
राजस्थान और मेवाड़ में गणगौर उत्सव की रौनक इन दिनों अपने चरम पर है और उदयपुर में इसका विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में शहर के भोईवाड़ा क्षेत्र में सदियों पुरानी दातन हेला परंपरा का आयोजन किया गया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इस परंपरा के तहत युवाओं ने एक पुरुष को डाकण, यानी भोलेनाथ की चेली का रूप दिया और उसे रस्सियों से बांधकर पूरे क्षेत्र में घुमाया। मान्यता है कि इस अनोखी झांकी के माध्यम से नए वर्ष में नकारात्मकता और बुरे प्रभावों को दूर किया जाता है तथा क्षेत्र में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। दातन हेला का यह दृश्य भले ही भयानक प्रतीत होता हो, लेकिन इसमें रोमांच और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिलता है। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भांग और भुजिया का वितरण और युवाओं की जोशीली भागीदारी इस आयोजन को जीवंत बना देती है। स्थानीय लोग इसे शुभ संकेत मानते हैं, वहीं बच्चों और ग्रामीणों में इसे लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। इस वर्ष गणगौर उत्सव शनिवार शाम चार बजे शाही सवारी के साथ शुरू होगा और चार दिनों तक चलेगा। इस दौरान महिलाएं सिर पर गणगौर रखकर गंगौर घाट पहुंचेंगी, जहां पारंपरिक गीतों और रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी।