
22 फरवरी 1952 को स्थापित भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर ने लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। अब संस्थान अपने 75वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जिसे हीरक जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर को विशेष बनाने के लिए शिल्प मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू की गई है। संस्थान के निदेशक लाईक हुसैन ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उन लोक कलाओं और कलाकारों को सामने लाना है, जो समय के साथ हाशिये पर चले गए हैं। ट्राइफेड के सहयोग से आयोजित शिल्प मेले में 30 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां देश के विभिन्न आदिवासी अंचलों से आए कारीगर अपनी हस्तशिल्प कलाकृतियों का प्रदर्शन और विक्रय कर रहे हैं। इस भव्य आयोजन का उद्घाटन राज्य सभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया ने किया। मेले में कठपुतली कला, लोक कथाओं का वाचन और पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। भील, जोगी सहित अन्य आदिवासी समुदायों के कलाकारों को यहां विशेष मंच प्रदान किया गया है, ताकि उनकी प्रतिभा को पहचान मिल सके। हुसैन ने बताया कि यह पहल केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। यहां के चयनित कलाकारों और कलाकृतियों को गुजरात के आनंद में आयोजित राष्ट्रीय उत्सव में भी प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके।
01 May 2026