
उदयपुर का रोडवेज बस स्टैंड और मंगलवार रात के साढ़े नौ बजे का समय। जैसे ही डिपो पर जोधपुर जाने वाली बस लगी तो लोग अंदर चढ़ गए और ऑनलाइन बुकिंग वाले यात्री बाहर रह गए। इसके बाद यात्री आमने-सामने हो गए और हंगामा शुरू हो गया। ये नजारा सिर्फ एक बस नहीं बल्कि अमूमन सभी बसों में देखने को मिला। बस स्टैंड पर यात्रियों की भीड़ और अफरा तफरी का माहौल रहा।राजस्थान में निजी बस ऑपरेटर्स की हड़ताल ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने ग्राउंड पर रात को बस स्टैंड का माहौल देखा तो सामने आया कि रात के समय जाने वाली बसों में अमूमन इतने यात्री नहीं होते हैं लेकिन बस की क्षमता से डबल यात्री बस स्टैंड पर थे।रात साढ़े नौ बजे उदयपुर से जोधपुर वाया गोगुंदा, रणकपुर और फालना जाने वाली बस जैसे ही लगी, वैसे ही यात्री अंदर घुस पड़े। बस कुछ ही मिनटों में इतनी भर गई कि खड़े होने की भी जगह नहीं बची। ऑनलाइन बुकिंग वाले यात्री बाहर ही खड़े रह गए, और उनकी आरक्षित सीटों पर बिना टिकट वाले यात्रियों ने कब्जा कर लिया। रिजर्व टिकट वाले यात्रियों को अंदर जाने तक की जगह नहीं थी।इस बीच कई यात्रियों ने विरोध किया कि हमारी सीट ऑनलाइन बुक थी, लेकिन अंदर पहुंचे तो कोई और बैठा हुआ था। उठाने को कहा तो बहस हो गई। करीब 10 से ज्यादा ऐसे यात्री थे जिनकी सीटों पर अनरिजर्व्ड सीटों वाले पैसेंजर्स ने कब्जा कर लिया था।पहले से सीटों पर कब्जा कर बैठे अनरिजर्व्ड यात्री टस से मस नहीं हुए। वे बोलते कि उन्होंने आकर सीट पहले रोकी तो यात्री कहता है कि ये मेरी ऑनलाइन बुकिंग वाली सीट है और मुझे आवंटित की गई है।बस के कंडक्टर को बीच-बचाव करना पड़ा, और काफी जद्दोजहद के बाद ऑनलाइन टिकट वालों को उनकी सीटें मिलीं। लेकिन इस दौरान चीख-पुकार और झगड़े की नौबत आ गई। हड़ताल के चलते निजी बसें बंद होने से सारा बोझ रोडवेज बसों और ट्रेनों पर आ गया है, जिससे यात्रियों का सफर दूभर हो रहा है।ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले यात्रियों का कहना था कि सीट आरक्षित होने के बावजूद उन्हें बस में चढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं बिना रिजर्वेशन वाले यात्री भी किसी तरह सफर करने की कोशिश में थे।एक परिवार सहित करीब पांच अन्य यात्री थे जिनको पिंडवाडा जाना था वे बस स्टैंड पर पहुंचे। उनको रात को एक बस की जानकारी मिली लेकिन एक परिवार को रात को 1 बजे पिंडवाडा से ट्रेन पकड़नी थी। बसों की भीड़ देखकर परिवार वहां से यह कहकर निकला कि ट्रैक्सी करके जाएगा। बाद में उसको ट्रैक्सी भी नहीं मिला और परिवार परेशान होता रहा और वहां से निकला।रोडवेज बस स्टैंड के बाहर ही ट्रैवेल बसों के जो बुकिंग कार्यालय थे वहां सन्नाटा था। यहां रात को गुजरात के सूरत, बड़ौदा, अहमदाबाद और राज्य के जयपुर, जोधपुर और कोटा जाने के लिए रात दस बजे बाद बसें यहां आती है। इन कार्यालयों के वहां पर रात 11 बजे तक रौनक रहती है लेकिन हड़ताल के चलते सब बंद थे और वहां सन्नाटा था।मुख्य रोड पर कई यात्री थे जिनको अहमदाबाद, सूरत और हिम्मतनगर जाना था लेकिन साधन नहीं थे। वे वहां पर खड़े थे कि कोई टैक्सी इस तरफ गुजर रही हो तो चले जाएंगे लेकिन थक हार कर वापस बस स्टैंड ही आए।