
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के हालात का असर अब भारत के स्थानीय बाजारों में साफ नजर आने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच तनाव के चलते गैस सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर छोटे व्यवसायों और आम लोगों पर पड़ रहा है। गैस की बढ़ती किल्लत के बीच एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है, लोग अब पारंपरिक मिट्टी के चूल्हों और तंदूरों की ओर तेजी से लौट रहे हैं। खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और सड़क किनारे लगने वाली लारियों में इनकी मांग अचानक बढ़ गई है। मिट्टी के उत्पाद बनाने वाले कारीगर कैलाश प्रजापत ने बताया कि जैसे ही गैस की समस्या बढ़ी, उनके पास ग्राहकों की लाइन लग गई। उनके मुताबिक, जो पुराना या डेड स्टॉक महीनों से पड़ा था, वह कुछ ही दिनों में खत्म हो गया। अब हालत यह है कि जैसे ही नया तंदूर या चूल्हा तैयार होता है, तुरंत बिक जाता है। कैलाश प्रजापत ने बताया कि हैं कि वे फिलहाल रोजाना 5 से 10 तंदूर तैयार कर रहे हैं, लेकिन मांग इतनी अधिक है कि सप्लाई पूरी नहीं हो पा रही। उनके पास मिट्टी के चूल्हों और तंदूरों की पांच अलग-अलग साइज उपलब्ध हैं, जो छोटे रेहड़ी-पटरी से लेकर बड़े होटल संचालकों तक की जरूरतों को पूरा करते हैं। कीमत की बात करें तो ये उत्पाद 300 रुपये से शुरू होकर करीब 1000 रुपये तक उपलब्ध हैं, जो गैस के मुकाबले सस्ता विकल्प साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही मिट्टी के चूल्हे पर बने खाने के स्वाद को लेकर भी लोगों का रुझान बढ़ रहा है।
01 May 2026