
उदयपुर के भाजपा सांसद मन्नालाल रावत को जोधपुर जिला निर्वाचन अधिकारी से कार्रवाई का नोटिस मिला है। नोटिस में चुनाव ड्यूटी में लापरवाही करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। दरअसल, सांसद मन्नालाल रावत लोकसभा चुनाव लड़ने से पहले ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में एडिशनल कमिश्नर थे। वे जोधपुर में भी पोस्टेड रहे। साल 2024 में वीआरएस लेकर उन्होंने चुनाव लड़ा और लोकसभा सांसद चुने गए। इसके बाद भी उनका नाम अब तक जोधपुर जिले के सरकारी कर्मचारियों की लिस्ट में शामिल है। नोटिस मिलने के बाद रावत ने सरकारी सिस्टम पर हैरानी जताई है।जोधपुर जिला परिषद के सीईओ और निर्वाचन विंग के कार्मिक प्रकोष्ठ प्रभारी अधिकारी आशीष कुमार मिश्रा के ऑफिस ने सांसद को गुरुवार (13 अगस्त) शाम को ये नोटिस जारी किया। इसमें रावत से उनके ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई है। इस डिटेल को सरकारी पोर्टल पर शुक्रवार (14 अगस्त) दोपहर तीन बजे तक अपडेट करने के आदेश दिए गए हैं। अगर रावत ऐसा नहीं करते हैं तो इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 134 के तहत अपराध माना जाएगा। उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। आशीष कुमार मिश्रा ने बताया- चुनाव के लिए ईएमएस पोर्टल पर कार्मिकों की सूचना 1 अगस्त 2026 तक अपडेट की जानी थी। 13 अगस्त 2026 तक एनआईसी से प्राप्त सूची के अनुसार सूचना अपडेट से शेष रहे डीडीओ ऑफिस को सूचित किया गया था। इसमें संयुक्त यातायात कमिश्नर (आरआईटी) जोधपुर द्वारा डीडीओ की सूची को अपडेट नहीं किया गया था। लिस्ट में 129 नंबर पर पूर्व अधिकारी मन्नाराम रावत का नाम होने के कारण उन्हें नोटिस जारी हो गया। सांसद बोले- कर्मचारी ने फोन कर दी सूचना सांसद को दिए गए इस नोटिस के बाद पंचायत और निकाय चुनाव की तैयारियों पर भी सवाल उठ गए हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि सालों तक कर्मचारियों की लिस्ट अपडेट नहीं होना चिंताजनक है। सांसद मन्नालाल ने बताया- पहले मुझे सुबह जोधपुर की निर्वाचन शाखा के एक कर्मचारी ने फोन करके नोटिस की सूचना दी। इसके बाद गुरुवार शाम 5:34 बजे मुझे वॉट्सएप पर नोटिस की कॉपी भेज दी गई। सांसद रावत ने कहा- डिजिटल दौर में भी निर्वाचन विभाग का डाटा 3 साल पुराना चल रहा है। इससे पता चलता है कि सिस्टम में बैठे अधिकारी आम आदमी और कर्मचारियों का डेटा कैसे मेंटेन कर रहे होंगे।
14 Aug 2026