
उदयपुर में आम जनता को पैदल चलने का पाठ पढ़ाने वाले और फुटपाथों से गाड़ियां हटवाने का दावा करने वाले नगर निगम प्रशासन को अपने ही 'नाक के नीचे' हो रहा भारी अतिक्रमण नजर नहीं आ रहा है। यह मामला नगर निगम उदयपुर की दीवार से ठीक सटी हुई ठक्कर बापा कॉलोनी का है, जहाँ प्रशासनिक दोहरे रवैये की पोल खुलकर सामने आ गई है। इस पूरे मार्ग पर टायरों को रिट्रेड करने वाली दुकानें स्थित हैं। दुकानें तो साइज में बेहद छोटी हैं, लेकिन इनका पूरा का पूरा कारोबार आधी से ज्यादा मुख्य सड़क पर फैला रहता है। दिनभर सड़क पर खुलेआम टायर बिखरे रहते हैं, जिससे न केवल यातायात अवरुद्ध होता है बल्कि राहगीरों का निकलना भी दुभर हो गया है। हैरानी की बात यह है कि निगम के आला अधिकारी रोज़ इसी रास्ते से गुजरते हैं, फिर भी उनकी नजर इस अवैध कब्जे पर नहीं पड़ती। जबकि यह मार्ग यातायात प्रबंधन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सूरजपोल चौराहे पर जब भी वाहनों का दबाव बढ़ता है, तो आपातकालीन परिस्थितियों में दुपहिया वाहनों को इसी रास्ते से डाइवर्ट किया जा सकता है। नगर निगम की दीवार से सटा यह रास्ता सीधे पीछे की तरफ शक्तिनगर-मेवाड़ मोटर्स लिंक रोड पर जाकर खुलता है। सवाल यह खड़ा होता है कि नगर निगम जब पूरे शहर में बुलडोजर चलाकर व्यापारियों की चबूतरियां तोड़ रहा है और आम रहवासियों को गाड़ियां हटाने की हिदायत दे रहा है, तो फिर अपने ही दफ्तर के बगल में पूरी सड़क घेरकर बैठे टायर दुकानदारों पर मेहरबानी क्यों? करीब तीन साल पहले प्रदूषण और शिकायतों के चलते यहाँ कार्रवाई हुई थी, लेकिन अब फिर से रहवासी जहरीले प्रदूषण और इस अतिक्रमण से त्रस्त हैं। अब देखना होगा कि निगम का बुलडोजर इस 'अंधेरे' को कब साफ करता है।
16 Oct 2026