
उदयपुर के प्रतापनगर थाने से इंसानियत और संवेदनशीलता की एक मिसाल सामने आई है, जहां पुलिसकर्मियों ने परिवार की तरह एक विधवा महिला के बेटे की शादी में मायरा भरकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाई।दरअसल मीराबाई पिछले करीब 25 वर्षों से प्रतापनगर थाने में पुलिसकर्मियों के लिए भोजन बनाती हैं। वे रोजाना थाने के स्टाफ के लिए खाना बनाती हैं और सभी का ध्यान एक मां की तरह रखती हैं। जब उनके बेटे मुकेश गायरी की शादी का मौका आया तो परिवार में मायरा भरने की परंपरा निभाने वाला कोई आगे नहीं आया। मीराबाई के तीन भाई हैं, लेकिन पारिवारिक नाराजगी के कारण दो भाई शादी में शामिल नहीं हुए। ऐसे में थाने के पुलिसकर्मियों ने ही यह जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। रविवार शाम को थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में पुलिसकर्मी ढोल-नगाड़ों की धुन पर सुंदरवास स्थित मीराबाई के घर पहुंचे। सभी पुलिसकर्मी साफा पहनकर पारंपरिक अंदाज में मायरा लेकर पहुंचे थे।पुलिस टीम अपने साथ नोटों और कपड़ों से सजे थाल लेकर आई और थाने की ओर से 1 लाख 11 हजार रुपए की राशि फैरावणी के साथ भेंट की। थानाधिकारी ने मीराबाई को चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित भी किया। इस दौरान मीराबाई भावुक हो गईं। सब इंस्पेक्टर रेणू खोईवाल ने बताया कि मीराबाई थाने के हर पुलिसकर्मी का ध्यान एक मां की तरह रखती हैं, इसलिए स्टाफ ने मिलकर यह फैसला किया कि बेटे की शादी में मायरा भरकर उनका सहयोग किया जाए। मीराबाई ने बताया कि शादी के एक साल बाद ही उनके पति की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उस समय बेटा मुकेश महज छह महीने का था। उन्होंने घरों में झाड़ू-पोछा कर बच्चों को पाला और बाद में थाने में खाना बनाने का काम शुरू किया। आज वही पुलिसकर्मी उनके परिवार की तरह उनके साथ खड़े नजर आए।