
यह तस्वीरें उदयपुर के चांदपोल इलाके की हैं, जहाँ 11 फरवरी की रात 2:20 बजे से सुबह 4:15 बजे तक जो कुछ हुआ, उसने पुलिस के आमजन में विश्वास वाले नारे पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। CCTV फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि कैसे डीएसपी गिर्वा गोपाल चंदेल की मौजूदगी में पुलिस के जवान गली में पहुँचते हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि रात के 4 बजकर 8 मिनट पर दो युवक हथौड़ा और सब्बल लेकर वहां पहुँचते हैं, जिनके साथ वर्दीधारी पुलिसकर्मी भी पैदल चलता दिखाई दे रहा है। अधिवक्ता की मां ने राज्यपाल, आईजी और एसपी को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस गोगुंदा के कुछ बदमाशों के साथ मिलकर घर में घुसी, छत के रास्ते अंदर आकर दरवाजा तोड़ा और मोबाइल छीनकर मारपीट की। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यह एक कानूनी कार्रवाई थी, तो पुलिस के साथ हथौड़े और सब्बल लिए वे युवक कौन थे? इस मामले में कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। भूपालपुरा थाने के एएसआई ने सीधे डिप्टी को जांच सौंप दी, जबकि नियमानुसार जांच बदलने का अधिकार एसपी के पास होता है। अधिवक्ता के वकील ओम चौधरी ने इसे भारी सियासी दबाव का नतीजा बताया है। वहीं, डीएसपी गोपाल चंदेल का कहना है कि उन्होंने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की और मोहल्ले के लोग वहां मौजूद थे, हालांकि उन्होंने उन हथियारबंद युवकों की पहचान से इनकार कर दिया है। मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को ब्लैकमेलिंग और रेप से जोड़ते हुए बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है। जूली का दावा है कि जल्द ही उदयपुर फाइल्स सामने आएगी, जिसमें सत्ताधारी दल के बड़े चेहरों का खुलासा होगा। फिलहाल, एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को जायज ठहरा रही है, तो दूसरी तरफ सामने आए वीडियो साक्ष्यों ने पुलिस प्रशासन को जवाबदेह बना दिया है।
01 May 2026