
उदयपुर के अर्थ डायग्नोस्टिक सेंटर के सीईओ और दिव्यांग अधिकारों के लिए सक्रिय डॉ. अरविंदर सिंह द्वारा दायर परिवाद पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक, मंडल रेल प्रबंधक अजमेर और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सभी पक्षों को 27 अगस्त को स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होकर जवाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं होने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई भी की जा सकती है। शिकायत के अनुसार, 14 मार्च को 50 प्रतिशत पोलियोग्रस्त दिव्यांग डॉ. अरविंदर सिंह को कैलिपर की मरम्मत के लिए तत्काल जयपुर जाना था। उनका आरोप है कि उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित पार्किंग, अलग टिकट काउंटर, व्हीलचेयर सहायता, प्लेटफॉर्म तक सुगम पहुंच और ट्रेन में सुरक्षित चढ़ने की व्यवस्था प्रभावी रूप से उपलब्ध नहीं थी। पूछताछ काउंटर बंद होने और लंबी कतारों के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने 412 रुपये का टिकट ऑनलाइन बुक किया, लेकिन पर्याप्त सहायता नहीं मिलने से ट्रेन में सुरक्षित रूप से सवार नहीं हो सके।परिवाद में कहा गया है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत असुविधा का नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के संवैधानिक अधिकारों और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा है। याचिका में त्ंरपअम त्ंजनतप, श्रममरं ळीवेी और टपांेी ज्ञनउंत से जुड़े सर्वाेच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें सार्वजनिक सेवाओं में सुगमता और गरिमापूर्ण व्यवहार को अनिवार्य बताया गया है। डॉ. अरविंदर सिंह ने मानसिक पीड़ा, आर्थिक नुकसान, मुकदमे के खर्च और टिकट राशि सहित कुल 6 लाख 20 हजार 412 रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की है। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल व्यक्तिगत मुआवजे की नहीं, बल्कि सभी दिव्यांग यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों पर वास्तविक और सम्मानजनक सुविधाएं सुनिश्चित कराने की पहल है।