
उदयपुर जिला कलेक्ट्री आज उस समय नारों से गूंज उठी जब सैकड़ों मजदूर, किसान और कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। ट्रेड यूनियनों द्वारा देशव्यापी आह्वान पर की गई इस आम हड़ताल का व्यापक असर लेक सिटी में भी देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि देश के संसाधनों को बेचने की तैयारी की जा रही है। समाजसेवी और एडवोकेट राजेश सिंघवी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए चार लेबर कोड श्रम कानूनों को खत्म करने की एक साजिश है। उन्होंने अमेरिका के साथ हुई फ्री ट्रेड डील पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह डील भारतीय किसानों के हितों को दरकिनार कर की गई है। सिंघवी ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार जिन वर्गों को बचाने का दावा करती है, असल में उन्हीं को बर्बाद करने की नीतियां बनाई जा रही हैं। रैली में मौजूद डॉ. हेमेंद्र चंडालिया ने बताया कि यह आंदोलन मुख्य रूप से उन चार श्रम संहिताओं के खिलाफ है जो आगामी 1 अप्रैल से लागू होने वाली हैं। संगठनों का तर्क है कि इन नए कानूनों से मजदूरों के संगठित होने और ट्रेड यूनियन बनाने के अधिकार छिन जाएंगे। इसके अलावा, मनरेगा को समाप्त कर लाई गई नई 'बी-राम जी' योजना का भी कड़ा विरोध किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार अपने दायित्वों को राज्यों पर डालकर ग्रामीण मजदूरों को उनके संबल से वंचित कर रही है। आंदोलन में CITU, AITUC और INTUC जैसी बड़ी यूनियनों के साथ-साथ बैंक एम्प्लाइज और LIC यूनियन के कर्मचारी भी शामिल रहे। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ठेका प्रथा को बढ़ावा देने और स्थाई रोजगार को खत्म करने की दिशा में अपने कदम पीछे नहीं खींचे, तो यह आंदोलन आने वाले समय में और उग्र होगा। प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्री परिसर में भारी पुलिस जाब्ता तैनात रहा, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।

12 Feb 2026