
उदयपुर जिले में सेवा और बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के बाद अब मास्टर ट्रेनर बनने की होड़ में भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे हैं। 8 फरवरी से 17 फरवरी तक चले प्रशिक्षण के बाद जैसे ही 19 फरवरी से शुरू होने वाले 7 दिवसीय मास्टर ट्रेनर कार्यक्रम की सूची सामने आई, स्वयंसेवकों का गुस्सा फूट पड़ा। 360 मास्टर ट्रेनरों की इस लिस्ट को लेकर आरोप है कि इसे पूरी तरह गोपनीय रखा गया और चयन में पारदर्शिता की जगह भाई-भतीजावाद को तरजीह दी गई। स्वयंसेवकों का दावा है कि कुछ कर्मचारियों ने मिलीभगत कर अपने करीबियों के नाम पहले ही सूची में शामिल करवा लिए थे। स्वयंसेवकों का कहना है कि जिन्होंने प्रशिक्षण के दौरान बेहतर प्रदर्शन किया और जिनके पास एचसीसी स्काउट और अन्य वैध प्रमाण पत्र हैं, उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। वहीं, ऐसे लोगों को मास्टर ट्रेनर बना दिया गया जो इसके पात्र ही नहीं थे। जब योग्य अभ्यर्थियों ने इस संबंध में अधिकारियों से जानकारी मांगी, तो उन्हें स्पष्ट जवाब देने के बजाय डराया और धमकाया गया। आरोप है कि आवाज उठाने वालों को ड्यूटी से हटाने और नोटिस देने की चेतावनी दी जा रही है, जिससे प्रशिक्षणार्थियों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। जिला कलेक्टर को सौंपी गई शिकायत में मांग की गई है कि इस विवादित सूची पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए। स्वयंसेवकों का कहना है कि प्रशासन इस पूरी चयन प्रक्रिया की दोबारा जांच कराए और केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही मेरिट के आधार पर मौका दिया जाए।