
उदयपुर के बड़गांव सेटेलाइट हॉस्पिटल में उस वक्त भावुक माहौल देखने को मिला, जब एपीओ किए गए डॉक्टर अशोक शर्मा करीब सवा दो महीने बाद वापस लौटे। 28 नवंबर को डॉक्टर शर्मा को प्रशासनिक आदेश के तहत एपीओ कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद एपीओ आदेश को क्वैश कर दिया। इसके बाद 2 फरवरी को डॉक्टर अशोक शर्मा ने दोबारा प्रभारी के रूप में ज्वाइन किया। ज्वाइनिंग के दौरान बड़ी संख्या में गांव के लोग मौजूद रहे। गाजे-बाजे के साथ जुलूस निकाला गया, डॉक्टर शर्मा को साफा पहनाया गया, फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया गया और मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की गई। डॉ. अशोक शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने उन्हें हटाने के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। उन्होंने बताया कि उनके एपीओ रहने के दौरान हॉस्पिटल में डॉक्टर से लेकर चपरासी तक को पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला, क्योंकि वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार उनके पास थे। अब वापसी के बाद सैलरी देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। डॉ. शर्मा ने साफ कहा कि उनके लिए हर जाति और हर नेता बराबर है। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले अमीर-गरीब सभी मरीजों को समान रूप से लाइन में लगकर इलाज मिलेगा।गौरतलब है कि एपीओ आदेश के बाद ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। हॉस्पिटल परिसर में हंगामा हुआ था और रिलीविंग के दौरान बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक भावुक हो गए थे। डॉक्टर शर्मा ने उस समय सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर चिकित्सा विभाग और जनप्रतिनिधियों पर सवाल भी उठाए थे।