
उदयपुर में पर्यटकों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पर्यटन विभाग ने होमस्टे और पेइंग गेस्ट हाउस के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब मकान मालिक 5 की जगह 8 कमरों तक की अनुमति ले सकेंगे। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब मालिक का घर में रहना जरूरी नहीं होगा, केयरटेकर भी इसे संभाल सकेंगे।पीक सीजन में शहर में होटल कम पड़ने और महंगे होने की समस्या के साथ ही रोजगार को बढ़ावा देने के मकसद से पर्यटन विभाग ने अपनी पुरानी पॉलिसी में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं।पूर्व में लागू नियमों को अब और सरल बना दिया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस स्वरोजगार से जुड़ सकें। उदयपुर में 500 से ज्यादा होम स्टे है। इसमें शहर में भी 200 से ज्यादा होम स्टे चल रहे हैं।अभी तक के नियमों के मुताबिक- किसी भी शुद्ध आवासीय मकान में होमस्टे या पेइंग गेस्ट चलाने के लिए केवल 5 कमरों की ही मंजूरी मिलती थी। विभाग ने अब इस सीमा को बढ़ाकर 8 कमरे कर दी है। इसी तरह बिस्तरों की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है।अब एक होमस्टे यूनिट में अधिकतम 24 बिस्तरों तक की अनुमति दी गई है। इस फैसले से उन लोगों को बड़ा फायदा होगा जिनके पास बड़े पुश्तैनी मकान हैं और वे पर्यटकों को बेहतर और ज्यादा जगह देना चाहते हैं।पर्यटन विभाग की उप निदेशक शिखा सक्सेना ने बताया कि पॉलिसी में सरलीकरण होने से उदयपुर में पर्यटकों के लिए रुकने की सुविधाएं बढ़ेंगी। वर्तमान में उदयपुर शहर में लगभग 200 और पूरे जिले में 500 से ज्यादा होमस्टे संचालित हैं।सीजन के दौरान जब होटलों में कमरे नहीं मिलते, तब ये होमस्टे पर्यटकों के लिए बड़ा सहारा बनते हैं। नए नियमों के बाद शहर में होमस्टे की संख्या में भारी इजाफा होने की उम्मीद है।इस बदलाव में सबसे बड़ी राहत केयरटेकर को लेकर दी गई है। पुराने नियमों के तहत होमस्टे चलाने के लिए संपत्ति के मालिक या उसके परिवार के किसी सदस्य का उसी घर में रहना अनिवार्य था। लेकिन अब नियम बदल गए हैं। अगर मकान मालिक खुद उस आवास में निवास नहीं करता है, तो वह संचालन के लिए एक केयरटेकर नियुक्त कर सकेगा। केयरटेकर योजना में निर्धारित नियमों व मानकों के अनुरूप इकाई के संचालन के लिए पूरी तरह उत्तरदायी होगा। इससे उन लोगों को फायदा होगा जो शहर से बाहर रहते हैं लेकिन उनका मकान उदयपुर में खाली पड़ा है।होटल एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि 7 रूम और 8 रूम के होटल संचालन के मुकाबले होम स्टे काफी सस्ता पड़ता है। केयर टेकर के भरोसे भी होम स्टे चल सकता है। पहले मालिक को रहना जरूरी था। इस पॉलिसी से काफी मिलेगी।होटल व्यवसाय से जुडे मयंक श्रीमाली का मानना है कि इस बदलाव से उदयपुर में 'कल्चरल टूरिज्म' को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी पर्यटक अक्सर होटलों के बजाय भारतीय परिवारों के साथ रहना और घर का बना पारंपरिक खाना पसंद करते हैं।कमरों की संख्या बढ़ने से अब ग्रुप में आने वाले विदेशी पर्यटकों को एक ही घर में रुकने की जगह मिल सकेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और शहर की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।नियमों में ढील के साथ विभाग ने सुरक्षा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। केयरटेकर नियुक्त करने पर उसकी पूरी जानकारी और पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। साथ ही पर्यटकों का रिकॉर्ड रखने के लिए ई-पर्यटक पोर्टल और सी-फॉर्म की प्रक्रिया का पालन पहले की तरह ही करना होगा। इससे पर्यटन की गरिमा और सुरक्षा दोनों बनी रहेगी।
01 May 2026