आवाज़ हम सबकी
उदयपुर के औद्योगिक क्षेत्र कलडवास रीको में रविवार देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई जब पैरागोन एसोसिएट के स्क्रैप गोदाम में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया और वहां रखा बड़ी मात्रा में स्क्रैप एवं अन्य सामग्री जलकर राख हो गई। घटना के दौरान गोदाम से उठते धुएं के घने गुबार दूर-दूर तक दिखाई दिए। आग की सूचना मिलते ही आसपास के उद्योगों में काम कर रहे कर्मचारी और स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। हालात की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद दमकल की 8 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने लगातार करीब एक घंटे तक राहत और बचाव कार्य चलाते हुए आग पर काबू पाया। समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता तो आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों तक भी आग फैलने का खतरा था। गनीमत यह रही कि इस पूरे हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग से करीब दो लाख रुपए से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है और संबंधित एजेंसियां इसकी जांच में जुटी हुई हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी नवदीप बग्गा ने बताया कि फैक्ट्री संचालक को पूर्व में अग्नि सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित करने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि गोदाम में आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं थे। नोटिस की अवहेलना के मामले में विभागीय स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मध्य प्रदेश के मुरैना में हुए ट्रेन हादसे में यूपी के 4 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में मां-बेटे भी शामिल हैं। मोबाइल ब्लास्ट से आग लगने की अफवाह के बाद उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से कुछ यात्री घबराकर नीचे उतर गए। इसी दौरान 4 यात्री दूसरी ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसे में मेरठ की रहने वाली कंचन सिंह (25) पत्नी मोहित सिंह, आगरा के रुनकता निवासी शकुंतला सिंह (60) पत्नी भूरा सिंह, आगरा निवासी आफरीन (35) पत्नी नदीम और असद (4) पुत्र नदीम खान की मौत हुई है। आफरीन और असद मां-बेटे थे। रेलवे मैनेजमेंट के अनुसार, हादसा उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल के हेतमपुर-धौलपुर रेलखंड पर हुआ। गाड़ी संख्या- 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस रविवार करीब 4:15 बजे हेतमपुर और धौलपुर स्टेशन के बीच चेन पुलिंग के कारण बीच सेक्शन में रुक गई थी। चेन पुलिंग और अफवाह से उतरकर भागे यात्री रेलवे के अनुसार, कोच में अलार्म चेन पुलिंग (ACP) की गई थी। इस कारण ट्रेन बीच सेक्शन में रुक गई। इसी दौरान ट्रेन के एक कोच में मोबाइल ब्लास्ट जैसी अफवाह फैल गई। इससे यात्रियों में दहशत फैल गई। कई यात्रियों ने जल्दबाजी में ट्रेन से उतरना शुरू कर दिया। ट्रैक पर उतरे और दूसरी ट्रेन की चपेट में आए उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से उतरे कुछ यात्री पास की अप-लाइन पर पहुंच गए। इसी दौरान गाड़ी संख्या- 20424 फिरोजपुर-सिवनी पातालकोट एक्सप्रेस वहां से तेज रफ्तार में गुजर रही थी। ट्रैक पर मौजूद 4 यात्री उसकी चपेट में आ गए। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मोबाइल ब्लास्ट की सूचना के बाद घबराए यात्री बागेश्वर धाम से लौट रही यात्री पूजा के अनुसार, कोच में मोबाइल ब्लास्ट की अफवाह फैलते ही अफरा-तफरी मच गई। चेन पुलिंग के बाद ट्रेन रुकते ही यात्री घबराकर नीचे उतर गए और ट्रैक की ओर भागने लगे। घटना की सूचना मिलते ही RPF, GRP और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा मुरैना एसपी धर्मराज मीणा ने बताया- हमारी टीम सराय छोला और सिविल लाइन क्षेत्र में रेत भंडारण पर कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान एक चरवाहे ग्रामीण से सूचना मिली कि ट्रेन रुकी हुई है और कोई घटना हुई है। सूचना मिलते ही दोनों पुलिस टीमें मौके के लिए रवाना की गईं। यह घटना धौलपुर और मुरैना सीमा क्षेत्र में हुई है। सभी शवों को कब्जे में ले लिया गया है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया की जा रही है। मृतकों के परिजन को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से डीजल वितरण को लेकर तय की गई नई सीमा पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उदयपुर पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारी मनोज गोयल ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि आम लोगों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार सरकार का यह आदेश ईंधन की जमाखोरी रोकने और बड़े उपभोक्ताओं द्वारा खुदरा बिक्री के लिए उपलब्ध डीजल की खरीद पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से जारी किया गया है। मनोज गोयल ने बताया कि कुछ बड़े उपभोक्ताओं और औद्योगिक इकाइयों को पहले सीधे सरकारी कंपनियों से ईंधन खरीदने की सुविधा मिली हुई थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बदलाव के बाद कुछ संस्थान खुदरा पंपों से डीजल खरीदने का प्रयास कर रहे थे, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बन सकती थी। इसी को रोकने के लिए सरकार ने यह व्यवस्था लागू की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन को 200 लीटर तक डीजल मिलने की सीमा तय की गई है, जो सामान्य तौर पर 700 से 800 किलोमीटर तक की दूरी तय करने के लिए पर्याप्त है। बाईट - मनोज गोयल, पदाधिकारी, पेट्रोलपम्प एसोसिएशन वीओ - वहीं दूसरी ओर वामपंथी नेता राजेश सिंघवी ने इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि डीजल की सीमा तय करने के पीछे सरकार की ओर से पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। उनका आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और तेल संकट के नाम पर आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। राजेश सिंघवी ने कहा कि पेट्रोलियम कंपनियों के मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जबकि आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि डीजल आपूर्ति और मूल्य से जुड़ी स्थिति का असर किसानों, परिवहन क्षेत्र, डीजल जनरेटर और अन्य मशीनरी पर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि देश की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट की जाए और ईंधन की उपलब्धता को लेकर पारदर्शिता बरती जाए। बाईट - राजेश सिंघवी, नेता वामपंथी दल
देबारी क्षेत्र में पुलिस की छापेमार कार्रवाई के दौरान एक ऐसे अवैध कारोबार का खुलासा हुआ, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता था। पुलिस को सूचना मिली थी कि क्षेत्र में अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री और पटाखों का निर्माण किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुई। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बारूद बनाने में उपयोग होने वाले विभिन्न केमिकल, तैयार पटाखे और निर्माण सामग्री को जब्त किया। मौके पर मौजूद सामग्री को देखकर पुलिस अधिकारियों ने भी इसे गंभीर सुरक्षा खतरा माना। सबसे बडी बात यह थी कि पूरा अवैध संचालन एक सरकारी स्कूल के बेहद नजदीक किया जा रहा था, जिससे विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ था। जांच के दौरान पुलिस ने एक लोडिंग टेम्पो भी जब्त किया, जिसका उपयोग तैयार माल की सप्लाई के लिए किया जा रहा था। मौके से पिता और पुत्र को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और विस्फोटक पदार्थों से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि अवैध कारोबार काफी समय से संचालित हो रहा था और यहां तैयार होने वाले सामान की सप्लाई विभिन्न क्षेत्रों में की जा रही थी। अब पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस कारोबार से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं और विस्फोटक सामग्री की खरीद और सप्लाई का स्रोत क्या था। पुलिस की इस कार्रवाई से एक संभावित बड़े हादसे को समय रहते टाल दिया गया। आरोपियों की पहचान 54 वर्षीय अनिल और 29 वर्षीय उसके बेटे लक्की के रूप में हुई। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पुछताछ में जुटी है।
उदयपुर के ओगणा थाना क्षेत्र के भंवरिया गांव में एक महिला ने अपने शराबी पति की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी पत्नी ने शव के अंतिम संस्कार का प्रयास किया, जिसे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर रुकवा दिया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर आरोपी महिला को डिटेन कर लिया है और मामले की जांच जारी है।
एमबी अस्पताल परिसर में खून के नाम पर अवैध वसूली के आरोप ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धार्थ सोनी ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो बाहर से आने वाले गरीब और असहाय मरीजों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे पैसे वसूल रहा है। सिद्धार्थ सोनी ने बताया कि डूंगरपुर से आए एक जरूरतमंद परिवार से एक यूनिट ब्लड दिलाने के बदले 6500 रुपये वसूले गए थे। पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है। आरोप है कि जब उसी परिवार को दूसरी यूनिट ब्लड की आवश्यकता पड़ी तो उनसे फिर रुपये मांगे गए। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी और आरोपी रौनक साहू को 3000 रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद मौके पर हंगामा हुआ और आरोपी को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। सिद्धार्थ सोनी ने बताया कि पीड़ित परिवार से ली गई 6500 रुपये और 3000 रुपये की राशि वापस दिलवाई गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों, अस्पताल प्रशासन और पुलिस को दी गई है। साथ ही अस्पताल के प्राचार्य को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई है। सिद्धार्थ सोनी ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में ब्लड उपलब्ध कराने के नाम पर किसी को भी हजारों रुपये नहीं देने चाहिए। उन्होंने कहा कि कई सामाजिक संस्थाएं और रक्तदाता समूह जरूरतमंदों को निशुल्क रक्त उपलब्ध करवाते हैं। फिलहाल मामले की शिकायत के बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन से कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है, ताकि यदि किसी प्रकार का गिरोह सक्रिय है तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकें।