
सहारा इंडिया परिवार के कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी है। सोमवार को कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट पहूंचे और आक्रोश जाहिर किया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे धन्नालाल सालवी ने बताया कि सहकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया भुगतान पोर्टल पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। मात्र 50 हजार रुपये की सीमा और ढेरों कमियां निकालकर निवेशकों को परेशान किया जा रहा है। सालवी का सवाल है कि जब कंपनी के पास 8 लाख करोड़ की संपत्ति मौजूद है और देनदारी सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ की है, तो भुगतान में इतनी देरी क्यों की जा रही है? ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने एक भयावह सच उजागर किया है। दावा किया गया है कि जमाकर्ताओं के दबाव और अपमान के कारण अब तक करीब 12 हजार सहारा कार्यकर्ता अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके हैं। लाखों कार्यकर्ता आज अपने ही घरों से दूर भूमिगत होने को मजबूर हैं। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि साल 2012 के उस मॉडल को फिर से लागू किया जाए, जिसके तहत सहारा ने अपने कार्यालयों के जरिए 73 हजार करोड़ का भुगतान किया था। पोर्टल के बजाय सीधी शाखाओं के माध्यम से पैसा लौटाना ही एकमात्र समाधान है। यही नहीं, कार्यकर्ताओं ने प्रबंधन में व्याप्त भय के माहौल पर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि ईडी के डर से कोई भी मैनेजमेंट की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा षड्यंत्र बताते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि एम्बी वैली जैसे प्रोजेक्ट्स को रोककर सहारा की बेशकीमती संपत्तियों को अडानी जैसे निजी समूहों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि 12 लाख बेरोजगार हो चुके कार्यकर्ताओं का रोजगार बहाल किया जाए और उन्हें तत्काल पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।
01 May 2026