
पाली जिले से करीब 78 किलोमीटर दूर तखतगढ़ के नागचौक इलाके में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने इंसानी रिश्तों की गहराई को एक बार फिर साबित कर दिया। देवासियों की गली में रहने वाली जेठी बाई और उनकी पड़ोसी भीकीबाई के बीच दशकों पुरानी दोस्ती थी। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि दोनों सहेलियां अक्सर हंसी-मजाक में कहा करती थीं कि अगर हममें से कोई एक पहले जाए, तो दूसरी को भी अपने साथ ही लेकर जाए। यह बात उस समय मजाक लगती थी, लेकिन नियति ने इसे सच कर दिखाया। बताया जा रहा है कि जेठी बाई के निधन की खबर जैसे ही भीकीबाई को मिली, वह इस सदमे को सह नहीं पाईं। पहले से ही उनके पैर में दर्द था, लेकिन अपनी सहेली के बिछड़ने का दुख इतना गहरा था कि महज 5 घंटे के भीतर उन्होंने भी दम तोड़ दिया। रविवार की दोपहर गोगरा रोड स्थित श्मशान घाट पर दोनों सहेलियों की अर्थियां एक साथ उठीं और सैकड़ों नम आंखों के बीच उनका अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। श्मशान घाट में मौजूद हर व्यक्ति इस अनोखी दोस्ती को देखकर भावुक हो उठा। भीकीबाई के बेटे हंसाराम ने बताया कि उनकी मां अपनी सहेली से बेहद जुड़ी हुई थीं और उनके बिना जीना शायद उनके लिए संभव नहीं था। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग इस दोस्ती को एक मिसाल के रूप में देख रहे हैं, एक ऐसी मिसाल, जो मौत के बाद भी साथ निभाने का संदेश देती है।
01 May 2026