
एक पुश्तैनी रास्ते को लेकर चल रहा विवाद उस समय गर्मा गया, जब गोगुंदा उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मोडी के वेलावतों की भागल में रहने वाले वृद्ध अंबाव सिंह राजपूत के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा श्मशान घाट तक नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि विवादित मार्ग पर एक पक्ष ने कांटेदार झाड़ियां डालकर रास्ता बंद कर दिया, जिससे शवयात्रा बीच रास्ते में ही रुक गई। इसके विरोध में परिजनों और ग्रामीणों ने मुख्य सड़क पर अर्थी रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया और प्रशासन से तत्काल श्मशान घाट का मार्ग खुलवाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यह वर्षों पुराना पुश्तैनी रास्ता है, जिसका उपयोग अंतिम संस्कार और गांव के नियमित आवागमन के लिए किया जाता रहा है। उनका आरोप है कि करीब दस दिन पहले भी गोगुंदा उपखंड अधिकारी, तहसील प्रशासन और गोगुंदा पुलिस को ज्ञापन देकर रास्ता खुलवाने की मांग की गई थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। सूचना मिलने पर थानाधिकारी श्यामसिंह चारण और तहसीलदार श्री सैनी मौके पर पहुंचे। करीब ढाई घंटे तक दोनों पक्षों से बातचीत की गई। इस दौरान जमीन के मालिक ने अपने स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए। इसके बाद तहसीलदार और थानाधिकारी ने ग्रामीणों और परिजनों को समझाइश देकर वैकल्पिक रास्ते से शवयात्रा निकालने के लिए मनाया किया। प्रशासन की समझाइश के बाद खेतों के रास्ते शव को श्मशान घाट पहुंचाया गया और अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। हालांकि ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक पुश्तैनी रास्ते के विवाद का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक इस तरह की स्थिति दोबारा भी उत्पन्न हो सकती है। अब ग्रामीण प्रशासन से स्थायी रूप से रास्ता खुलवाने की मांग कर रहे हैं।