
उदयपुर के महाराणा भूपाल अस्पताल के बाल रोग विभाग में मंगलवार दोपहर एक दर्दनाक घटना के बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया। सलूंबर क्षेत्र से करीब साढ़े चार महीने की बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। बच्ची को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत थी, लेकिन इलाज के दौरान करीब आधे घंटे में ही उसकी मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिजन गहरे सदमे में थे और मां का रो-रोकर बुरा हाल था। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात एक महिला गार्ड ने परिजनों को चुप रहने के लिए कहा और कथित तौर पर उन पर चिल्लाने लगी। इस पर पास में मौजूद चित्तौड़गढ़ जिले के सेमलिया निवासी जगदीश वैष्णव ने गार्ड से संवेदनशीलता बरतने की बात कही, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। जगदीश वैष्णव का आरोप है कि पहले तो उनके साथ बदतमीजी की गई और बाद में कुछ अन्य गार्डों के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट की गई। इस दौरान उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बहन और पत्नी के साथ भी बदसलूकी की गई और मारपीट करते हुए नाखून तक लगाए गए। घटना की सूचना पर 112 के जरिए पुलिस मौके पर पहुंची। हाथीपोल थाना क्षेत्र की पुलिस चौकी से पहुंचे जवानों ने मामला शांत कराया और दोनों पक्षों को थाने आने के लिए कहा, लेकिन परिजन इलाज में व्यस्त होने के कारण नहीं जा सके। देर रात तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। वहीं, बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष वरिष्ठ आचार्य डॉ. विवेक अरोड़ा का कहना है कि बच्ची की हालत गंभीर थी और वेंटिलेटर पर लेने के बावजूद उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि परिजन आईसीयू के अंदर आ गए थे और शोर-शराबा कर रहे थे, जिससे अन्य मरीज प्रभावित हो रहे थे। इसी कारण गार्ड को बुलाकर उन्हें बाहर करने को कहा गया। फिलहाल इस पूरे मामले ने अस्पताल की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
01 May 2026