
ओस्तवाल नगर में सेटबैक और निर्माण विवाद उस समय खूनी संघर्ष में बदल गया जब पड़ोसी प्रवीण सिंह आसोलिया, उसके चचेरे भाई अनुराग और एक अन्य युवक पर 68 वर्षीय सागरमल मेहता के साथ बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगा। परिजनों का कहना है कि तीनों ने सागरमल मेहता के सिर, गर्दन और सीने पर लगातार लात-घूंसों से हमला किया, जिससे वे मौके पर ही अचेत हो गए। अस्पताल पहुंचाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के बेटे राहुल मेहता का आरोप है कि जिस निर्माण को लेकर विवाद हुआ, वह न्यायालय के स्टे और यूडीए की कार्रवाई के बावजूद जारी था। घटना से पहले कोर्ट कमिश्नर ने मौके का निरीक्षण किया था और उनके जाने के बाद दोनों पक्षों में कहासुनी मारपीट में बदल गई। घटना के बाद एमबी अस्पताल की मोर्चरी के बाहर परिजन, रिश्तेदार और जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में जुट गए। उन्होंने साफ कहा कि जब तक तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिजनों ने आरोपियों के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने, पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और एक से डेढ़ करोड़ रुपए तक मुआवजा देने की मांग भी रखी। रिश्तेदार लोकेश कोठारी ने आरोप लगाया कि समय रहते प्रशासन और संबंधित एजेंसियां अवैध निर्माण पर कार्रवाई करतीं तो यह घटना टाली जा सकती थी। जैन समाज के प्रतिनिधि प्रकाश जैन ने भी प्रशासन से अवैध निर्माण हटाने और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब बुधवार सुबह एमबी अस्पताल की मोर्चरी में एक ओर सागरमल मेहता का शव रखा था और दूसरी ओर अंबामाता थानाधिकारी दलपत सिंह राठौड़ का पार्थिव शरीर अंतिम विदाई के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान सागरमल मेहता के परिजनों और समाज के लोगों ने नारेबाजी करते हुए आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाने, दोषियों को फांसी की सजा देने और मुआवजा घोषित किए जाने तक शव नहीं उठाने की घोषणा कर दी। हंगामे के बीच कुछ लोगों ने थानाधिकारी दलपत सिंह राठौड़ के पार्थिव शरीर को ले जा रही एंबुलेंस का रास्ता रोकने का प्रयास भी किया, जिसके बाद पुलिस को मशक्कत कर एंबुलेंस को वहां से रवाना करना पड़ा। इस दौरान परिजनों ने पुलिस पर धक्का-मुक्की करने के भी आरोप लगाए। समाज के लोग यूडीए अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अडे रहे। इसी दौरान मौक़े पर पहुंचे उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने न्यूज़ 91 से बात करते हुए इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवार क़ी. मांग बताते हुए कहा क़ी पीड़ित परिवार का कहना है क़ी उन्हें थाने के स्टाफ पर भरोसा नहीं है ऐसे में इसकी जांच. डीएसपी से कराई जा रही है और आरोपियों को भी गिफ्तार कर लिया गया है। उधर पुलिस ने मामले की जांच प्रतापनगर थाने से हटाकर दूसरे अधिकारी को सौंप दी है। वहीं परिजनों और समाज के बढ़ते आक्रोश के बाद यूडीए की टीम बुलडोजर लेकर आरोपी के घर पहुंची और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

29 Jul 2026