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उदयपुर की भूपालपुरा थाना पुलिस ने 23 स्थाई वारंटों में 15 साल से फरार चल रहे आरोपी को साधु के भेष में उत्तराखंड के ऋषिकेश से गिरफ्तार किया है। आरोपी अपनी पहचान छिपाकर साधु के रूप में रह रहा था। डीएसपी छवि शर्मा के सुपरविजन में टीम को गठन किया गया। 15 साल से दे रहा था चकमा गिरफ्तार आरोपी श्यामालाल (78) पुत्र परसराम निवासी मीरा कॉलोनी पिछले 15 साल से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी साधु का भेष धारण कर उत्तराखंड में छिपा हुआ है। इस पर पुलिस की टीम उत्तराखंड पहुंची। जहां पुलिस ने आरोपी को जगह-जगह तलाशा। पुलिस को उसके ऋषिकेश में होने का अंदेशा हुआ। पुलिस ने लोगों को पुराने फोटो दिखाए पुलिस ऋषिकेश पहुंची। वहां मंदिरों और घाटों पर जा जाकर आरोपी की पुरानी तस्वीरें दिखाई। जगह-जगह लोगों से पूछताछ करते हुए आरोपी का पता किया। जिसके बाद आरोपी एक मंदिर में साधु के वेष में मिला। बाद में आरोपी को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई में कॉन्स्टेबल आसुराम और रघुवीर सिंह की विशेष भूमिका रही।
उदयपुर के गोवर्धनविलास थाना पुलिस ने हाईवे पर खतरनाक स्टंट करने वाले बाइकर्स के खिलाफ विशेष अभियान चलाते हुए बड़ी कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक अमृता दुहन के निर्देश पर चलाए गए अभियान में तेज रफ्तार और लापरवाही से पावर बाइक्स दौड़ाकर स्टंट करने वाले 12 बाइक चालकों को पकड़ा गया। पुलिस ने सभी वाहनों को जब्त कर मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान भी काटे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के स्टंट न केवल वाहन चालकों की बल्कि आम लोगों की जान के लिए भी खतरा बनते हैं। पुलिस ने चेतावनी दी कि भविष्य में भी ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी पुलिस टीम बनकर अपहरण और फिरौती की वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह के खिलाफ सुखेर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा और डीएसपी राजेश यादव के सुपरविजन में थाना अधिकारी भरत योगी के नेतृत्व में गठित टीम ने आसूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से वारदात में प्रयुक्त टाटा नेक्सॉन कार भी जब्त कर ली है। पुलिस के मुताबिक 13 जुलाई को चीरवा निवासी महेन्द्र सिंह ने सुखेर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने बताया कि 12 जुलाई की रात वह अंबेरी स्थित न्यू आशापुरा होटल में सो रहा था। इसी दौरान कुछ लोग कार लेकर वहां पहुंचे और स्वयं को पुलिस की डीएसटी टीम का सदस्य बताते हुए उसे जबरन अपने साथ ले गए। आरोपियों ने होटल के कमरे से उसका अपहरण किया और नेगड़िया टोल के आगे जंगल में ले जाकर उसके साथ मारपीट की। इसके बाद उससे पैसों की मांग की गई और घायल अवस्था में छोड़कर आरोपी फरार हो गए। मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान सुरेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह, रविराज सिंह, संदीप सिंह, मंगल सिंह, विक्रम सिंह, हिम्मत सिंह और राहुल उर्फ रोहित सिंह को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड लिया है। पुलिस अब रिमांड के दौरान आरोपियों से वारदात की पूरी साजिश, गिरोह के अन्य सदस्यों, फिरौती की रकम और इस तरह की अन्य घटनाओं में उनकी भूमिका को लेकर गहन पूछताछ कर रही है। साथ ही पूरे आपराधिक नेटवर्क की भी जांच जारी है।
उदयपुर। राजस्थान सरकार ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में अनियमितताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेशभर के 51 अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया है। वहीं 24 अस्पतालों पर कुल 2 करोड़ 96 लाख 48 हजार 353 रुपए की रिकवरी और जुर्माना लगाया गया है। इस कार्रवाई में उदयपुर के अस्पताल भी शामिल हैं। उदयपुर के पारस जेके हॉस्पिटल पर सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 85 लाख 34 हजार 304 रुपए की रिकवरी की गई है। इसके अलावा डॉ. चौधरी हॉस्पिटल से 6 लाख 5 हजार 259 रुपए और जीबीएच अमेरिकन हॉस्पिटल से 13 हजार 870 रुपए की रिकवरी के आदेश जारी किए गए हैं। सरकार के ऑडिट में इन अस्पतालों के क्लेम से जुड़ी विभिन्न अनियमितताएं सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि जांच के दौरान फर्जी या डुप्लीकेट दस्तावेजों के आधार पर क्लेम, जरूरत से ज्यादा जांचें कराना, एक ही पैकेज की सेवाओं को अलग-अलग दिखाकर अतिरिक्त भुगतान लेना, आवश्यक दस्तावेजों के बिना क्लेम प्रस्तुत करना तथा ओपीडी मरीजों को अनुचित तरीके से आईपीडी में भर्ती दिखाकर भुगतान लेने जैसी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। RGHS की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने सभी मामलों की विस्तृत सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई के आदेश जारी किए। वहीं राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने कहा कि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए ऑडिट व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। भविष्य में भी फर्जी बिलिंग, अनियमित क्लेम और वित्तीय गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
दिव्यांगजनों को न्याय व्यवस्था तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने और उनके अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में राजस्थान में एक अहम पहल शुरू हुई है। गृह विभाग और राजस्थान पुलिस अब ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता के साथ दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 की संबंधित धाराओं को भी शामिल करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। साथ ही प्रदेश के पुलिस थानों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी दिव्यांगजन के साथ अपराध, शोषण, मारपीट, भेदभाव या उत्पीड़न होता है, तो उसे केवल सामान्य आपराधिक कानून के तहत ही नहीं, बल्कि उसके विशेष अधिकारों की रक्षा करने वाले कानून का भी संरक्षण मिल सके। इससे पुलिस कार्रवाई अधिक संवेदनशील, प्रभावी और अधिकार आधारित होगी। पेनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के संस्थापक और अर्थ डायग्नोस्टिक्स के सीईओ डॉ. अरविंदर सिंह ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर सभी पुलिस थानों में रैंप, रेलिंग, व्हीलचेयर सुविधा, ब्रेल संकेतक, सुगम शौचालय और बाधा-रहित प्रवेश जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की थी। उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 की धाराओं को भी अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। डॉ. अरविंदर सिंह और पेनेशिया के प्रयासों के बाद यह विषय प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर गंभीरता से आगे बढ़ा है। यह पहल उन हजारों दिव्यांगजनों के लिए राहत लेकर आ सकती है, जिन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए सबसे पहले थाने तक पहुंचने में ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। डॉ. अरविंदर सिंह ने इस पहल के लिए पुलिस विभाग और उच्च अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय दिव्यांगजनों को न्याय, सम्मान और समान अधिकार दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि पेनेशिया भविष्य में भी दिव्यांगजनों के अधिकार, सुगम्यता और जन-जागरूकता के लिए अपने प्रयास लगातार जारी रखेगी।
सोमवार सुबह करीब 9 बजे कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि नीमच माता रोपवे बीच रास्ते में तकनीकी खराबी आने से रुक गया है और उसमें कई यात्री फंस गए हैं। सूचना मिलते ही राजस्थान नागरिक सुरक्षा विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल एसडीआरएफ और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल एनडीआरएफ की टीमें तत्काल आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गईं। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशन में संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। मॉक ड्रिल के दौरान रोपवे में यात्रियों के फंसने का काल्पनिक स्थिति को तैयार किया गया। इसके बाद सभी एजेंसियों ने निर्धारित एसओपी के अनुसार राहत और बचाव अभियान चलाते हुए फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया। रेस्क्यू के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया। पूरे अभियान में अंबामाता थाना पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली, जबकि चिकित्सा विभाग और एंबुलेंस सेवा की टीमें किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहीं। बचाव के बाद घायलों को प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे ऑपरेशन के दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और रेस्क्यू क्षमता का आकलन किया। अधिकारियों ने बताया कि पर्यटन स्थलों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में समय-समय पर इस प्रकार की संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित करना आवश्यक है, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में सभी विभाग बिना किसी देरी के प्रभावी ढंग से राहत और बचाव कार्य कर सकें।