
देवस्थान विभाग के अधीन सवीना मठ की करोड़ों रुपये मूल्य की कृषि भूमि को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि मंदिर की भूमि को सुनियोजित तरीके से खुर्द-बुर्द कर राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता राधा कृष्ण चावरिया ने आरोप लगाया कि सवीना मठ की कृषि भूमि देवस्थान विभाग के अधीन है, लेकिन तत्कालीन पटवारी मोहन सिंह राठौड़ और कथित भू-माफियाओं की मिलीभगत से इस भूमि का अवैध रूप से नामांतरण कर पट्टे आवंटित कर दिए गए। उन्होंने मांग की कि पूरी भूमि दोबारा देवस्थान विभाग के नाम दर्ज की जाए और इस पूरे मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया जा चुका है और आवश्यकता पड़ने पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में भी शिकायत दर्ज कराई जाएगी। वहीं हिंदू समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर रामलाल गुर्जर ने आरोप लगाया कि सवीना मठ में स्थित श्रीकृष्ण, राधा और भगवान शिव मंदिर की सेवा में लगे पुजारी गोपाल गिरि गोस्वामी ने शांतिलाल वेलावत, दिनेश और तत्कालीन पटवारी मोहन सिंह राठौड़ के साथ मिलीभगत कर मंदिर की भूमि को अपना पैतृक अधिकार बताकर बेच दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में इस भूमि की रजिस्ट्रियां कर अन्य लोगों को बेच दिया गया। ज्ञापन में दिनेश जैन, शशिकला मेहता, सुधा मेहता, ओमप्रकाश, रमेश, राकेश मूंदड़ा, गोपाल मुणोत, गोपाल गिरि गोस्वामी और तत्कालीन पटवारी मोहन सिंह राठौड़ के नाम का उल्लेख करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, अवैध रजिस्ट्रियां निरस्त करने और भूमि को फिर से मंदिर एवं देवस्थान विभाग के नाम दर्ज करने की मांग की गई है।

31 Jul 2026