
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब देश की तेल कीमतों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका, इजरायल और इराक के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई कीमतें 15 मई से लागू हो गई हैं। करीब दो साल बाद ईंधन की कीमतों में यह बड़ा इजाफा हुआ है, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और वैश्विक अस्थिरता के कारण लागत बढ़ी है। कंपनियों के अनुसार अभी भी उन्हें प्रति लीटर करीब 25 से 30 रुपए तक का घाटा उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया। पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ कई प्रमुख शहरों में सीएनजी की कीमतों में भी दो रुपए प्रति किलो तक की वृद्धि की गई है। इसका असर अब परिवहन लागत पर भी पड़ने की संभावना है। माना जा रहा है कि ट्रांसपोर्ट महंगा होने से रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से रसोई का बजट प्रभावित होगा और खाद्य पदार्थों सहित कई जरूरी वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। ऐसे में आम जनता को आने वाले दिनों में महंगाई की दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है।

14 May 2026