आवाज़ हम सबकी
यह शिकायत केसरपुरा निवासी भुरकी देवी ने की है। शिकायत के मुताबिक उनके पति स्वर्गीय खातरा पिता वक्ता के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था। योजना में लाभार्थी का Beneficiary Name RJ12047950 दर्ज है। आरोप है कि आवास स्वीकृत होने के बाद जियो-टैगिंग की प्रक्रिया भी कराई गई, लेकिन लाभार्थी के मकान के बजाय अमृत पिता सुरमाल के मकान की जियो-टैगिंग कर दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद पूरे मामले में खेल किया गया। लाभार्थी के नाम स्वीकृत आवास को पूर्ण बताते हुए ग्राम पंचायत स्तर पर कंप्लीशन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और इसी आधार पर 1 लाख 20 हजार रुपए की राशि उठा ली गई। शिकायत में ग्राम पंचायत गरनाला कोटडा के सरपंच धर्मेन्द्र और अमृत पिता सुरमाल पर मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायत सही है तो जिस व्यक्ति के नाम आवास स्वीकृत हुआ, उसके मकान की जगह दूसरे व्यक्ति के मकान की जियो-टैगिंग आखिर कैसे हो गई? आवास पूर्ण होने की रिपोर्ट किस आधार पर तैयार हुई? और लाभार्थी के नाम स्वीकृत राशि किस प्रक्रिया से जारी हुई? इन सवालों का जवाब संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आएगा। शिकायतकर्ता ने संभागीय आयुक्त से मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। जियो-टैगिंग रिकॉर्ड, आवास स्वीकृति, निर्माण की फोटो, कंप्लीशन रिपोर्ट, भुगतान आदेश और राशि किस खाते में गई—इन सभी बिंदुओं की जांच की मांग की गई है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा लाभार्थी को उसकी स्वीकृत राशि दिलाने की मांग की गई है।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में कालिका माता मंदिर के सामने मंगलवार सुबह जब छोटे व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोलीं तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। कई दुकानों को क्षतिग्रस्त किया गया था और अंदर रखा सामान भी गायब मिला। व्यापारियों के अनुसार बीती रात अज्ञात लोगों ने दुकानों को निशाना बनाया और तोड़फोड़ करने के बाद सामान चोरी कर लिया। इस वारदात में गैस की टंकी, इनवर्टर और प्रसाद की दुकानों में रखा अन्य सामान चोरी होने की बात सामने आई है। दुकानदारों का कहना है कि बदमाशों ने सिर्फ चोरी ही नहीं की, बल्कि दुकानों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे छोटे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। व्यापारियों के मुताबिक इस इलाके में पहले भी चोर ऐसी वारदात को अंजाम दे चुके हैं। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उनकी चिंता बनी हुई है। इस बार चोरी के साथ हुई ज्यादा तोड़फोड़ ने व्यापारियों की परेशानी और बढ़ा दी है। घटना की जानकारी मिलते ही व्यापारियों ने शहर कोतवाली पुलिस को सूचना दी और मामले में कार्रवाई की मांग की। दुर्ग जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल और धार्मिक क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद व्यापारी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी है।
जोधपुर हाईकोर्ट का फैसला फिल्म निर्माण के नाम पर 30 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के हाईप्रोफाइल मामले में बॉलीवुड फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ से बड़ा झटका लगा है। आपराधिक (क्रिमिनल) केस को दीवानी (सिविल) विवाद बताकर हाईकोर्ट के 19 मार्च 2026 के अंतिम आदेश में संशोधन कराने और केस को सिविल रंग देने की उनकी कानूनी पैंतरेबाजी पूरी तरह नाकाम हो गई हैं। न्यायमूर्ति फर्जंद अली की एकल पीठ ने 14 अगस्त 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी श्वेतांबरी की संशोधन याचिका खारिज करते हुए साफ किया कि एक बार अंतिम फैसला सुनाने के बाद अदालत अधिकार-शून्य हो जाती है और अपने निर्णय की समीक्षा नहीं कर सकती। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 403 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि हस्ताक्षरित फैसले में कोई बदलाव संभव नहीं है। पुलिस जांच पूरी कर ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट पेश कर चुकी है और मामला अब आपराधिक धाराओं में आरोप तय करने के चरण में है। हाईकोर्ट ने साफ रुख कर दिया है कि यह मामला आपराधिक (क्रिमिनल) केस श्रेणी में ही चलेगा। इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय उदयपुर में चल रही है। गत 7 दिसंबर 2025 को उदयपुर के तत्कालीन डीएसपी छगनलाल राजपुरोहित की 6 सदस्यीय टीम ने मुंबई के जुहू स्थित गंगाभवन कॉम्प्लेक्स में दबिश दी थी। गार्ड्स के गुमराह करने के बावजूद पुलिस ने विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी को गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता डॉ. अजय मुर्डिया की पक्षकार बनने की अर्जी को भी कोर्ट ने याचिका निस्तारित होने के कारण निष्फल मानकर खारिज कर दिया, हालांकि उनके कानूनी अधिकार सुरक्षित रखे हैं। इस मामले के दलाल दिनेश कटारिया की गिरफ्तारी पर फिलहाल हाईकोर्ट से रोक लगी हुई है। भट्ट दंपती सुप्रीम कोर्ट की जमानत पर जेल से बाहर हैं। -क्रिमिनल केस का मजबूत आधार- फर्जी बिलों का खेल और ₹44.29 करोड़ का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पुलिस पूछताछ में सह-निर्माता महबूब अंसारी और वेंडर संदीप त्रिलोभन ने कबूला कि आरोपियों ने रंग-रोगन करने वालों, ऑटो चालकों और छोटे दुकानदारों के नाम पर फर्जी वेंडर खाते खुलवाए थे। इन खातों में फर्जी बिलों के जरिए ₹2-2 लाख जमा कराए जाते, जिसमें से ₹1.40 लाख सीधे श्वेतांबरी भट्ट के बैंक खाते में ट्रांसफर होते थे। इंदिरा एंटरटेनमेंट से 25 से ज्यादा बार फर्जी बिल क्लेम कराकर ऑन-रिकॉर्ड ₹35 लाख का अवैध भुगतान पकड़ा जा चुका है। पुलिस ने इन सबके साक्ष्य भी जुटा लिए। पीड़ित डॉ. अजय मुर्डिया से 4 फिल्मों के नाम पर ₹44.29 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान लिया गया। इसमें से चौथी फिल्म महाराणा (परिवर्तित नाम रण) का करार ₹25 करोड़ में हुआ, लेकिन शूटिंग तक शुरू नहीं हुई। फर्जी बिलों के पुख्ता सबूतों और करोड़ों के डायरेक्ट ऑनलाइन ट्रांजेक्शन ने ही इस मामले को पूरी तरह आपराधिक (क्रिमिनल) श्रेणी में खड़ा किया है। -ठगी और फर्जीवाड़े के आरोपी भट्ट परिवार पर 7 साल की जेल की तलवार डॉ. अजय मुर्डिया द्वारा 8 नवंबर 2025 को भूपालपुरा थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर पुलिस ने विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट समेत 8 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की बेहद संगीन और गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें बीएनएस की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 316(2) (आपराधिक विश्वासघात), 336(3) (फर्जी बिल व दस्तावेज बनाना), 340(2) (जाली कागजातों का असली रूप में उपयोग) और 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) शामिल हैं। इन धाराओं में दोषियों को 7 साल तक के कठोर कारावास के साथ भारी जुर्माने से दंडित करने का कड़ा कानूनी प्रावधान है। 26 मार्च 2024 को पत्नी की पुण्यतिथि पर मिडलमैन दिनेश कटारिया से मुलाकात से शुरू हुआ यह घटनाक्रम 30 करोड़ से अधिक की ठगी के बाद अब अदालत में आपराधिक मुकदमे की दहलीज पर पहुंच चुका है।
महाकालेश्वर मंदिर की भूमि को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच सोमवार को प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और वैज्ञानिक पद्धति से जमीन की पैमाइश शुरू की। सरकारी वकील अशोक सिंघवी ने बताया कि सिविल न्यायालय शहर उत्तर में महाकालेश्वर मंदिर की भूमि को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में साबीक आराजी संख्या 5 और वर्तमान आराजी संख्या 42 की भूमि पर कथित अतिक्रमण और व्यावसायिक गतिविधियों का मुद्दा उठाया गया है। न्यायालय के निर्देश पर भू-प्रबंधन निरीक्षक, तहसीलदार गिर्वा, पटवारी और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में मौका निरीक्षण कराया जा रहा है। इसके लिए राजेश उपाध्याय को कमिश्नर नियुक्त किया गया है, जिन्हें सर्वे की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी। यह सर्वे ददो से तीन तीन में पुरा होगा। वहीं मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष चंद्रप्रकाश दाधीच ने बताया कि मंदिर की भूमि को लेकर 1954 में सेटलमेंट कमिश्नर का आदेश पारित हुआ था, जिसे 1975 में राजस्व मंडल ने भी यथावत रखा। उनके अनुसार बाद में कुछ लोगों ने फर्जी पट्टों के जरिए भूमि पर कब्जे किए और वर्तमान में यह भूमि नए आराजी नंबर 42 के अंतर्गत दर्ज है। दाधीच ने बताया कि सर्वे में अतिक्रमण, व्यावसायिक गतिविधियों और कब्जे की स्थिति की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी। उनके अनुसार फतेहसागर किनारे से लेकर रानी रोड तक का बड़ा क्षेत्र मंदिर की खातेदारी भूमि में दर्ज है। उन्होंने कई मकानों और होटलों के मंदिर भूमि पर होने का दावा भी किया। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश दाधीच के अनुसार महाकाल मंदिर भूमि पर कई तीन सितारा होटल आलिशान मकान सहित कई रेस्टोरेंट ने अपना अधिकार जता रखा है फिलहाल सर्वें पूरा होने और रिपोर्ट न्यायलय मे पेश होने के बाद ही पता चल सकेगा की उक्त मंदिर की भूमि पर कितने लोगो ने कब्जा किया हुआ है
सूरजपोल थाना क्षेत्र के स्वराज नगर में रहने वाली 13 वर्षीय बालिका के लापता होने से परिजन परेशान हैं। परिवादी रेणु छोछावत ने पुलिस को बताया कि 16 अगस्त की शाम करीब 7 से 8 बजे के बीच बालिका घर में किसी को बिना बताए कहीं चली गई। देर तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने आसपास के इलाकों और संभावित स्थानों पर उसकी तलाश शुरू की, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी बालिका का पता नहीं चल सका। रिपोर्ट में रेणु छोछावत ने बताया कि उन्होंने 4 जून 2018 को फॉस्टर केयर योजना के तहत बालिका को पालन-पोषण और देखरेख के लिए गोद लिया था। तब से वह उसकी देखभाल कर रही थीं। परिवादी ने पुलिस को यह भी बताया कि बालिका इससे पहले भी दो बार बिना बताए घर से चली गई थी, लेकिन दोनों बार वह वापस लौट आई थी। इस बार काफी समय बीतने के बावजूद बालिका के वापस नहीं आई। सूरजपोल पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है। प्रकरण में आरोपियों की पहचान फिलहाल सामने नहीं आई है। जांच की जिम्मेदारी सहायक उपनिरीक्षक चतर सिंह को सौंपी गई है। पुलिस बालिका की तलाश के लिए संभावित स्थानों पर जानकारी जुटा रही है और मामले से जुड़े हर पहलू की जांच की जा रही है।
इस गैंग का शिकार बने एक राहगीर की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और तकनीकी और आसूचना की मदद से आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की। मामला 1 अगस्त का है। प्रार्थी हिन्दुस्तान जिंक के जिंक स्मेल्टर देबारी में ड्यूटी के बाद अपने घर ढिकली जा रहा था। इसी दौरान हाईवे पर उसे एक व्यक्ति पड़ा दिखाई दिया। उसके मुंह से झाग निकल रहा था। घायल समझकर प्रार्थी मदद के लिए रुका, तभी तीन अन्य व्यक्ति भी वहां पहुंच गए। शिकायत के मुताबिक घायल व्यक्ति ने प्रार्थी पर कोई स्प्रे डाल दिया, जिससे उसकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। इसके बाद चारों आरोपियों ने उसे पकड़कर स्विफ्ट डिजायर कार में डाल लिया और अम्बेरी रोड की तरफ ले गए। आरोप है कि वहां आरोपियों ने उसका आपत्तिजनक वीडियो बनाया, मारपीट की और पेटीएम के जरिए करीब 25 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए। आरोपियों ने पीड़ित को धमकी दी कि अगर उसने किसी को घटना के बारे में बताया या पुलिस में शिकायत की तो उसका वीडियो वायरल कर दिया जाएगा और उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई। रिपोर्ट के आधार पर प्रतापनगर थाने में प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए उदयपुर जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर उदयपुर उमेश ओझा और DSP नगर पूर्व छवि शर्मा के सुपरविजन में थानाधिकारी प्रतापनगर अजय सिंह राव के नेतृत्व में टीम गठित की गई। पुलिस ने तकनीकी सहयोग और आसूचना के आधार पर देवेन्द विश्नोई, मनीप जोशी, नरेन्द रेबारी और ओम प्रकाश को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपियों का तरीका वारदात राहगीरों को मदद के बहाने रोकना, फिर अपहरण और मारपीट कर रुपए और जेवरात छीनना था। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल कार, मोबाइल और वसूली गई रकम बरामद कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
उदयपुर नगर निगम के आगामी चुनावों की तस्वीर अब वार्ड आरक्षण के बाद काफी हद तक साफ हो गई है। जिला परिषद सभागार में सोमवार सुबह 11 बजे से वार्ड वाइज लॉटरी प्रक्रिया शुरू हुई, जो करीब एक घंटे में पूरी कर ली गई। इस प्रक्रिया में नगर निगम के सभी 80 वार्डों के लिए आरक्षण तय किया गया। आरक्षण व्यवस्था के मुताबिक नगर निगम के 80 वार्डों में से 48 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए रखे गए हैं। इनमें 32 वार्ड सामान्य श्रेणी के लिए और 16 वार्ड सामान्य महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा ओबीसी वर्ग के लिए कुल 16 वार्ड आरक्षित किए गए हैं। इनमें 11 सीटें ओबीसी ओपन और 5 सीटें ओबीसी महिला के लिए निर्धारित हैं। इसी तरह एससी वर्ग के लिए कुल 8 सीटें आरक्षित की गई हैं। इनमें 5 सीटें एससी ओपन और 3 सीटें एससी महिला के लिए हैं। एसटी वर्ग के लिए भी कुल 8 सीटों का आरक्षण किया गया है। इनमें 5 सीटें एसटी ओपन और 3 सीटें एसटी महिला के लिए आरक्षित हैं। वहीं इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम बात मेयर पद को लेकर सामने आई है। उदयपुर नगर निगम में इस बार मेयर की सीट अनारक्षित यानी ओपन रखी गई है। इसका मतलब है कि किसी भी वर्ग का व्यक्ति मेयर पद के लिए चुनाव लड़ सकता है। वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होने की उम्मीद है। हालांकि, किस वार्ड में किस वर्ग के लिए आरक्षण हुआ है, इसकी वार्डवार स्थिति के आधार पर ही स्थानीय दावेदारों की राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल 80 वार्डों की आरक्षण व्यवस्था तय होने के साथ नगर निगम चुनाव को लेकर अब पार्टी स्तर पर भी तैयारियां शुरू हो गई है
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