
पति की मौत के बाद सहारे की उम्मीद जिस बेटे से थी, उसी पर मां ने घर से बेदखल करने और प्रताड़ित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता चुन्नी देवी ने जिला कलेक्टर को दिए परिवाद में बताया कि उनके पति खेमराज डाक विभाग में पोस्टमैन थे और वर्ष 2003 में उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद बड़े बेटे पवन कुमार रावत को विभाग में नौकरी मिल गई, लेकिन नौकरी मिलने के बाद उसने कभी परिवार का खर्च नहीं उठाया। पीड़िता का आरोप है कि वर्ष 2021 में छोटी बेटी ममता की शादी में भी बेटे ने कोई आर्थिक सहयोग नहीं किया। दवा, रिश्तेदारी और दैनिक जरूरतों तक का खर्च भी नहीं उठाया। महिला ने आरोप लगाया कि बेटे पवन कुमार रावत और बहू प्रमिला ने मारपीट कर उन्हें घर से निकाल दिया। इतना ही नहीं, छोटे बेटे गौरीशंकर को भी गांव छोड़ने पर मजबूर कर दिया और जमीन-जायदाद पर भी कब्जा कर लिया। चुन्नी देवी का कहना है कि उनके नाम के मकान की पट्टिया तक उखाड़ दी गईं और रहने लायक स्थिति भी नहीं छोड़ी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि खेरोदा थाने में पहले भी शिकायत और प्रकरण दर्ज करवाया गया, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी कई बार मारपीट की घटनाएं हुईं। पीड़िता ने बताया कि पिछले चार वर्षों से वह अपने घर से दूर रहने को मजबूर हैं और फिलहाल मायके पक्ष के सहारे जीवन यापन कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि वह अपने घर जाने का प्रयास करती हैं तो उन्हें वहां से भगा दिया जाता है। चुन्नी देवी ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर बेटे पवन कुमार रावत और बहू प्रमिला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने, कब्जा की गई संपत्ति वापस दिलाने और एक विधवा महिला को न्याय दिलाने की मांग की है।

03 Aug 2026