
उदयपुर जिले को हाल ही में एक नई और सख्त पुलिस कप्तान मिली हैं। डॉ अमृता दुहन अब जिले की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनकी पहचान राजस्थान पुलिस की तेज-तर्रार और चर्चित महिला अधिकारियों में होती है। सख्त कार्यशैली, अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई और अनुशासन के कारण उन्हें कई लोग “लेडी सिंघम” के नाम से भी जानते हैं। डॉक्टर से पुलिस सेवा तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा माना जाता है। डॉ अमृता दुहन का जन्म ग्यारह नवंबर उन्नीस सौ तिरासी को हरियाणा में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई भी हरियाणा में ही पूरी की। पढ़ाई में शुरू से ही प्रतिभाशाली रहने वाली अमृता दुहन ने पहले चिकित्सा क्षेत्र को चुना और डॉक्टर बनने का निर्णय लिया। उन्होंने चिकित्सा की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद उच्च चिकित्सा शिक्षा भी प्राप्त की। कुछ समय तक उन्होंने डॉक्टर के रूप में सेवा भी दी, लेकिन समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करने और लोगों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी निभाने की इच्छा ने उन्हें सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया। कड़ी मेहनत और लगन के साथ उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी की। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हो गईं। दो हजार सोलह बैच की अधिकारी के रूप में उन्हें राजस्थान कैडर मिला। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने राजस्थान के कई जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और अपनी सख्त तथा प्रभावी कार्यशैली से अलग पहचान बनाई। पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम जनता का पुलिस पर भरोसा बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने प्रतापगढ़, श्रीगंगानगर और कोटा जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया। इन जिलों में उन्होंने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाया और कई बड़े मामलों का खुलासा किया। कोटा में पुलिस अधीक्षक रहते हुए उनका काम काफी चर्चा में रहा। कोटा देश का प्रमुख कोचिंग शहर माना जाता है, जहां देशभर से हजारों छात्र पढ़ने आते हैं। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती होती है। डॉ अमृता दुहन ने इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए छात्रों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने नशे के कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चलाया और कई नशा तस्करों को गिरफ्तार कराया। इस कार्रवाई से शहर में अवैध नशे के नेटवर्क पर काफी हद तक रोक लगी और छात्रों को सुरक्षित वातावरण मिला। इसके अलावा उन्होंने साइबर अपराध और सड़क अपराधों के खिलाफ भी विशेष अभियान चलाए। पुलिस गश्त बढ़ाई गई, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी मजबूत की गई और अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की गई। उनके नेतृत्व में पुलिस ने कई मामलों का खुलासा किया और अपराधियों को गिरफ्तार किया। जोधपुर में उप पुलिस आयुक्त पूर्व के रूप में तैनाती के दौरान भी उन्होंने संगठित अपराध और गैंगस्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। उस समय शहर में सक्रिय कई आपराधिक गिरोहों के खिलाफ पुलिस ने अभियान चलाया। खासतौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े अपराधियों और उनके नेटवर्क पर कार्रवाई की गई। कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके आपराधिक नेटवर्क को कमजोर किया गया। इस कार्रवाई के बाद शहर में अपराधियों के बीच डर का माहौल बना और आम जनता में पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ा। डॉ अमृता दुहन की कार्यशैली की खास बात यह मानी जाती है कि वह सख्ती के साथ-साथ जनता से संवाद बनाए रखने पर भी जोर देती हैं। वह युवाओं को नशे और अपराध से दूर रहने के लिए प्रेरित करती हैं और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए भी प्रयास करती हैं। अब जिले की कमान संभालने के बाद उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे अपराध पर सख्ती, कानून व्यवस्था की मजबूती और जनता की सुरक्षा के लिए उसी तरह सक्रिय भूमिका निभाएंगी जैसी उन्होंने अपने पिछले पदों पर निभाई है। उनकी छवि एक ईमानदार, निडर और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की है, इसलिए लोगों को उनसे बेहतर पुलिसिंग की उम्मीद है।