
उदयपुर की यातायात समस्या को सुलझाने के लिए शुरू किया गया फ्लाईओवर प्रोजेक्ट अब खुद एक बड़ी समस्या बन गया है। चार चरणों में होने वाले इस निर्माण कार्य के तीन चरणों में तो काम जारी है, लेकिन जिला कलेक्ट्रेट से कोर्ट सर्कल स्थित जिला कलेक्टर आवास के बीच का चौथा चरण पूरी तरह बदहाल स्थिति में है। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी ठोस प्लानिंग और जमीनी सर्वे के कलेक्ट्रेट के बाहर खुदाई शुरू कर दी गई। जैसे ही काम आगे बढ़ा, सड़क के नीचे बिछी केबलों का जाल सामने आ गया। इसके बाद प्रशासन ने समाधान निकालने के बजाय काम को ही बंद कर दिया। पिछले कई दिनों से यह काम ठप पड़ा है, जिससे पूरी सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। प्रशासन की इस अदूरदर्शिता का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। कलेक्ट्रेट और कोर्ट सर्कल जैसे अति-व्यस्त इलाकों में अधूरे पड़े इस काम की वजह से आए दिन भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। कलेक्ट्रेट आने वाले परिवादी हों या आम वाहन चालक, हर कोई इस प्रशासनिक ढिलाई से त्रस्त है। सवाल यह उठता है कि क्या निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित विभागों के साथ समन्वय नहीं किया गया था? क्यों केबल शिफ्टिंग जैसी बुनियादी तैयारी पहले नहीं की गई? विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले अधिकारियों की चुप्पी अब लोगों के सब्र का बांध तोड़ रही है। अगर जल्द ही इस चौथे चरण का काम शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह मार्ग शहर के लिए यातायात का सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाएगा। फिलहाल, गड्ढे खोदकर काम बंद कर देने वाली इस कार्यप्रणाली ने प्रशासन की साख पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।