
राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर में दर्ज दुष्कर्म के प्रयास के मामले में आरोपी भाजपा नेता को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने पहले से लागू गिरफ्तारी पर रोक को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि मामले की परिस्थितियां गंभीर हैं और इसकी गहन जांच आवश्यक है। न्यायाधीश मुननुरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए तर्क अदालत को संतुष्ट नहीं कर सके, इसलिए जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना जा सकता। मामला 5 जून 2025 की घटना से जुड़ा है। पीड़िता ने 6 जून को आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए जबरन घर में घुसने, बदसलूकी करने और दुष्कर्म के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। मामले के बाद 4 अगस्त 2025 को आरोपी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी, लेकिन अब हाईकोर्ट ने उस रोक को हटा दिया है। मामले में आरोपी पक्ष ने आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए इसे व्यापारिक विवाद से जोड़कर साजिश करार दिया था। आरोपी ने घटना के अगले ही दिन क्रॉस केस भी दर्ज कराया था। फिलहाल पुलिस दोनों एफआईआर की जांच पूरी कर चुकी है, हालांकि अब तक अदालत में चार्जशीट पेश नहीं की गई है। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब पुलिस दोबारा सक्रिय होकर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकेगी।

20 May 2026