
उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट पर मंगलवार को घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के सैकड़ों लोग अपने अधिकारों और आरक्षण की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन की खास बात यह रही कि आंदोलनकारी पारंपरिक वेशभूषा में ऊंटों पर सवार होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जिससे यह प्रदर्शन आम विरोध प्रदर्शनों से अलग नजर आया। घुमंतू विमुक्त जाति परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रतननाथ कालबेलिया के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में गाडोलिया, बंजारा, कालबेलिया, भोपा, रायका, रेबारी और देवासी सहित विभिन्न समुदायों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्षों से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। उनका आरोप है कि रेनके आयोग, इदाते आयोग और न्यायालयों की विभिन्न टिप्पणियों और सिफारिशों के बावजूद घुमंतू और विमुक्त जातियों को उनका अधिकार नहीं मिल पाया है। प्रदर्शनकारी आंध्र प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान में भी घुमंतू जातियों को 10 प्रतिशत संवैधानिक आरक्षण देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान रतननाथ कालबेलिया ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 1 जुलाई को जयपुर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि घुमंतू समाज की समस्याएं केवल आरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आज भी कई परिवारों के सामने भूमि और मूलभूत अधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दे मौजूद हैं। वहीं डीएनटी संघर्ष समिति के सह-अध्यक्ष कालूराम योगी ने भी सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की। प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और भारी पुलिस जाब्ता मौके पर तैनात रहा।