
कोटा-चित्तौड़गढ़ रेल मार्ग पर मंगलवार तड़के एक खतरनाक साजिश का खुलासा हुआ, जिसने रेलवे सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। उदयपुर की ओर जा रही मेवाड़ एक्सप्रेस को पटरी से उतारने के इरादे से असामाजिक तत्वों ने ट्रैक पर भारी-भरकम लोहे का गर्डर रख दिया था। घटना तोरनिया और सुवावा गांव के बीच ओराई नदी की पुलिया के पास की है, जहां करीब 5 मीटर लंबा और ढाई क्विंटल वजनी पुरानी पटरी का टुकड़ा ट्रैक पर रखा गया। यदि ट्रेन इससे टकराकर डिरेल होती, तो नदी में गिर सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था। लेकिन संयोगवश ट्रेन के लेट होने के कारण पहले चित्तौड़गढ़ से कोटा की ओर जा रही एक मालगाड़ी इस गर्डर से टकरा गई। टक्कर के बाद वह लोहे का टुकड़ा ट्रैक से दूर जा गिरा और एक बड़ा हादसा टल गया। मालगाड़ी के लोको पायलट ने ट्रैक पर संदिग्ध वस्तु देखकर तुरंत ब्रेक लगाए। अंधेरे के बावजूद उनकी सतर्कता के चलते ट्रेन धीमी गति से गर्डर से टकराई, जिससे नुकसान सीमित रहा और बड़ी दुर्घटना टल गई। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन सतर्क हो गया और एहतियात के तौर पर मेवाड़ एक्सप्रेस को पारसोली स्टेशन पर करीब एक घंटे तक रोका गया। ट्रैक की गहन जांच के बाद ही ट्रेन को आगे बढ़ाया गया। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इतने भारी गर्डर को ट्रैक पर रखने में एक से अधिक लोगों की भूमिका हो सकती है। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं।
01 May 2026