आवाज़ हम सबकी
केंद्र सरकार की ओर से डीजल वितरण को लेकर तय की गई नई सीमा पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उदयपुर पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारी मनोज गोयल ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि आम लोगों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार सरकार का यह आदेश ईंधन की जमाखोरी रोकने और बड़े उपभोक्ताओं द्वारा खुदरा बिक्री के लिए उपलब्ध डीजल की खरीद पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से जारी किया गया है। मनोज गोयल ने बताया कि कुछ बड़े उपभोक्ताओं और औद्योगिक इकाइयों को पहले सीधे सरकारी कंपनियों से ईंधन खरीदने की सुविधा मिली हुई थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बदलाव के बाद कुछ संस्थान खुदरा पंपों से डीजल खरीदने का प्रयास कर रहे थे, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बन सकती थी। इसी को रोकने के लिए सरकार ने यह व्यवस्था लागू की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन को 200 लीटर तक डीजल मिलने की सीमा तय की गई है, जो सामान्य तौर पर 700 से 800 किलोमीटर तक की दूरी तय करने के लिए पर्याप्त है। बाईट - मनोज गोयल, पदाधिकारी, पेट्रोलपम्प एसोसिएशन वीओ - वहीं दूसरी ओर वामपंथी नेता राजेश सिंघवी ने इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि डीजल की सीमा तय करने के पीछे सरकार की ओर से पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। उनका आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और तेल संकट के नाम पर आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। राजेश सिंघवी ने कहा कि पेट्रोलियम कंपनियों के मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जबकि आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि डीजल आपूर्ति और मूल्य से जुड़ी स्थिति का असर किसानों, परिवहन क्षेत्र, डीजल जनरेटर और अन्य मशीनरी पर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि देश की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट की जाए और ईंधन की उपलब्धता को लेकर पारदर्शिता बरती जाए। बाईट - राजेश सिंघवी, नेता वामपंथी दल
देबारी क्षेत्र में पुलिस की छापेमार कार्रवाई के दौरान एक ऐसे अवैध कारोबार का खुलासा हुआ, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता था। पुलिस को सूचना मिली थी कि क्षेत्र में अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री और पटाखों का निर्माण किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुई। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बारूद बनाने में उपयोग होने वाले विभिन्न केमिकल, तैयार पटाखे और निर्माण सामग्री को जब्त किया। मौके पर मौजूद सामग्री को देखकर पुलिस अधिकारियों ने भी इसे गंभीर सुरक्षा खतरा माना। सबसे बडी बात यह थी कि पूरा अवैध संचालन एक सरकारी स्कूल के बेहद नजदीक किया जा रहा था, जिससे विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ था। जांच के दौरान पुलिस ने एक लोडिंग टेम्पो भी जब्त किया, जिसका उपयोग तैयार माल की सप्लाई के लिए किया जा रहा था। मौके से पिता और पुत्र को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और विस्फोटक पदार्थों से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि अवैध कारोबार काफी समय से संचालित हो रहा था और यहां तैयार होने वाले सामान की सप्लाई विभिन्न क्षेत्रों में की जा रही थी। अब पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस कारोबार से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं और विस्फोटक सामग्री की खरीद और सप्लाई का स्रोत क्या था। पुलिस की इस कार्रवाई से एक संभावित बड़े हादसे को समय रहते टाल दिया गया। आरोपियों की पहचान 54 वर्षीय अनिल और 29 वर्षीय उसके बेटे लक्की के रूप में हुई। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पुछताछ में जुटी है।
उदयपुर के ओगणा थाना क्षेत्र के भंवरिया गांव में एक महिला ने अपने शराबी पति की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी पत्नी ने शव के अंतिम संस्कार का प्रयास किया, जिसे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर रुकवा दिया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर आरोपी महिला को डिटेन कर लिया है और मामले की जांच जारी है।
एमबी अस्पताल परिसर में खून के नाम पर अवैध वसूली के आरोप ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धार्थ सोनी ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो बाहर से आने वाले गरीब और असहाय मरीजों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे पैसे वसूल रहा है। सिद्धार्थ सोनी ने बताया कि डूंगरपुर से आए एक जरूरतमंद परिवार से एक यूनिट ब्लड दिलाने के बदले 6500 रुपये वसूले गए थे। पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है। आरोप है कि जब उसी परिवार को दूसरी यूनिट ब्लड की आवश्यकता पड़ी तो उनसे फिर रुपये मांगे गए। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी और आरोपी रौनक साहू को 3000 रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद मौके पर हंगामा हुआ और आरोपी को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। सिद्धार्थ सोनी ने बताया कि पीड़ित परिवार से ली गई 6500 रुपये और 3000 रुपये की राशि वापस दिलवाई गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों, अस्पताल प्रशासन और पुलिस को दी गई है। साथ ही अस्पताल के प्राचार्य को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई है। सिद्धार्थ सोनी ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में ब्लड उपलब्ध कराने के नाम पर किसी को भी हजारों रुपये नहीं देने चाहिए। उन्होंने कहा कि कई सामाजिक संस्थाएं और रक्तदाता समूह जरूरतमंदों को निशुल्क रक्त उपलब्ध करवाते हैं। फिलहाल मामले की शिकायत के बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन से कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है, ताकि यदि किसी प्रकार का गिरोह सक्रिय है तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकें।
आमजन को सरकारी सेवाएं सरल और प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से 12 जून से 15 जुलाई तक ग्रामीण और शहरी सेवा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल उदयपुर विकास प्राधिकरण यानी यूडीए पहुंचे और यहां संचालित शहरी सेवा शिविर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर ने शिविर में दी जा रही विभिन्न सेवाओं, आवेदन प्राप्ति की प्रक्रिया, शिकायत निस्तारण व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से यह भी जाना कि आमजन को किस प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और उनकी समस्याओं का समाधान किस समय सीमा में किया जा रहा है। कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आवेदन और प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए ताकि आमजन को राहत मिल सके। निरीक्षण के दौरान यूडीए आयुक्त अभिषेक खन्ना और सचिव हेमेन्द्र नागर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने जिला कलेक्टर को शिविर की कार्यप्रणाली और अब तक प्राप्त आवेदनों के बारे में जानकारी दी। जिला कलेक्टर ने शिविर में मौजूद व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। गौरतलब है कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार 12 जून से 15 जुलाई तक आयोजित होने वाले इन ग्रामीण और शहरी सेवा शिविरों का उद्देश्य आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और सरकारी सेवाओं को लोगों तक आसानी से पहुंचाना है।
उदयपुर जिले के मावली थाना क्षेत्र में एक विवाहिता ने अपने पति और सास के खिलाफ घरेलू प्रताड़ना, मारपीट और दहेज मांगने के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है। पीड़िता प्रविणा बानू ने पुलिस को दी रिपोर्ट में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रविणा बानू ने उसके पति उदयलाल खटीक के साथ लव मैरिज की थी। विवाहिता का आरोप है कि शादी के बाद उसके पति का व्यवहार बदल गया और वह लगातार परेशान करने लगा। महिला ने बताया कि उसका पति शराब का आदी है और अक्सर देर रात घर लौटता था। पीड़िता के मुताबिक जब भी वह पति को शराब छोड़ने और देर रात घर आने को लेकर समझाने का प्रयास करती, तो विवाद शुरू हो जाता था। आरोप है कि पति उसके साथ मारपीट करता था और कई बार उसका गला दबाकर जान से मारने का प्रयास भी किया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति उससे अपने पिता के घर से तीन लाख रुपए लाने की मांग करता था। विवाहिता का कहना है कि उसकी सास प्रताबी बाई और पति उदयलाल ने मिलकर उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद वह गाडरीयावास में पानी की टंकी के पास किराए के मकान में रहने को मजबूर है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पति ने उसके नाम पर मकान निर्माण के लिए समूह ऋण और पर्सनल लोन ले रखा है, लेकिन अब उसकी किश्तें भी जमा नहीं कर रहा है। मामले की शिकायत मिलने के बाद मावली थाना पुलिस ने पति उदयलाल खटीक और उसकी मां प्रताबी बाई खटीक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
फर्जी एमटेक डिग्री लगाकर सरकारी नौकरी का लाभ लेने के मामले में एसओजी ने जलदाय विभाग के एक जूनियर इंजीनियर (जेईएन) को गिरफ्तार किया है। आरोपी दुर्गाशंकर मेनारिया उदयपुर जिले की भींडर तहसील के वाना गांव का निवासी है। एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि वर्ष 2018-19 में आरपीएससी की समूह अनुदेशक, सर्वेयर व सहायक शिक्षुता सलाहकार ग्रेड-द्वितीय भर्ती के दस्तावेज सत्यापन के दौरान आरोपी की मानव भारती विश्वविद्यालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश) से जारी एमटेक (इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम) की डिग्री संदिग्ध पाई गई। यूनिवर्सिटी से जांच कराने पर डिग्री फर्जी निकली। जांच में सामने आया कि संबंधित पद के लिए केवल स्नातक योग्यता आवश्यक थी, इसके बावजूद आरोपी ने एमटेक की डिग्री लगाकर खुद को ज्यादा योग्य दिखाने के लिए फर्जी डिग्री लगाई। पूछताछ में यह भी सामने आया कि इसी डिग्री के आधार पर उसने वर्ष 2015 से 2020 तक सिरोही के माधव विश्वविद्यालय में सहायक तकनीकी अधिकारी के पद पर कार्य किया और वहां से प्राप्त अनुभव प्रमाण पत्र को भी सरकारी नौकरी के आवेदन में लगाया। तकनीकी शिक्षा निदेशालय, जोधपुर की शिकायत पर एसओजी थाने में मामला दर्ज किया गया था। आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया है। एसओजी अब फर्जी डिग्री प्रकरण में शामिल दलालों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। बता दें कि हाल में उदयपुर में नियुक्त शिक्षकों को एसओजी ने डमी कैंडिडेट से परीक्षा िदलवाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके अलावा अन्य कई मामलों में भी जांच जारी है।
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