
उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर रहे वामपंथी दल के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे वामपंथी नेता और समाजसेवी राजेश सिंघवी ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचूक को 18 जुलाई को सरकार ने जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह लड़ाई सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों नौजवानों के भविष्य को बचाने का आंदोलन है। केंद्र सरकार पिछले लंबे समय से शिक्षा का निजीकरण करने में जुटी है, जिसके खिलाफ अब पूरा देश लामबंद हो रहा है। सिघवी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में 70 से ज्यादा पेपर लीक हुए हैं, जिससे युवाओं का भविष्य पूरी तरह बर्बाद हो गया है। राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा गया कि राज्य में एमबीबीएस की 900 सीटें तो बढ़ी हैं, लेकिन इनमें से एक भी सरकारी सीट नहीं है। निजीकरण के इस दौर में जब एक छात्र एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करके डॉक्टर बनेगा, तो समाज के प्रति उसका दृष्टिकोण सेवा का नहीं रह पायेगा। देश की लचर परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कानपुर के एक गोल्ड मेडलिस्ट छात्र का जिक्र भी किया गया, जिसने 50 सरकारी परीक्षाएं देने के बाद भी सफलता न मिलने पर हताश होकर अपनी जान दे दी थी। आंदोलनकारियों का कहना है कि देश को एक वैज्ञानिक शिक्षा पद्धति की जरूरत है, न कि किसी विशेष सांप्रदायिक ढांचे की। सरकार ने जिस तरह सोनम वांगचुक के आंदोलन को दबाने की कोशिश की, वैसे ही इस छात्र आंदोलन को भी कुचलना चाहती है, लेकिन देश के अलग-अलग शहरों में यह प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। जनसंगठनों ने मांग की है कि शिक्षा का निजीकरण तुरंत रोका जाए और सभी परीक्षाएं सिर्फ सरकारी एजेंसियों के माध्यम से ही पूरी कराई जाएं।