
राजसमन्द के रेलमगरा क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक से निकलने वाले वेस्टेज, प्रदूषित हवा और प्रतापगढ़ से लाए जा रहे टेलिंग के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रशासनिक कार्यालय के बाहर चल रहे धरने में करीब चार लोग भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलनकारी ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक गतिविधियों और टेलिंग के कारण क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ रहा है और इसका असर खेती, जल स्रोतों तथा आम जनजीवन पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराए जाने की मांग की है।राजसमन्द जिले के रेलमगरा क्षेत्र में ग्रामीणों का विरोध लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। हिंदुस्तान जिंक से निकलने वाले वेस्टेज, केमिकल और प्रदूषित हवा के साथ ही प्रतापगढ़ से क्षेत्र में लाए जा रहे टेलिंग को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।प्रशासनिक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रदूषण का असर आसपास के गांवों तक पहुंच रहा है।आंदोलनकारियों का आरोप है कि वेस्टेज और टेलिंग के कारण क्षेत्र की कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कई स्थानों पर खेती करना पहले की तुलना में मुश्किल होता जा रहा है।ग्रामीणों ने पानी और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।आंदोलन में करीब चार लोग भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं, जबकि बड़ी संख्या में ग्रामीण धरने में शामिल हैं। आंदोलनकारियों की मांग है कि वेस्टेज, केमिकल, प्रदूषण और प्रतापगढ़ से लाए जा रहे टेलिंग की निष्पक्ष जांच कराई जाए।साथ ही लोगों के स्वास्थ्य, कृषि भूमि, जल स्रोतों और पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन कराने की भी मांग की गई है।तीन दिन से जारी इस आंदोलन में ग्रामीण अब ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा।हालांकि, प्रदूषण, खेती और जनजीवन प्रभावित होने के ये आरोप आंदोलनकारी ग्रामीणों की ओर से लगाए गए हैं। इस मामले में हिंदुस्तान जिंक और प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष प्राप्त करने का प्रयास किया गया, उनकी ओर से यह जवाब सामने आया कि आंदोलन करने वाले लोग बाहरी हैं।फिलहाल रेलमगरा में टेलिंग, वेस्टेज और प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज बना हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित कंपनी की ओर से आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।