
उदयपुर में मजदूर दिवस पर श्रमिक संगठनों का गुस्सा खुलकर सामने आया। कलेक्ट्रेट परिसर में विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने कहा कि देशभर में लगातार बढ़ती महंगाई और गिरते वास्तविक वेतन ने मजदूर वर्ग की स्थिति को बेहद कठिन बना दिया है। पानीपत, नोएडा, भिवाड़ी, नीमराना और सूरत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलनों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि मजदूर लंबे समय से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। श्रमिक संगठनों का कहना है कि वर्तमान न्यूनतम मजदूरी दरें आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसे जरूरी खर्चों के मुकाबले बेहद कम हैं। यह स्थिति जीविका योग्य वेतन की अवधारणा से भी काफी नीचे है और भारतीय श्रम सम्मेलन तथा सर्वाेच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के विपरीत है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि ठेका और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को कई बार तय न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलती। उनसे आठ घंटे से अधिक काम लिया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर कम से कम 26 हजार रुपए प्रतिमाह किया जाए और इसके लिए एक राष्ट्रीय वेज बोर्ड का गठन किया जाए, जिसमें श्रमिक प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की है।
01 May 2026