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने में पूरी तरह विफल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन की लापरवाही के कारण आमजन के जीवन और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।मामले की सूचना मिलते ही डबोक थाना पुलिस मौके पर पहुंची और धरने पर बैठे ग्रामीणों से बातचीत कर समझाइश का प्रयास किया। हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और फैक्ट्री प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे।प्रशासक नरेश मेघवाल ने बताया कि फैक्ट्री प्रबंधन ने पांच दिन के भीतर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा में दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।
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