
उदयपुर में जनजातीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय जनजाति भित्ति चित्र एवं मांडना कला कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का शुभारंभ जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। यह आयोजन जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग तथा माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के तत्वावधान में सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण संस्थान के सभागार में किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीसीआरटी अध्यक्ष विनोद नारायण इंदुकार ने की। कार्यक्रम में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग के निदेशक हेमंत द्विवेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर टीआरआई निदेशक ओ.पी. जैन और सांख्यिकी निदेशक सुधीर दवे ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकार भाग ले रहे हैं। इनमें राजस्थान के साथ-साथ महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, ओडिशा और त्रिपुरा सहित कुल 10 राज्यों के कलाकार शामिल हैं। इस कार्यशाला के माध्यम से जनजातीय समुदायों की पारंपरिक भित्ति चित्र और मांडना कला को संरक्षित करने के साथ-साथ कलाकारों को एक साझा मंच प्रदान किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान कलाकार अपनी पारंपरिक कला शैली का प्रदर्शन भी करेंगे और एक-दूसरे के अनुभवों को साझा करेंगे। आयोजकों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से जनजातीय कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।
01 May 2026