
जल जीवन मिशन से जुड़े करीब 900 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में जांच एजेंसी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार 9 अफसरों को विशिष्ट न्यायालय भ्रष्टाचार अधिनियम में पेश किया। सभी आरोपियों को एसीबी की टीम एक ही गाड़ी में कोर्ट लेकर पहुंची। खास बात यह रही कि अधिकारियों के हाथों में लाल कपड़े में बंधी वे फाइलें थीं, जिनमें इस घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज बताए जा रहे हैं। एसीबी ने कोर्ट से 5 दिन की रिमांड की मांग की थी, ताकि जल जीवन मिशन के तहत हुए कार्यों में कथित अनियमितताओं, फर्जी बिलों और वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े तथ्यों की गहन जांच की जा सके। हालांकि कोर्ट ने सभी 9 आरोपियों को 3 दिन के रिमांड पर भेजने के आदेश दिए हैं। अब इस दौरान एसीबी ठेकेदारों, विभागीय अधिकारियों और अन्य संदिग्ध भूमिका निभाने वालों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करेगी। इस मामले में एसीबी ने 17 फरवरी को जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर, उदयपुर सहित प्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ बिहार, झारखंड और दिल्ली में कुल 15 स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की थी। इसी कार्रवाई के बाद इन 9 अफसरों को हिरासत में लिया गया था। कोर्ट में पेश किए गए आरोपियों में जयपुर शहर के चीफ इंजीनियर केडी गुप्ता, तत्कालीन मुख्य अभियंता पीएचईडी परियोजना जयपुर दिनेश गोयल, रिटायर्ड तकनीकी चीफ इंजीनियर डीके गौड, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता निरिल कुमार, वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को शक है कि जल जीवन मिशन के कार्यों में बड़े पैमाने पर फर्जी भुगतान और वित्तीय हेराफेरी की गई। कोर्ट के आदेश के बाद अब एसीबी की पूछताछ से इस घोटाले की कई और परतें खुलने की संभावना जताई जा रही है।
01 May 2026