
उदयपुर सहित पूरे मेवाड़ क्षेत्र में शीतला अष्टमी का उल्लास आज दिखाई दिया। आस्था के इस विशेष दिन पर महिलाओं ने व्रत रखकर माताजी की विशेष आराधना की। परंपरा के अनुसार, माताजी को ठंडा करने की मान्यता के चलते यह पर्व मनाया जाता है। श्रद्धालु बताते हैं कि छह दिन तक माताजी को ठंडा करने की रस्म निभाई जाती है और छठे दिन घरों में शुद्ध सात्विक ठंडा भोजन तैयार किया जाता है। इसके बाद सप्तमी और अष्टमी को उसी ठंडे भोजन का माता को भोग लगाया जाता है। मंदिरों में सुबह से ही महिलाएं हाथों में ओलिया, दही-दूध से बनी जावणी, नैवेद्य और फल-फ्रूट की थालियां सजाकर पहुंचीं। पूजा के दौरान न केवल शीतला माता, बल्कि भगवान गजानन, पथवारी माता और दशा माता की कथाएं भी सुनी। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और बच्चों व परिवार की संक्रामक रोगों से रक्षा होती है। मंदिरों में सामूहिक कथा वाचन के बाद महिलाओं ने घर लौटकर अपना व्रत खोला और परिवार के साथ ठंडे भोजन लिया। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, इस पर्व का महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि यह बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने का भी प्रतीक है। इसी पारंपरिक और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ हर साल की तरह इस बार भी शीतला सप्तमी और अष्टमी का पर्व पूरे उत्साह से संपन्न हुआ।
01 May 2026