
जल जीवन मिशन में हुए भ्रष्टाचार के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो राजस्थान द्वारा गठित एसआईटी ने मंगलवार सुबह बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। 2024 में दर्ज एक में सामने आए तथ्यों के आधार पर एसीबी की करीब डेढ़ दर्जन टीमों ने जयपुर, बाड़मेर, उदयपुर, करौली, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में एकसाथ दबिश दी और 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में दिनेश गोयल, वर्तमान मुख्य अभियंता प्रशासन, के.डी. गुप्ता, मुख्य अभियंता ग्रामीण, सुभांशु दीक्षित, तत्कालीन सचिव आरडब्ल्यूएसएसएम और वर्तमान अतिरिक्त मुख्य अभियंता जयपुर क्षेत्र-द्वितीय, सुशील शर्मा वित्तीय सलाहकार अक्षय ऊर्जा, निरिल कुमार मुख्य अभियंता चूरू, विशाल सक्सेना अधिशाषी अभियंता जो कि अभी संस्पेंड चल रहे है। इसके अलावा अरुण श्रीवास्तव अतिरिक्त मुख्य अभियंता जो अब सेवानिवृत्त हो चुके है। साथ ही डी.के. गौड तत्कालीन मुख्य अभियंता और तकनीकी सदस्य और महेन्द्र प्रकाश सोनी अधीक्षण अभियंता सेवानिवृत्त शामिल हैं। अनुसंधान में सामने आया कि मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवैल कंपनी और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवैल कंपनी द्वारा आयरल इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किए गए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलीभगत कर करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए गए। इसके अलावा, पीएचईडी के उच्च अधिकारियों द्वारा 50 करोड़ रुपये से अधिक के मेजर प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में नियमों के विरुद्ध साइट विजिट प्रमाण पत्र अनिवार्य कर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की गई, जिससे टेंडर पुलिंग हुई और ऊंचे टेंडर प्रीमियम स्वीकृत किए गए। इससे हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के तथ्य उजागर हुए। प्रकरण में अनुसंधान के लिए पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई। महानिरीक्षक पुलिस राजेश सिंह और उपमहानिरीक्षक डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में कार्रवाई की गई, जबकि अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में पूछताछ और आगे की कार्रवाई जारी है।