
उदयपुर का चर्चित वीडियो कांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राजस्थान की सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। भारतीय जनता पार्टी की एक महिला नेता द्वारा वकील विशाल गुर्जर पर एआई के जरिए अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के आरोपों के बाद, अब इस केस की कमान एएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा को सौंपी गई है। पुलिस मुख्यालय ने बुधवार को डीएसपी गोपाल चंदेल को जांच से हटाते हुए पूरी फाइल मेवाड़ा के सुपुर्द कर दी है। यह कार्रवाई उस वक्त हुई जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सदन में इस केस की तुलना एपस्टीन फाइल्स से करते हुए इसे उदयपुर फाइल्स करार दिया। जूली ने दावा किया कि उनके पास इसके इतने दस्तावेज हैं कि अगर परतें खोली गईं, तो भाजपा के कई कद्दावर नेताओं के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सवाल किया कि क्या वे सच का साथ देंगे और भाजपा के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? विपक्ष ने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 11 फरवरी को मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस ने बिना उचित प्रक्रिया के दूसरे सर्कल के डिप्टी को जांच सौंप दी। आरोप है कि पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं ने रात के अंधेरे में आरोपी विशाल के घर पहुंचकर दरवाजे तोड़े, सीसीटीवी और मोबाइल जब्त किए, लेकिन इन साक्ष्यों को अनिवार्य ई-साक्ष्य ऐप पर अपलोड नहीं किया गया। दूसरी ओर, आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने भी तीखे हमले करते हुए दावा किया कि इन वीडियो सीडी में कैबिनेट मंत्री और संगठन के बड़े पदाधिकारी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में कांग्रेस और सत्तापक्ष के बीच मिलिभगत की खबरें भी आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन तमाम राजनीतिक इनपुट और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जांच अधिकारी बदलने के निर्देश दिए। एएसपी मेवाड़ा, जो पहले उदयपुर सिटी के एएसपी रह चुके हैं, अब आरोपी विशाल गुर्जर से हुई पूछताछ, बरामद सबूतों और एफआईआर के बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई की नए सिरे से जांच करेंगे। जांच अधिकारी बदलने के इस फैसले ने अब उन तथाकथित नेताओं की चिंता बढ़ा दी है, जिनका नाम इस ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट से जोड़ा जा रहा है।
01 May 2026