
खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इसी क्रम में पहली कार्रवाई मैसर्स जेड ए कानोडवाला के खिलाफ की गई। सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य के मुताबिक फर्म द्वारा फूड लाइसेंस प्राप्त करने के लिए गलत तथ्य और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। दस्तावेजों की जांच में अनियमितता सामने आने के बाद फर्म का फूड लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। दूसरी कार्रवाई सवीना स्थित मैसर्स कल्याण डेयरी पर हुई। यहां से खाद्य सुरक्षा अधिकारी अशोक गुप्ता ने कुछ समय पहले घी का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था। जांच रिपोर्ट में घी का सैंपल अनसेफ पाया गया। इसके बाद विभाग ने डेयरी संचालक विजय सिंह सिसोदिया को नोटिस जारी कर उनका फूड लाइसेंस निलंबित कर दिया। इसी तरह जयश्री कॉलोनी स्थित मैसर्स लक्ष्मी डेयरी एवं स्वीट नमकीन के यहां से लिए गए घी के नमूने भी जांच में असुरक्षित पाए गए। रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग ने फर्म संचालक केशरसिंह सिसोदिया को नोटिस जारी करते हुए फूड लाइसेंस निलंबित कर दिया। सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने कहा कि तीनों फर्मों के मालिक निलंबन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की खरीद-फरोख्त या खाद्य कारोबार नहीं कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दे कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत किसी खाद्य पदार्थ का नमूना असुरक्षित पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ 5 लाख रुपए तक जुर्माना और 6 माह से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।

04 Jun 2026