
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर शहर जिलाध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ और देहात जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उदयपुर के संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर सोमवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्व विधायक प्रीति गजेंद्र सिंह शक्तावत, त्रिलोक पूर्बिया सहित संभाग भर के कई विधायक और पदाधिकारी मौजूद रहे। शहर जिलाध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार को गरीब विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाना न केवल महापुरुष का अपमान है, बल्कि यह ग्रामीणों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने चेतावनी दी कि महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए मनरेगा आखिरी सहारा है, जिस पर अब मोदी सरकार हमला कर रही है। वहीं, पूर्व विधायक प्रीति शक्तावत ने योजना में किए जा रहे तकनीकी बदलावों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने इस योजना की नींव इसलिए रखी थी ताकि माताओं-बहनों और बुजुर्गों को उनकी अपनी ही पंचायत में काम मिल सके। लेकिन अब काम का दायरा बढ़ाकर उन्हें दूर भेजने की तैयारी है, जिससे महिलाएं इस काम से दूर हो जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गारंटी को पंचायतों से छीनकर ठेकेदारों के हाथ में दे रही है, जो पूरी तरह गलत है। देहात अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने भी इसे गरीबों के हक पर डाका बताया। प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस नेताओं ने संभागीय आयुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मनरेगा को उसके पुराने स्वरूप में बहाल करने और महात्मा गांधी का नाम फिर से जोड़ने की मांग की।