आवाज़ हम सबकी
उदयपुर जिले की वल्लभनगर तहसील के भमरासिया ग्राम पंचायत में 24 अक्टूबर 2026 को हुए सरपंच चुनाव में धांधली का गंभीर मामला सामने आया है। पराजित प्रत्याशी दुर्गाशंकर मेघवाल ने जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सनसनीखेज खुलासे किए हैं। आरोप है कि सरपंच उम्मीदवार जगदीश भाट ने ओबीसी वर्ग से होने के बावजूद अपने दस्तावेज में खुद को 'ढोली' जाति का बताकर फर्जी जाति प्रमाण पत्र पेश किया और एससी के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ा। प्रार्थी का कहना है कि मतदान से एक दिन पहले यानी 23 अक्टूबर को ही रिटर्निंग ऑफिसर के सामने लिखित शिकायत और पुख्ता सबूत पेश किए गए थे, जिसमें जगदीश भाट के सभी दस्तावेजों में जाति 'भाट' दर्ज होने की बात थी, लेकिन रिटर्निंग अधिकारी ने इस आपत्ति को सिरे से खारिज कर दिया। प्रार्थी और ग्रामवासियों ने मांग की है कि इस फर्जीवाड़े की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, आरोपी उम्मीदवार को सरपंच पद से हटाया जाए और गलत प्रमाण पत्र जारी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
उदयपुर के भुवाणा स्थित सर्विस रोड पर होटल संचालकों की मनमानी चरम पर पहुंच गई है। होटल मालिक बिना किसी अनुमति के सड़क पर अवैध पार्किंग करवा रहे हैं, जिससे आए दिन भीषण ट्रैफिक जाम लग रहा है। हद तो तब हो जाती है जब विरोध करने पर होटल वाले स्थानीय निवासियों के साथ अभद्रता और बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं। आम नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि सार्वजनिक सड़क को निजी पार्किंग बनाने की इजाजत इन होटल वालों को किसने दी? परेशान क्षेत्रवासियों ने अब नगर निगम से इस अवैध कब्जे और तानाशाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
खेरोदा थाना इलाके के बाठेड़ा कलां गांव से एक युवती के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला सामने आया है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 19 अक्टूबर 2026 को दिन के समय प्रार्थी की पुत्री घर पर बिना बताए कहीं चली गई, जो काफी समय बीत जाने के बाद भी अपने घर वापस नहीं लौटी। परिजनों ने अपने स्तर पर सगे-सम्बन्धियों और संभावित ठिकानों पर उसकी काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा। परेशान परिजनों ने आखिरकार थाने पहुंचकर इसकी सूचना दी। प्रार्थी की रिपोर्ट के आधार पर खेरोदा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इस पूरे प्रकरण की जांच और अग्रिम अनुसंधान हेड कांस्टेबल उदयलाल को सौंपा गया है। पुलिस अब विभिन्न तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और आसपास के क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी है ताकि लापता युवती का जल्द से जल्द सुराग लगाया जा सके और उसे सुरक्षित बरामद किया जा सके।
उदयपुर सेंट्रल जेल के अंदर कैदियों के लिए प्रतिबंधित सामग्री (तंबाकू) ले जाने और साक्ष्य मिटाने के आरोप में दो जेल कर्मियों, प्रहरी पंकज कुमार और आरएसी के हेड कॉन्स्टेबल गिरधारी सिंह के खिलाफ सूरजपोल थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच के बाद दोनों की कथित मिलीभगत उजागर हुई। मामले ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जांच में सामने आया कि हेड कॉन्स्टेबल गिरधारी सिंह ने इस मामले को दबाने के लिए आरोपी प्रहरी पंकज कुमार के साथ मिलीभगत कर ली। गिरधारी सिंह आरोपी प्रहरी पंकज कुमार को जानबूझकर सीसीटीवी कैमरे की नजरों से हटाकर किनारे बने तलाशी कक्ष में ले गया। वहां पंकज की वर्दी से मिली तंबाकू को जब्त करने और वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना देने के बजाय दोनों ने कथित तौर पर उसे नष्ट कर दिया। आरोप है कि तंबाकू जेल के अंदर कैदियों तक पहुंचाई जानी थी। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।उदयपुर सेंट्रल जेल प्रशासन ने घटना के बाद इस गंभीर लापरवाही और मिलीभगत की विस्तृत जांच रिपोर्ट महानिदेशालय कारागार जयपुर को भेजी थी। जेल मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों ही कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं, पुलिस ने दोनों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।मामला बीते 29 सितंबर 2026 का है। सुबह करीब 10 बजे की शिफ्ट में जब ड्यूटी पर तैनात होने वाले सुरक्षाकर्मियों की तलाशी ली जा रही थी। तब मुख्य प्रवेश द्वार पर तैनात आरएसी (RAC) के तलाशी कर्मियों को ड्यूटी प्रहरी पंकज कुमार पर संदेह हुआ। आरएसी के हेड कांस्टेबल गिरधारी सिंह ने जब पंकज की तलाशी ली। तब पाया कि उसने कैदियों के इस्तेमाल के लिए अपनी वर्दी के भीतर भारी मात्रा में तंबाकू छिपा रखा था। इसके बाद गिरधारी सिंह ने बाहर आकर दूसरे साथी कर्मी को हाथ के इशारे से सब ठीक होने का संकेत भी दिया। इस पूरी घटना को जेल अधीक्षक सहित अन्य बड़े अफसरों से पूरी तरह छिपाकर रखा गया था। लेकिन इसी बीच इस मामले की भनक जेल के खुफिया तंत्र को लग गई। जिसके बाद जेल प्रशासन ने उस दिन के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो दोनों कर्मियों की यह करतूत कैमरे में साफ कैद मिली।
उदयपुर जिले के सुखेर थाना अंतर्गत राम नगर राजीव गांधी स्कूल क्षेत्र में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात जमकर उपद्रव और हिंसा हुई। इस खौफनाक घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी तनाव और दहशत का माहौल बना हुआ है। पीड़ित परिवार के डालू कालबेलिया के मुताबिक, शनिवार रात जब माता-पिता भटेवर गए हुए थे और घर पर बच्चे अकेले थे, तब पास ही दुकान पर सामान लेने गई बेटी के साथ छेड़छाड़ और अपहरण करने का प्रयास किया। लड़की दौड़कर घर पहुंची और भाई को इसकी जानकारी दी। भाई इसका विरोध करने दुकान पहुंचा तो उसके साथ चार लोगों ने मारपीट की। उस रात सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची तो बदमाश भाग निकले। लेकिन बदमाशों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे अगले दिन यानी रविवार रात को फिर से अपने साथियों और साथी महिलाओं के साथ पीड़ित के घर आ धमके। रविवार रात को आरोपियों ने सरेआम जान से मारने और बच्ची को उठा ले जाने की धमकी दी और देखते ही देखते पत्थरों व लाठियों से हमला कर दिया। उपद्रवियों ने पीड़ित के घर के बाहर खड़े 8 ऑटो टेम्पो, एक कार और तीन मोटरसाइकिलों में जमकर तोड़फोड़ की और उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया। इस हिंसक झड़प और मारपीट में पीड़ित परिवार के विजय और रमेश गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़ित परिवार ने नाथू, राहुल, संतोष, भैरा, लालू, कालू और ललिता सहित अन्य लोगों पर इस हमले का सीधा आरोप लगाया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पार्षद योगेश कुमावत ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि इस वारदात में शामिल एक-एक आरोपी को पुलिस तुरंत गिरफ्तार करे। उन्होंने यह भी दो टूक कहा कि इलाके में अवैध रूप से कब्जा जमाकर रह रहे इन बदमाशों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश में जुटी है, लेकिन इस घटना ने स्थानीय निवासियों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
झीलों की नगरी उदयपुर में भू-माफियाओं के हौसले और पुलिस के ढुलमुल रवैये को लेकर वकीलों का गुस्सा अब सड़कों से होता हुआ कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंच गया है। सवीना थाने के सीआई दलबीर सिंह को पद से हटाने की मांग पर अड़े वकीलों ने सोमवार सुबह कलेक्ट्रेट के भीतर बैठकर उग्र विरोध-प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूरा विवाद गोविंद नगर स्थित देवेन्द्र अग्रवाल के एक प्लॉट से शुरू हुआ, जिस पर कब्जा करने की नीयत से आरोपी कौशल आमेटा ने पथराव किया था। इस मामले में जब साथी वकील राजेश जाजोदिया शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो आरोपी आमेटा भी वहां आ गया और पुलिस की मौजूदगी में ही वकील को जान से मारने की धमकी दे डाली। वकीलों का गंभीर आरोप है कि इस खुलेआम गुंडागर्दी के बावजूद सीआई दलबीर सिंह ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे क्षेत्र में भू-माफिया पनप रहे हैं। रविवार को सवीना थाने में करीब 3 घंटे तक चले भारी हंगामे और एएसपी उमेश ओझा की समझाइश के बाद भी जब ठोस कार्रवाई का असर नहीं दिखा, तो सोमवार सुबह वकीलों का धैर्य जवाब दे गया। वकील गोलबंद होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और परिसर के अंदर ही बैठकर धरने पर बैठ गए। वकीलों के पूर्व महासचिव चेतनपुरी गोस्वामी का कहना है कि जब तक सीआई को लाइन हाजिर या निलंबित नहीं किया जाता, तब तक वकीलों का यह आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, सीआई दलबीर सिंह का कहना है कि दोनों पक्षों के परिवाद पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। वकीलों ने एसपी डॉ. अमृता दुहन के नाम ज्ञापन सौंपकर आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी और सीआई के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग उठाई है।