
चित्तौड़गढ़ जिले के तंबोलिया गांव का शमशान घाट इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है। हालात इतने खराब हैं कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील मौके पर भी ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। शमशान घाट पर न तो बैठने की कोई व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे गंभीर समस्या यह है कि यहां छाया के लिए कोई शेड तक नहीं है, जिससे गर्मी और बारिश दोनों ही मौसम में ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे खड़ा रहना पड़ता है। इसके अलावा शमशान घाट पर साफ-सफाई की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। गंदगी के कारण आसपास का वातावरण अस्वच्छ बना हुआ है, जो न केवल असुविधाजनक है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी खतरनाक साबित हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार पंचायत और प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शमशान घाट पर जल्द से जल्द शेड का निर्माण कराया जाए, बैठने और पेयजल की व्यवस्था की जाए तथा नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।