
कानोड़ क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आकोला से शिक्षा विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ कार्यवाहक प्रधानाचार्य भंवर लाल पर विद्या संबल योजना के तहत नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए अपने ही रिश्तेदार को बैकडोर से राजनीति विज्ञान व्याख्याता के पद पर लगाने का गंभीर आरोप लगा है। मामला तब भड़का जब कानोड़ के जागरूक अभ्यर्थी सोहन लाल माली ने चयन प्रक्रिया की पोल खोलते हुए उच्च अधिकारियों से लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, सीकर से बुलाए गए अभ्यर्थी प्रदीप के आवेदन और अटेंडेंस रजिस्टर के हस्ताक्षरों में भारी भिन्नता पाई गई, जो पूरी प्रक्रिया के फर्जीवाड़े की ओर इशारा करती है। धांधली की परतें खुलीं तो विभाग ने नरेंद्र दक की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी। लेकिन मामला यहीं नहीं थमा! आरोप है कि खुद को फंसता देख कार्यवाहक प्रधानाचार्य भंवर लाल ने 14 और 15 सितंबर को पुरानी चयन कमेटी के सदस्यों पर 31 अगस्त की बैक डेट में दस्तखत करने का अनुचित दबाव बनाया। जब सदस्यों ने इस फर्जीवाड़े का हिस्सा बनने से इनकार किया, तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर सर्विस बुक फाड़ने तक की धमकियां दी गईं और मनमाने ढंग से नई कमेटी का गठन कर दिया गया। लगातार बढ़ती शिकायतों पर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (समग्र शिक्षा) भींडर ने तीन सदस्यीय एक और जांच टीम का गठन कर दिया। चारों तरफ से घिरने और कानूनी शिकंजे के डर से कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने आनन-फानन में 12 अक्टूबर को अपने रिश्तेदार से इस्तीफा लिखवा दिया। हेडमास्टर की इस मनमानी की सजा अब स्कूल के उन मासूम छात्रों को भुगतनी पड़ रही है, जिनका पद फिर से खाली हो गया है। गौर करने वाली बात यह भी है कि विवादों से भंवर लाल का पुराना नाता रहा है; इससे पहले भी एक महिला कार्मिक से छेड़छाड़ और प्रताड़ना के मामले में उनके खिलाफ जांच लंबित है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस पूरे फर्जीवाड़े पर केवल कागजी कमेटियां ही बनाता है या आरोपी प्रधानाचार्य पर कोई ठोस सख्त कार्रवाई भी करता है।
16 Oct 2026