
तस्वीरों में दिख रहा यह नजारा उदयपुर के प्रसिद्ध गुलाब बाग का है। झीलों की नगरी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम ने गांधी मूर्ति के पास इस पार्क को संवारा था और इसके संचालन और मरम्मत का जिम्मा निजी संस्था एसआरजी फाउंडेशन को सौंपा था। पार्क में घुसते ही आपको संस्था के बड़े-बड़े साइनबोर्ड नजर आएंगे, जिन पर लिखा है कि प्रकृति की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। इन बोर्ड्स के जरिए संस्था ने पार्क की देखरेख और सौंदर्य को बनाए रखने के ऊंचे-ऊंचे दावे किए हैं, लेकिन हकीकत इन शब्दों के बिल्कुल उलट है। हकीकत यह है कि इस पार्क की खूबसूरती का मुख्य केंद्र रहे फव्वारे पिछले कई महीनों से बंद पड़े हैं। देखरेख के अभाव में अब ये फव्वारे महज कंक्रीट के ढांचे बनकर रह गए हैं। यहाँ आने वाले पर्यटक उम्मीद करते हैं कि उन्हें फव्वारों के बीच एक सुकून भरा माहौल मिलेगा, लेकिन उन्हें यहाँ सिर्फ सूखे पड़े फव्वारे और संस्था के प्रचार वाले बोर्ड ही देखने को मिलते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी संस्था ने बोर्ड लगाकर अपना प्रचार तो बखूबी कर लिया, लेकिन फव्वारों के संचालन और तकनीकी मरम्मत की अपनी असली जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है। गुलाब बाग में हर रोज देश-विदेश से सैकड़ों सैलानी आते हैं। ऐसे में इस महत्वपूर्ण स्थान पर अव्यवस्थाओं का होना स्मार्ट सिटी उदयपुर की छवि पर दाग लगा रहा है। जब संस्था ने रखरखाव की जिम्मेदारी ली थी, तो आखिर किसके आदेश पर ये फव्वारे बंद हैं? क्या नगर निगम के अधिकारियों ने कभी इन बोर्ड्स के पीछे की बदहाली का निरीक्षण किया है? पर्यटकों का कहना है कि इन फव्वारों को जल्द से जल्द शुरू किया जाए ताकि पार्क की खोई हुई रौनक लौट सके।
01 May 2026