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बांसवाड़ा-डूंगरपुर से बीएपी सांसद राजकुमार रोत ने पेपर लीक प्रकरण को लेकर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बाबूलाल कटारा को लगातार मीडिया और एजेंसियों के जरिए सामने लाकर यह संदेश दिया जा रहा है कि एक आदिवासी अधिकारी ने भ्रष्टाचार किया, जिससे पूरे समाज और क्षेत्र की छवि प्रभावित हो रही है। रोत ने साफ कहा कि कटारा दोषी है और जेल में है, लेकिन असली सवाल यह है कि उसे किसकी अनुशंसा पर पद मिला और किन नेताओं के नाम जांच में सामने आए। सांसद ने आरोप लगाया कि ईडी और एसओजी की जांच में कई नेताओं के नाम उजागर हुए हैं, इसके बावजूद मौजूदा डबल इंजन सरकार कार्रवाई से बच रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, तब बीजेपी ने भ्रष्टाचार और पेपर लीक को लेकर बड़े आंदोलन किए थे, लेकिन अब सत्ता में आने के बाद वही मुद्दे ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं। राजकुमार रोत ने कहा कि केवल एक व्यक्ति को बलि का बकरा बनाकर असली दोषियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने आरपीएससी अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सांसद का कहना है कि बाबूलाल कटारा खुद बयान दे चुका है कि उसने पैसे लेकर नियुक्ति हासिल की और कई लोगों को पेपर उपलब्ध कराए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि युवाओं को सच्चाई नहीं बताई गई, तो आने वाले समय में जनता वोट के जरिए जवाब देगी। गौरतलब है कि बाबूलाल कटारा अप्रैल 2023 से जेल में बंद है और ईडी की चार्जशीट में करोड़ों की डील का खुलासा हुआ है। फिलहाल यह मामला अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
डूंगरपुर जिला परिषद के ईडीपी सभागार में सोमवार सुबह जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक चल रही थी। मंच पर सांसद, विधायक, जिला कलेक्टर और तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। लेकिन विकास के मुद्दों पर चर्चा की जगह बैठक कुछ ही देर में सियासी टकराव में बदल गई। बैठक की शुरुआत में बीएपी सांसद राजकुमार रोत ने एजेंडे से हटकर राज्य सरकार से जुड़े मुद्दे उठाने शुरू किए। इस पर उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने आपत्ति जताई और कहा कि दिशा बैठक में केंद्र सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों पर ही चर्चा होनी चाहिए। बस यहीं से माहौल गरमाने लगा। राजकुमार रोत ने पलटवार करते हुए कहा कि वे बैठक के अध्यक्ष हैं और जनता से जुड़ा हर मुद्दा उठाने का उन्हें अधिकार है। बहस ने उस वक्त और तीखा रूप ले लिया जब रोत ने आरोप लगाया कि मन्नालाल रावत केवल माहौल बिगाड़ने आए हैं और डूंगरपुर का विकास नहीं चाहते। तनाव चरम पर तब पहुंचा जब आसपुर विधायक उमेश डामोर भी बहस में कूद पड़े। बात तू-तू, मैं-मैं तक पहुंची और विधायक डामोर ने खुलेआम सांसद मन्नालाल रावत को चुनौती देते हुए कह दिया कि लड़ाई करनी है तो बाहर आ जाओ मैदान में। करीब 15 मिनट तक सभागार हाई-वोल्टेज ड्रामे का गवाह बना रहा। कलेक्टर अंकित कुमार सिंह, अधिकारी और सुरक्षाकर्मी हालात संभालते नजर आए। भारी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया गया, तब जाकर बैठक की कार्यवाही दोबारा शुरू हो सकी। यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर सवाल खड़े करता है कि विकास के मंच पर सियासत का तापमान इतना क्यों चढ़ जाता है, और जनता के मुद्दे हंगामे की भेंट क्यों चढ़ जाते हैं।
डूंगरपुर जिले में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन स्वच्छता के तहत बिछीवाड़ा थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। राजस्थान-गुजरात सीमा पर स्थित रतनपुर बॉर्डर पर पुलिस ने इलेक्ट्रिक उपकरणों की आड़ में की जा रही शराब तस्करी का खुलासा किया है। बिछीवाड़ा थानाधिकारी कैलाश सोनी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि नेशनल हाईवे-48 के रास्ते एक बंद बॉडी कंटेनर में अवैध शराब गुजरात ले जाई जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए रतनपुर बॉर्डर पर नाकाबंदी की गई और संदिग्ध वाहनों की सघन जांच शुरू की गई। इसी दौरान उदयपुर की ओर से आ रहे एक कंटेनर को रोका गया। कंटेनर चालक से जब पूछताछ की गई तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। संदेह होने पर पुलिस ने कंटेनर की गहन तलाशी ली। तलाशी के दौरान इलेक्ट्रिक उपकरणों के पीछे छिपाकर रखी गई हरियाणा निर्मित अंग्रेजी शराब की पेटियां बरामद हुईं। मौके पर शराब से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। पुलिस ने कंटेनर से विभिन्न ब्रांड की कुल 74 पेटी अंग्रेजी शराब जब्त की, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 8 लाख रुपए बताई जा रही है। इस मामले में पुलिस ने कंटेनर चालक प्रदीप अग्रवाल और सहचालक अजय को गिरफ्तार किया है, दोनों हरियाणा के निवासी हैं। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि शराब की खेप गुजरात सप्लाई की जा रही थी। फिलहाल पुलिस तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।