
मेवाड़ की गौरवशाली विरासत पर भू-माफियाओं की नजर अब इस कदर बढ़ गई है कि सदियों पुराने स्मारकों को भी नहीं बख्शा जा रहा। ताजा मामला तितरड़ी ग्राम पंचायत का है, जहाँ महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय के शासनकाल के दौरान निर्मित एक ऐतिहासिक बुर्ज को ढहा दिया गया। इतिहासकार डॉ. अजातशत्रु सिंह शिवरती ने बताया कि यह बुर्ज पूर्व में शिवरती ठिकाने के अधीन था और इसका ऐतिहासिक महत्व बेहद खास था। पुराने समय में जब शाम ढलते ही उदयपुर शहर के दरवाजे बंद कर दिए जाते थे, तब सलूंबर की ओर से आने-जाने वाले यात्री इसी बुर्ज में विश्राम किया करते थे। विशिष्ट अतिथियों के लिए जहाँ तितरड़ी गढ़ में व्यवस्था होती थी, वहीं आम जन और यात्रियों के लिए यह बुर्ज एक सुरक्षित आश्रय स्थल था। वर्तमान में यह संरचना महाराज हमीर सिंह जी शिवरती के नाम से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी। डॉ. शिवरती ने इस घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पुरातत्व विभाग की लापरवाही को भी आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि अगर विभाग ने इसे पहले ही संरक्षित घोषित किया होता, तो आज यह नौबत नहीं आती। सवीना थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज करा दी गई है। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में अंबा माता मंदिर, चित्तौड़ी तालाब और खांडा तालाब जैसी कई ऐतिहासिक संपत्तियां हैं, जो मेवाड़ के जनकल्याणकारी इतिहास की गवाह हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की और इस धरोहर की भरपाई नहीं की, तो वे बड़े स्तर पर जन आंदोलन करेंगे।