
मेवाड़ की परंपराओं और लोक संस्कृति का अनूठा संगम शुक्रवार को उदयपुर की गलियों में देखने को मिला। शुक्रवार को दशामाता के पावन अवसर पर शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। सुहाग के प्रतीक लाल-गुलाबी चुंदड़ी की साड़ियों में सजी महिलाएं समूह बनाकर पीपल के वृक्षों की पूजा करने पहुंचीं। महिलाओं ने पीपल की परिक्रमा की, उसे कुमकुम-मेहंदी अर्पित की और श्रद्धाभाव से धागा लपेटकर परिवार की रक्षा का संकल्प लिया। पूजन के दौरान विशेष रूप से तैयार 10 गांठ वाले धागे का पूजन किया गया, जिसे सुहागिनों ने एक-दूसरे के गले में पहना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह धागा पहनने से घर की दशा और दिशा सुधरती है और दरिद्रता का नाश होता है। प्रसाद के रूप में माता को आटे के गहने, दही का औलिया, मिठाइयां और विशेष पकवान अर्पित किए गए। पूजन के बाद पीपल की छांव में बैठकर महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक दशामाता की दस कथाओं को सुना। कथाओं के जरिए यह संदेश दिया गया कि सच्ची भक्ति और नियमों का पालन करने से बिगड़ी हुई दशा भी सुधर जाती है। महिलाओं ने दिन भर का उपवास रखा और घर की खुशहाली, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। शहर के जगदीश मंदिर परिसर, गणगौर घाट और विभिन्न मोहल्लों में स्थित देव स्थानों पर दिनभर भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। प्रशासन की ओर से भी प्रमुख पूजन स्थलों पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा में कोई असुविधा न हो।
01 May 2026