
कालीबाई भील और देवनारायण स्कूटी योजना के तहत जिन स्कूटियों को छात्राओं के हाथों में होना चाहिए था, वे आज उदयपुर के मीरा गर्ल्स कॉलेज में मिट्टी की परतों के नीचे दबी हैं। कॉलेज परिसर में ऐसी 112 स्कूटियां खड़ी हैं, जिनमें से 25 स्कूटियां पिछले 3-4 साल से वितरण का इंतजार कर रही हैं, जबकि 87 स्कूटियां इसी साल जनवरी में आई थीं। हालत यह है कि धूप और बारिश में खड़े-खड़े इन नई स्कूटियों के टायर और इंजन जवाब देने लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि जब इन फटी हुई सीटों और कबाड़ होती स्कूटियों पर सवाल पूछा गया, तो प्राचार्य दीपक माहेश्वरी ने अजीबोगरीब तर्क दिया। उन्होंने कहा कि कॉलेज में आवारा कुत्तों ने स्कूटियों की सीटें फाड़ दी हैं और इसके लिए नगर निगम को पत्र लिखा गया है। प्रबंधन का यह भी कहना है कि छात्राओं के मोबाइल नंबर बदलने या गलत होने की वजह से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है, इसलिए वितरण में देरी हो रही है। हालांकि, कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय इस दलील से संतुष्ट नहीं है। आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश बैरवा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राचार्य को मंगलवार को जयपुर मुख्यालय उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, स्कूटी वितरण को लेकर हुई महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी प्राचार्य अनुपस्थित रहे थे, जिसे आयुक्त ने अनुशासनहीनता माना है। वीसी में प्राचार्य की जगह शामिल हुए कार्मिक के पास भी योजना की स्पष्ट जानकारी नहीं थी, जिससे विभाग की नाराजगी और बढ़ गई। अब प्राचार्य को साल 2021 से लेकर 2024 तक की स्कूटी वितरण की पूरी रिपोर्ट के साथ स्पष्टीकरण देना होगा। दूसरी ओर, प्राचार्य का दावा है कि जिन छात्राओं के दस्तावेजों की जांच पूरी हो चुकी है, उन्हें स्कूटियां सौंपी जा चुकी हैं और शेष छात्राओं को दस्तावेज सत्यापन के बाद जल्द ही स्कूटियां बांट दी जाएंगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या उधड़ी हुई सीटों और खराब मशीनरी वाली ये स्कूटियां उन होनहार छात्राओं के किसी काम आएंगी?