
भ्रष्टाचार की जड़ें सरकारी दफ्तरों में कितनी गहरी हैं, इसका सबूत है उदयपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ये टूटी छतें। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चलता है कि 20 जनवरी 2025 को विधायक मद से इन छतों की मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये का मोटा बजट स्वीकृत किया गया था। 12 अप्रैल 2025 को ठेकेदार ने बड़ी शान से काम शुरू किया और 11 अगस्त 2025 को इसे पूरा बताकर कागजों में ओके रिपोर्ट लगा दी गई। लेकिन विभाग के चहेते ठेकेदार का काम देखिए कि मरम्मत के ठीक 6 महीने बाद ही छत का एक बड़ा हिस्सा जमींदोज हो गया। 6 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि मरम्मत के नाम पर स्वाहा कर दी गई, लेकिन गुणवत्ता के नाम पर यहाँ केवल धोखा दिया गया। जिस छत को सालों तक सलामत रहना था, वो एक सीजन भी नहीं निकाल पाई। मलबे को देखकर साफ जाहिर है कि सीमेंट की जगह केवल रेत और घटिया सामग्री का लेप लगाया गया था। सवाल यह उठता है कि जब 11 अगस्त को काम समाप्त हुआ, तो किस इंजीनियर और किस अधिकारी ने इस घटिया निर्माण को पास किया? क्या बजट डकारने के चक्कर में जानबूझकर कर्मचारियों की जान जोखिम में डाली गई? हादसे के वक्त कमरा खाली था, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई। इस घटना से पुरे विभाग में हडकम्प मच गया। यह सीधे तौर पर सरकारी धन की लूट और लापरवाही का मामला है। जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा ठेकेदार और भ्रष्ट अधिकारियों की तिजोरियों में चला गया और बदले में मिला मौत का साया। अब मांग उठ रही है कि दोषी ठेकेदार को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए और उन जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए जिन्होंने इस घटिया काम का भुगतान किया। क्या प्रशासन इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराएगा या फिर एक और मरम्मत के नाम पर नया बजट डकार लिया जाएगा?
01 May 2026