आवाज़ हम सबकी
राजसमंद में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सरकारी अस्पताल में कथित रिश्वतखोरी के मामले का खुलासा करते हुए एक डॉक्टर को ट्रैप कार्रवाई में गिरफ्तार किया है। एसीबी की यह कार्रवाई एडिशनल एसपी हिम्मत सिंह चारण के नेतृत्व में आरके जिला अस्पताल में की गई। एसीबी के अनुसार परिवादी के पुत्र की आंख के पास एक गांठ थी, जिसे हटाने के लिए वह सरकारी अस्पताल पहुंचा था। आरोप है कि उपचार और ऑपरेशन की प्रक्रिया के लिए जूनियर स्पेशलिस्ट सर्जरी डॉ. पंकज जैन ने परिवादी से 2 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। बाद में दोनों पक्षों के बीच 1800 रुपए में सहमति बनी। परिवादी ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान आरोपी डॉक्टर ने पहली किस्त के रूप में 500 रुपए ले लिए, जिससे शिकायत की पुष्टि हो गई। इसके बाद एसीबी टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की। जैसे ही आरोपी डॉ. पंकज जैन परिवादी से शेष 1300 रुपए की रिश्वत ले रहा था, टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। एसीबी ने रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली। फिलहाल एसीबी आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच जारी है और रिश्वतखोरी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी।
26 मई को दोपहर करीब एक बजे एक विवाहिता अपनी बहन के यहां कोटड़ा में कलश कार्यक्रम में जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन देर रात तक भी वह घर नहीं पहुंची। परिजनों ने जब उससे संपर्क करने का प्रयास किया तो उसका मोबाइल बंद या नेटवर्क से बाहर मिला। रिश्तेदारों और ससुराल पक्ष में भी तलाश की गई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। महिला के पति किशनसिंह के अनुसार 9 जून को एक परिचित से जानकारी मिली कि उसकी पत्नी कथित रूप से सायरा थाना क्षेत्र के चरावो का गुडा निवासी आरोपी हिम्मतसिंह पुत्र शंकरसिंह के साथ है। पति का आरोप है कि आरोपी ने उसकी पत्नी को बहला-फुसलाकर अपने साथ रखा हुआ है। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाहिता घर से उसकी मां के लाखों रुपए मूल्य के सोने-चांदी के जेवर और अलमारी में रखे 35 हजार रुपए नकद भी साथ ले गई। शिकायत के अनुसार चोरी हुए सामान में चांदी के दो कंदौरे, सोने का बोर, सोने की टोकरियां और चांदी की गारनी शामिल हैं। पति ने यह भी आरोप लगाया है कि उसकी दोनों नाबालिग संतानों को भी साथ ले जाया गया है। साथ ही आरोपी पर विवाहिता को बहकावे में लेकर जेवर अपने कब्जे में रखने का भी आरोप लगाया गया है। इस मामले में पिडित किशनसिंह की शिकायत पर गोगुंदा थाना पुलिस ने आरोपी हिम्मतसिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सलुम्बर जिले के दानितालाई वन क्षेत्र के ग्राम लकुकालेवा में उस समय वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई, जब सूचना मिली कि एक पैंथर गहरे कुएं में गिर गया है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लेने के बाद रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। रेस्क्यू के दौरान टीम ने पूरी सावधानी बरतते हुए पहले पैंथर को सुरक्षित बाहर निकालने की रणनीति बनाई। इसके लिए चारपाई और पिंजरे का उपयोग किया गया। काफी प्रयासों के बाद पैंथर को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित कुएं से बाहर निकाल लिया गया। रेस्क्यू अभियान के दौरान वन विभाग की टीम लगातार पैंथर की गतिविधियों पर नजर बनाए रही, ताकि वह घबराकर किसी तरह की चोट का शिकार न हो। सफल रेस्क्यू के बाद पैंथर को सुरक्षित वाहन में रखकर बांसी नर्सरी भेजा गया। वन विभाग के मुताबिक फिलहाल पैंथर को चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा, जहां उसके स्वास्थ्य की जांच और आवश्यक उपचार किया जाएगा। यदि जांच में पैंथर पूरी तरह स्वस्थ पाया जाता है तो उसे जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर रहे वामपंथी दल के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे वामपंथी नेता और समाजसेवी राजेश सिंघवी ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचूक को 18 जुलाई को सरकार ने जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह लड़ाई सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों नौजवानों के भविष्य को बचाने का आंदोलन है। केंद्र सरकार पिछले लंबे समय से शिक्षा का निजीकरण करने में जुटी है, जिसके खिलाफ अब पूरा देश लामबंद हो रहा है। सिघवी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में 70 से ज्यादा पेपर लीक हुए हैं, जिससे युवाओं का भविष्य पूरी तरह बर्बाद हो गया है। राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा गया कि राज्य में एमबीबीएस की 900 सीटें तो बढ़ी हैं, लेकिन इनमें से एक भी सरकारी सीट नहीं है। निजीकरण के इस दौर में जब एक छात्र एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करके डॉक्टर बनेगा, तो समाज के प्रति उसका दृष्टिकोण सेवा का नहीं रह पायेगा। देश की लचर परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कानपुर के एक गोल्ड मेडलिस्ट छात्र का जिक्र भी किया गया, जिसने 50 सरकारी परीक्षाएं देने के बाद भी सफलता न मिलने पर हताश होकर अपनी जान दे दी थी। आंदोलनकारियों का कहना है कि देश को एक वैज्ञानिक शिक्षा पद्धति की जरूरत है, न कि किसी विशेष सांप्रदायिक ढांचे की। सरकार ने जिस तरह सोनम वांगचुक के आंदोलन को दबाने की कोशिश की, वैसे ही इस छात्र आंदोलन को भी कुचलना चाहती है, लेकिन देश के अलग-अलग शहरों में यह प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। जनसंगठनों ने मांग की है कि शिक्षा का निजीकरण तुरंत रोका जाए और सभी परीक्षाएं सिर्फ सरकारी एजेंसियों के माध्यम से ही पूरी कराई जाएं।
एमबी हॉस्पिटल में पीपीपी मोड पर एमआरआई मशीन संचालित करने वाली वर्धमान मार्केटिंग कंपनी पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन ने हाथीपोल थाना पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2005 में टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित फर्म को एमआरआई मशीन संचालन का कार्य सौंपा गया था। जांच में सामने आया कि यह एक प्रोपराइटरशिप फर्म थी और उसके प्रोपराइटर की 10 मई 2010 को मृत्यु हो चुकी थी। आरोप है कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर अस्पताल प्रशासन से छुपाया गया। इसके बावजूद वर्ष 2010 से 2018 के बीच कंपनी के प्रतिनिधि स्वयं को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बताते रहे और अस्पताल प्रशासन से लगातार पत्राचार करते हुए एमआरआई मशीन का संचालन जारी रखा। पूरे मामले का खुलासा साल 2019 में उस समय हुआ, जब मृत प्रोपराइटर की पत्नी की ओर से अस्पताल प्रशासन को एक पत्र भेजा गया। इसके बाद दस्तावेजों की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2018 में जारी नई निविदा में इसी फर्म ने दोबारा आवेदन किया था। आवेदन पर हस्ताक्षर करने वाला प्रतिनिधि एक दूसरी कंपनी में डायरेक्टर के पद पर मिला। इससे यह संकेत मिला कि संबंधित फर्म वास्तव में उसी दूसरी कंपनी की एक इकाई के रूप में कार्य कर रही थी। शिकायत के अनुसार निःशुल्क एमआरआई जांच, किराया और बिजली शुल्क के मद में कंपनी पर अस्पताल का 48 लाख 86 हजार 787 रुपए बकाया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई बार पत्राचार और राशि जमा कराने के लिए नोटिस दिए गए, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद आईजी कार्यालय के निर्देश पर हाथीपोल थाना पुलिस ने धोखाधड़ी और षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शनिवार सुबह दिल्ली के जंतर-मंतर पर उस समय माहोल गरमा गया, जब पुलिस सिविल ड्रेस में मौके पर पहुंची और 21 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को एंबुलेंस के जरिए सफदरजंग अस्पताल ले गई। बताया गया कि पुलिस ने उन्हें सफेद चादर में उठाकर अस्पताल पहुंचाया। इस कार्रवाई का वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया, जिससे कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई। सोनम वांगचुक पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार भूख हड़ताल पर थे। लंबे अनशन के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी और उनका वजन करीब साढे 9 किलो तक कम हो गया था। इस बीच वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू कर दी। इसी दौरान मंच से नीचे बैठे दीपके पर एक महिला ने स्याही फेंक दी। इसके बाद वहां पर हंगामे के हालात हो गये। हालांकि घटना के बाद वहां मौजूद लोगों ने स्थिति को संभाला। इस मामले में इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश दिए थे कि सोनम वांगचुक का प्रतिदिन मेडिकल चेकअप कराया जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जाए। वहीं, वांगचुक के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन के नेहा, आमीन और मनीष भी पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। जानकारी के अनुसार नेहा को गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के चलते अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई है, जबकि आमीन और मनीष की तबीयत भी लगातार खराब बताई जा रही है। हाइपोग्लाइसीमिया वह स्थिति होती है, जब रक्त में शुगर का स्तर सामान्य से काफी नीचे चला जाता है। फिलहाल जंतर-मंतर पर अभी भी प्रदर्शन जारी है।
मानसून की सुस्त रफ्तार का असर अब उदयपुर जिले में साफ दिखाई देने लगा है। शुरुआती दौर में अच्छी बारिश के बाद अब लंबे समय से बारिश नहीं होने से मौसम में उमस बढ़ गई है और लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। लगातार सूखे मौसम का असर तापमान पर भी देखने को मिला है। पिछले सात दिनों में अधिकतम तापमान 2.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है। शुक्रवार को उदयपुर का अधिकतम तापमान 34.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं उदयपुर संभाग में शुक्रवार को केवल डूंगरपुर जिले में 12.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार 17 जुलाई तक उदयपुर जिले में 183.6 मिलीमीटर वर्षा हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 128.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है। यानी जिले में सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसी कारण उदयपुर को रेड कैटेगरी में रखते हुए डी श्रेणी में शामिल किया गया है, जिसका अर्थ कम वर्षा की स्थिति है। बारिश की कमी का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। शुरुआती अच्छी बारिश के बाद किसानों ने मक्का, मूंगफली और ज्वार सहित खरीफ फसलों की बुवाई कर दी थी, लेकिन मानसून की रफ्तार थमने से खेतों में नमी कम होती जा रही है। लगातार तेज धूप, गर्मी और उमस के कारण कई स्थानों पर बीजों का अंकुरण प्रभावित हुआ है। जिन खेतों में अंकुर निकल चुके हैं, वहां भी पानी की कमी से पौधे मुरझाने लगे हैं। ऐसे में किसान अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग ने आज उदयपुर और सलूंबर जिले में बारिश की संभावना जताई है, जिससे लोगों और किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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