
उदयपुर के भुवाणा स्थित खसरा नंबर 1961 की आधा बीघा जमीन अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। मंगलवार को कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक पर गंभीर आरोप लगाए। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने कहा कि जिले में आदिवासियों की जमीनों को हड़पना अब आम बात हो गई है। उन्होंने दावा किया कि भुवाणा के मूल खातेदार ने पहले यह जमीन दो करोड़ रुपये में चित्तौड़गढ़ के एक व्यक्ति को बेची थी, लेकिन सत्ता के दबाव में खेल पलट दिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों और भाजपा नेताओं ने मिलकर खातेदार को सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में बंधक बनाया। आरोप के मुताबिक, रिवॉल्वर और लाठियों के दम पर महज 12 लाख रुपये में जमीन की फिर से रजिस्ट्री करवाई गई। इतना ही नहीं, पीड़ित खातेदार को ही ठगी के फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेज दिया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार को पर्ची सरकार करार देते हुए कहा कि उदयपुर में जमीनों के जितने भी विवाद सामने आ रहे हैं, उनमें सत्ताधारी दल के नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत साफ नजर आ रही है। पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा और फतह सिंह राठौड़ ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि पीड़ित आदिवासी परिवार को उसकी जमीन वापस दिलाई जाए। उन्होंने इस मामले में लिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई करने और विधायक के इस्तीफे की भी मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे गरीबों और आदिवासियों का शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे और यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
04 Feb 2026