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शिक्षक दिवस पर स्कूल से लौटती छात्रा को जंगल में उठा ले गए, रात भर दरिंदगी, अब दो आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे एंकर उदयपुर जिले के पानरवा थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक अत्यंत गंभीर घटना सामने आई है। यहाँ 5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रही एक नाबालिग पीड़िता का दो युवकों ने रास्ता रोककर अपहरण कर लिया। इसके बाद आरोपियों ने उसे जबरन जंगल में ले जाकर पूरी रात उसके साथ दुष्कर्म किया और प्रताड़ित किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वीओ : उदयपुर जिले के पानरवा थाने में दर्ज प्रकरण संख्या 91/2026 के अनुसार, यह वीभत्स घटना 5 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2 बजे घटित हुई। पीड़िता अपनी स्कूल की छुट्टी के बाद पैदल अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान रास्ते में घात लगाए बैठे दो आरोपियों नरेश और लक्ष्मण ने उसका पीछा किया। आरोपियों ने सुनसान रास्ते पर नाबालिग को जबरन दबोच लिया और उसे घसीटते हुए पास के जंगल में ले गए। आरोपियों ने जंगल में नाबालिग को बंधक बनाकर पूरी रात उसके साथ शारीरिक शोषण किया और उसे तरह-तरह से प्रताड़ित किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पानरवा थानाधिकारी सबीर खान और बीट प्रभारी सउनि धर्मीलाल ने त्वरित अनुसंधान शुरू किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नामजद आरोपी नरेश और लक्ष्मण को दबोच लिया है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) यानी अपहरण, 65(1) यानी दुष्कर्म, 3(5) तथा बालकों का लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम पॉक्से एक्ट की धारा 5, 6, 16 और 17 के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और पीड़िता को चिकित्सीय एवं कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मामला डूंगरपुर के विकासनगर पटवार हल्का और पंचायत समिति झांतरी के मोजा डूंगरपुर स्थित खसरा नंबर 962 से जुड़ा है। इस भूमि में परिवादी की भी हिस्सेदारी दर्ज है। भूमि के शुद्धिकरण के लिए परिवादी ने करीब एक साल पहले संबंधित पत्रावली तत्कालीन पटवारी शीतल भट्ट को सौंपी थी। आरोप है कि पत्रावली लंबित रहने के दौरान परिवादी ने अलग-अलग समय पर पटवारी को कुल 6 लाख 50 हजार रुपए दिए। इसके बावजूद भूमि शुद्धिकरण का काम आगे नहीं बढ़ा। परेशान होकर परिवादी ने 19 फरवरी को एसीबी चौकी डूंगरपुर में लिखित शिकायत दी। शिकायत के मुताबिक इससे एक दिन पहले 18 फरवरी को परिवादी दोबारा तत्कालीन पटवारी शीतल भट्ट से मिला था। इस दौरान उसे बताया गया कि संबंधित पत्रावली एसडीएम कार्यालय भेज दी गई है और वहां से काम करवाने के लिए डेढ़ लाख रुपए और देने होंगे। शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्राथमिक जांच शुरू की और रिश्वत मांग की पुष्टि के लिए सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत मांगने की पुष्टि हो गई। इसके बाद एसीबी चौकी डूंगरपुर में तत्कालीन पटवारी शीतल भट्ट के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। रिश्वत की रकम लेते हुए कार्रवाई के लिए एसीबी ने ट्रैप की तैयारी भी शुरू कर दी थी, लेकिन इसी दौरान परिवादी के बड़े भाई का निधन हो गया। पारिवारिक परिस्थितियों के चलते परिवादी करीब डेढ़ से दो माह तक व्यस्त रहा। इसी वजह से उस समय रिश्वत की रकम लेते हुए ट्रैप कार्रवाई नहीं हो सकी। अब एसीबी मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। 6 लाख 50 हजार रुपए पहले दिए जाने के आरोप और डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत मांग की पुष्टि के आधार पर प्रकरण में अग्रिम अनुसंधान जारी है।
डूंगरपुर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय महिला चोर गिरोह का राजफाश किया है। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन शिकंजा के तहत कोतवाली थाना पुलिस ने 2000 रुपए के इनामी और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर कमलेश चौधरी को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सांखला, सीओ तपेन्द्र मीणा के मार्गदर्शन और थानाधिकारी अजय सिंह के नेतृत्व में टीम ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने परंपरागत पुलिसिंग और मुखबिर सूचना के आधार पर वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर उसका पीसी रिमांड लिया और चोरी हुए जेवरात बरामद किए। मामला उस समय सामने आया जब डूंगरपुर निवासी मधुबाला ने थाने में रिपोर्ट दी कि 1 मार्च को वह अपनी 13 वर्षीय पुत्री के साथ रोडवेज बस में सवार हुईं, जहां भीड़ का फायदा उठाकर अज्ञात बदमाश ने उनके बैग से चार सोने की चूड़ियां और एक जोड़ी सोने के टॉप्स चोरी कर लिए। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कमलेश चौधरी एक शातिर अपराधी है, जो महिला गिरोह के साथ मिलकर मेलों, त्योहारों और भीड़भाड़ वाले आयोजनों में इस तरह की वारदातों को अंजाम देता था। आरोपी के खिलाफ उदयपुर, पाली और सिरोही सहित कई जिलों में चोरी, नकबजनी, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के 27 से अधिक मामले दर्ज हैं। पुछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी उदयपुर के गोवर्धनविलास थाने का हिस्ट्रीशीटर है। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
डूंगरपुर जिले में अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए बनाई गई जिला विशेष टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में टीम को शराब तस्करों के खिलाफ 72 घंटों के भीतर तीसरी बड़ी सफलता मिली है। यह कार्रवाई बिछीवाड़ा थाना सर्कल में की गई, जहां टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दिन के समय एक तीन पहिया टेम्पो में स्क्रैप और कबाड़ के नीचे अवैध शराब छिपाकर बॉर्डर पार गुजरात भेजी जा रही है। सूचना के आधार पर टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर निगरानी शुरू की। कुछ देर बाद मुखबिरी के अनुसार एक तीन पहिया टेम्पो वहां से गुजरता दिखाई दिया, जिसे टीम ने रोककर चालक से पूछताछ की। चालक के संतोषजनक जवाब नहीं देने पर वाहन की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान स्क्रैप और कबाड़ के नीचे छिपाकर रखे गए 35 कार्टन अवैध अंग्रेजी शराब बरामद हुई। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें राजसमंद निवासी नानु गुर्जर और भीलवाडा निवासी मुकेश जोगी शामिल हैं। जब्त की गई शराब की अनुमानित कीमत करीब 2 लाख 50 हजार रुपये बताई जा रही है। यह कार्रवाई मनीष कुमार के सुपरविजन में की गई। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर वाहन को डिटेन किया और आगे की कार्रवाई के लिए बिछीवाड़ा थाने को सौंप दिया है।
डूंगरपुर जिले के दोवड़ा थाना क्षेत्र में स्थित वन मंडल की आंतरी रेंज के अंतर्गत नाका दामड़ी के डोलवर क्षेत्र में बुधवार को एक मादा लेपर्ड मृत अवस्था में पाई गई। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। लेपर्ड के मृत मिलने की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीणों की भीड़ भी मौके पर जमा हो गई। वन विभाग ने मृत मादा लेपर्ड के शव को कब्जे में लेकर दोवड़ा वन नाका पहुंचाया। जांच के लिए पशु चिकित्सा विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन पाटीदार, डॉ. निशांत परमार और डॉ. युक्ति परमार ने मादा लेपर्ड की जांच की। जांच के दौरान डॉक्टरों ने पुष्टि की कि मादा लेपर्ड गर्भवती थी और उसके गर्भ में दो शावक पल रहे थे, जिनकी मादा लेपर्ड के साथ ही मौत हो गई। देर शाम वन विभाग और पशु चिकित्सा टीम की मौजूदगी में मादा लेपर्ड का पोस्टमार्टम किया गया।पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार लेपर्ड का अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि प्रारंभिक जांच में मौत के स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सके हैं। वन विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि कुछ दिन पहले साबला क्षेत्र में एक लेपर्ड के शिकार की घटना सामने आई थी, जिसमें शिकारियों ने उसके नाखून और जबड़ा काट लिया था। ऐसे में इस मादा लेपर्ड की मौत को लेकर भी शिकार की आशंका जताई जा रही है। वन विभाग सभी पहलुओं से मामले की गहन जांच में जुटा हुआ है।
डूंगरपुर में सरकारी टीचर, उनकी पत्नी और भाभी की सड़क हादसे में मौत हो गई। तीनों एक बाइक पर बैठकर शादी समारोह से घर लौट रहे थे। इसी दौरान आगे चल रहे ट्रॉले ने अचानक ब्रेक लगा दिया, जिससे बाइक ट्रॉले में घुस गई।कोतवाली थाने के SI रमेशचंद्र ने बताया कि ढेड़को का वेला निवासी मगनलाल (50) पुत्र कमलाशंकर खराड़ी प्राइमरी स्कूल पारगी फला नेगाला में सरकारी टीचर थे। मगनलाल के ससुराल हिराता गोलआंबा में एक शादी समारोह था, जिसमे शामिल होकर वो पत्नी विमला खराड़ी (45) और चचेरी भाभी ललिता (45) पत्नी विश्राम खराड़ी के साथ बाइक से घर आ रहे थे। रात करीब 8 बजे डूंगरपुर शहर से आगे बढ़ते ही बोरी मोड़ के पास आगे चल रहे ट्रॉले ने अचानक ब्रेक लगा दी, जिससे बाइक ट्रॉले में घुस गई।घटना कोतवाली थाना क्षेत्र में बोरी गांव के पास गुरुवार रात 8 बजे की है। टीचर के भाई की 3 साल पहले मौत हो चुकी है। हादसे के बाद 14 बच्चे अनाथ हो गए। एक ही परिवार में एक साथ 3 मौत होने से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।हादसे में टीचर मगनलाल और उनकी पत्नी विमला देवी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई ललिता को डूंगरपुर अस्पताल में प्राइमरी ट्रीटमेंट के बाद उदयपुर रेफर कर दिया गया। शुक्रवार सुबह उदयपुर में इलाज के दौरान ललिता ने भी दम तोड़ दिया।टीचर मगनलाल और उसकी पत्नी के 7 बच्चे है। जिनमें 5 बेटियां और 2 बेटे है। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है। वहीं चचेरी भाभी ललिता खराड़ी के भी 7 बच्चे है। जिनमें 5 लड़कियां और 2 लड़के है। ललिता के पति विश्राम खराड़ी की 3 साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद ललिता ही बच्चों की परवरिश कर रही थी। लेकिन अब हादसे में इन 3 मौत से दोनों परिवारों के 14 बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया।