
एमबी हॉस्पिटल में पीपीपी मोड पर एमआरआई मशीन संचालित करने वाली वर्धमान मार्केटिंग कंपनी पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन ने हाथीपोल थाना पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2005 में टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित फर्म को एमआरआई मशीन संचालन का कार्य सौंपा गया था। जांच में सामने आया कि यह एक प्रोपराइटरशिप फर्म थी और उसके प्रोपराइटर की 10 मई 2010 को मृत्यु हो चुकी थी। आरोप है कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर अस्पताल प्रशासन से छुपाया गया। इसके बावजूद वर्ष 2010 से 2018 के बीच कंपनी के प्रतिनिधि स्वयं को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बताते रहे और अस्पताल प्रशासन से लगातार पत्राचार करते हुए एमआरआई मशीन का संचालन जारी रखा। पूरे मामले का खुलासा साल 2019 में उस समय हुआ, जब मृत प्रोपराइटर की पत्नी की ओर से अस्पताल प्रशासन को एक पत्र भेजा गया। इसके बाद दस्तावेजों की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2018 में जारी नई निविदा में इसी फर्म ने दोबारा आवेदन किया था। आवेदन पर हस्ताक्षर करने वाला प्रतिनिधि एक दूसरी कंपनी में डायरेक्टर के पद पर मिला। इससे यह संकेत मिला कि संबंधित फर्म वास्तव में उसी दूसरी कंपनी की एक इकाई के रूप में कार्य कर रही थी। शिकायत के अनुसार निःशुल्क एमआरआई जांच, किराया और बिजली शुल्क के मद में कंपनी पर अस्पताल का 48 लाख 86 हजार 787 रुपए बकाया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई बार पत्राचार और राशि जमा कराने के लिए नोटिस दिए गए, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद आईजी कार्यालय के निर्देश पर हाथीपोल थाना पुलिस ने धोखाधड़ी और षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
20 Jul 2026